दादाजी से चुदकर उनकी पत्नी बन गई 2

Dadaji ne apna lund mujhe dikhaya:- अगले दिन मैं अपनी सहेली के साथ कॉलेज गई तो मुझे कुछ दूर उन अंकल की गाड़ी दिखाई दी। और शाम को छुट्टी के समय मैं अपनी सहेली के साथ वापस आने के लिए कॉलेज के गेट से बाहर निकली, तब भी मुझे उन अंकल की गाड़ी दिखाई दी।

(yeh meri hindi sex story ka doosra part hai – pichla part nhi padha to padh le pahle) => दादाजी से चुदकर उनकी पत्नी बन गई 1

पर इस बार मेरी सहेली ने उन्हें देख लिया और उनके पास मुझे लेकर चली गई।

मेरी सहेली – अंकल, आप यहाँ?

अंकल – हाँ बेटा, मैं यहाँ किसी से मिलने आया था, पर वो अभी तक आया नहीं। शायद किसी काम में फँस गया होगा।

अंकल के मुँह से ये सुनकर कि वो आया नहीं, मैं अपने मन में मुस्कुराते हुए बोली — आया नहीं, ये कहिए आई नहीं!

अंकल – अरे, तुम दोनों घर जा रही हो? आओ, मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ गाड़ी में।

मेरी सहेली – अरे नहीं-नहीं अंकल, हम चले जाएँगे। आप क्यों तकलीफ़ कर रहे हैं!

मैं अपने मन में — हमें छोड़ने में इन्हें तकलीफ़! ये तो आए ही हैं हमें अपनी गाड़ी में घुमाने के लिए।

अंकल – अरे इसमें तकलीफ़ कैसी! अपनी गाड़ी होते आप लोग ऑटो से जाओ, अच्छा लगता है क्या? चलो आओ, मैं उधर ही जा रहा हूँ, तुम्हें छोड़ दूँगा।

मैंने तो बस चोरी-चोरी उन्हें ही देख रही थी और अंकल मुझे… ये बात मैंने और अंकल ने भी नोटिस की थी। हम दोनों की नज़रें आपस में टकरा रही थीं और हम आँखों ही आँखों में बातें कर रहे थे — यानी हम दोनों, अंकल और मेरा आँख-मटक्का चल रहा था।

मैं अपनी सहेली से — तुम चली जाओ, मैं पैदल चली जाऊँगी — तो अंकल तपाक से बोले, तुम पैदल क्यों चलोगी! मैं अब क्या कहती, मुझे भी उनके साथ गाड़ी में जाना पड़ा।

सच कहूँ, आज जीवन में पहली बार इतनी बड़ी और आलीशान गाड़ी में बैठी थी। अंकल ने मुझे और मेरी सहेली को हमारे घर के पास छोड़ दिया और मैं अपने घर और मेरी सहेली अपने घर चली गई।

अंकल ने मेरी दो-तीन पिक ली। मैंने देख भी लिया था अंकल को मेरी पिक लेते हुए, पर मैंने उन्हें कुछ नहीं बोला। क्योंकि मुझे इसमें बुरा कुछ नहीं लग रहा था।

आखिर वो मेरे आशिक़ ही तो अपनी माशूक़ की पिक ले रहा था। अकेले में बिस्तर पर माशूक़ न सही, उसकी पिक देखकर उसका आशिक़ अपना काम चला सकता है। भले ही माशूक़ न सही, माशूक़ की पिक तो होनी ही चाहिए ना!

(yahin se meri is hindi sex ka naya mod shuru hua)

अंकल ने मुझे और नीलू को हमारे घर से कुछ दूर पहले ही ड्रॉप किया। मैंने चलते-चलते पीछे मुड़कर देखा, अंकल अभी भी पीछे खड़े मुझे ही देख रहे थे।

मैंने आँखों के इशारे से मुस्कुराकर उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा, पर वो तब तक वहाँ से नहीं गए जब तक मैं उनकी आँखों से दूर नहीं हो गई।

मुझे यकीन था कि आज अंकल का हथियार ज़रूर गाड़ी में ही बग़ावत कर दिया होगा और वो गाड़ी में अपने लंड  को निकालकर मेरी पिक देखते हुए ज़रूर हिलाएँगे। खैर, अंकल अभी हिलाने के सिवा कुछ कर भी नहीं सकते थे।

उधर घर पर अंकल बेड पर मेरी तस्वीर निकालकर उसे ही देख रहे थे। मेरे अंग-अंग को अपनी नज़रों से ताड़ रहे थे। मैं पिक में से अंकल से बात करते हुए — क्या देख रहे हैं? इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ!

