मेरी दीदी एक जवान हसीना – 1
Didi ki chudai ki hindi sex story:- हेलो दोस्तों मै एक स्टोरी लिख रही हूँ, जो मेरी और मेरे भाई की है। स्टोरी कभी मेरी भाई सुनाएगा कभी मै ओवर टेक कर लूँगी, मेंतलब स्टोरी दोनों बहन भाई के प्रॉस्पेक्ट्स से पढ़ने को मिलेगी। चलो शुरू करते है।
Didi ki chudai ki hindi sex story
मेरा नाम आमिर है और मै स्कूल मे पढ़ता हूं, हम दिल्ली मे रहते है घर मे मम्मी पापा और दीदी है, वह भी मेरे ही स्कूल मे पढ़ती है दीदी का नाम ज़ेबा खान है। ऐज 24 साल है और बहुत खूबसूरत, दूध जैसा कलर, बुहत ही अट्रैक्टिव फिगर्स- 34-28-38। स्किन बुहत ही चिकनी, सेक्सी लुकिंग गुलाबी होंठ, लाइट बरवां आंखें, कमर की हाफ तक आते हुए सिल्की बाल, नाज़ुक सा स्लिम बदन और बुहत ही हंसमुख और खुश मिज़ाज और बहुत ही सुपर ऐक्टिव लड़की है।
हर किसी के साथ और हर तरह के हालात मैं खुद को एडजस्ट कर लेनी वाली लड़की। जो देखता बस देखता रह जाता, जो बात करे वह उस भी इम्प्रेस हुए बिना ना रह सके। पापा की जॉब है मम्मी हाउस वाइफ है. मेरी क्लास मे 70% लड़को की गर्लफ्रेंड थी, ये तो दिल्ली मे नार्मल है क्लास मे मेरा एक दोस्त है विनय हम दोनों सिंगल है.
विनय – यार हमारी फ्यूचर गर्लफ्रेंड कहाँ होंगी अभी, क्या कर रही होंगी?
आमिर – पता नहीं! शायद अपने प्रेजेंट बॉयफ्रेंड को किश कर रही होंगी.
और हम दोनों एक दूसरे को देख कर ज़ोर से हंसने लगे, फिर कुछ डर्टी जोक्स के साथ हमारी बातें इसी टॉपिक पर आगे बढ़ने लगी.
विनय – आई डोन्ट ब्लेम हर।
आमिर – मेंतलब तुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, तेरी फ्यूचर वाइफ या गर्लफ्रेंड के एक्स से?
विनय – देख भाई हमारी क्लास मे 7-8 लड़कियां ही सिंगल है और उन सब को डेली पता है क्या क्या प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है, डेली 6-7 उलटे सीधे प्रोपोस, जो काम बॉयफ्रेंड इजी से करवा देता है उनको खुद मेंहनत करनी पड़ती है। पॉकेट मेंनी ब्रो, सब से इंपोरटेंट, आज कल लेडीज के शौक घर वालो के पैसा से पुरे हो नहीं सकते। सेक्स की डिजायार, मूवीज एंड आस पास इतने कपल है जो पब्लिक प्लेस मे ही शुरू हो जाते है हर जगह सेक्स है। तो थोड़ी बहुत रोमांटिक की इच्छा तो हर लड़की को रहती है हर वक़्त आज के माहौल के हिसाब से। पॉइंट तो और भी बहुत से है जिस की वजा से आज कल बॉयफ्रेंड बनाना बहुत जरुरी हो गया है, सोसाइटी में सर्वाइव करने के लिए।
विनय की बात सुन कर आमिर सोच मे डूब गया, यार बात तो सही कह रहा है ये! तो क्या ज़ेबा दीदी का भी कोई बॉयफ्रेंड होगा? नहीं नहीं मेरी दीदी ऐसी नहीं है।
मैंने अपने सोच को काबू करने की कोशिश की इतने मे विनय बोल उठा क्या सोचने लगा?
आमिर – कुछ नहीं यार बस सोच रहा हूं किसी तरह अपनी फ्यूचर वाइफ के बॉयफ्रेंड को कांटेक्ट कर के बोलूँ की भाई बस ऊपर ऊपर से करना जो भी कर रहे हो प्लीज.
