ससुरजी और उनके दोस्त से चुद गई 1
Sasur Bahu ki desi kamuk sex story:- हेलो मेरे प्यारे दोस्तों… मैं आपको एक सच्ची घटना बताने जा रही हूँ जो मेरी एक बहुत प्यारी और पक्की सहेली, जिसका नाम पूनम है, के साथ हुई थी। जब काफी सालों के बाद पूनम मुझसे मिलने आई तो मैंने उसे काकाजी वाली पूरी घटना बताई। तब उसने भी मुझे अपनी सारी घटना सिलसिलेवार बताई क्योंकि हम दोनों में कभी कुछ नहीं छुपा।
और हाँ, इस स्टोरी में सिर्फ लफ्ज मेरे हैं पर पूरी स्टोरी मेरी सहेली की जुबानी है। तो सुनिए।
Sasur Bahu ki desi kamuk hindi sex story
मेरा नाम पूनम है। मेरी उम्र लगभग 30 साल है। जब मेरी शादी हुई थी मेरी उम्र करीब 22 साल की थी। रंग नॉर्मल है मतलब मैं एक आम रंगत पर तीखे फीचर्स वाली बेहद सेक्सी औरत हूँ। बॉडी वाइज मैं एक अच्छे-खासे सेक्सी फिगर वाली हूँ। बूब्स मीडियम, मांसल हैं, काफी टाइट हैं और मेरे निप्पल्स भी काफी टाइट हैं। पेट पर हल्का गुगुदापन है जिसके कारण नेवल काफी गहरी है। हिप्स मांसल और उभरे हुए हैं। टाँगें भी सुडौल हैं जिसके कारण मेरी पुसी काफी टाइट लगती है।
शादी के वक्त तो मैं आज के समय से भी ज्यादा सेक्सी लगती थी। जब हम सब सहेलियाँ कॉलेज में थीं तब ही हम सबने लगभग 30-35 हार्डकोर XXX फिल्में देख ली थीं। मेरी कुछ एक सहेलियाँ काफी बिंदास थीं इसलिए लगभग सभी सहेलियों को लंड, चूत, बूब्स जैसे सारे आम बोलचाल के शब्दों के बारे में मालूम था। मेरी सबसे खास बात ये थी कि मुझे सेक्स बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव लगता था और पोर्न फिल्में देखते समय मैं काफी फैंटसीज भी करती थी। शायद इसलिए I am very fond of enjoying sex. शायद मुझे ही सबसे ज्यादा पोर्न फिल्में देखने का शौक था क्योंकि पोर्न फिल्मों में जैसे मेल पार्टनर अपने फीमेल पार्टनर के शरीर से खेलता है, उसे चूमता है, चूसता है, मुझे सब कुछ अच्छा लगता था और मैं मन ही मन में सब कुछ अपने साथ अनुभव भी करने लगती थी। कई बार इच्छा भी हुई किसी लड़के के साथ सेक्स करूँ पर शायद शर्म के कारण नहीं कर पाई।
ये तो था मेरा छोटा सा इंट्रोडक्शन। अब मैं आपको अपनी शादी वाले दिन से बताती हूँ। जब मेरी शादी हो रही थी तो मैं बहुत खुश थी क्योंकि अब मुझे सेक्स करने का लाइसेंस मिलने वाला था और मैं वो सब कुछ अपने पति के साथ करना चाहती थी जो कुछ मैंने पोर्न फिल्मों में आज तक देखा था।
ये सोच-सोच के ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे थे। खैर, चलो जैसे-तैसे सुहागरात आई। योगेश (मेरे पति का नाम) कमरे में आए और पलंग पर बैठे हुए मुझसे पूछा—
योगेश: थक गई हो ना?
