घर मे वासना का खेल – 3
Family me bahu beti ki hindi sex story:- रामु के लिए पहली बार था के वो बहुरानी के कमरे तक जा रहा था, क्यूंकि हमेशा श्लोका उसको आवाज़ देती थी, लेकिन श्लोका अपने कमरे में गयी थी अलोक को बुलाने। रामु धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ कर प्रिया बहुरानी के कमरे तक जा रहा था. वैसे उसकी मजाल नहीं थी के वो उस कमरे के आस पास भी भटके, लेकिन आज उसका लक समझ लीजिए के खुद श्लोका ने कहा था उसे कमरे के बाहर तक ही सही जाने के लिए. कहानी को पूरा समझने के लिए पिछले पार्ट जरूर पढ़ें।
पिछला भाग यहाँ पढ़ें ==> घर मे वासना का खेल – 2
रामु रूम के बाहर तक पहुँच गया था. कितनी साफ़ सुथरी जगह थी, वहां रूम का दरवाज़ा बंद था
रामु- बहुरानी!
थोड़ा आहिस्ता ही बोलता है वो, लेकिन अंदर से कोई रिस्पांस नहीं आता. वो 2-3 बार यूँ ही पुकारता है, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आता.
रामु- अब क्या करू.
तभी उसे थोड़ी दूर विंडो डोर ओपन दिखता है वो उधर चला जाता है, विंडो पर पर्दा था, वो उसे सरका कर अंदर देखता है. अंदर देखते ही उसका दिल थम सा जाता है उसका लौड़ा करवट बदलने लगता है. अंदर किसी हसीन परी की तरह प्रिया अपने आलीशान बेड पर आराम से लेटी हुई थी।
गुलाबी साड़ी और मैचिंग ब्लाउज में उसका शरीर कहर ढा रहा था. रामु की नज़र तभी प्रिया के पैरों पर गयी, जहाँ पर साड़ी थोड़ा ऊपर सरकी हुई थी, गोरे गोरे प्रिया के पैर देख, रामु की हालत ख़राब हो रही थी। वैसे ही वो नज़र दौडाते हुए प्रिया की कमर तक पोहचता है, वहां पर भी साड़ी थोड़ा सरकी हुई थी। रामु का थोड़ा सा प्रिया का गोरा पेट दिख रहा था, जितना भी दिख रहा था उतना काफी था रामु की हालत ख़राब करने के लिए.
वो प्रिया को घूर ही रहा था के नीचे से आवाज़ आती है।
श्लोका – अरे रामऊ बहहू को बुलाया या नहीं?
रामु हड़बड़ा जाता है और जल्दी से डोर के पास जाकर इस बार खटखटाने लगता है.
रामु- बहुउउ रानी!
इस बार डोर का आवाज़ सुनकर प्रिया जाग जाती है।
प्रिया- हाँ आईई.
प्रिया बेड से उतर कर खुद को ठीक करती है.
रामु- बहुरानी मालकिन खाने के लिए बुला रही हैं।
प्रिया- हाँ आयी.
फिर रामु फटाफट नीचे चला जाता है. प्रिया बाथरूम से फ्रेश होकर नीचे आने लगती है. अलोक और श्लोका पहले से ही बैठे हुए थे.
अलोक- आर आओ बहु।
प्रिया- वो सॉरी पापाजी मुझे नींद लग गयी थी, इसलिए देरी हो गयी।
श्लोका- कोई बात नहीं बहु आजा खा ले.
फिर तीनो खाने लगते हैं, साइड में ही विमला खड़ी थी और किचन के अंदर रामु काका. अभी अभी जो वो ऊपर से देख कर आया था उसके नशे में. घर की जवान बहु को देख कर आया था वो. उसे पता तो था, की आदित्य की बीवी और इस घर की बहु जवान और खूबसूरत, लेकिन आज इस तरह उसे देखने के बाद उसका नज़रिया बदल गया था. वो किचन के विंडो से प्रिया को देखने लगता है, आज तक उसने ये चीज़ कभी नहीं की थी, लेकिन आज प्रिया की जवानी और खूबसूरती ने उसे मजबूर किया था।
चेयर पर बैठी हुई प्रिया की साड़ी उसके कमर पर थोड़ा सरकी हुई थी, रामु काका की नज़र प्रिया के गोरे सपाट पेट पर थी, वहां देखते हुए वो धोती के ऊपर से अपना लौड़ा मसल रहा था। ऐसे ही थोड़ी देर चलता है, तीनो का कहना हो जाता है खाने के बाद प्रिया सीढ़ियाँ चढ़ कर वापस जाने लगती है.