और हम दोनों जोर से हंसने लगे. ऐसे ही फ्री पीरियड ओवर हो गया और नार्मल स्टडी स्टार्ट हो गई स्कूल मे. 2 बजे मै घर वापस आया माँ को हाय हीलो बोला और खाना खाने बैठा ही था की ज़ेबा दीदी भी आ गई। हम दोनों मेट्रो से आते थे पर अलग अलग अपने फ्रेंड्स के साथ आते और जाते भी अलग अलग ही थे स्कूल. आज पहली बार मैंने दीदी को सही से देखा, मेंतलब एक मेंर्द वाली नज़र से गन्दी नज़र से नहीं और दिल मे सोचा दीदी है तो बहुत खूबसूरत ऐसा नहीं हो सकता दीदी को प्रपोज नहीं आते हो.
इतने मे दीदी बोली – मै अभी चेंज कर के आती हूं मुझे भी बहुत तेज भूख लगी है इतना कहते हुवे दीदी अपने रूम मे चली गई.
मैंने दिल में सोचा क्या दीदी का भी कोई बॉयफ्रेंड है??? नहीं …नहीं… मेरी दीदी ऐसी नहीं है. उनकी परवरिश ऐसी नहीं है, पर फिर भी विनय ने स्कूल में जो बोला था वो भी एक सच है मुझे पता लगाना होगा आखिर सच क्या हैं।
अगले दिन दीदी स्कूल के लिए रहेडी हो गई। मैंने दीदी को देखा कितनी प्यारी लग रही थी वो। मुझे पता ही नहीं चला कब वो मेरे पास आ गई चल कर और ब्रेकफास्ट करने के लिए मेरे बगल वाली चेयर पर भी बैठ गई।
मुझे होश जब आया जब वो बोली भाई सब ठीक तो है ऐसे क्या देख रहे हो?
मैं चौक गया – वो भी बहुत गन्दा वाला, मुझे समझ नहीं आया क्या बोलू! उस एक सेकंड में मुझे लगा पूरा साल निकल गया हो। जैसे मेरे लिए टाइम ही रुक गया था, अब किसी को पुरे साल का टाइम मिल जाए सोचने के लिए तो वो एक अच्छे एक्सक्यूज़ ढूंढ ही लेता है।
मै बोला – दीदी कभी तो नहाकर स्कूल जाया करो, कैसे भंगन लग रही हो और सड़ा सा मुंह बना दिया।
दीदी का गुस्सा एक दम टॉप पर पहुँच गया वो बोली सब को अपने जैसा समझा है क्या? मै डेली 2 टाइम नहाती हूं नाकी तुम्हारे जैसी जो साल में 2 बार नहाते है।
तभी मम्मी की आवाज आई तुम दोनों बाद में लड़ना टाइम नहीं है जल्दी जल्दी ब्रेकफास्ट करो और स्कूल जाओ.
हमने फनी इशारे करते हुवे अपना ब्रेकफास्ट कम्पलीट कर और साथ में घर से निकले मगर दीदी पड़ोस वाले घर में अपनी बेस्ट फ्रेंड रिया को आवाज देते हुवे अंदर चली गई उसको बुलाने। रिया और दीदी बेस्ट फ्रेंड थे और साथ ही स्कूल जाते और आते थे। लंच तक सब नार्मल रहा, वही रोज़ की बातें और स्टडी. लंच टाइम में, मै और विनय स्कूल की कैंटीन चले गए कुछ खाने, हमने एक एक समोसा लिया फिर विनय बोला-
विनय – एक मिनट पीछे चलते है, कैंटीन के पीछे थोड़ी सी जगह थी जो चारो तरफ से क्लोज थी बस एक छोटा सा एंट्री पॉइंट था, लड़के वहाँ जा कर सिगरेट वगैरह पीते थे। स्कूल का हिडन ऑफिसियल स्मोकिंग एरिया था वो। मै और विनय वहाँ स्मोकिंग कर रहे थे, थोड़ी दूर 3 दोस्त भी स्मोकिंग करते हुवे आपस में बातें कर रहे थे, अपनी अपनी गर्लफ्रेंड की।
तभी उनमे से एक बोला भाई ज़ेबा का उद्घाटन कब कर रहे हो?
फिर वो लड़का बोला इतनी जल्दी क्या है? कही जल्दी बाजी के चक्कर में बात न बिगड़ जाए, साली को पटाने में 2 साल लगे है।
दूसरा लड़का बोला है भाई आराम आराम से गरम करो, पहले अच्छे से फिर जब कद्दू कटेगा तो सब में बटेगा और वो सब हंसने लगे.
