हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 4

Huma A Housewife Hindi Sex Story:- हुमा के दिल की धड़कन ये सोच कर ही बढ़ गयी थी की उसको एक गैर मर्द की पीठ को बाम लगाना है, उसके लिए मुश्किल था मगर सिचुएशन ऐसी थी इतना तो उसको करना ही था। हुमा को बहुत घबराहट हो रही थी। मिश्रा जाकर पेट के बल सोफे पर लेट गया था, पेट के बल लेटने के कारण उसका लंड नीचे सोफे के नरम कुशन पर लगा, तो उसका लंड खड़ा हो गया। मिश्रा बहुत एक्साइटेड था, आज उसका मिशन कुछ हद तक कामयाब हुआ था। आज हुमा उसके जिस्म को छूने वाली थी।

Part 3 ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 3

Huma A Housewife Hindi Sex Story

सोफे के कुशन को वो हुमा की नरम गांड फील कर रहा था, वही हुमा की भी हालत ख़राब थी। न चाहते हुए भी वो अपने हाथ में बाम की शीशी लिए आगे बढ़ती है, शांता भी आगे बढ़ती है।

शांता मिश्रा को देखते हुए बोलती है- अपना कमीज़ तो ऊपर कीजिये मिश्रा जी.

मिश्रा अपना कमीज़ ऊपर करता है तो उसकी काली मोटी पीठ हुमा और शांता के सामने आ जाती है। मिश्रा की काली पीठ पर बाल थे, ऐसी पीठ हुमा ने पहली बार देखि थी, उसके शौहर की पीठ पर बाल नहीं थे और उसकी पीठ गोरी भी थी। मिश्रा अपने पेट के बल लेटा था, उसको हुमा और शांता दिखाई नहीं दे रहे थे। इधर हुमा के हाथ कांप रहे थे, तो शांता हुमा को देख आँखों से इशारा करती है की जाओ और लगा लो, मगर हुमा की हिम्मत नहीं होती।

तभी मिश्रा – भाभी जी लगा भी दीजिये क्या हुआ? अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो मै अपना कुरता नीचे कर देता हूं.

शांता – अरे नहीं मिश्रा जी मालकिन लगा देगी, आज पहली बार किसी गैर मर्द को बाम लगा रही है तो जरा घबरा रही है।

हुमा ने एक बार शांता की तरफ देखा और कहा जी जी वो वो ऐसी बात नहीं भाई साहब।

हुमा भी कंफ्यूज थी, कभी मिश्रा को मिश्रा जी कहती तो कभी भाई साहब कहती, कुछ ही देर में हुमा आगे बढ़ी और बाम की शीशी को खोलकर अपनी दो उंगलियों में बाम लेकर अपने कांपते हाथो को मिश्रा की बालो वाली काली पीठ की तरफ ले जाकर अपनी नरम उंगलिया उसपर रख देती है और धीरे धीरे अपनी दो उंगलियों से सहलाने लगती है। सिर्फ दो उंगलियों के टच से ही मिश्रा का लंड झटका मार गया, नीचे सोफे का नरम कुशन मिश्रा को और मज़ा दे रहा था।

जैसे जैसे हुमा अपनी उंगलिया मिश्रा की पीठ पर घुमा रही थी, वैसे वैसे शांता भी खुश हो रही थी आखिर उसका भी मिशन कामयाब हो रहा था। उसको पैसे जो मिलने वाले थे. कुछ देर अपनी दो उंगलियों से हुमा मिश्रा की पीठ पर बाम लगते हुए सोच रही थी, कितनी काली और बालो भरी पीठ है इनकी, सैफ की तो कितनो गोरी पीठ है। तभी उसको ख्याल आया की वो क्या सोच रही है और फिर उसने कह ही दिया।

हुमा – भाई साहब बस?

मिश्रा को मन मार कर आखिर कहना पड़ा, भाभी जी बस धन्यवाद्.

