अपने बेटे से ही चुदाई कर बैठी 5
Maa beta sex affair hindi story:- फिर सुबह मैं अपने टाइम से उठ गई। और अपनी पैंटी पहन के फ़्रेश होने चली गई। रात में अपने बेटे से चुदवाने के ख़याल से मैं अपनी चूत रगड़ रही थी। मगर आज सुबह मैं पूरे होश में थी।
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Maa beta sex affair hindi story
मैं बार-बार यही सोच रही थी कि क्या अपने बेटे के साथ ये सब करना सही है। मैं यही सब सोच रही थी कि तभी मुझे विक्रम की वो पैंटी वाली बात याद आ गई। मैं भी देखना चाहती थी कि क्या सच में मेरा बेटा मेरी पैंटी से खेलता है।
फिर मैंने अपनी पैंटी निकाल के हुक पर टांग दी। मैं फ़्रेश होकर घर के काम करने लगी। घर के काम करके जब मैं अपने बेटे को उठाने पहुँची। तो मैंने देखा मेरा बेटा हमेशा की तरह सिर्फ़ अंडरवियर में सो रहा था।
और उसका लंड उसके अंडरवियर में पूरा खड़ा हुआ था। उसका खड़ा लंड देखकर मैं समझ गई कि मेरा बेटा जाग रहा है। और वो मुझे अपना लंड दिखा रहा है। मैं भी खड़ी-खड़ी उसके लंड को देख रही थी। फिर मैं उसके पास गई।
और उसे उठा दिया। मेरा बेटा उठते ही स्माइल करते हुए मुझे देखने लगा। फिर मैं बाहर आ गई। और उसके लिए नाश्ता बनाने लगी। तब तक मेरा बेटा टॉयलेट हो आया। फिर जैसे ही वो नहाने के लिए बाथरूम में गया।
तभी मैं भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम के पास पहुँच गई। हमारा बाथरूम का दरवाज़ा फ़ाइबर शीट का बना हुआ है। जो काफ़ी पुराना है। जिसकी वजह से उसमें 2-3 होल भी हो गए हैं। जिससे किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।
फिर बाथरूम के पास पहुँच के जैसे ही मैंने एक होल से अंदर देखा। तो मेरी आँखें बड़ी हो गईं। अंदर मेरा बेटा पूरा नंगा खड़ा हुआ था। और वो मेरी पैंटी को लेकर आगे और पीछे करके देख रहा था।
फिर उसने मेरी पैंटी के चूत वाले हिस्से को देखा। और तुरंत उसे अपनी नाक से लगा लिया। फिर मेरी पैंटी को सूंघते हुए उसने अपना लंड पकड़ा। और उसे आगे-पीछे करने लगा।
आज पहली बार मैं अपने बेटे के लंड को नंगा देख रही थी। मेरे बेटे का लंड 6 साढ़े 6 इंच लंबा था। मगर उसके लंड की मोटाई साढ़े 3-4 इंच के आसपास लग रही थी। मेरे बेटे के लंड की मोटाई बिल्कुल विक्रम के लंड के जैसे थी।
मेरा बेटा कभी मेरी पैंटी को सूंघता तो कभी उसे अपने लंड पर रगड़ने लगता। अपने बेटे को देखकर मुझे आज पता चल रहा था कि मेरा बेटा मुझे चोदने के लिए कितना पागल है। वो अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था।
मैं उसे ये सब करते देख रही थी। मेरी पैंटी को सूंघते हुए वो जल्दी-जल्दी अपना लंड आगे-पीछे करने लगा। और कुछ ही देर बाद उसका पानी निकलने लगा। जिसे उसने नीचे गिरा दिया। और तभी मैं जल्दी से किचन में आ गई।
फिर से उसके लिए नाश्ता बनाने लगी। मगर अब मेरे दिमाग़ में अपने बेटे का मोटा लंड घूम रहा था। मुझे बार-बार अपने बेटे का बिना बालों वाला मोटा लंड दिखाई दे रहा था। मैं उसके लंड के बारे में सोच रही थी।
कि तभी मेरा बेटा तैयार होकर आ गया। और किचन में आते ही उसने मेरी कमर को पकड़ लिया। और बोला।
मेरा बेटा: क्या हुआ मम्मी? कहाँ खोई हुई हो आप।