मैंने अपना चेहरा नीचे झुका रखा था। मैं कुछ नहीं बोली। योगेश ने आगे बोलना शुरू किया—
योगेश: मैं तो बहुत ज्यादा थक गया हूँ और सोना चाहता हूँ। सुबह जल्दी उठना है।
मैं तो ये सुनके बिल्कुल अवाक रह गई कि ये बात वो आदमी बोल रहा है जिसकी आज सुहागरात है। मैंने योगेश की तरफ देखा तो योगेश मुस्कुरा रहा था। मैंने भी हल्के से मुस्कुरा दिया।
योगेश: मैं तो मजाक कर रहा था।
ये कहके उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं तो जैसे निहाल ही हो गई। योगेश ने मुझे थोड़ा सा चूमा और मेरे कपड़े उतारने लगा। मुझे लगा कि मुझे अब वो सब मिलने वाला है जिसकी कल्पना मैंने आज तक सिर्फ सपनों में की थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
उधर योगेश मेरे कपड़े उतारने के बाद मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने कपड़े उतार के मुझे चोदने की तैयारी करने लगा। योगेश ने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मुझे बहुत दर्द भी हुआ पर वो जल्दी-जल्दी मुझे चोदने लगा। मैं तो बिल्कुल अवाक ही रह गई कि ये सब क्या हो रहा है। पर योगेश मुझे चोद रहा था। करीब 10 मिनटों के बाद वो झड़ गया और मुझसे अलग हुआ। मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा सा खून निकला हुआ है। उधर योगेश का मुरझाया लंड झड़ने के कारण और भी मुरझाया हो गया है। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये कौनसा सेक्स है।
खैर, चलो मैंने उठके अपनी चूत साफ की और कपड़े पहनकर बिस्तर पर लेट गई। मैंने पीछे घूमके देखा तो योगेश सोया हुआ था। पर मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मैंने जो-जो सपने सेक्स के लिए देखे थे वो सब मिट्टी में मिल गए थे। चलो जैसे-तैसे सुहागरात गुजर गई।
अगली सुबह मैं नहा-धोके अपने कमरे से बाहर निकली और रिश्तेदारों से मिलने का सिलसिला चल पड़ा। मैंने एक बात नोट की थी योगेश के परिवार के बारे में— वो सब लोग बहुत हँसमुख और मजाक करने वाले थे। हमेशा हँसते रहते थे। जैसे-तैसे शाम हुई। मुझे वापस अपने कमरे में भेज दिया गया। रात आई और पहली वाली रात से भी ज्यादा बुरी गुजरी क्योंकि योगेश ने मुझसे सेक्स किया ही नहीं और ऐसे ही सो गया। उस रात मुझे भी नींद आ गई क्योंकि मैं भी नहीं सो पाई थी पिछली रात को।
और ऐसे ही सेक्स का सिलसिला चल पड़ा। योगेश मुझसे ऐसे ही सेक्स करता था। नई शादी होने के बावजूद भी वो केवल हफ्ते में 2 या हद करो तो 3 बार ही इंटरकोर्स करता था। जहाँ तक सेक्स एन्जॉय करने की बात है, योगेश सेक्स को सिर्फ एक काम मानता था जो उसे हफ्ते में 2-3 बार करना है। वो तो बस हमेशा पैसा कमाने के लिए ही सोचता रहता था और उसने अपनी अभी तक की छोटी सी जिंदगी में काफी कमाया भी था। मतलब कि मैं हमेशा सेक्स के लिए भूखी रह जाती थी। मैं कभी नहीं झड़ी थी मेरे और योगेश के इंटरकोर्स में। कुल मिलाके मैं योगेश से सेक्सुअली बिल्कुल अनसैटिस्फाइड थी क्योंकि मुझे चाहिए था एक भरपूर सेक्स। दिन ऐसे ही कटने लगे।