वहाँ बाकि लोग भी थे सब अपनी अपनी बातो में लगे थे, विनय भी मुझसे कुछ बोल रहा था पर मेरा फोकस उन तीन लड़को की बातों की तरफ चला गया था पूरा। जब एक के मुह से ज़ेबा सुना मैंने क्या ये मेरी ज़ेबा दीदी की बात कर रहे है या कोई और ज़ेबा?
ये रिया पता नहीं कहाँ रह गयी – क्लास में बैठी ज़ेबा ने मन ही मन सोचा. ज़ेबा यानि ज़ेबा खान स्कूल में 12th क्लास की स्टूडेंट है और क्लास में बैठी अपनी सहेली रिया का वेट कर रही है, रिया उसे वाशरूम जा रही हूँ बोल के गयी थी और 15 मिनट हो चुके थे पर उसका अभी तक कोई अता पता नहीं था। ज़ेबा और रिया इसी साल 12 क्लास में पहुंची थी, वो दोनों स्कूल के लगभग सभी लड़कों के बीच बात चीत का विषय बनी हुई थी। हर कोई उन्हें अपना बनाने के लिए उनके आस पास मंडराता रहता था, पर ज़ेबा और रिया ने आज तक किसी भी मजनू को घास नहीं डाला था. वो इसलिए क्योकि उन दोनों को भगवान ने जम के सुन्दर रूप और कातिलाना हुस्न दिया था। वैसे तो स्कूल में इस साल उनकी क्लास में बहोत सी सुन्दर लड़कियां आयी थी, पर इन दोनों की बात ही कुछ और थी.
ज़ेबा जम के सुन्दर और अभी ताज़ी ताज़ी सोलहवें साल से बाहर आयी थी और उसकी जवानी भी कहर ही थी, क्योकि स्कूल के लड़के तो लड़के बल्कि कई टीचर्स भी उसकी पतली लचीली कमर के दीवाने हो गए थे। जब वो चलती थी तो उसके चुत्तड़ अपने आप ही ठुमके लगा देते थे, जिनको देख कर कई लड़के तो पेण्ट के ऊपर से ही अपना लंड मसल देते थे. जब वो चलती तो उसके चुत्तड़ एक एक ऊपर नीचे होते और जैसे पैंट में आग ही लगा देते। वैसे तो उसके बदन का निचला हिंसा ही अच्छे अच्छों के होश उडाने के लिए काफी था, पर जब कभी गलती से उसकी चुन्नी उसके टाइट चूचियों से हट जाती, तो देखने वाले की छाती में जैसे गोली ही लग जाती।
उसकी चुन्नी खिसक जाये बस इस इंतेज़ार में सारे स्कूल के रहते, क्योकि वो ज्यादातर अपने सिंधुरी आम चुन्नी के नीचे छुपा के रखती थी। उससे ऊपर नजर जाये, तो उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन और उसके ऊपर उसके मासूम पर सेक्सी चेहरे के तो क्या ही कहने.
जहां ज़ेबा 12 बोर की बंदूक की गोली की तरह लगती थी, वही उधर उसकी सहेली रिया जलती आग के बराबर थी। ना ज्यादा भारी और न ज्यादा हलकी, वो चाहे कुछ पहन ले, पर कोई भी कपडा उसके उभरे हुए सेक्सी अंगों को नहीं छुपा पाता। हर कोई उसके बाहर निकले हुए चूतड़ों को अपने हाथो में पकड़कर मसलना चाहता था, पर आज तक स्कूल में किसी की भी ऐसी किस्मत नहीं खुली थी की कोई उसके गद्देदार चूतड़ों पर अपना हक़ जमा सके.
ज़ेबा अभी भी रिया का क्लास में वेट कर रही थी, पर वो महारानी तो जैसे वह अपना घर ही बसा कर बैठ गयी थी. ज़ेबा बस उठ कर वाशरूम की तरफ जाने की सोच ही रही थी की तभी सामने से उसे उसकी क्लास की एक लड़की सिमरन जो की अब उसकी सहेली बन गयी थी, आती हुई दिखी. खूबसूरती के मामले में सिमरन भी, ज़ेबा और रिया से किसी हालत में कम नहीं थी। बस फर्क इतना था की जहा सिमरन और रिया थोड़े खुले विचार वाली लड़कियां थी। वही ज़ेबा थोड़े पुराने ख्यालों वाली लड़की थी, यही कारण था की स्कूल के बहोत कम लड़के ज़ेबा पर ट्राई मारते थे, क्योकि सभी जानते थे की वो इतनी आसानी से हाथ आने वाली लड़कियों में से नहीं है, पर सभी लड़के ये जरूर मानते थे की ज़ेबा जिस किसी की भी गोद में गिरेगी वो स्कूल का सबसे खुशनसीब लड़का होगा।
क्योकि ज़ेबा जितनी शरीफ और सुन्दर लड़की पुरे स्कूल में नहीं थी. सिमरन ने ज़ेबा को क्लास में बैठा देख कर उसकी तरफ ही रुख कर लिया और उसके पास आकर बोली
सिमरन – ज़ेबा तू अभी घर नहीं गयी क्या? स्कूल तो काफी देर पहले ओवर हो चुका है?
