दो नए लौड़े और मेरी अकेली चूत

Do naye lund se chudai ki kahani:- दोस्तों मैं कविता आज फिर से अपनी चूत और गाँड दोनों खोलकर आपका स्वागत करती हूँ। मुझे अब सब प्यार से कविता रंडी ही कहते हैं, इसलिए अब से आप भी मुझे कविता रंडी या रंडी ही कहा करो। मुझे ये बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि अब मैं रंडी ही बन चुकी हूँ।

Do naye lund se chudai ki kahani

मैंने अपनी 27 की उम्र में ना जाने कितने लंड अपनी चूत और गाँड में ले लिए हैं। वैसे तो मैं शादीशुदा औरत हूँ। पर मेरा पति मुझे बहुत कम चोदता है। क्योंकि वो एक कंपनी में मार्केटिंग का काम करता है, इसलिए वो ज्यादातर बाहर रहता है।

घर में मैं 15-15 दिन अकेली रहती हूँ। इसलिए मेरा अकेलापन दूर करने के लिए घर पर मेरे कुछ दोस्त आते-जाते रहते हैं। वो मुझे मेरे ही घर पर चोदकर चले जाते हैं। और मुझसे पैसे और मेरी प्यास को शांत करके चले जाते हैं।

मैंने आपको पिछली बार अपनी एक चुदाई के बारे में बताया था। जिसमें मुझे एक ट्रक ड्राइवर ने चोदा था। उसका नाम राजू था। अगर आपको वो कहानी नहीं पढ़ी तो पहले उस कहानी को पढ़ लीजिए। आह्ह… आह्ह… क्या चुदाई करता है राजू मेरा यार।

दरअसल राजू एक ट्रक ड्राइवर है, इसलिए वो ज्यादातर नशे में ही रहता है। उस दिन भी उसने मुझे नशे में ही अपने ट्रक में करीब एक घंटे तक बिना रुके हुए चोदा था। उसकी सीट मेरी चूत के पानी से पूरी तरह भीग चुकी थी। मैं उसे खुद खुश होकर उसे अपना फोन नंबर देकर आई थी।

अभी पिछले वीक मैं उससे फिर से मिलकर आई हूँ। आज मैं आपको वही बताने जा रही हूँ। चलिए फिर जल्दी से कहानी शुरू करते हैं, अब तो मेरी चूत भी पानी निकलने लग गई है।

दरअसल उस रात मैं सोने की कोशिश कर रही थी। पर मेरी चूत और गाँड में लंड लेने की खुजली हो रही थी। इसलिए मुझे अच्छे से नींद नहीं आ रही थी। मेरा मन लंड लेने का हो रहा था। पर मुझे क्या पता था, कि मैं सच्चे दिल से भगवान से लंड माँग रही थी।

भगवान ने तभी मेरी सुन ली और मेरा फोन रिंग करने लग गया। मैंने अपना फोन देखा तो एक अनजान नंबर था। मैंने फोन उठाया और बोली—

कविता: हेलो।

वो फोन राजू ड्राइवर का था। वो बोला—

राजू: और मेरी रंडी कैसी है?

कविता: कौन बोल रहा है?

राजू: क्यों साली भूल गई अब अपने यार, बड़ी घोड़ी बनकर चुद रही थी मेरे आगे। पर फिर भी पूछ रही है, कौन बोल रहा हूँ।

कविता: बहन के लंडे मैं तो पता नहीं कितनों के आगे घोड़ी बन चुकी हूँ। तू बता कौन सा माँ का लौड़ा बोल रहा है।

राजू: आए हाय अगर तू मेरी वाइफ होती ना, बहनचोद सच में मजा आ जाता।

कविता: माँ के लंडे अब तू बताएगा तू कौन सा लौड़ा बोल रहा है।

राजू: मैं राजू तेरा यार ट्रक वाला।

कविता: हाय राजू मेरी जान आज कैसे याद आ गई तुझे मेरी?

राजू: तेरी नहीं तेरी चूत की याद आई है।

कविता: अच्छा आजा फिर मैं तो घर पर अकेली हूँ। आजा मेरी चूत मार ले माँ के लंडे आजा। कोई पैसा भी नहीं लूँगी तुझसे।

राजू: वो मुझे पता है, पर आज तुझे आना होगा चूत मरवाने के लिए मेरे पास।

कविता: बहन के लंड टाइम देख 11 बज चुके हैं।

राजू: तो क्या हुआ हाईवे पर आजा, मैं आ रहा हूँ।

कविता: मैं इस टाइम कैसे आ सकती हूँ।

राजू: बहन की लौड़ी बात सुन, तेरे घर में कार खड़ी है। कार लेकर आ और हाईवे के साथ पार्किंग है। वहाँ अपनी कार लगा और फिर आगे मेरा ट्रक खड़ा है वहाँ आजा बस।

कविता: ठीक है मैं आती हूँ 30-35 मिनट में।

राजू: ठीक है, आजा आज तुझे जन्नत की सैर करवाता हूँ।

कविता: देखते हैं लौडू चल अब फोन काट अपनी माँ को तैयार होने दे।

फिर राजू ने फोन कट कर दिया। जब मैं राजू से फोन पर बात कर रही थी तब मेरी चूत पूरी पानी-पानी हो गई थी। पता नहीं उसे चुदने की इतनी क्या जल्दी हो रही थी। फिर मैं उठी और दारू के दो पेग मारे और फिर एक रंडी की तरह तैयार होकर मैं घर से निकल ली।

मैंने कार पार्किंग में लगाई और फिर अपने यार राजू के ट्रक की तरफ चल पड़ी। उसका एक चेल्या जिसका नाम सोनू था, वो मुझे देखते ही उछलकर बोला—

सोनू: उस्ताद आ… गाड़ी स्टार्ट करो… आ गई रंडी।

फिर सोनू ने मुझे नीचे से पकड़कर ऊपर ट्रक में चढ़ा दिया। ट्रक के अंदर मेरा यार दारू में पूरा सेट होकर बैठा हुआ था। जैसे ही अंदर आई उसने मुझे पकड़ लिया और मेरे होठों को जोर-जोर से चूसने लग गया। मैंने भी उसके होठ चूसे और फिर वो बोला—

राजू: चल रंडी आज तुझे एक नई जगह लेकर चलता हूँ।

कविता: कहाँ?

राजू: जब मैं ट्रक चला रहा हूँ, तू मेरा लंड चूस और उसका पानी निकाल। सोनू पीछे से तेरी चूत मार लेगा इतना।

कविता: ठीक है।

फिर राजू ने ट्रक स्टार्ट किया और मैंने उसका लंड बाहर निकालकर चूसना शुरू कर दिया। मेरे पीछे सोनू अपना लंड मेरी चूत में डालकर मुझे चोद रहा था। कुछ ही देर में उन दोनों का पानी निकल गया, और फिर वो मुझे एक बड़े से ट्रांसपोर्ट ऑफिस के बाहर ले आया।

फिर हम तीनों बाहर आए और देखा कि बाहर दो हैंडसम आदमी खड़े थे। राजू उनके पास गया और हाथ मिलाकर बोला—

राजू: लो साहब जी आपकी रात को रंगीन करने के लिए ये रंडी आ गई है। अब इसके साथ जो मर्जी करो। सुन ये रंडी ये अपने मालिक हैं, तेरा काम खुश करना है।

कविता: साले भोसड़ी के ज्यादा दलाल बनने की कोशिश न कर, मैं अपनी मर्जी से चुदती हूँ। वैसे ये दोनों भी कम नहीं हैं चुदवाने के लिए। चल ठीक है अब तेरा काम हो गया तू निकल। हाँ आप दोनों का कोई नाम है? वैसे मेरा नाम कविता रंडी है।

शर्मा: मैं हूँ शर्मा और ये है मेरा दोस्त चौहान। साले ये तो बहुत गरम है राजू। ये अपनी पेमेंट और दफा हो जा यहाँ से। इसे सुबह हम अपने आप पहुँचा देंगे।

राजू अपने पैसे लेकर वहाँ से चला गया। फिर वो दोनों मुझे अंदर ले गए। अंदर काफी मस्त माहौल बना हुआ था, तभी चौहान बोला—

चौहान: कविता मैंने जितना सोचा था, तू उससे काफी ज्यादा सुंदर और सेक्सी है। आज की रात तू हमारी बनकर रह, हम दोनों से दोस्ती कर ले। तुझे कभी निराश नहीं होने देंगे।

कविता: ठीक है।

शर्मा: अच्छा अंदर जा और हमारे लिए दारू लेकर आ। आते हुए तेरे जिस्म पर कपड़े नहीं होने चाहिए याद रहे।

मैं अंदर गई और एक ट्रे में तीन गिलास, दारू की बोतल और चिप्स अपने हाथों में लिए बाहर आई। मेरे जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था। मैं जानबूझकर अपनी गाँड मटका-मटकाकर आ रही थी।

शर्मा: आए हाय मैं मर जाऊँ। इतनी सेक्सी औरत मैंने आज तक नहीं देखी। मेरी जान इधर आओ हमारे बीच में बैठो और आज हमें अपने हाथों से दारू पिलाओ।

कविता: मुझे कौन पिलाएगा?

वो दोनों चूत के प्यासे एकदम बोले—

शर्मा / चौहान: मैं… मैं…

फिर मैं हँसते हुए उन दोनों के बीच में बैठ गई। और दोनों के लिए पेग बनाने लग गई। वो दोनों मेरे दोनों बूब्स पकड़कर मसलने लग गए, और मुझे किस करने लग गए। मैंने दोनों को अपने हाथों से दारू पिलाई और फिर उन दोनों ने अपने-अपने लंड बाहर निकाल लिए।

मैं नीचे जमीन पर बैठकर उनके लंड को चूसने लग गई। शर्मा तो मेरा मुँह पकड़कर जोर-जोर से चोदने लग गया। उसका निकलने वाला था, इसलिए वो बोला—

शर्मा: मुँह में निकाल दूँ?

कविता: हम्म… हम्म…

फिर उसने लंड मुँह से निकाला और मेरे पूरे चेहरे और जिस्म पर अपने लंड की पिचकारी मारने लग गया। ऐसे ही चौहान ने भी मेरे जिस्म पर निकाल दिया। फिर वो दोनों मुझे पकड़कर बाथरूम में ले गए और बोले—

शर्मा: साली तूने ये पानी से साफ नहीं करना।

मैं गुस्से में बोली—

कविता: तो सालों क्या अपने मूत से साफ करूँ?

चौहान: हाँ पर अपने नहीं हम दोनों के मूत से।

ये कहते ही उन दोनों ने लंडों से मूत की धार निकालने लग गई। जिससे मैंने अपना मुँह और अपने जिस्म को साफ किया। फिर मैं भी उन दोनों को सीधा लिटाकर उन दोनों के मुँह पर अपना मूत किया।

उसके बाद हम दोनों के साथ नहाने लग गए। फिर बाहर आकर दारू पीई और दोनों मुझे घोड़ी बनाकर मेरी चूत और गाँड मारने लग गए। कुछ ही देर में उन दोनों का फिर से निकल गया।

फिर शर्मा फोन करके अपने एक और दोस्त को बुलाने लग गया। अब आगे हुआ क्या मेरा थ्रीसम सेक्स फोरसम सेक्स में बदला या नहीं, ये कविता रंडी आपको इस कहानी के अगले भाग में जरूर बताएगी। तब तक के लिए गुडबाय। सदा सेक्सी रहो।

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