मेरी शादी के 3 महीने बाद अचानक योगेश का ट्रांसफर एक बड़े शहर में हो गया और उन्हें वहाँ परमानेंटली रहना था। इसलिए मेरे सास-ससुर ने मुझे भी साथ ले जाने के लिए योगेश को बोला। योगेश भी मान गए। हम लोगों ने अपना सामान पैक किया और ट्रेन में बैठकर शहर आ गए।
शहर में योगेश को कंपनी की तरफ से बहुत बड़ा घर मिला था जो एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग की 8th फ्लोर पर था। घर वाकई बड़ा और शानदार था। वेल फर्निश्ड और वेल इक्विप्ड भी था। मतलब फ्लैट स्क्रीन टीवी, डबल डोर फ्रिज, हर कमरे में एसी लगा था। बहुत शानदार घर था वो।
हम लोग जैसे ही घर पहुँचे मैंने सामान वगैरह खोलके जमाना शुरू कर दिया। योगेश अपने ऑफिस रिपोर्टिंग करने चला गया। शाम के कब 7 बज गए पता ही नहीं चला। योगेश भी घर आ गया और अपने साथ बहुत सारा खाने का सामान, राशन सब कुछ लेकर आया और हाँ, खाना भी बाहर से पैक कराके लाया था। हमने फटाफट सारा बचा हुआ सामान जमाया और नहाके खाना खाने बैठ गए। खाना खत्म करने के बाद मैंने बर्तन साफ किए और हम दोनों हमारे बेडरूम में चले गए जिसका बेड बहुत शानदार था। उस पर करीब 1 फुट मोटा मैट्रेस बिछा था। उस घर की हर चीज शानदार थी। हमारे बेडरूम के अलावा उस घर में 3 और बड़े बेडरूम भी थे और सारे अटैच बाथरूम वाले।
सुबह-सुबह हम लोग करीब 9 बजे सोके उठे क्योंकि योगेश की छुट्टी थी। हम लोगों ने दिन भर घर सजाया और शाम को पिक्चर भी देखके आए। खाना भी बाहर खाया। मेरा मूड बहुत अच्छा था। रात को मैंने योगेश को सेक्स करने के लिए पहली बार बोला। योगेश मान गया और हम लोगों ने अपने कपड़े उतार दिए। बिल्कुल न्यूड होके मैंने पहली बार शुरुआत की और योगेश को चूमने लगी। और चेहरा चूमते-चूमते मैंने योगेश की गर्दन पर भी किस किया और अपने हाथों को उसकी छाती पर फेरा और धीरे-धीरे अपना एक हाथ योगेश के पेनिस पर हल्के-हल्के फिराना शुरू किया और योगेश के सीने को चूमते हुए उसके पेनिस पर एक किस किया।
तभी योगेश मुझसे दूर हो गया और बोला—
योगेश: पुन्नो, don’t do that. I hate this type of sex. मुझे ये सब कुछ नहीं पसंद है।
और अपने कपड़े पहनाने लगा। मैंने बड़ी दया से उसे देखा और बोला—
मैं: प्लीज योगेश, ऐसा मत करो मेरे साथ। मेरी बहुत इच्छा हो रही है।
इस पर योगेश बोला—
योगेश: ठीक है पर मेरे साथ ये सब नहीं करना।
मैंने बोला—
मैं: ठीक है पर अब प्लीज आ जाओ।
योगेश बेड पर आया और मुझे चोदने की तैयारी करने लगा। मैंने योगेश को धीरे से बोला—
मैं: योगेश, प्लीज मुझे किस तो करो।
योगेश ने मेरे गाल चूमे और गर्दन पर किस किया। फिर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी तो मैंने योगेश को बोला—
मैं: योगेश, मुझे हर जगह किस करो। मेरी पुसी को किस करो, उसे चाटो और चूसो।
इस पर योगेश पहले से भी ज्यादा भड़क गया और मुझे एक तमाचा मार दिया और बोला—
योगेश: तुम कितनी गंदी हो। मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता। अब चुपचाप अपने कपड़े पहनो और सो जाओ और मुझे भी सोने दो। मुझे सुबह ऑफिस जाना है।