अंकल – हमसे पूछो मेरी जान कि तुम क्या चीज़ हो! कसम से तुमने आँखों से नींद चुरा ली। एक-एक पल तुम्हारे बिना काटना मुश्किल है। तुम्हारे बिना ये बिस्तर काटने को दौड़ता है। देखो तुम्हारी खूबसूरती ने इसका क्या हाल कर दिया है — अंडरवियर फाड़ने को है!

मैं – आँखों से इतने ज़ालिम होंगे आप, मैंने सोचा नहीं था! देखिए कैसे इस बेचारे पर ज़ुल्म कर रहे हैं, अपनी क़ैद में रखे हैं! ये बेचारा आज़ाद होने के लिए कैसे फड़फड़ा रहा है! चलिए, कीजिए इसे आज़ाद!

और अंकल ने अपना अंडरवियर उतार दिया।

और अपने लंड  को सहलाते — अब ये हमारी क़ैद में कहाँ रहेगा, अब तो ये इस हुस्न की देवी की क़ैद में रहेगा — और बेड पर लेटे अपनी कमर को चलाने लगे। मैं शर्माते हुए — हाय राम, इन्होंने तो प्रैक्टिस भी शुरू कर दी!

ऐसे ही 2-3 दिन मैंने नोटिस किया कि अंकल रोज़ छुट्टी के समय आते, पर मेरे साथ मेरी सहेली होती तो वो बात नहीं कर पाते। ऐसे ही एक हफ़्ता बीत गया।

और एक दिन मैं छुट्टी से आधा घंटा पहले कोई बहाना करके कॉलेज से निकल गई। उम्मीद के मुताबिक़ अंकल बाहर अपनी गाड़ी में बैठे हमारे आने की राह देख रहे थे।

और आज जैसे ही उन्होंने मुझे अकेली कॉलेज से आते देखा, उनकी तो जैसे लॉटरी लग गई! उनके चेहरे पर स्माइल आ गई, तो उनको देखकर मैं भी मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे चलने लगी।

और वो गाड़ी चलाते मेरे पास आए और बोले — मधु, तुम अकेली? तुम्हारी सहेली?

मैं – अंकल, मैं आज थोड़ा जल्दी आ गई।

अंकल ने आगे से गाड़ी का गेट खोलते हुए — आओ, मैं छोड़ देता हूँ।

मैं क्या कहती, चुपचाप मैं गाड़ी में आगे की सीट पर बैठ गई। इतनी आलीशान गाड़ी में आगे की सीट पर बैठकर मैं खुद अपने आप को शहज़ादी समझ रही थी।

मेरे बैठते ही अंकल ने गाड़ी दौड़ा दी। कुछ दूर चलते अंकल मुझसे बोले — मधु, आओ एक-एक कप कॉफ़ी पीते हैं।

मैं – अंकल, देर हो जाएगी।

अंकल – अरे नहीं होगी, आज जल्दी आई हो। चलो ना, बस 5 मिनट ही लगेंगे।

तो मैं इस बार उनको इनकार न कर सकी और अंकल ने गाड़ी शहर के सबसे बड़े रेस्टोरेंट की ओर बढ़ा दी। और कुछ ही देर में गाड़ी एक आलीशान रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी थी।

अंकल ने गाड़ी पार्क की और मुझे लेकर अंदर जाने लगे। तो गेट पर खड़े दरबान ने गेट खोला और अंकल और मुझे सैल्यूट किया, तो अंकल ने 500 रुपये की टिप उसे थमा दी। जैसे ही मैं अंकल के साथ अंदर आई…

(meri is hindi sex story ka sabse khoobsurat mod) — मुझे लगा कि मैं दूसरी दुनिया में आ गई। वो होटल क्या, एक महल जैसा था!