ज़ेबा ने थोड़े गुस्से में कहा – कहा यार ये रिया पता नहीं कहा मर गयी, मुझे वाशरूम का बोल कर गयी थी पर 20 मिनट हो चुके है अभी तक नहीं आयी, पता नहीं कहाँ रह गयी!!
कॉल कर पूछ ले कहा है वो- सिमरन ने कहा.
पर उस महारानी का मोबाइल तो यहाँ मेरे पास है – ज़ेबा ने मोबाइल दिखाते हुए जवाब दिया.
चल हम भी वाशरूम चलते है साथ में उसे भी देख लेंगे – सिमरन ने उठते हुए कहा.
वो दोनों उठ कर वाशरूम की तरफ चल दी, पर जब उन्होंने वहाँ देखा तो वो महारानी वहाँ भी नहीं थी.
पता नहीं ये लड़की कहा मर गयी यहाँ भी नहीं है – ज़ेबा ने परेशान होते हुए कहा.
कोई बात नहीं तू टेंशन न ले वो यही होगी चल बाहर चलकर देखते है – सिमरन ने ज़ेबा का हाथ पकड़ कर उसे बाहर ले जाते हुए कहा.
दोनों स्कूल के पार्क में गयी, तो उन्होंने देखा की रिया उनके एक क्लास के लड़के परम के साथ एक बेंच पर बैठ थी.
दोनों ने हैरान होकर एक दूसरे की तरफ देखा और ज़ेबा बोली – सिमरन देख महारानी को, मुझे बोली की मैं वाशरूम जा रही हूँ और खुद यहाँ बैठी है और वो भी लड़के के साथ.
ये पहली बार था जब उन्होंने रिया को किसी लड़के के साथ बैठे देखा था.
चल ज़ेबा पास जाकर देखते है रिया वह क्या कर रही है – सिमरन ने कहा.
वो दोनों जैसे ही उसके सामने जाकर खड़ी हुई रो रिया एक दम उठके खड़ी हो गयी. परम भी उन्हें देख कर खड़ा हो गया और ज़ेबा को देखते हुए बोला ‘हेलो ज़ेबा और अपना हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया. ज़ेबा ने झिझकते हुए अपना हाथ परम के हाथ में दे दिया और हैंडशेक करने लगी. परम ने अपने हाथ से उसका हाथ धीरे से दबा दिया और ज़ेबा को जैसे ही एहसास हुआ तो उसने अपना था छुड़ाते हुए मन ही मन कहा – कमीना बैठा रिया के साथ है और हाथ मेरा दबा रहा है.
फिर परम ने सिमरन के साथ भी ऐसा ही किया, उसने उसका भी हाथ दबाया और सिमरन ने भी अपना हाथ एक दम से पीछे की और खीछा और नजरे झुका ली.
ज़ेबा ने गुस्से में रिया की तरफ देखते हुए कहा – तू यहाँ क्या कर रही है मैं कबसे तेरा क्लास में वेट कर रही हूँ.
रिया ने अपने कान पकड़ते हुए कहा – सॉरी यार मैं वाशरूम से निकल कर क्लास में ही आ रही थी तभी परम ने मुझे आवाज लगा दी, इसे कोई बात करनी थी.
तो अब हो गयी बात या फिर मैं और सिमरन अकेले ही घर चली जाये?
ज़ेबा अभी भी गुस्से में थी एक तो रिया के कारण और दूसरा परम की हरकत के कारण. परम उनके स्कूल में फेमस स्टूडेंट था और सारा दिन बदमाशी और स्पोर्ट एक्टिविटी में घूमता रहता था.
ज़ेबा को गुस्सा हुए देख रिया के कहा – ठीक है बाबा चलते है बात कर ली मैंने.