बर्तन उठाने के बहाने रामु काका टेबल के पास आकर प्रिया को जाते हुए चोरी छुपे देखने लगता है. सीढ़ियाँ चढ़ते हुए प्रिया की गांड की फांकें हल्का हल्का मूव कर रही थी और साड़ी पर से वो साफ़ नज़र आ रहा था. ये नज़ारा देख रामु खुद को काबू नहीं कर पा रहा था, उसका मन तो हो रहा था के जाके प्रिया को पकड़ ले, लेकिन वो ठहरा इस घर का नौकर वो भी बूढ़ा. उसकी कहाँ औकात. लेकिन उसे खुद पर काबू करना मुश्किल हो रहा था, वो बर्तन उठा कर अंदर किचन में चला जाता है.
वहां पर विमला बर्तन धो रही थी. रामु झूठे बर्तन रख कर सीधा जाकर विमला से चिपक जाता है पीछे से और उसके चूचे दबाने लगाता है.
विमला- आह्ह्ह क्या कर रहे हैं आप?
रामु- विमला मत रोक मुझे।
रामु को जैसे नशा हो गया था.
विमला- क्या हो गया आपको अचानक? आह्ह! छोड़िये! मालकिन आ गयी तो मुसीबत हो जाएगी.
रामु- आने दे, तू चल कमरे में।
विमला- आप पागल हैं क्या? छोड़िये मुझे काम करने दीजिए.
विमला- छोड़िये और जाकर खाना खा लीजिए.
रामु को पता था विमला वैसे भी बूढी हो गयी है उसे ज़रा भी इंट्रेस्ट नहीं है इन सब चीज़ों में. रामु किचन के साइड में बने कमरे में जाकर बीड़ी फूंकने लगता है.
रामु- क्या मस्त है बहुरानी! सोचा नहीं था उसका बदन कितना गोरा है और उसकी वो गांड उफ्फ्फ! साला मेरा लौड़ा अब शांत नहीं होने वाला, अह्ह्ह.
रामु अपना लौड़ा मसलने लगता है वो कुछ कर भी नहीं सकता था, शाम में अंजली कॉलेज से आ चुकी थी, फ्रेश होने के बाद वो और उसकी भाभी उसके कमरे में बैठ कर बातें कर रहे थे. इधर रामु और हरिया घर के पीछे सर्वेंट वाले कमरे बैठे थे।
हरिया- साले क्या बात है, वो तो माल है ही तूने कुछ किया तो नहीं.
राम- अबे कहाँ उसके नज़दीक भी गया ना ये साहब लोग जेल में सड़वा देंगे.
हरिया- जिस तरह से तू बोल रहा है, उसे देख कर लगता है के ये बहुरानी कड़क माल है, हाथ में आ जाए तो मज़े हो जायें.
रामु- हम लोग तो सपनों में ही सोच सकते हैं बहुरानी जैसी जवान औरत हम बूढ़ों के नसीब में कहाँ.
हरिया- हां बात तो सही बोल रहा है तू, चल रात में पेग लगाते हैं आज.
रामु- हाँ आज तो थोड़ा ज़्यादा लगाऊंगा मैं।
हरिया- चल ठीक है ऐसे ही रात हो जाती है खाना खाने के बाद प्रिया वापस जाने लगती है।
अंजली- भाभी मुझे आपसे थोड़ा काम था।
प्रिया- हां अंजली बोल.
अंजली- चलिए रूम में बताती हूँ, तभी आदित्य पीछे से.
आदित्य- अरे अंजली कहाँ ले जा रही हो मेरी बीवी को?
प्रिया अभी भी नाराज़ थी उससे, तो वो कुछ नहीं बोलती।
अंजली- भैया मेरे रूम में फ़िक्र मत कीजिए, थोड़ी देर का ही काम है, फिर आ जायेगी आपकी बीवी आपके पास.
इतना बोलकर वो दोनों अंजली के कमरे में चले जाते हैं और आदित्य अपने. करीब आधे घाटे बाद प्रिया अंजली के कमरे से आ जाती है अपने कमरे में वहां जाकर वो देखती है के आदित्य सोया हुआ है। प्रिया को और गुस्सा आ रहा था, क्योंकि आदित्य उसको मनाये बिना ही सो गया था. वो अभी भी गुस्सा थी उससे, वो फ्रेश होकर बेड में आकर लेट जाती है. वो एक बार आदित्य के तरफ देखती है लेकिन वहां आहट भी नहीं हो रही थी। वो तो जैसे घोड़े बेच कर सोया था. प्रिया भी अब सोने के कोशिश करती है. थोड़ी देर बाद उसे भी नींद आ जाती है.