और योगेश कपड़े पहनकर सो गया। मैं तो बिल्कुल अवाक रह गई योगेश की इस हरकत से। पूरे वाकिये के दौरान मैं बस अपने गाल पर हाथ लगाके तुकुर-तुकुर योगेश को देखती रही और रोती रही। योगेश के सो जाने के बाद मैं धीरे-धीरे बेड से उठी, अपने कपड़े पहने और बाथरूम में घुस गई और जोर-जोर से रोने लगी अपनी किस्मत पर। करीब 2 घंटों तक मैं बाथरूम में ही रही। फिर बाहर आकर बेड पर लेट गई। सुबह के करीब 4 बज रहे थे पर मेरी आँखों में नींद नहीं थी। अपनी किस्मत को कोसती हुई ना जाने कब मेरी आँख लग गई।
सुबह करीब 8 बजे मेरी नींद खुली तो देखा योगेश ऑफिस के लिए तैयार हो गया था। नहा-धोके बिल्कुल रेडी। मैं हड़बड़ाके उठी तो योगेश बोला—
योगेश: कोई बात नहीं, सोती रहो। और हाँ, कल की बात के लिए I am really sorry. मैं नाश्ता ऑफिस में कर लूँगा।
और कहकर ऑफिस चला गया। दिन भर मैं बार-बार रोती रही। शाम को करीब 7 बजे योगेश घर आ गया और साथ में 2 गुलाब के फूल भी लाया था और खाना भी पैक कराके लाया था। उसने आते ही मुस्कुराके मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं फिर से रोने लगी। तब उसने बोला—
योगेश: अच्छा बाबा, मुझे माफ कर दो। आज के बाद ऐसी हरकत नहीं होगी। पर एक बात है, मुझे इस तरह का सेक्स बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। तुम भी कभी ऐसी जिद मत करना।
मैंने अपना मन मार लिया और बोली—
मैं: हाँ, मुझसे भी गलती हो गई।
ये सुनते ही योगेश मुझसे लिपट गया और मुझे चुप कराने लगा। फिर थोड़ी देर बाद हमने खाना खाया और बेड पर लेट गए और योगेश मुझे चोदने की तैयारी करने लगा। मैंने योगेश से कहा—
मैं: प्लीज योगेश, आज नहीं। मेरी तबीयत ठीक नहीं है और फिर मैं पिछली पूरी रात नहीं सोई हूँ।
तो योगेश हँसकर बोला—
योगेश: ओके डियर, सो जाओ।
और वो उठके टीवी देखने चला गया। मैं चुपचाप अपने बिस्तर पर पड़ी रही। ना जाने कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
अगले दिन से बस इसी तरह जिंदगी चलती रही। करीब 15 दिनों के बाद मेरे सास का फोन मुझे आया। सारा हाल-चाल पूछने के बाद उन्होंने पूछा—
सास: योगेश है?
मैंने योगेश को आवाज लगाई। योगेश ने आकर माँ-बाबूजी से बात की और बोले—
योगेश: हाँ-हाँ बाबूजी, आप चिंता ना करें। हम सब सँभाल लेंगे।
फोन रखने के बाद योगेश ने मुझसे बोला—
योगेश: कल सुबह मेरे अंकल जो कि पेरिस में रहते हैं, अपने एक फ्रेंच दोस्त के साथ बिजनेस के सिलसिले में हमारे घर कुछ दिनों के लिए आ रहे हैं। उसके बाद वो यहाँ से सीधे फ्रांस चले जाएँगे।
हम लोग सुबह करीब 5 बजे उठ गए और योगेश उन्हें घर लाने के लिए तैयार हो गया और मुझे बोला—
योगेश: बढ़िया सा नाश्ता बना लेना।
मैंने हाँ बोला। फिर योगेश बोला—
योगेश: उनकी फ्लाइट करीब 6 बजे आ जाएगी और हम लोग घर करीब-करीब 7:30 बजे तक पहुँचेंगे। मैं आज ऑफिस से छुट्टी ले लूँगा और सारा दिन उन लोगों के साथ ही बिताऊँगा। ठीक है?
तो मैंने बोला—
मैं: बिल्कुल ठीक है।
योगेश घर से निकल गया उन्हें लेने के लिए और मैं नाश्ता बनाने में बिजी हो गई। करीब 7 बजे ही वो लोग घर आ गए। मैंने घर का दरवाजा खोला तो देखा योगेश सबसे आगे खड़ा था। उसके पीछे करीब 6 फुट का बेहद गोरा और अच्छे कद-काठी वाला करीब-करीब 45 साल का सक्श खड़ा था। उसने जीन और एक बहुत बढ़िया टी-शर्ट पहनी थी। उस जीन-टी-शर्ट में वो बहुत बढ़िया लग रहा था। मुझे देखकर वो मुस्कुराया। मैंने भी सर झुकाकर उसका वेलकम किया। उसके पीछे एक अंग्रेज खड़ा था जो बहुत मजबूत कद-काठी का था। मैंने उसका भी वेलकम किया और वो लोग घर के अंदर आ गए।
अंदर आकर योगेश ने मुझे उन लोगों से इंट्रोड्यूस किया। जीन-टी-शर्ट वाले ही अंकल थे और दूसरे वाले उनके फ्रेंच दोस्त। इंट्रोडक्शन के वक्त मैंने देखा था कि अंकल मुझे काफी गौर से देख रहे थे। शायद वो मेरी आँखों और चेहरे से कुछ पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। मैंने जल्दी से उनसे नजरें चुराकर किचन में चली गई और उन सबके लिए नाश्ता लगाने लगी।
नाश्ता करते-करते ही योगेश के लिए फोन आया और फोन रखने के बाद योगेश बोला—
योगेश: मुझे ऑफिस जाना ही पड़ेगा। कुछ खास मीटिंग।
अंकल बोले—
अंकल: तुम जाओ। हम लोग भी नहा-धोके कुछ देर आराम करते हैं। जब तक तुम वापस आ जाना। उसके बाद आगे का प्रोग्राम फिक्स करेंगे।
योगेश सुनके थोड़ा मुस्कुराया और फिर कमरे में जाकर तैयार होने लगा। पर मैं उन लोगों के साथ नाश्ता कर रही थी। जैसे ही मैं उठके योगेश के पास जाने लगी अंकल बोले—
अंकल: अरे तुम कहाँ जा रही हो? बच्चे को तैयार करने?
और कहकर हँसने लगे। मैं भी मुस्कुरा दी। 10 मिनट बाद योगेश ऑफिस के लिए निकल गया और मैं अंकल और उनके दोस्तों के साथ बातचीत करने लगी। अंकल काफी मजेदार नेचर के इंसान थे। काफी खुले विचारों वाले, बिंदास इंसान थे। बहुत हँसमुख, बेहद मैनर्स वाले और बहुत केयरिंग भी।
बातों-बातों में उन्होंने मुझसे पूछ लिया—
अंकल: और बातों क्या चल रहा है? How is my married life? etc. etc.
अब मैं क्या बताती अपनी मैरिज लाइफ के बारे में। मैं काफी उदास हो गई पर मैंने जाहिर नहीं होने दिया। थोड़ी देर बाद अंकल बोले—
अंकल: अरे भाई, हमारा कमरा तो दिखा दो ताकि हम नहा लें।
तभी मुझे ध्यान आया कि हम लोग अभी भी ड्रॉइंग रूम में ही बैठे हैं। मैं सॉरी बोलके उन लोगों के साथ अपने कमरे वाले बेडरूम में उन्हें ले गई। बेडरूम की सजावट देखकर अंकल बोले—
अंकल: वाह, क्या बढ़िया सजाया है तुमने कमरे को।
इस बार उनके फ्रेंच दोस्त भी बोले—
फ्रेंच दोस्त: It really nice.
मैंने दोनों को थैंक्स कहा और बाथरूम वगैरह बताके कमरे से बाहर आ गई और दिन के खाने की तैयारी करने लगी।
दिन के करीब 2 बजे अंकल अपने कमरे से बाहर निकले और सीधे किचन में आ गए और बोले—
अंकल: क्या बना रही हो पूनम बेटी?
मैं एकदम पीछे घूमी। उस समय मैं एक पतली लॉन्ग स्कर्ट और शर्ट पहन रखी थी। शर्ट भी काफी पतली थी पर उसके नीचे मैंने कमीज पहनी थी। स्कर्ट ब्राउन कलर की और शर्ट व्हाइट कलर का और कमीज ब्लैक कलर की थी। बस उसके अलावा मैंने कुछ नहीं पहना था क्योंकि मैं अक्सर घर में पैंटी और ब्रा नहीं पहनती थी।
मुझे देखते ही अंकल का मुँह खुला का खुला रह गया। फिर सँभालते हुए बोले—
अंकल: You are looking so nice in this dress.
कहने के बाद वो मुझे ऊपर से नीचे तक देखने लगे। मैं थोड़ा सँभली और हँसते हुए अंकल को थैंक्स बोला। अंकल ने भी मुस्कुराते हुए पूछा—
अंकल: क्या बना है खाने में?
इतनी देर में उनके फ्रेंच दोस्त भी आ गए किचन में और मुझे देखते ही बोले—
फ्रेंच दोस्त: Looking nice.
मैंने उनको भी थैंक्स बोला और उनके लिए खाना वगैरह डाइनिंग टेबल पर लगाने लगी। अंकल भी मेरे साथ मेरा हाथ बटा रहे थे। दो-तीन बार उनका हाथ बर्तन लेते हुए मेरे हाथ से टच हुआ। मुझे उनका हाथ बहुत गरम महसूस हुआ। उस समय मेरी नजर उनसे मिली तो पाया वो भी मुझे देख रहे थे और उनकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी।
फिर हम तीनों लोग साथ बैठकर खाना खाने लगे। अंकल और उनके फ्रेंड ने मेरे खाने की बहुत तारीफ की। खाना खत्म होने के बाद मैं उनके बर्तन उठाने लगी तो अंकल भी मेरे साथ बर्तन वगैरह उठाने लगे।
मैं: अरे आप ये क्या कर रहे हो?
अंकल: कोई बात नहीं। अगर मैं थोड़ा सा तुम्हारा हाथ बटा दूँ तो मर थोड़ी ना जाऊँगा।
मुझे मन ही मन बहुत अच्छा लगा। वो मेरे साथ किचन के सिंक तक आए और जूठे बर्तन सिंक में डालने लगे। मैंने भी सारे जूठे बर्तन सिंक में डाल दिए और बाकी बर्तन लाने के लिए जाने लगी तो बोले—
अंकल: तुम रुको, मैं लेकर आता हूँ।
मैं तो एकदम अंकल के मैनर्स से दंग रह गई। फिर मैं बर्तन साफ करने लगी। थोड़ी देर बाद अंकल बाकी बर्तनों के साथ सिंक के पास आए और मेरे पीछे से बर्तनों को सिंक में रखने लगे। सिंक एरिया थोड़ा छोटा था इसलिए वो बिल्कुल मेरे पीछे सट गए। उनका लंड बिल्कुल मेरी गाँड से टच होने लगा। मुझे ना जाने क्यों बहुत अच्छा लगा। मेरे बदन में सिहरन होने लगी। तभी वो मेरे पीछे हट गए और मेरे बगल में आ गए और मुझे गौर से देखने लगे। मैं काफी हड़बड़ा गई थी पर सर नीचे किए मैं बर्तन साफ कर रही थी।
अचानक अंकल बोले—
अंकल: अरे वो बर्तन तो वहीं रह गया।
और कहकर मेरे पीछे से अपने लंड को मेरी गाँड से रगड़ते हुए बर्तन उठाने लगे। मेरी हालत बहुत खराब होने लगी। मैं थोड़ा सा सँभली पर अंकल ने मुझे सिंक पर उल्टा चिपका दिया था। फिर बर्तन लेकर उन्होंने सिंक में डाल दिया और एक साफ कपड़ा लेकर धोए हुए बर्तनों को पोंछ के साइड में रखने लगे। मेरी हालत बहुत पतली हो चुकी थी। उनके इस टच से मेरे बदन में बहुत तेज बिजलीयाँ दौड़ने लगी थीं और अंकल लगातार मुझे देखे जा रहे थे और कुछ बोलते जा रहे थे पर मेरा ध्यान उन बातों की तरफ नहीं था। मेरा दिल धड़-धड़ करके धड़क रहा था।
थोड़ी देर बाद मैं वहाँ से हटी तो अंकल भी मेरे साथ ड्रॉइंग रूम में आकर बैठ गए। जब तक मैं काफी सँभल चुकी थी। मैंने उन्हें देखकर मुस्कुराई पर मैं उनसे आँखें नहीं मिला पा रही थी और उन्हें सब काम के लिए थैंक्स बोला तो बोले—
अंकल: कोई बात नहीं। It’s ok.