उनको जाता देख परम ने रिया को आवाज देकर कहा – प्लीज यार रिया जो मैंने तुमसे कहा है वो काम जरूर करना.
रिया भी मुस्कुराते हुए पीछे की और मुड़ी और बोली – ठीक है मैं कोशिश करुँगी.
फिर उन सहेलियों के जाते हुए उनके मटकते चूतड़ों को देख कर परम ने अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से मसल दिया और मन ही मन बोला – साली तेरा गुस्सा तो एक दिन तुझे नंगी करके निकालूंगा.
उधर स्कूल से बाहर आते हूं ज़ेबा ने रिया से पूछा – क्या कह रहा था वो कमीना?
रिया ने हैरानी से ज़ेबा की तरफ देखा और बोली – तू उसे कमीना क्यों कह रही है?
कमीना न कहूं तो और क्या कहूं हाथ मिलाते टाइम कैसे मेरा हाथ दबा रहा था वो – ज़ेबा ने गुस्से में कहा.
सिमरन ने जैसे ही ज़ेबा के मुँह से वो बात सुनी तो वो भी अपने साथ हुए सेम इंसिडेंट को बताना चाहती थी पर फिर वो कुछ सोच कर चुप हो गयी, और वो तीनो सहेलिया मेट्रो स्टैंड पर खड़ी होकर अपने घर जाने वाली मेट्रो का वेट करने लगी।
ज़ेबा और रिया एक ही तरफ की थी, पर जबकि सिमरन उनसे आगे वाले स्टॉप में रहती थी पर वो तीनो एक ही मेट्रो में स्कूल आया करती थी, वो वेट कर रही थी के अचानक ज़ेबा ने रिया से पूछा..
पर वो कह क्या रहा था तेरे को?
तो रिया ने कहा – बता दूंगी मेरी जान एक बार घर तो चल.
सिमरन ने उसका कान पकड़कर के कहा – मतलब अब तू मेरे कारण नहीं बता रही कुछ?
रिया ने अपना कान छुड़वाते हुए कहा – नहीं यार ऐसे तो कोई बात नहीं है मैं तुझे कल जरूर बताउंगी पर आज मैं सिर्फ ज़ेबा को ही बताउंगी.
ज़ेबा या सिमरन आगे कुछ बोलती इससे पहले ही मेट्रो वहाँ आ गयी और वो तीनो सहेलियां मेट्रो में चढ़ गयी और मेट्रो उनके घर की और बढ़ने लगी. मेट्रो में काफी भीड़ होती थी, क्योकि ये टाइम ही रश वाला होता था. तो मेट्रो ज्यादातर पूरी तरह से भरी होती थी. वो तीनो मेट्रो में पिछले दरवाजे के पास एक साथ ही खड़ी हो गयी। कुछ लड़के मेट्रो में लगभग रोज ही होते थे और जिनका काम सिर्फ सुन्दर लड़कियों और आंटियों की मोटे मुलायम चूतड़ों पर हाथ फेरना होता था, उनमे से कुछ ज़ेबा और रिया के एरिया से, कुछ आगे किसी स्टेशन से और कुछ आस पास के एरिया के लड़के होते थे.
वो अक्सर इन तीनो खूबसूरत कलियों को मेट्रो में स्कूल से चढ़ता देखते थे, पर तीन सहेलिओं के एक साथ खड़े होने के कारन कभी इन पर अपना हाथ नहीं साफ़ कर पाए थे। अभी ये तीन एक साथ खड़ी थी और सबसे पीछे सिमरन खड़ी थी, रिया उसके पीछे एक लड़का खड़ा था जोकि उसी का क्लासमेट था और उसका नाम सुख था. सुख से उन तीनो लड़कियों को किसी तरह का कोई खतरा नहीं था, क्योकि वो एक शरीफ लड़का था और किसी लड़की को बेवजह तंग करना उसे पसंद नहीं था। वो तो बस चोर नजर से सिमरन को देख रहा था और ऐसा इसलिए था क्योकि वो उसे पहली नजर से पसंद करता था और वो क्लास में भी चोर नजर से उसे ही देखता रहता था।
वैसे सिमरन ने उसके बारे में ऐसा कभी कुछ मेंहसूस नहीं किया था. वो तीनो सहेलियां मेट्रो में खड़ी अपने स्टेशन के आने का इंतजार कर रही थी, तभी मेट्रो एक जगह रुकी और एक स्कूल के कुछ बच्चे मेट्रो में चढ़ गए, जिसके कारण मेट्रो में और भीड़ हो गयी और सभी थोड़ा और टाइट हो गए. सुंख अब सिमरन के बिलकुल करीब खड़ा था और पीछे जब भी थोड़ा बहोत धक्का आता तो वो सिमरन के साथ एक दम सट जाता। वो पूरी कोशिश कर रहा था की वो सिमरन के साथ न लगे पर पीछे आ रहे लगातार धक्को ने उसे सिमरन के साथ सटने पर मजबूर कर दिया.