मिश्रा को पता था इस शरीफ शादी शुदा औरत को पटाना इतना आसान नहीं होगा, इसलिए उसने सबर से काम लिया और अपना कमीज़ नीचे करके हुमा को धन्यवाद् कहा। मगर हुमा बिना मिश्रा से नज़र मिलाये हॉल से किचन में गयी और वाश बेसिन में अपने हाथ धोने लगी। मिश्रा ने शांता को देखा और आंख मार दी। शांता ने भी आँख मारके उसको जवाब दिया और इशारा किया की थोड़ा सबर करे, ये बुलबुल जल्द ही हाथ आ जाएगी.

मिश्रा ने भी वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए जाना ही ठीक समझा. आज का दिन भी गुजर गया।

दूसरे दिन दोपहर को शांता और हुमा कुछ बातें कर रहे थे, शांता हमेशा की तरह मिश्रा पानवाले की तारीफ किये जा रही थी की तभी डोर बैल बजी। शांता ने जाकर डोर ओपन किया तो 2 लोग सामने खड़े हुमा को दिखाई दिए, उनमे जो बाँदा आगे था उसके बाल बड़े थे, चेहरे पर स्टिचिंग के निशान दिखाई दे रहे थे, जैसे किसी ने चेहरे पर वार किया हो, उसकी आँखे लाल थी। शक्ल ही डरावनी थी उसको देख शांता और हुमा दोनों कुछ घबरा गए।

तभी उस शख्स ने कहा सैफ का घर यही है?

उसकी आवाज़ भी बहुत सख्त थी

शांता – हाँ यही है आप को क्या काम था?

शांता ने घबराते हुए कहा।

शक्स – वो भड़वा यहाँ रहता है साले ने मेरे से ब्याज पर 20 हज़ार ले रखे है और एक महीने से मुझ से मुह छुपा रहा है मादरचोद साला।

शांता – डरते हुए गली मत दीजिए।

आदमी – तू उसकी बीवी है क्या?

शांता – नहीं हम उनकी नौकरानी है।

आदमी – ओह्ह भड़वे को देखो, मुझ से ब्याज से पैसे उधर ले रहा है और साले ने नौकरनी रखी है, हुमा ये सब देख सुनकर बस जैसे कुछ ही देर में रोने वाली थी, की तभी वो शख्स अंदर आ गया शांता को धक्का देकर और हुमा के सामने आकर बोला.

आदमी – तू उसकी जोरू है क्या?

हुमा की आँखों से आंसू आ चुके थे, वो सर से पाँव तक कप रही थी.

हुमा- जी जी मै उनको फ़ोन लगाती हूं रुकिये।

आदमी – वो भेनचोद अपना फोन बंद करके बैठा है मै उसकी दुकान पर गया था, वहीं से यहाँ का पता मिला.

तभी दूसरा शख्स बोला – भाई सैफ की लुगाई तो एकदम कड़क माल लग रही है क्यों न इसी से पैसे वसूल करते है।

आदमी – मेरा नाम शंकर है लोग मुझे शंकर दादा कहते है वो भड़वे का कोई दूसरा नंबर है क्या?

हुमा – रोते हुए जी नहीं एक ही नंबर है।

हुमा ने कॉल लगाया मगर सैफ का फ़ोन स्विच ऑफ आया, हुमा को सैफ पर आज बहुत गुस्सा आ रहा था। पता नहीं उसने किस गुंडे से पैसे ले रखे है और अब फ़ोन भी बंद किया हुआ था।

शंकर दादा हुमा को ऊपर से नीचे देखते हुए, वैसे तेरा जिस्म तो बहुत क़ातिल लग रहा है, जब तक तेरा मर्द घर नहीं आ जाता, तब तक हम लोग यही रुक जाते है।

हुमा अपने बूब्स को दुप्पटे से कवर किये हुए कांप रही थी, की तभी दरवाज़े से मिश्रा अंदर आता है उसको देख हुमा की जान में जान आ जाती है।

मिश्रा – अरे शंकर दादा आप यहाँ?

शंकर – उस भड़वे से पैसे की वसूली करने आया था.

मिश्रा – कितना पैसा लिया है सैफ भाई ने?

शंकर – 20 हज़ार! ब्याज के साथ 26 हजार।

मिश्रा – आप मेरे साथ चलिए मै अभी दे देता हूँ।

शंकर हुमा को ऊपर से नीचे देख के कहता है- तू क्यों दे रहा है कौन लगते है ये तेरे?

मिश्रा – दादा सैफ मेरे भाई जैसे है और ये मेरी भाभी।

शंकर – बहुत कड़क माल है तेरी भाभी।

मिश्रा – दादा आपको पैसे दे रहा हूं और एक लफ्ज़ भी ना कहना मेरी भाभी के खिलाफ।

शंकर – साली के बाल बहुत बड़े है।

तभी मिश्रा शंकर को एक तमाचा मार देता है, शंकर भी मिश्रा को घुसा लगा देता, तभी दूसरा शख्स भी मिश्रा को एक घुसा लगा देता है। मिश्रा नीचे गिरता है उसके सर से खून निकल आता है।

शंकर – मिश्रा तुझे सालो से जानता हूं, इसलिए छोड़ रहा हूं, साले आइंदा कभी हाथ मत उठाना मुझ पर, समझा ना।

मिश्रा के सर से खून आ रहा था, तो हुमा ने आगे दौड़कर और अपना दुपट्टा मिश्रा के सर पर लगा दिया।

शंकर – वाह बहुत याराना लगाता है वैसे मुझे क्या करना है, मिश्रा चल मेरे पैसे दे।

तभी मिश्रा के सर पर दुपट्टा लगाए हुए खड़ी हुमा को मिश्रा देखता है और कहता है भाभी जी आप टेंशन न लो मुझे कुछ नहीं हुआ।

हुमा – रोते हुए भाई साहब आपका खून निकल रहा है।

मिश्रा भी सिचुएशन का फायदा उठा कर कहता है- भाभी जी आप जैसी भाभी के लिए जिस्म का पूरा खून भी निकल जाये तो कम है।

ऐसे हैवी डाइलॉग मारने के बाद हुमा के दिल में पूरी जगह बना ली थी मिश्रा ने.

शंकर- तुम भाभी देवर का ड्रामा ख़तम हो गया हो तो मेरे पैसे।

मिश्रा – मेरे साथ आओ।

इतना कह कर मिश्रा बाहर निकल जाता है उसके पीछे शंकर और दूसरा शख्स बाहर निकल जाते है।

हुमा को कुछ देर पहले लग रहा था की ये गुंडा अब उसको नहीं छोड़ेगा, मगर एन वक़्त पर मिश्रा ने हीरो वाली एंर्टी मार कर हुमा का दिल जीत लिया था। उसपर मिश्रा के सर से बहता हुआ खून हुमा के दिल में उतरने के लिए काफी था. कुछ देर बाद एटीएम से पैसे निकालकर शंकर दादा को देकर मिश्रा फिर आया। अब भी हल्का सा खून उसके माथे पर लगा था। हुमा एक दम से भाग कर मिश्रा के पास गयी और कुछ इंच की दुरी पर जाकर रुक गयी, मिश्रा को लगा तो ऐसे था की हुमा जैसे आकर उसको गले लगा लेगी, मगर हुमा रुक गयी और मिश्रा के माथे पर लगी चोट को देखते हुए बोली-

हुमा – पता नहीं किस जनम का रिश्ता है आपके साथ, आज अगर आप वक़्त पर न आते तो पता नहीं क्या हो जाता? शायद मै किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहती है। सैफ को पता नहीं क्या हो गया कैसे कैसे घटिया लोगो से उधार पैसे ले रहे है, आज उनपर बहुत गुस्सा आ रहा है।