मैं: मैं कहाँ खोई हुई हूँ बेटा। मैं तो तेरे लिए नाश्ता बना रही हूँ।
मेरा बेटा: मैंने आपको 2 बार आवाज़ दी। मगर आपने कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए मैंने पूछा।
अब मैं अपने बेटे को क्या बताती कि मैं उसके ही लंड के बारे में सोच रही थी। जो वो मेरी गाँड पर लगा रहा था। मेरा बेटा मेरी कमर को अपने हाथ से हल्के-हल्के सहला रहा था। और उसके लंड का अहसास मुझे अपनी गाँड पर हो रहा था।
फिर मैंने अपने बेटे को नाश्ता निकाल के दे दिया। जिसे खाके वो कॉलेज चला गया। मैं सारा काम करके कमरे में आ गई। और लेटकर अपने बेटे के बारे में सोचने लगी। विक्रम बिल्कुल सही कह रहा था। मेरा बेटा मेरे लिए बिल्कुल पागल है।
किस तरह वो मेरी गंदी पैंटी को सूंघ रहा था। और उसे सूंघते हुए अपना लंड हिला रहा था। ऐसा पागलपन मैंने आज तक नहीं देखा था। मैं लेटी-लेटी अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी। फिर मैंने अपनी आईडी लॉगिन कर ली। और तुरंत विक्रम को मैसेज कर दिया।
मैं: हेलो, कैसे हो?
विक्रम: मैं ठीक हूँ आंटी। आप कैसे हो।
मैं: मैं भी ठीक हूँ।
विक्रम: फिर आंटी आपने कुछ किया। जैसे मैंने कहा था या नहीं।
मैं: नहीं नहीं मैंने अभी वैसे कुछ नहीं किया।
विक्रम: क्यों आंटी? क्या आपका मन चुदवाने का नहीं है?
मैं: है, मगर वो मेरा बेटा है।
विक्रम: बेटा तो है आंटी। मगर चोदना तो वो भी आपको चाहता है।
मैं: हाँ वो तो मैं जानती हूँ। मगर मैंने उसे ऐसे नज़र से कभी नहीं देखा। और वो जैसे भी हो। है तो मेरा बेटा ही। इसलिए मुझे ये सब थोड़ा अजीब लग रहा है।
विक्रम: बेटे के साथ-साथ वो एक मर्द भी है आंटी। जो ये बात जानता है कि आप माँ के साथ-साथ एक औरत भी हो। जिसको जिस्मानी सुख की ज़रूरत है। जो आपके पति आपको नहीं दे पाते हैं। वैसे आज आपने अपनी पैंटी रखी थी बाथरूम में।
मैं: हाँ रखी थी।
विक्रम: तो फिर क्या देखा आपने।
मैं: तुमने बिल्कुल सही कहा था विक्रम। मेरा बेटा पागलों की तरह मेरी पैंटी को सूंघ रहा था। और मेरी चूत वाले हिस्से को अपने लंड पर रगड़ रहा था। और उसे सूंघते हुए अपना लंड हिला रहा था।
विक्रम: वो तो होना ही था आंटी। हर इन्सेस्ट लड़का ऐसा ही करता है। वैसे आपने अपने बेटे का लंड देखा।
मैं: हाँ देखा।
विक्रम: कैसा लगा आपको।
मैं: अच्छा था।
विक्रम: आपके पति के लंड से बड़ा था या नहीं।
मैं: हाँ उनसे तो बड़ा और मोटा है।
विक्रम: वैसे सच कहूँ आंटी। चुदाई का सुख तो आप भी अपने बेटे से लेना चाहती हो।
मैं: तुम्हें ऐसा क्यों लगता है? कि मैं अपने बेटे से चुदवाना चाहती हूँ।
विक्रम: जिस तरह आप मुझे अपने बेटे के लंड के बारे में बता रही थीं। तो आपके अंदर एक उत्तेजना थी। और ये उत्तेजना एक औरत में तभी होती है। जब वो औरत उस लंड से चुदवाने के बारे में सोच रही हो।
मैं जानता हूँ आप अभी ये बात मानना नहीं चाहती हो। मगर आप भी अपने बेटे के लंड के बारे में सोच रही हो। और जल्द ही आप ख़ुद ही अपने बेटे के लंड की सवारी करोगी।
विक्रम की बात सुनके मैं चुप हो गई। और उसकी बात के बारे में सोचने लगी। क्योंकि वो सही कह रहा था। जब से मैंने अपने बेटे के लंड को देखा था। तब से मेरे दिमाग़ में उसका मोटा लंड घूम रहा था।