अंकल ने एक साइड टेबल की ओर इशारा करके उधर चले और तो अंकल ने बड़े जेंटलमैन तरीक़े से मेरी चेयर को थोड़ा पीछे करते मुझे वहाँ बिठाया।

और फिर मेन्यू मुझे थमाते बोले — लो, क्या खाओगी? मैंने वो खोला तो मेरे होश ही उड़ गए — उनकी एक डिश ही हमारे घर के एक महीने के राशन से भी ज़्यादा थी!

मैं क्या बोलती, तो अंकल मेरे मन की बात समझ गए और उन्होंने 2 कॉफ़ी और सैंडविच का ऑर्डर किया। आज जीवन में मैंने पहली बार इतनी महँगी कॉफ़ी पी थी।

कॉफ़ी पीने के बाद हम घर आ गए और जैसे ही अंकल ने मुझे घर से थोड़ा दूर छोड़ा और मेरे उतरते ही मुझसे पूछने लगे — कल मिलोगी? तो जवाब में मैं मुस्कुरा पड़ी और बोली — अंकल, आप कॉलेज के बाहर मत आना। वो थोड़ा आगे जाकर गली है — क्योंकि नीलू साथ होती है, इसलिए।

तो इसमें अंकल को क्या ऐतराज़ हो सकता था और वो बोले — मैं समझ गया।

अब अंकल अक्सर रोज़ मेरे कहने के मुताबिक़ आगे गली में मेरा वेट कर रहे होते और मैं रोज़ अपनी सहेली से बहाना करके अंकल के साथ, खुद उनकी गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर आगे बैठते ही बोलती — अब जल्दी चलिए, यहाँ से कोई देख लेगा!

और मैं उनके साथ घूमने चली जाती। शहर का ऐसा कोई महँगे से महँगा होटल नहीं होगा जहाँ मैं उनके साथ नहीं गई और वहाँ खाया-पिया नहीं।

मुझे अब घर जाने के लिए जल्दी भी नहीं थी क्योंकि मम्मी तो ऑफिस से शाम 6 बजे के बाद ही आती थीं और इस दौरान मैं अंकल के साथ घूमती, एन्जॉय करती। अंकल ने मेरे दिल में अपने लिए एक खास जगह बना ली थी।

यानी कि आग अब दोनों तरफ़ से बराबर लगी थी। न मुझे इस बात की चिंता थी कि जिनसे मैं नैन-मटक्का लड़ा रही हूँ वो मुझसे उम्र में कितने बड़े हैं, और शायद उन्हें भी।

एक बात थी — अंकल के साथ घूमते अभी तक अंकल ने मुझसे मेरा फ़ोन नंबर नहीं लिया था। अगर माँग भी लेते तो कहाँ से देती, मेरे पास कोई फ़ोन ही नहीं था।

पर एक दिन अंकल ने जाते समय मुझे फ़ोन करने को कहा तो मैंने कहा कि मेरे पास फ़ोन नहीं है, तो अंकल मुझे उसी समय एक बहुत बड़े मोबाइल फ़ोन के शोरूम में ले गए और मुझे एक बहुत बढ़िया iPhone दिलवाया।

अंकल मुझे घर से थोड़ा पहले ड्रॉप कर देते और मुझे तब तक देखते रहते जब तक मैं उनकी आँखों से दूर नहीं हो जाती। मैं चलते हुए मुस्कुराते हुए बस यही सोचती कि अंकल मुझे देख रहे हैं, तो इसलिए मैं थोड़ा और मटककर चलती जिससे मेरी बाहर को निकली गाँड़ एक अलग ही तरह से ऊपर-नीचे होती। खैर, हमारी गाँड़ तो मर्दों की कमज़ोरी है!

घर पर इतना महँगा iPhone, मैं मम्मी को क्या कहती कि कहाँ से आया, किसने दिया! मैंने iPhone घर में छुपाकर रख लिया। अब तो अक्सर अंकल मुझे शॉपिंग पर ले जाते, मुझे जींस-टॉप दिलवाते।

मुझे बाद में पता चला कि मैं रेस्टोरेंट-होटल में अंकल के साथ जाती थी, उन सबके अंकल मालिक थे। मैं तो… कोई भी लड़की अंकल के लाइफ़स्टाइल से उनकी दीवानी हो सकती थी।

एक दिन मैं अंकल के साथ ऐसे ही किसी रेस्टोरेंट में बैठी थी तो मेरे बारे में पूछने लगे, तो मैंने — मेरे इलावा घर में मेरी माँ हैं जो किसी ऑफिस में जॉब करती हैं।

और जब मैंने उनसे उनके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वो इस दुनिया में अकेले हैं — एक बेटा था जो बरसों पहले गुज़र चुका।

मैं – अंकल, आपने दोबारा शादी क्यों नहीं की?