न चाहते हुए भी उसका लंड अब सिमरन की नरम मुलायम गांड के साथ लग गया था और उसकी मुलायम गांड के सहलाव के कारण अब उसका लंड अपने कामुक रूप में आने लगा था। सुख अपनी पूरी जान लगा रहा था की वो सिमरन के साथ न लगे पर इतनी कोशिश के बाद भी वो असफल ही रहा. आखिरकार उसका लंड अपने पुरे सुरूर में आ गया और अब सिमरन को भी सुख का खड़ा लंड सलवार के ऊपर से ही आपकी दो चूतड़ों के बीच बनी दरार में महसूस होने लग गया। उसका लंड महसूस करते ही सिमरन घबरा गयी, पर अब वो कर भी क्या सकती थी, उसे बिलकुल यकीन नहीं हो रहा था की सुख उसके साथ ऐसा कर रहा है, क्योकि वो उसे बहोत शरीफ लड़का समझती थी.
तभी सिमरन ने अपने चेहरा पीछे की और घुमाया और उसने देखा की सुख ने अपनी आँखे बंद करके चेहरा दूसरी तरफ घुमाया हुआ था, सिमरन ने मन ही मन सोच हरामी पुरे मजे ले रहा है, जबकि असलियत में सुख सोच रहा था की ये इंसिडेंट उसे सिमरन की नजरो में गिरा देगा और इसी सोच में उसका स्टेशन आ गया। वो ज़ेबा और रिया के एरिया का ही था, इसलिए वो उनके साथ मेट्रो से नीचे उतर गया और इसके साथ साथ सिमरन ने भी आराम की सांस ली और अपने स्टेशन के आने का इंतजार करने लगी और सुख उदास होकर अपने घर ही तरफ चल पड़ा.
ज़ेबा ने मेट्रो से बाहर आ कर पूछा – बता रिया क्या बात बतानी थी तुझे?
रिया ने कहा – घर जाते हुए बता दूंगी तुझे पूरी बात, पहले एक चिप्स का पैकेट ले ले।
फिर वो दोनों अपने घर की तरफ निकल पड़ी.
रस्ते में ज़ेबा बोली – अब बता क्या बात थी?
रिया मुस्कुराते हुए बोली – परम तेरे साथ सेटिंग करना चाहता है, इसलिए वो मेरे से बात कर रहा था.
क्या? – ज़ेबा ने हैरानी से कहा.
हाँ. अब तू बता वैसे लड़का तो हैंडसम है – रिया उसे चढ़ाते हुए बोली.
अच्छा.. हैंडसम है तो तू ही सेटिंग करले उसके साथ।
रिया अपने बचाव में बोली – मुझे कहा होता तो मैं तो उसी वक्त उसे हाँ कह देती पर वो तो तेरे पे मरता है। रिया थोड़ा उदास सा चेहरा बनाते हुए बोली.
यार तुझे पता तो है वो किस तरह का लड़का है वो एक नंबर का लफंगा और बदमाश है – ज़ेबा ने कहा.
मुझे तो ऐसा बिलकुल नहीं लगा वो तो बड़ी प्यारी प्यारी बाते कर रहा था – रिया ने कहा.
हाँ पर स्कूल में सभी का यही मानना है – ज़ेबा ने जवाब दिया.
तो फिर अब बता की मैं उसे क्या जवाब दूँ – रिया ने पूछा.
अब मैं क्या कहु मुझे कुछ कुछ समझ नहीं आ रहा – ज़ेबा ने परेशान होते हुए कहा.
चल कोई बात नहीं आज रात अच्छी तरह से सोच ले फिर कल बता दियो मुझे – रिया ने सुझाव देते हुए कहा.
हम्म्म यही सही है चल अब सुबह मिलते है – और ज़ेबा अपने घर की तरफ चल पड़ी.
आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट मे..