गुस्से वाली बात सुनकर मिश्रा खुश हो जाता है, मिश्रा तो चाहता ही यही था की सैफ और हुमा के बीच दूरी बने, इसलिए आज दिल पर पत्थर रख कर उसने शंकर दादा को 26000 दे दिए थे। वैसे मिश्रा हुमा को चोदने के लिए वह अपना सबकुछ देव पर लगाने को तैयार था, क्योंकी हुमा जैसी बला की खूबसूरत औरत उसने आज तक नहीं चोदी थी। उसके नसीब में शांता जैसी लो क्लास और कुछ बाज़ारू रंडिया ही थी।

मिश्रा को पता था, शंकर दादा को पैसे देकर उसको ही फायदा होने वाला था, वो तो मन ही मन शंकर दादा का शुक्रिया कर रहा था उसके प्लानिंग में शंकर दादा वाला पार्ट इत्तेफ़ाक़ से जुड़ गया था जिसका उसको बहुत फायदा होने वाला था.

हुमा – अरे शांता जल्दी से फर्स्ट एड बॉक्स ला।

शांता फर्स्ट ऐड बॉक्स लायी, हुमा ने अपने हाथ से मिश्रा के माथे पर डेटोल लगाया और पट्टी की। मिश्रा बहुत खुश था।

मिश्रा – भाभी जी मुझे भी सैफ भाई पर गुस्सा आ रहा है, इस कमीने से पैसे आखिर क्यों लिए मुझ से मांग लेते, ऐसे लोगो से रिश्ता रखेंगे तो एक दिन खुद मुसीबत में आएंगे और आपको भी मुसीबत में डाल देंगे।

हुमा की आंख में अब भी आंसू थे, हुमा भरी हुए आवाज़ में – भाई साहब आज जो आपने हमारे लिए किया है या ये कहूँ की मेरे लिए किया है मै ज़िन्दगी भर इस एहसान को नहीं भूलूंगी।

मिश्रा – भाभी जी एहसान कह कर पराया कर दिया आपने।

हुमा – मेरा वो मतलब नहीं था भाई साहब।

मिश्रा नाराज़गी का नाटक करता हुआ चुप हो गया।

हुमा – मेरा वो मतलब नहीं था भाई साहब अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी।

मिश्रा – हा मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि आप रो रही है अपने आंसू पोछिए तो मै नाराज़ नहीं हूँगा।

हुमा के चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट आ गई।

मिश्रा – ये हुई ना बात वो तो शुक्र है भगवान का की शांता ने मुझे कॉल किया, नहीं तो पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता। भाभी अगर आपको कुछ हो जाता तो मै अपने आपसे भी नज़रे नहीं मिला पाता।

मिश्रा हैवी पर हैवी डायलाग मरता रहा, कुछ हद तक तो मिश्रा ने हुमा को पटा लिया था, मगर मिश्रा जो सोच रहा था वो सच था या उसका वहम ये आगे देखते है।

कुछ देर बाद मिश्रा चला गया, मिश्रा को जाता देख हुमा, शांता से कहने लगी- ज़रूर ज़िन्दगी में कोई अच्छा काम किया होगा, इसलिए उपरवाले ने इस फ़रिश्ते को यहाँ भेज दिया।

हुमा शांता के करीब जाकर उसको गले लगा लेती है और कहती है तूने जो आज वक़्त पर मिश्रा जी को कॉल किया, तेरा भी ये एहसान मै ज़िन्दगी भर नहीं भुलुंगी।

शांता – क्या मालकिन आप भी न छोड़िये आईये खाना खाते है।

खाना खाते वक़्त शांता कहती है – मालकिन एक बात कहु बुरा मत मानियेगा।

हुमा – तू तो मेरी बहन जैसी, तेरी बात का क्यों बुरा मानूँगी।

शान्ता – मालकिन मालिक को आपका बिलकुल भी ख्याल नहीं है, कैसे गुंडे के हवाले कर दिया था आपको! आपको तो मिश्रा जी जैसा नेक इंसान मिलना चाहिए था।

आगे क्या हुआ पढिए अगले पार्ट मे।

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