अंकल – कोई मिली ही नहीं।

मैं – कैसी बातें कर रहे हैं अंकल, सब कुछ तो है आपके पास, कोई भी लड़की आपको इनकार कैसे कर सकती है!

अंकल – क्यों नहीं कर सकती? अच्छा ये बताओ, अगर मैं तुमसे कहूँ कि तुम मुझसे शादी करोगी, तो बोलो — करोगी तुम मुझसे शादी?

अंकल का इस तरह सीधे मुझे शादी के लिए प्रपोज़ करना — मैं तो जैसे शॉक्ड ही हो गई! मुझे तो जैसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूँ।

मुझे इस तरह चुप देखकर शायद अंकल को भी लगा कि उन्होंने कुछ ग़लत बोल दिया है। मैं चुपचाप वहाँ से उठी और बोली — अंकल, अब चलें? तो मेरी बात सुनकर अंकल भी चुपचाप उठ खड़े हुए और मेरे साथ चल दिए।

रास्ते में न तो मैंने कोई बात की और न अंकल ने। अंकल ने मुझे मेरे घर छोड़ दिया। सारी रात अंकल के बारे में सोचती रही।

आखिर मेरे दिल ने मुझसे कहा — मधु, क्या कमी है उनमें! हैंडसम, स्ट्रॉन्ग जी, पैसे वाले हैं, कितना ख्याल रखते हैं! और उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी शराफ़त थी।

कितने दिनों से मेरे साथ घूम रहे थे, मुझे होटलों में लेकर जा रहे थे — अगर वो चाहते तो मुझे किसी होटल में ले जाकर मुझे चोद डालते और शायद मैं उन्हें इनकार भी नहीं कर पाती।

पर नहीं, उन्होंने ऐसा करना तो दूर, मुझे चूमा या मेरा हाथ तक नहीं पकड़ा था। उनकी यही खूबी पर सच कहूँ तो मैं मर-मिटी थी। यही सोच मैं खुद ही मुस्कुराते हुए शर्मा रही थी।

एक तरह से मैंने दिल से उनका प्रपोज़ल एक्सेप्ट कर लिया।

मैं ये सोचने लगी कि कैसे मैं उनका सामना कर पाऊँगी, कैसे मैं उन्हें उनके प्रपोज़ल का जवाब दूँगी। अगली सुबह मैं अपनी सहेली के साथ कॉलेज गई और वापसी में मुझे अंकल की गाड़ी कहीं दिखाई नहीं दी तो काफ़ी उदास हो गई।

मुझे लगा कि मैंने ग़लती कर दी उन्हें नाराज़ करके। आप जानते हैं कि कोई लड़की अगर किसी के प्यार में पड़ जाए और उसका आशिक़ पहले जहाँ उससे रोज़ मिलता हो, अपने प्यार की बात पर अगर लड़की रूठ जाए और वो उससे मनाए नहीं और ऊपर से मिले नहीं, तो उस लड़की की क्या हालत होगी — ये आप अच्छे से समझ सकते हैं।

मेरा भी अब दिल नहीं लग रहा था, रास्ते पर मेरी नज़रें अंकल को ढूँढने में लगी रहतीं। घर पर मम्मी काम से थकी आतीं, उन्हें मेरी हालत कहाँ दिखाई देती।

भले ही मम्मी को मेरी हालत दिखाई न दे, पर मेरी सहेली नीलू — वो तो मुझे अच्छे से जानती थी। छुट्टी के समय मुझे कॉलेज में रोककर नीलू ने मुझसे पूछा — मधु, कौन है वो?

नीलू के इस सवाल पर मैं एकदम हैरान रह गई और फिर अपने आप को शांत करते हुए — ये क्या पूछ रही है!

नीलू – जो पूछ रही हूँ, सही पूछ रही हूँ।

मैं – यार, तू ऐसे ही शक कर रही है, कोई भी तो नहीं है।

नीलू – अच्छा, कोई नहीं है तो तेरी सूरत पर 12 क्यों बजे हैं!