विक्रम: वैसे आंटी जिस तरह आज आप अपने बेटे को लंड हिलाते हुए देख रहे थे। क्या कभी आपको लगा कि कोई आपको नहाते हुए देख रहा है।
मैं: नहीं कभी ऐसा लगा तो नहीं। मगर तुम्हारी बातें सुनने के बाद लगता है कि वो मुझे देखता ज़रूर होगा।
विक्रम: ज़रूर देखता होगा आंटी। इन्सेस्ट लड़के अपनी माँ को नंगा देखने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। मैं दावे से कह सकता हूँ कि सिर्फ़ बाथरूम में ही नहीं, बल्कि आपका बेटा रात को भी आपके कमरे में भी आपको देखता होगा।
जैसे ही विक्रम ने ये बात कही। तभी मैं उठ के बैठ गई। और तुरंत बोली।
मैं: तुम ये कैसे कह सकते हो।
विक्रम: आप ख़ुद जाके देख लो। आपके कमरे के दरवाज़े में या तो कीहोल होगा। या कोई और छेद होगा। या खिड़की में कोई जगह होगी। जहाँ से आपका बेटा आपको देखता होगा।
विक्रम की बात सुनके मैं तुरंत बेड से उठी। और जाके अपने कमरे का दरवाज़ा देखने लगी। और जब मैंने कमरे का दरवाज़ा देखा। तो कीहोल के पास एक छेद था। और जैसे ही मैंने उस छेद से अंदर देखा।
तो मेरा पूरा कमरा उस छेद से दिख रहा था। ये देखकर मैं थोड़ी शॉक तो ज़रूर गई थी। मगर इन दिनों मुझे मेरे बेटे के बारे में इतनी बातें पता चली थीं कि अब ये बात मुझे नॉर्मल लग रही थी। तभी विक्रम का मैसेज आया।
विक्रम: देखा आंटी आपने।
मैं: हाँ तुम सही कह रहे थे। मेरे दरवाज़े में एक छेद है। जिससे पूरा कमरा दिखता है।
विक्रम: यहीं से आपका बेटा हर रोज़ आपको देखता है। यहाँ तक कि उसने आपकी और आपके पति की चुदाई भी देखी है। इसलिए वो जानता है कि आप अपने पति से ख़ुश नहीं हैं। इसलिए आप डिल्डो से अपनी चूत को शांत करती हैं।
विक्रम की बात सुनके मैं अपने बेटे के बारे में सोचने लगी। मेरा बेटा ने उस छेद से मुझे उसके पापा से चुदवाते हुए देखा है। मैं अपने पति से ख़ुश नहीं हूँ। ये बात वो जानता है।
शायद इसलिए वो मुझे अपने लंड का अहसास करवाता है। क्योंकि वो जानता है। मुझे एक लंड की ज़रूरत है। और शायद इसलिए वो इन्सेस्ट भी बन गया। क्योंकि कहानी में भी मैंने ऐसा ही पढ़ा था कि एक बेटा जब ये बात जान जाता है।
कि उसकी माँ चुदाई में ख़ुश नहीं है। तभी वो अपनी माँ की तरफ़ आकर्षित होता है। और अब मुझे भी यही लग रहा था कि मेरा बेटा भी मेरी तरफ़ इसलिए आकर्षित हुआ है। मैं बैठी-बैठी अपने बेटे के बारे में सोच रही थी।
विक्रम: क्या हुआ आंटी? क्या सोच रहे हो आप?
मैं: बस यही सोच रही थी कि मेरा बेटा मुझे वो सब करते हुए देखता है। मगर फिर भी वो आगे क्यों नहीं बढ़ा।
विक्रम: आंटी अपनी माँ के साथ आगे बढ़ना आसान नहीं होता है। मगर आपका बेटा आपको अपने लंड का अहसास तो दिलाता ही रहता है। ये भी उसके लिए बहुत बड़ी बात है।
मैं: हाँ ये तो है।
विक्रम: अगर आप उसकी थोड़ी हिम्मत बढ़ा दो। तो वो इससे आगे भी बढ़ जाएगा। बस आप वही सब करो। जैसा मैंने आपको बताया है।
जैसे ही विक्रम ने ये बात कही। तभी मैं उसकी बताई बातों के बारे में सोचने लगी। विक्रम ने मुझे जो-जो करने को कहा था। उससे मेरा बेटा क्या, कोई भी मर्द मुझे चोदने के लिए पागल हो जाएगा।
विक्रम: क्या हुआ आंटी? आप ख़ामोश क्यों गए?
