प्रोफेसर ने मेरी गांड मारी
College Professor se Gay Chudai Sex Story:– नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम समीर है। मैं इंडिया के एक छोटे से शहर के छोटे से गाँव में रहता था। मैं अब 19 साल का हूँ।
ये कहानी 3 साल पुरानी है जब मैं 19 साल का था। मेरा घर बहुत छोटा था। सिर्फ़ एक रूम, उससे लगा हुआ एक किचन और एक छोटा बाथरूम और टॉयलेट। इस घर में मेरी माँ और मैं दोनों रहते थे। मेरी माँ का नाम शबाना बेगम है और मेरे पापा दूसरी शादी करके शहर में बस गए थे। मेरा एक फ्रेंड है जिसका नाम भानू है। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।
भानू और मैं कई सेक्स की किताबें देखा करते थे और सेक्स के बारे में बात किया करते थे। हमारा सेक्स का जूनून इतना बढ़ गया था कि हम लोग एक-दूसरे का लंड पकड़कर खेला करते थे और एक-दूसरे को मुठ मारा करते थे। फिर हमने इंटरनेट पर लड़कों की ब्लू फ़िल्म देखी जिसमें लड़के एक-दूसरे के लंड चूस रहे हैं। वो देखकर हम भी एक-दूसरे के लंड चूसते थे और एक-दूसरे का रस पीने लगे।
College Professor se Gay Chudai Hindi Sex Story
एक दिन कॉलेज में मैथ्स का पीरियड चल रहा था। भानू ने मैथ्स सर से कहा कि उसको मूतने जाना है। मैथ्स सर ने उसको जाने दिया। मैंने भी खड़े होकर मैथ्स सर से मूतने के लिए जाने की परमिशन माँगी। सर ने कहा ठीक है। मैं टॉयलेट के पास पहुँचा और देखा कि भानू मुठ मार रहा है। मैं पीछे गया और उसका लंड पकड़ लिया। हम दोनों एक ही टॉयलेट में थे और डोर लगाकर मैं भानू का लंड चूस रहा था।
क़रीब 5 मिनट बाद अचानक डोर पर ज़ोर से दस्तक हुई और हम चौंक गए। भानू ने ज़िप लगाई और डोर को थोड़ा सा ओपन किया और मैथ्स सर ने सारा डोर ओपन कर दिया और हम दोनों को एक साथ एक ही टॉयलेट में देखकर पूछने लगे कि क्या कर रहे थे तुम दोनों एक टॉयलेट में। हमारे पास कोई जवाब नहीं था। हम खामोश खड़े रहे।
मैथ्स सर ने हम दोनों को कॉलेज खत्म होने के बाद रुकने के लिए कहा। कॉलेज खत्म हुआ सब चले गए। मैं और भानू दोनों क्लास में बैठे रहे। मैथ्स सर जिनका नाम श्रीनिवास था वो आए और आगे के बेंच पर बैठ गए और मुस्कुराकर पूछने लगे कि बताओ तुम दोनों एक साथ एक टॉयलेट में क्या कर रहे थे। हम दोनों शरम से कुछ नहीं कह पा रहे थे। तब श्रीनिवास सर ने कहा सच-सच बता दो वरना ये बात प्रिंसिपल तक चली जाएगी और प्रिंसिपल हमें कॉलेज से निकाल देंगे।
भानू रोने लगा और कहा सर मैं बताता हूँ। और भानू ने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा हम इससे खेल रहे थे। सर ने पूछा कैसे खेल रहे थे। भानू ने कहा सर समीर इसको चूस रहा था। सर मेरी तरफ देखने लगे और कहा ठीक है भानू तुमने सच कहा इसलिए तुमको मैं माफ़ करता हूँ तुम घर जाओ पर समीर को पनिशमेंट मिलेगा। ये सुनकर मैं भी रोने लगा। भानू अपना बैग उठाया और क्लास से भाग गया।