अगली सुबह हमेशा की तरह श्लोका की आवाज़ से घर गूंज रहा था, नौकरों को आर्डर देते हुए. हमेशा की तरह नाश्ता सब कर चुके थे, अंजली अपने कॉलेज जाने के लिए हरिया के साथ जा चुकी थी। इधर प्रिया पुरे मॉर्निंग अपने पति से बात नहीं करती. आदित्य जानता था के प्रिया गुस्सा है लेकिन काम के मज़बूरी में वो ऑफिस चला जाता है. प्रिया वापस अपने रूम में आकर उदास सी बैठी थी अचानक ही यूँ आदित्य का बिहेवियर उसे खाये जा रहा था, हालाँकि अभी अभी वो दोनों एक रोमांटिक हनीमून मना कर आए थे. फिर भी अब सब कुछ फीका लगा रहा था.
प्रिया का एक हाथ लेटे हुए ही, अपनी साड़ी के ऊपर से अपने चुचों पर चला जाता है वो हलके हलके खुद को सहलाने लगती है, दो दिन से आदित्य ने उसे ठीक से चोदा भी नहीं था. उन दोनों की शादी को ज़्यादा दिन भी नहीं हुए थे. इसलिए प्रिया की एक्साइटमेंट अभी भी बरक़रार थी सेक्स को लेकर। लेकिन इस वक़्त जो उसे चाहिए था वो देने के लिए उसका पति यहाँ नहीं था. प्रिया खुद के चूचे ब्लाउज के ऊपर से हलके हलके दबा रही थी अब. उसकी सांसों से हलकी हलकी सिसकारियों की आवाज़ आने लगी. वो अपनी ऑंखें बंद किये हुई खुद को शांत करने में लगी थी, उसका एक हाथ अब चुचों पर से थोड़ा नीचे आने लगता है।
नीचे आते आते वो हाथ साड़ी के ऊपर से अपनी पैंटी पर ले जाती है और हल्का हल्का वहां सहलाने लगती है.
प्रिया- आआनह वो धीमी आवाज़ में सिसकारियां भर रही थी, लेकिन उसे खबर नहीं थी के दो ऑंखें उसके इस कार्यक्रम को देख रही हैं. उधर अंजली को लेकर हरिया करीब करीब कॉलेज पहुँच चुका था. लेकिन तभी कार अचानक रुक जाती है.
अंजली- क्या हुवा हरिया चाचा.
हरिया- नहीं पाता अंजली मेमसाब मैं देखता हूँ.
वो कार से बाहर आकर बोनट खोलकर चेक करने लगता है. वो एरिया सुनसान सा था. हरिया बिजी था, कार चेक करने में अंजली को देरी तो हो रही थी लेकिन वो कर भी क्या सकती थी. वो भी अब कार से बाहर आती है और आगे जहाँ हरिया कार चेक कर रहा था वहां चली जाती है.
अंजली- चाचा और कितनी वक़्त लगेगा? मुझे कॉलेज के लिए देरी हो रही है.
हरिया- अंजली बिटिया करीब आधा घंटा तो लग ही जायेगा.
अंजली- ओ नो चाचा! मैं इतनी देरी इन्तिज़ार नहीं कर सकती।
हरिया- बिटिया अब तो भगवान ही कोई उपाय करा दे, कोई गाड़ी आ जाए।
अंजली परेशान थी अब लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकती थी, सिवाए इन्तिज़ार के. हरिया वापस कार ठीक करने में लग जाता है.
अंजली(मन में)- मुझे नहीं लगता मुझे अब की क्लास में एंट्री मिलेगी, शिट!
अंजली इधर उधर टहलने लगती है, वहां आस पास हरे भरे पेड़ थे, अंजली उन्ही को देख कर अपना मन बहला रही थी। वो थोड़ा आगे ही गयी थी के वहां पर एक आवारा कुत्ता उसे नज़र आता है अंजली एक बार के लिए डर जाती है. क्यूंकि वो कुत्तों से डरती बोहत थी. वो वापस जाने के लिए मुड़ ही रही थी के वो कुत्ता उसपर भोंकना शुरू करता है जिससे वो डर जाती है. सिवाए भागने के उसके पास और कोई रास्ता नज़र नहीं आता और वो कार की तरफ भाग जाती है अब कुत्ता भी उसके पीछे भागने लगाता है।
अंजली- चाचा बचाओ।
अंजली चिल्लाते हुए उसके तरफ जाने लगती है, अंजली की आवाज़ सुनकर हरिया उसके तरफ देखता है.
हरिया- अबे साला ये क्या।
अंजली- चाचा!
अंजली जैसे ही हरिया के पास पोहंचती है, उसे जोर से गले लग जाती है, वो इस वक़्त कुछ भी नहीं सोचती, डर के हालत में. ये भी नहीं के वो इतने बड़े घर की बेटी एक ड्राइवर से ऐसे गले लगी है हरिया एक बार के लिए तो यकीन नहीं कर पा रहा था के ऐसा कुछ हो रहा है। वो जवान और खूबसूरत इतने अमीर घर की बेटी, जिसे सोच कर वो मुठ मारता है वही लड़की आज उसके बाँहों में थी। उसके गले लगी हुई थी।
अंजली- चाचा मुझे बचा लो।
हरिया अब होश में आते हुए कुत्ते के तरफ देख कर.