मैं: बस मैं फ़ैसला नहीं कर पा रही हूँ कि ऐसा करना सही है या ग़लत।
विक्रम: समझ सकता हूँ, आंटी। ये आसान नहीं है। वैसे आपका मन क्या कहता है?
मैं: मैं अगर एक माँ की तरह सोचूँ। तो ये मुझे ग़लत लगता है। और अगर मैं एक औरत की तरह सोचूँ। तो ये मुझे ग़लत नहीं लग रहा है।
विक्रम: वैसे आंटी ज़िंदगी एक ही बार मिलती है। इसलिए मेरा मानना है। इसे खुल के जीना चाहिए। मुझे मेरी माँ पसंद है। इसलिए मैं सही और ग़लत नहीं देखता। मेरा जो मन करता है। वही करता हूँ आप भी अपने दिल की सुनो। और जो मन करे। बस वही करो।
मैं: तुम सही कह रहे हो। वैसे आज मेरे पति आ रहे हैं। तो 2 दिन तक बात नहीं कर पाऊँगी।
विक्रम: कोई बात नहीं आंटी। इन 2 दिन मैं भी अपनी मम्मी की चुदाई में बिज़ी रहूँगा। वैसे आपके पति आ रहे हैं। तो क्या चुदाई होना पक्का है।
मैं: पता नहीं ये तो उनके मूड के ऊपर है। वैसे भी वो मेरी तसल्ली कहाँ करा पाते हैं।
विक्रम: इसलिए तो मैं आपको कह रहा हूँ आंटी। आप अपने बेटे को मौक़ा दो। वो आपकी हर तरह से तसल्ली करा देगा। बाक़ी आप ख़ुद समझदार हो। वैसे आंटी क्या आज मैं आपकी एक फ़ोटो देख सकता हूँ?
मैं: ठीक है रुको।
फिर मैं बेड से उठी। और अपनी साड़ी निकाल के शीशे के सामने खड़ी हो गई। मैं इस वक़्त ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। जिसमें मेरा पूरा खुला हुआ पेट दिख रहा था। और मेरे बड़े-बड़े दूध और उनके खड़े हुए निप्पल्स साफ़-साफ़ दिख रहे थे।
फिर मैंने 2 फ़ोटो बिना चेहरे की खींची और विक्रम को भेज दी। और फ़ोटो देखते ही विक्रम बोला।
विक्रम: आप बहुत हॉट हो आंटी। आपको ऐसे देखकर तो कोई भी पागल हो जाएगा। अब समझ आया आपका बेटा इन्सेस्ट क्यों बना है?
मैं: अच्छा जी।
विक्रम: सच आंटी, आपको ऐसे देखकर तो किसी मुर्दे का लंड भी खड़ा हो जाए। और आपका बेटा तो पूरा जवान है। उसका क्या हाल होता होगा? आपको ऐसे देखकर।
मैं: अगर मैं इतनी ही हॉट हूँ। तो मेरे पति मुझपे ध्यान क्यों नहीं देते हैं?
विक्रम: क्योंकि सारे पति चूतिये होते हैं आंटी। मेरा बाप भी चूतिया है। मेरी माँ जैसे औरत मेरे बाप को मिली है। जिसे देखकर लोग अपना लंड मसलते हैं। मगर मेरा बाप जब भी घर आता है।
तो हफ़्ते में 1-2 बार ही मम्मी को चोदता है। और मम्मी को देखकर ये साफ़-साफ़ पता चलता है कि मेरा बाप मेरी मम्मी की गर्मी सही से निकाल नहीं पाता है। और आपको देखकर भी मुझे यही लग रहा है कि आपके बदन की गर्मी भी सही से निकली नहीं है।
मैं: हाँ ऐसा ही है। मेरे पति भी कहाँ मुझे अच्छे से चोद पाते हैं।
विक्रम: सच कहूँ आंटी। अगर मैं आपका बेटा होता। तो अब तक ज़बरदस्ती आपको चोद चुका होता। फिर चाहे आप मुझे जितना मना करतीं। मैं आपकी एक ना सुनता।
अपनी बात बोलते ही विक्रम ने तुरंत अपने लंड की फ़ोटो भेज दी। विक्रम का लंड पूरा खड़ा हुआ था। फिर वो बोला।
विक्रम: देखो, आंटी सिर्फ़ आपकी फ़ोटो देखकर ऐसा हाल हो जाता है। मैं तो सोच रहा हूँ। आपके बेटे कैसे ख़ुद को रोकता होगा।
मैं: उसका लंड भी खड़ा ही रहता है। इन दिनों मैंने कई बार उसके लंड का उभार देखा है।
विक्रम: वो तो होना ही है आंटी।
मैं: चलो मैं चलती हूँ। मंडे को बात करेंगे।
विक्रम: ठीक है आंटी। और आप भी अपनी जवानी को बर्बाद मत करो। खुल के चुदाई का मज़ा लो। सही-ग़लत कुछ नहीं होता है। इंसान को सिर्फ़ ख़ुश रहना चाहिए।
मैं: चलो मैं देखती हूँ। मन क्या कहता है?
फिर विक्रम से बात करके मैं किचन में आ गई। और दोपहर का खाना बनाने लगी। मैं अभी भी ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। और मेरे दिमाग़ में विक्रम की बातें घूम रही थीं। विक्रम कह तो सही रहा था।
मगर मेरा दिमाग़ कह रहा था कि मैं ऐसा न करूँ। मगर दिल कह रहा था कि मैं भी चुदाई का मज़ा लूँ। और वैसे भी मेरा बेटा तो पहले ही मुझे चोदने के लिए मरा जा रहा था। मुझे तो बस उसे हल्का से उकसाना ही था।
यही सब सोचते-सोचते मैं खाना बनाए जा रही थी कि तभी बेल बजी। मैंने तो देखा तो मेरे बेटे के आने का टाइम था। मैं ऐसे ही ब्लाउज़-पेटीकोट में दरवाज़ा खोलने चली गई। मैंने बिना किसी झिझक के दरवाज़ा खोल दिया।
और जैसे ही मेरे बेटे की नज़र मुझपे पड़ी। वो मुझे देखता ही रह गया। मेरा बेटा मेरे बदन को देख रहा था। क्योंकि आज पहली बार मैंने ऐसे कपड़े पहन के गेट खोला था। गेट के खुलते ही मेरा बेटा अंदर आ गया। फिर वो बोला।
मेरा बेटा: आप कहीं जा रहे हो क्या मम्मी?
मैं: नहीं तो, तुझे ऐसा क्यों लगा? कि मैं कहीं जा रही हूँ।
मेरा बेटा: वो आप सिर्फ़ ब्लाउज़-पेटीकोट में थीं ना। इसलिए मुझे लगा आप कहीं जाने के लिए तैयार हो रही हो।
मैं: वो गर्मी बहुत हो रही थी। इसलिए साड़ी निकाल दी। खाना बना रही थी कि तभी तू आ गया। इसलिए ऐसे ही गेट खोल दिया।
मेरा बेटा: ओह अच्छा।
मैं: चल तू कपड़े बदल ले।
फिर मेरा बेटा अपने कमरे में चला गया। मैं किचन में फिर से खाना बनाने लगी। गर्मी वाक़ई बहुत ज़्यादा हो रही थी। मेरे गले से बहता पसीना मेरे दूध में जा रहा था। और मेरा बेटा बाहर मेरे दूध को ही देख रहा था।
मैं रोटी बना रही थी। तभी मैंने तिरछी नज़र से किचन के दरवाज़े पर देखा। मैंने देखा मेरा बेटा किचन में आ गया था। और उसने सिर्फ़ कच्छा पहना हुआ था। अपने बेटे को देखकर मैं समझ गई थी।
कि वो मुझे अपने लंड का अहसास देने ही आ रहा है। और सच कहूँ तो मुझे भी अब उसके मोटे लंड का अहसास अपनी गाँड पर अच्छा लगने लगा था। फिर अगले ही पल मेरे बेटे ने मुझे कमर से पकड़ लिया।
और उसके पकड़ते ही एक बिजली का झटका मेरे शरीर में दौड़ गया। मेरा बेटा मुझसे चिपक गया। और उसके चिपकते ही उसके लंड का अहसास मुझे अपनी गाँड पर होने लगा। तभी मेरा बेटा बोला।
मेरा बेटा: क्या बनाया मम्मी?