श्रीनिवास सर मेरे पास आए और कहने लगे समीर क्या तू सच में भानू का चूस रहा था। मैंने कहा नहीं सर वो झूठ कह रहा है। सर ने गुस्से से मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मारा और कहने लगे सब सच-सच बता वरना तुझे तो मैं कॉलेज से निकलवाकर रहूँगा। फिर मैंने सच-सच कहा कि हाँ सर मैं भानू का लंड चूस रहा था। श्रीनिवास सर फिर बेंच पर बैठ गए और पूछे कब से चल रहा है। मैंने कहा कि यही कोई 2 महीने से हम एक-दूसरे के लंड चूसते हैं। सर उठकर खड़े हुए और क्लासरूम का डोर क्लोज़ किया और मुझे सामने आने के लिए कहा।
मैं सामने गया और उन्होंने कहा ठीक है तुमने सच कहा इसलिए मैं ये बात प्रिंसिपल को नहीं बताऊँगा पर तुमको मैं पनिशमेंट दूँगा। मैंने सोचा कि सर अब मुझे मारेंगे जैसे क्लास में होमवर्क न करने पर मारते हैं हाथों पर स्केल उल्टी करके। मैं घबरा गया और कहा सर नहीं सर नेक्स्ट टाइम हम ऐसा नहीं करेंगे। सर ने कहा नहीं तुमको पनिशमेंट तो मिलेगी यहाँ आओ। मैं और क़रीब गया और सर ने अपनी पैंट का बेल्ट खोला और ज़िप खोली और पैंट नीचे किए और अंडरवियर उतारी और उनकी झाँट के बाल भरे हुए थे और काला लंबा मोटा लंड तना हुआ बाहर निकलकर सर ने कहा आओ अब इसको चूसो।
मैंने सोचा अच्छा तो ये पनिशमेंट है। और मैं खुशी-खुशी सर के पास बैठ गया और सर का मोटा काला लंबा लंड लेकर चूसने लगा और सर खुश हो रहे थे और बस 2-3 मिनट में ही सर ने सारा रस मेरे मुँह में डाल दिया और मैं सारा रस पी गया।
फिर सर अपना पैंट पहनकर मुझसे पूछने लगे कि घर पर कौन-कौन रहता है। मैंने कहा कि माँ और मैं दोनों। फिर उन्होंने पापा के बारे में पूछा तो मैंने बताया कि पापा दूसरी शादी करके शहर में बस गए हैं। सर ने कहा कि फिर कॉलेज की फ़ीस कौन देता है। मैंने कहा कि माँ कॉलेज फ़ीस देती है। फिर सर ने पूछा कि माँ कोई काम करती है क्या। मैंने कहा कि हाँ माँ क़रीब में एक लेडीज़ टेलर की दुकान पर काम करती है। फिर सर ने पूछा कि क्या संडे को माँ काम पर जाती है। मैंने कहा हाँ संडे को माँ को ज़्यादा काम होता है। तो सर ने कहा कि ठीक है संडे को मैं तुम्हारे घर आऊँगा और तुम फिर यही करो जो अभी तुमने किया। मैंने कहा ठीक है सर। और मैं खुशी-खुशी घर आ गया।
फ़्राइडे सैटरडे मैं कॉलेज गया पर सर तो ऐसे थे जैसे मुझे जानते ही नहीं। सब लड़कों को जैसे देखते हैं मुझे भी वैसे ही देख रहे थे। मैंने सोचा पता नहीं सर को क्या हो गया। फिर संडे के दिन 11 बजे सर मेरे घर आए और मैं उनको रूम में ले गया। वहाँ सर ने मेरे सारे कपड़े उतारे और खुद भी नंगे हो गए और मेरा लंड मसलने लगे। मेरा भी लंड तनकर टाइट हो गया और सर का भी। फिर मैं सर का लंड चूसने लगा। कुछ देर चूसने के बाद सर ने मुझे रोक दिया और मुझसे कहने लगे कि बाल में लगाने का तेल है तो ले आओ। मैं किचन में गया और तेल की बोतल ले आया। वो मुझे पलटकर मेरी गाँड पर तेल डालने लगे। और मेरे गाँड के छेद में तेल लगाकर उँगली डालने लगे। मुझे दर्द हो रहा था। पर मैं कुछ नहीं बोला। सर अब दो उँगलियाँ मेरी गाँड में डाल चुके थे। मैं दर्द बरदाश्त करता रहा। वो तेल गाँड के छेद में गिरा रहे थे और 2 उँगलियों से मेरी गाँड में अंदर-बाहर कर रहे थे।