हरिया(मन में)- वाह रे तेरा कैसे धन्यवाद करू क्या मौक़ा दिलवाया है तूने मुझे, तू नहीं जानता इस गरम जिस्म के लिए मैं कितना तड़पता हूँ.
हरिया- डरो मत अंजली बिटिया मैं हूँ न.
इतना बोलकर वो अंजली को खुद से और मज़बूती से सटा लेता है. सिचुएशन का अच्छी तरह से फायदा उठा रहा था वो. वहीँ दूसरी और अंजली को इसका बिलकुल अहसास नहीं था. वो तो डर के मारे, लेकिन अब हरिया चाचा की गिरफ्त में उसे हिफाज़त महसूस हो रही थी। लेकिन वो नहीं जानती थी के जिसे वो अपना रक्षक समझ रही है वो कितना बड़ा भक्षक है और उसके बारे में क्या क्या सोचता है. हरिया इस वक़्त जैसे स्वर्ग में था. अंजली के मध्यम साइज के चूचे हरिया की बालों वाली छाती में धंसे हुए थे. डरने की वजा से अंजली के निप्पल्स टॉप में कड़क थे उसका अहसास भी हरिया को बखूबी हो रहा था. हरिया अंजली को मज़बूती से जकड़े हुए था.
अंजली- चाचा।
हरिया सोच में डूबा हुआ अब ख्यालों से बाहर आता है.
हरिया- हाँ बिटिया।
अंजली- चाचा उस कुत्ते को भगाइये प्लीज.
हरिया- हाँ हाँ बेटी तू फ़िक्र मत कर।
उसे छोड़ने का मन तो नहीं था, लेकिन उसे ये भी पता था के उसने ज़्यादा किया तो अंजली को शक हो जायेगा. उससे अलग होकर वो कुत्ते को पत्थर से भगा देता है.
अंजली- थैंक्स चाचा।
हरिया- अरे कैसी बात करती हो अंजली बिटिया, ये तो मेरा फ़र्ज़ था.
अंजली- चाचा आप कार ठीक कीजिए, अब वापस घर ही चलेंगे।
हरिया- अरे बिटिया कॉलेज नहीं जाना?
अंजली- नहीं चाचा।
हरिया- ठीक है।
अंजली फिर कार में जाकर बैठ जाती है. हरिया वापस कार ठीक करने लग जाता है।
हरिया- ससुरा का नाती क्या गरम जिस्म है इसका, मेरे बूढ़े शरीर में तो फिर से जवानी भर दी इसने.
इतना बोलकर वो अपना लौड़ा पैंट के ऊपर से मसलता है. उधर प्रिया अपने रूम में बेखबर होकर खुद को सहलाने में लगी थी, बिना ये जाने के कोई उसे देख रहा है उसे नहीं पता था के वो कितनी बड़ी लापरवाही कर रही है। वो साड़ी के ऊपर से खुद के चूचे हलके हलके सहलाये जा रही थी। अपने कोमल हाथों से आज ऐसा पहली बार हुआ था के वो यह काम कर रही थी, क्यूंकि उसको ये करने के कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी थी, उसका पति उसे अच्छा खासा खुश कर देता था। आज वो खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका बैड लक के, कोई उसे देख रहा था। प्रिया की उखड़ी हुई सांसों पर भी उसकी नज़र थी, प्रिया की हर हरकत पर नज़र थी उसकी।
कौन था वो? जाने अगले भाग मे।





Why every story is incomplete.
Aage kya
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Aage bhi dal do yar
आगे
Please aage ki story dal do
Complete karo yar
Mai ladki hoke bhi mari ja rahi hu ki ab aage kya hoga please complete kar do story ye wali please
Number do apna
Dear sir / madam I kindly request please complete the story
Complete the story
Kya hua story adhuri kyo chod Di.
Esko complete kro.
Complete kar de na sake jab itne log bol rahe he lkb
Aage ki story upload kar do please
Abe sale complete kar na chutiye
tu hi likh de aage ka part
Sorry 😔
Please 🙏
Komal please complete kar do na
Hi story ke liye ladai mat karo
Magar writter se request hai sari story incomplete hai pahle 1 story complete kar lo . Uske baad dusra likho
Sorry komal ji mujhe maf kar dijiye. Magar please story ko complete kar dijiye. Please 🙏🙏🙏
Are bhai complete kar de yar please aur anjali ko sex jarur karwana please jaldi complete kar do
Please complete kar do na please didi
Komal ji please complete kar do na ye wali please
Komal ji koi to instalment do kab tak pura hoga
Komal ji please complete kar do na