मैं: कोफ़्ते की सब्ज़ी, चावल और रोटी बनाई है। मगर तू यहाँ गर्मी में क्यों आ गया?
मेरा बेटा: आप भी तो यहाँ गर्मी में खाना बना रही हो मम्मी। तो सोचा आपसे बात कर लूँ।
मैं: बात बाहर कर लेना बेटा। यहाँ बहुत गर्मी है। तू बाहर बैठ मैं खाना निकाल के लाती हूँ।
मेरा बेटा: खाना एक साथ निकाल लेना मम्मी। मैं आपके साथ ही खाऊँगा।
मैं: चल ठीक है।
मेरा बेटा मेरी कमर को सहलाते हुए अपना लंड मेरी गाँड पर रगड़ रहा था। और उसके हाथ का वो गरम स्पर्श और उसके लंड की रगड़ मुझे अंदर से गरम कर रही थी।
मेरा बेटा: आज तो पापा आने वाले होंगे मम्मी।
मैं: हाँ बेटा शाम तक आ जाएँगे। और आज शाम को सब्ज़ी लेने भी चलना है।
मेरा बेटा: ठीक है मम्मी।
मैं: चल अब तू कमरे में जाके बैठ। मैं खाना निकाल के लाती हूँ।
फिर मेरा बेटा किचन से चला गया। मैं खाना लेकर कमरे में आ गई। फिर हम दोनों खाना खाने लगे। और खाना खाके मैं और मेरा बेटा वहीं लेट गए। लेटकर मैंने अपने माथे पर कोहनी रख ली।
जिससे मेरे बेटे को लगा कि मैं सो गई हूँ। और मेरा बेटा मेरे बदन को घूर-घूर के देखने लगा। और अपने लंड को कच्छे के ऊपर से मसलने लगा। मेरे बेटे का लंड खड़ा हो चुका था। जिसका उभार उसके कच्छे में दिख रहा था।
15-20 मिनट मेरा बेटा मुझे ऐसे ही घूरता रहा। फिर वो बाहर चला गया। मैं भी लेटे-लेटे सो गई। फिर शाम 5 बजे मेरी खुली। मैं फिर बाहर आ गई। मैंने देखा मेरा बेटा बाहर सोफ़े पर बैठा हुआ था।
मैं: तू सोया नहीं बेटा।
मेरा बेटा: नहीं मम्मी मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मैं: चल फिर तैयार हो जा। मार्केट चलना है।
मेरा बेटा: मैं तो तैयार ही हूँ मम्मी। बस एक टीशर्ट ही पहननी है।
मैं: चल फिर मैं कपड़े बदल लेती हूँ।
और ये बात बोलके मैं अपने कमरे में आ गई। आज मैंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद नहीं किया। और कमरे में आते ही मैं हल्के-हल्के अपना ब्लाउज़ खोलने लगी। मैंने अभी 2 ही हुक खोले थे कि तभी मेरा बेटा आ गया। और बोला।
मेरा बेटा: आप अभी तैयार नहीं हुईं मम्मी। देखो मैं तो तैयार हो भी गया।
मैं: मुझे भी ब्लाउज़ बदलना है। और साड़ी ही पहननी है बस। तू बैठ मैं अभी तैयार होती हूँ।
मेरी बात सुनके मेरा बेटा बेड पर मेरे सामने बैठ गया। और उसके बैठते ही मैंने अपना ब्लाउज़ खोल दिया। ब्लाउज़ के खुलते ही मेरे बड़े-बड़े दूध बाहर निकल के लटकने लगे। और मेरा बेटा बैठे-बैठे मेरे दूध को देखने लगा।
मैं अपने बेटे को ऐसा दिखा रही थी कि मुझे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है। मगर अंदर से मैं अपने बेटे को अपना बदन दिखा के गरम हो रही थी। आज मैं बिना किसी शर्म के आधी नंगी अपने बेटे के सामने घूम रही थी।
और ना चाहते हुए भी उसे उकसा रही थी। मैंने अभी तक अपने बेटे से चुदवाने का फ़ैसला नहीं किया था। मगर उसे ना भी नहीं किया था। फिर मैंने अलमारी खोल के एक सफ़ेद ब्रा, ब्लाउज़ और साड़ी निकाल ली।
और अपने बेटे के सामने ब्रा पहनने लगी। और जैसे ही मैं ब्रा पहनने लगी। तभी मेरे बेटे ने अपना मोबाइल निकाला। और वो उसे चलाने लगा। मैंने देखा मेरे बेटे ने मोबाइल ऐसे पकड़ा हुआ था। जैसे कि वो मेरी वीडियो बना रहा हो।
मैं वैसे ही ब्रा पहनती रही। और मेरा बेटा मेरी वीडियो बनाता रहा। मैं इतना तो जानती थी कि मेरा बेटा मुझे नंगी देखने के लिए वीडियो बना रहा था। इसलिए मुझे भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा था।
फिर ब्रा पहनने के बाद मैंने ब्लाउज़ और साड़ी भी पहन ली। फिर हम दोनों मार्केट के लिए निकल पड़े। और आज भी मेरा बेटा रास्ते में बार-बार ब्रेक लगा रहा था। जिससे मेरे दूध उसकी पीठ पर दब रहे थे।
आज मुझे अपने बेटे की हरकतों पर गुस्सा नहीं बल्कि हँसी पर आ रही थी। मैं बार-बार यही सोच रही थी कि मेरा बेटा मेरे लिए कितना पागल है। फिर मार्केट से सामान लेकर हम लोग घर आ गए।
और शाम होते ही मेरे पति भी घर आ गए। फिर हम तीनों बैठ के चाय पीने लगे। और चाय पीके मेरा बेटा बाहर चला गया। मैं किचन में खाना बनाने लगी। खाना बनाते हुए भी मैं अपने बेटे के बारे में सोच रही थी।
मैं बार-बार यही सोच रही थी कि क्या मुझे भी अपने बेटे से चुदवा लेना चाहिए। क्योंकि मेरे अंदर जो आग लगी हुई थी। वो मेरे पति से शांत नहीं होने वाली थी। आज पूरे 1 हफ़्ते बाद मेरे पति घर आए थे।
और अभी भी वो कमरे में बैठकर न्यूज़ देख रहे थे। मैं किचन में अपनी गरम और गीली चूत लिए तड़प रही थी। जो बस कैसे भी लंड का सुख लेना चाहती थी। फिर खाना बनाने के बाद मैं भी कमरे में आ गई।
और अपने पति से बातें करने लगी। फिर 9 बजे मेरा बेटा भी आ गया। फिर हम लोग खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद मैं काम में लग गई। और मेरे पति बाहर बैठे हुए टीवी देखने लगे।
साढ़े 10 तक काम करने के बाद मैं भी घर की सारी लाइट बंद करके कमरे में आ गई। और कमरे में आते ही मैं अपनी साड़ी निकाल के बेड पर आ गई। फिर मेरे पति मेरे पास आए। और मेरे पेट को सहलाते हुए वो मेरे गले को चूमने लगे।
मैं तो पहले से ही गरम हो रही थी। इसलिए मैं भी अपने पति का साथ देने लगी। 2 मिनट में ही मेरे पति ने मुझे पूरा नंगा कर दिया। और मेरे ऊपर चढ़ के मेरे दूध को चूसने लगे।
मैं अपने पति का सिर सहला रही थी। और सिर सहलाते हुए बार-बार दरवाज़े की तरफ़ देख रही थी। मैं जानती थी मेरा बेटा बाहर खड़ा हुआ हम दोनों को देख रहा होगा। और अब मुझे भी उससे कोई शर्म नहीं थी।
मेरे दूध को चूसने के बाद मेरे पति ने मेरी टाँगें फैला दीं। और टाँगों के फैलते ही मेरे पति मेरी गीली चूत देखकर मुस्कुराने लगे। फिर उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया।
और वो मेरी चूत चाटने लगे। मेरी चूत लगातार पानी बहा रही थी। और ये पानी मेरे पति की वजह से नहीं, बल्कि मेरे बेटे की वजह से बह रहा था। 2 मिनट चूत चाटने के बाद मेरे पति मेरे ऊपर से उठ गए।