फिर उन्होंने मुझे घोड़े की तरह खड़ा किया और मेरी गाँड में अपना लंड डालने लगे। बड़ी मुश्किल से और तकलीफ़ से सर का लंड मेरी गाँड में गया और वो मेरा मुँह अपने एक हाथ से दबा रखे थे और धीरे-धीरे लंड आगे-पीछे कर रहे थे। मुझे बहुत तकलीफ़ हुई। फिर धीरे-धीरे मैं शांत हो गया। मेरा लंड सिकुड़ गया था और सर मेरी गाँड में चोदकर मेरी गाँड में अपना रस डाल दिए। और वहीं मेरे पलंग पर नंगे लेट गए।
मैं भी वहीं बैठा रहा। सर ने पूछा कि माँ कब आएगी। मैंने कहा शाम 6 बजे तक आएगी। अभी तो 2 बज रहे थे। सर ने मुझे कपड़े पहनने के लिए कहा और मुझे एक रेस्टोरेंट ले गए और वहाँ हमने चिकन और रोटी खाई और फिर जूस पिया और फिर वो मेरे साथ मेरे घर आए और फिर मुझे नंगा होने के लिए कहा… और वो भी नंगे हो गए और मुझे लंड चूसने के लिए कहा। मैंने उनका लंड चूसा और फिर उन्होंने तेल मेरी गाँड पर लगाया और मेरी गाँड चोदने लगे।
इस बार मुझे दर्द थोड़ा कम हुआ और मज़ा आने लगा। क़रीब 15-20 मिनट तक वो मेरी गाँड चोदते रहे और फिर मेरी गाँड में झड़ गए और फिर मेरे बेड पर कुछ देर लेटने के बाद वो अपने कपड़े पहनकर मुझसे कहा कि ये बात किसी को नहीं बताना अगर किसी को भी पता चली तो मुझे कॉलेज से निकलवा देंगे। मैंने ये बात भानू को भी नहीं बताई। और कॉलेज नॉर्मल चलने लगा।
अगले संडे को फिर सर आए और वही किया जो पहले संडे को किया था। ऐसे ही हर संडे को वो मेरी गाँड चोदते थे। पर एक संडे को जब वो मेरी गाँड चोदकर जा रहे थे तब मेरी माँ घर में आई। मैंने श्रीनिवास सर से कहा सर ये मेरी माँ है और माँ से कहा कि ये हमारे श्रीनिवास सर हैं जो हमको मैथ्स पढ़ाते हैं। वो दोनों एक-दूसरे को हैलो कहा और सर चले गए और फिर सब नॉर्मल चलता रहा।
अगले संडे सर जब घर आए और मुझे अपना लंड चूसवा रहे थे तब सर ने मेरी माँ की ब्रा और पैंटी रखी देखी। और वो मेरी माँ की ब्रा और पैंटी अपने हाथ में लेकर मुझसे पूछने लगे समीर ये क्या तुम्हारी माँ की ब्रा और पैंटी है। मैंने हाँ कहा। फिर सर ने कहा समीर तेरी माँ के चुचियाँ तो बहुत बड़े लगते हैं। मैं कुछ जवाब नहीं दिया। फिर सर ने कहा कि तेरी माँ की पैंटी भी बहुत बड़ी है लगता है तेरी माँ की गाँड भी बहुत बड़ी होगी। मैं कुछ नहीं कहा सिर्फ़ सर का लंड चूसता रहा। सर ने मेरी माँ की ब्रा और पैंटी देखते हुए मेरे मुँह में अपना रस गिरा दिया और मैं सारा रस पी गया। सर उस शाम मेरी माँ के आने तक मेरे साथ रुके। माँ के आने के बाद वो माँ से जनरल बात करने लगे और फिर चले गए।
अब वो रोज़ शाम को 6 बजे मेरे घर आते और मेरी माँ से बात करते। उन्होंने मेरी माँ से कहा कि मैं मैथ्स सब्जेक्ट में बहुत कमज़ोर हूँ और वो मुझे रोज़ मैथ्स पढ़ा रहे हैं। मैं किताबें लेकर बैठता वो मुझे एक क्वेश्चन का जवाब लिखवाते और कहते इसको अच्छे से दिमाग में बिठा लो। बस फिर माँ के साथ बात करने लगते। वो बात करते-करते माँ के साथ किचन में भी जाते।
मैं देख रहा था कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे वो माँ के साथ बहुत घुल-मिल गए थे। वो हर संडे को मेरी गाँड मारते थे और शाम में माँ आने के बाद बाज़ार से खाने-पीने की चीज़ें लाकर देते थे और खुद भी हमारे साथ रात में डिनर करते और फिर घर जाते। वो माँ के लिए कभी साड़ी तो कभी नई ओढ़नी लाकर माँ को देते थे। और माँ के साथ मज़ाक करते थे और उनका हाथ पकड़कर बात करते थे।
फिर एक संडे को सर 2 बजे घर आए। मैं अंदर गया और अपने कपड़े उतारे। पर सर ने मुझे रोक दिया और कहने लगे। समीर आज नहीं। आज मेरे साथ चलो और हम कुछ शॉपिंग करते हैं। और फिर हम कपड़ों की दुकान पर गए और सर ने मुझे अपनी पसंद का शर्ट लेने के लिए कहा। मुझे शर्ट पसंद नहीं था मैं टी-शर्ट लेना चाहता था उन्होंने कहा ठीक है टी-शर्ट ले लो। मैंने एक टी-शर्ट पसंद किया और सर ने वो टी-शर्ट मेरे लिए खरीद ली। फिर सर और मैं लेडीज़ की शॉप पर गए और सर ने एक ब्रा और पैंटी खरीदी और पैक करवा ली। वापस आते वक्त सर होटल से चिकन की बिरयानी पैक करवा ली और हम वापस घर आ गए। स
र ने कहा मुझे टी-शर्ट पहनने के लिए। मैं टी-शर्ट पहनकर सर के साथ बैठा रहा और कुछ देर बाद माँ आई और सर ने माँ को वो पैकेट दिया और कहा ये आपके लिए लाया हूँ शबाना। माँ ने पूछा क्या है ये। पर सर ने कहा आप खुद ही देख लो। माँ ने पैकेट खोलकर देखा और शर्माकर किचन में चली गई। सर भी माँ के पीछे किचन में गए। किचन का रूम छोटा था और अंदर का साफ़ दिखाई पड़ रहा था जहाँ मैं बैठा था वहाँ से।
सर ने माँ को पीछे से पकड़ लिया था और उनकी गर्दन पर चूमते हुए कान में कुछ कह रहे थे धीरे से। माँ का एकदम पलटी और दोनों गले लग गए। माँ ने मुझे देखा और फिर पीछे हट गई। सर बाहर आ गए और माँ सर की लाई हुई चिकन बिरयानी मुझे और सर के प्लेट्स में डालकर दी और खुद भी खाने लगी। हम सब खाने के बाद सर ने मुझसे कहा कि समीर तुम सो जाओ मैं और कुछ देर तुम्हारी माँ से बात करके जाऊँगा। मैं समझ गया था कि सर आज माँ के साथ सेक्स करेंगे। मेरी दिल की धड़कनें तेज़ हो गई थीं और मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं बस सोने का नाटक करने लगा। क़रीब आधे घंटे तक सर माँ के बाज़ू बैठकर बातें करते रहे और मुझे देखते रहे। और माँ की चुचियों को अपने हाथ से दबा रहे थे और उनके गाल पर गर्दन पर चूम रहे थे और फिर धीरे से वो माँ की साड़ी का पल्लू गिराया और माँ के ब्लाउज़ के हुक्स खोले और ब्रा भी उतारी और बच्चों जैसे माँ की गोद में लेटकर माँ के चुचियों को चूसने और दबाने लगे।
माँ धीरे से आह्ह-आह्ह की आवाज़ें करने लगी और सर ने माँ का हाथ पकड़कर उनके लंड पर रखा और माँ उनका लंड पैंट के ऊपर से मसलने लगी। फिर सर उठे पैंट उतारी और माँ से लंड चूसने के लिए कहा। माँ छी कहकर पीछे हट गई। सर ज़बरदस्ती अपना लंड माँ के होठों पर लगाने लगे और मुँह में डालने की कोशिश करने लगे पर माँ लंड मुँह में लेने से इनकार कर रही थी। फिर सर ने माँ को लिटाया और साड़ी ऊपर की और चूत में लंड डाल दिया। मुझे लंड और चूत साफ़ नहीं दिख रही थी क्योंकि माँ की साड़ी नीचे से सिर्फ़ उठी हुई थी।
फिर सर ने माँ को चोदना शुरू किया और माँ अपने मुँह पर हाथ रखकर आह्ह-आह्ह कर रही थी। सर माँ को चोदकर शांत हो गए और माँ के ऊपर ही लेटे रहे। माँ और सर दोनों के चेहरे पसीने से चमक रहे थे। फिर सर उठे और कहा शब्बो जानू मैं कल फिर आऊँगा। ये कहते हुए सर अपना पैंट पहना और चले गए।
फिर अगली रात को आए और माँ के लिए फूलों का कजरा लाए। वो माँ अपने सर में लगा ली और उस रात सर फिर माँ के मुँह में लंड देने लगे और माँ न चाहते हुए भी उनका लंड पहली बार मुँह में लिया और थोड़ा चूसकर जल्दी उठकर किचन में गई और उल्टी कर दी। फिर सर ने माँ को चोदा और चले गए। ऐसे ही सर अब 2 दिन में एक बार हमारे घर आते और माँ को चोदते। जैसे तेल लगाकर सर ने मेरी गाँड मारी थी वैसे ही तेल लगाकर उन्होंने माँ की भी गाँड मारी और मेरी माँ भी लंड चूसना सीख गई और हर दो दिन बाद सर आते माँ से लंड चूसवाते उनको चूत में उँगली करते और गाँड चोदते।
कुछ महीने गुज़रे और मुझे पता चला कि माँ प्रेग्नेंट है। और सर को पता चला कि मेरी माँ उनके बच्चे की भी माँ बनने वाली है तो सर बहुत खुश हुए और माँ से कहा कि 3 महीने बाद वो उनके गाँव जा रहे हैं और वापस आने के बाद वो हमारे साथ ही रहेंगे। माँ तब तक 6 महीने की प्रेग्नेंट थी। अब सर का आना-जाना कम हो गया था। वो महीने में एक या 2 बार आते और माँ को चोदकर जाते। फिर एक संडे को वो सुबह 11 बजे आए। माँ वहीं टेलरिंग की दुकान गई हुई थी। वो जल्दी आए और मुझसे कहा कपड़े उतारो और मैंने कपड़ा उतारा। वो मुझसे अपना लंड चूसवाए और मेरी गाँड चोदी और फिर रात में वैसे ही मेरे सोने के बाद वो माँ को पूरी नंगी करके उनके उभरे हुए पेट को चूमने लगे और कहने लगे मेरा बच्चा। और माँ को खड़ा करके दीवार के सहारे झुकाया और खड़े-खड़े माँ की गाँड मारी। सुबह 11 बजे मेरी गाँड मारी और रात में 9 बजे माँ की गाँड मारी और फिर चले गए। उसके बाद सर वापस कभी नहीं आए। माँ को और एक लड़का हुआ। और मुझे भानू ने कहा कि सिक्योरिटी गार्ड्स की जॉब के लिए अप्लाई करने को। भानू और मैं सिक्योरिटी जॉब के लिए अप्लाई किए और हैदराबाद की एक बड़ी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का जॉब मिल गया।
मैं और भानू अब हैदराबाद में एक रूम लेकर रह रहे हैं। मैं अपने खर्चे के पैसे अपने पास रखकर माँ को भी पैसे भेजता हूँ। अब मेरा सौतेला भाई 2.5 साल का हो गया है। मैं और भानू यहाँ हैदराबाद में एक ही रूम में एक-दूसरे की गाँड मार रहे हैं और कभी-कभी किसी चिनाल को भी लाकर चोदते हैं। हमने सोच रखा है कि हमारी शादी होने के बाद हम एक-दूसरे की बीवी को भी एक-दूसरे से चुदवाएंगे।