फिर हम जैसे ही सोफे पर बैठे मुझे कुछ गीलापन लगा अपनी चूत में। मैं फौरन उठकर अंकल से बोली—
मैं: मैं अभी आती हूँ।
और फिर अपने कमरे में चली गई। मैंने फौरन कमरे में पहुँचते ही अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाया और अपने एक हाथ की उंगली से चूत को चेक किया। चूत सच में गीली थी और काफी टाइट भी थी और उसमें हल्का-हल्का मीठा-मीठा दर्द भी हो रहा था। मैं समझ नहीं पा रही थी क्या हुआ। खैर, चलो मैंने अपने टॉवल से चूत को साफ किया और कपड़े ठीक-ठाक करके वापस ड्रॉइंग रूम में आ गई।
मैंने देखा अंकल अपने दोस्त से कुछ बात कर रहे हैं। मुझे देखते ही वो मुस्कुराए और बोले—
अंकल: आओ बैठो बैठो।
मैं बैठ गई। फिर हम लोग इधर-उधर की बातें करने लगे। तभी कॉल बेल बजी। मैं फौरन उठकर दरवाजे की तरफ गई। उस समय मेरी स्कर्ट मेरी उभरी हुई गाँड के अंदर घुस हुई थी और गाँड का पूरा नक्शा दिखा रही थी पर ध्यान उस पर नहीं गया। मैंने दरवाजा खोला तो योगेश बाहर खड़ा था। मैं दरवाजे से हटी तो योगेश अंदर आ गया और अंकल को देख मुस्कुराया और पूछा—
योगेश: आपने खाना खाया या नहीं?
अंकल: अरे नहीं-नहीं, हम सबने बहुत बढ़िया खाना खा लिया। और तुमने?
योगेश: नहीं, अभी खाता हूँ।
और योगेश बेडरूम में चला गया। मैं योगेश का खाना लगाने किचन में चली गई। योगेश को खाना खिलाके बर्तन साफ करके मैं सीधी रूम में चली गई और बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत को सहलाने लगी। आज बहुत दिनों बाद चूत ने पानी छोड़ा था और मीठा-मीठा दर्द भी हुआ था। अंकल के टच होने से ये हाल है सोचने लगी कि अगर अंकल का लंड मिल जाए तो कितना मजा आएगा। उसके बाद फिर मेरी चूत ने थोड़ा पानी छोड़ा। फिर मैंने अपने दिमाग को झटका दिया और सोचा मैं भी कितनी पागल हूँ जो ऐसा सोच रही हूँ।
तभी अचानक योगेश कमरे में आया और बोला—
योगेश: मैं इन लोगों को मार्केट लेकर जा रहा हूँ। तुम चलोगी?
मैं: नहीं-नहीं, आप लोग ही चले जाइए। मुझे शाम के खाने की तैयारी करनी है।
तभी योगेश बोला—
योगेश: पुन्नो, एक बात है। मुझे कल से 5 दिनों के लिए टूर पर जाना होगा। बहुत जरूरी है।
मैंने आश्चर्य से योगेश को देखा।
योगेश: प्लीज तुम गुस्सा मत करो। जाना जरूरी नहीं होता तो मैं कभी नहीं जाता। पर क्या करूँ, जरूरी है।
मैंने बोला—
मैं: ओके ठीक है। मैं पीछे से सब सँभाल लूँगी। आप जाइए।
योगेश: थैंक्स अ लॉट।
कहकर बाहर निकल गए।

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