मैं – यार वो क्या, रात को नींद अच्छे से नहीं आई।

नीलू – अच्छा, बात इतनी बढ़ गई है कि अब रातों को नींद नहीं आती! बता ना, कौन है वो जिसने मेरी सहेली की आँखों की नींद उड़ा दी?

मैं – यार कोई भी नहीं, तू खामखा शक कर रही है।

नीलू – शक नहीं, सही कह रही हूँ! बता, किसके प्यार में पड़ गई है?

जब नीलू ने बार-बार पूछा तो मैंने — अच्छा, बता देती हूँ, पहले तू कसम खा, किसी को नहीं बताएगी।

नीलू – कसम खाती हूँ कि किसी को नहीं बताऊँगी, चल अब बता।

मैं धीरे से – देख, किसी को बताना नहीं, वो अंकल हैं ना।

अंकल का सुनते ही नीलू चिल्लाते हुए – तू पागल हो गई है! जानती है ना कि वो उम्र में तुझसे कितने बड़े हैं?

मैं – जानती हूँ, पर प्यार में उम्र तो नहीं देखी जाती।

नीलू – तू पागल है! जानती है अगर उन्हें पता चलेगा तो कितना गुस्सा करेंगे?

मैं – कुछ नहीं होगा, वो जानते हैं।

नीलू – क्या?

मैं – हाँ।

नीलू – विश्वास नहीं हो रहा।

मैं – सच है, रोज़ तुझसे बहाना करके उनके साथ ही तो जाती थी।

नीलू – तो फिर?

मैं – तीन दिनों से वो आ नहीं रहे, गुस्सा हो गए हैं।

और फिर नीलू का हाथ पकड़ – नीलू, सच में उनसे बहुत प्यार करती हूँ, उनके बिना नहीं रह सकती।

नीलू – नाराज़ क्यों हैं? वो क्या… कहीं वो तुझे…

मैं नीलू का मतलब समझकर – अरे नहीं-नहीं, उन्होंने कभी मुझे हाथ भी नहीं लगाया।

नीलू – तो फिर नाराज़ क्यों?

मैं – वो… उन्होंने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया।

नीलू – तो बात शादी तक पहुँच गई! तूने क्या जवाब दिया?

मैं – यार उसमें क्या जवाब देती, उन्होंने एकदम से प्रपोज़ कर दिया।

नीलू – तो तू अब क्या चाहती है?

मैं शर्माकर – जो वो चाहते हों।

नीलू – अगर ऐसी बात है और तू जो चाहती है वो तुझे मिलकर रहेगा। देखना, आज ही तुझे जीजा जी मिलेंगे।

मैं – नीलू का अंकल को जीजा जी बोलना मुझे अच्छा लगा, पर मैं शर्माते-मुस्कुराते – क्या यार, तू भी!

नीलू – क्यों, इसमें ग़लत क्या है? तेरा पति मेरा जीजा ही हुआ ना! अब से मैं उन्हें अंकल नहीं, जीजा जी ही कहूँगी।

नीलू की बात सुन मैं मुस्कुराते हुए – जो तेरा दिल कहे वो कहना, बस पर पहले वो मिलें तो सही।

नीलू – तेरे पास जीजू का फ़ोन नंबर है क्या?

मैं – अरे हाँ, मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा! उन्हें फ़ोन ही कर लूँ।

नीलू – चल फ़ोन लगाकर उन्हें बुला।

ये सुनते ही मैंने उसी वक़्त अंकल को फ़ोन मिला दिया।

नीलू – स्पीकर पर कर।

अंकल – मधु, बोलो।

मैं – कहाँ हैं आप?

अंकल – ऑफिस में।

मैं – 3 दिनों से आए नहीं।

अंकल – कहती हो तो अभी आ जाता हूँ।

मैं – इतनी भी जल्दी नहीं कह रही हूँ! छुट्टी के बाद वहीं जहाँ मिलती थी, समझे? और फ़ोन रख दिया।

(yeh hindi sex kahani ka doosra part tha — teesra part jald aa raha hai!)

Next Part ==> दादाजी से चुदकर उनकी पत्नी बन गई 3

More Stories

3 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *