मेरी कमसिन दीदी आवारा लड़के से फंसी – 1

Didi ki awara ladke se chudai story:- दीदी : नाम मेनूका, 22 साल की एकदम खूबसूरत है। अभी कॉलेज में 2nd ईयर में है। रंग एकदम गोरा और फिगर 34-26-34 है। एकदम स्वर्ग से आई अप्सरा लगती है। दिखने में बहुत हॉट और गोरी इतनी कि जैसे कश्मीर की गोरी लड़कियाँ।

मैं : मेरा नाम हर्ष है। साधारण सा लड़का हूँ। 18 साल का हूँ और अभी कॉलेज में 10 के पेपर देकर घर पे फ्री हूँ।

डैड : महेश कुमार एक कंपनी में अ सि मैनेजर की नौकरी करते हैं। उम्र 42 है।

मॉम : उम्र 35 है। खूबसूरत है। मेनूका दीदी इन्हीं पे गई है।

ये कहानी मेरी दीदी की किसी और से चुदाई के ऊपर बेस्ड होगी।

Didi ki awara ladke se chudai story

हमारे मोहल्ले का नाम है विश्वास नगर। हमारे मोहल्ले के पास एक ग्राउंड है जहाँ पर ज्यादातर लोग क्रिकेट खेलते हैं आसपास के मोहल्ले वाले। उसी खाली ग्राउंड के कुछ दूर जाके स्लम एरिया शुरू होता है। इस एरिया के लोग कुछ गुंडे टाइप के हैं, और पॉलिटिकल पावर वाले हैं। मैं घर पे फ्री रहता था तो कभी उस ग्राउंड में जाके क्रिकेट खेल लिया करता था।

एक दिन मैं उस ग्राउंड में क्रिकेट खेलने गया था। उस ग्राउंड के कुछ कोने पर कुछ लोग ताश (कार्ड्स) खेल रहे थे। कुछ समय बाद उनमें किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। वो कुछ तीन लोग थे। फिर उनमें से दो लोगों ने मिलकर एक को मारना शुरू कर दिया। वो हमसे कुछ दूर थे तो हमें नहीं पता था वो किस लिए उसको मार रहे थे, और वो लोग उम्र में हमसे कुछ बड़े और गुंडे टाइप के लग रहे थे तो किसी ने उनके लफड़े में पड़ने का ना सोचा। कुछ देर बाद वो एक बंदा जिसने मार खाई थी वहाँ से चला गया और बाकी के दो लोग वहीं बैठके बीड़ी पीने लगे (smocking करने लगे)।

कुछ देर बाद वो एक बंदा (जिसने मार खाई थी) अपने साथ दो लड़के लेकर आया। दोनों लड़के उम्र में 22-23 साल के लग रहे थे। फिट शरीर के, एकदम काले थे। उन दोनों के हाथ में बैट और हॉकी स्टिक्स थीं। उन्होंने आते ही पहले वाले दोनों लोगों पर अटैक करना शुरू कर दिया। कुछ देर मारने के बाद पहले वाले दोनों बंदे वहाँ से भाग गए। तब तक हमने भी खेलना बंद कर दिया था। मुझे अपने साथ वाले एक फ्रेंड से पता चला कि दोनों साथ के स्लम एरिया से हैं, एक का नाम है जय और दूसरे का नाम रघु। दोनों ही लड़ाई और झगड़े के लिए मशहूर थे और सुना था कि बहुत सी सुंदर लड़कियाँ पटाके चोदना इनका काम था।

दोनों बहुत सी लड़कियों को अपने जाल में फँसाते थे और फिर साथ में चुदाई भी करते थे उसके साथ। दोनों ही दिखने में एकदम काले और हब्शी जैसे दिखते थे। कुछ देर और वहाँ बैठने के बाद मैं घर आ गया। करीब 12:30 को मैं घर आया खाना खाने, घर में सिर्फ मम्मी ही थीं। पापा ऑफिस गए थे और दीदी कॉलेज गई थीं। वो कॉलेज से करीब 2 बजे आती थीं। वो एक्टिवा से कॉलेज जाती थीं। उस दिन ज्यादा कुछ और खास हुआ नहीं।

अगले दिन मैं जब ग्राउंड पे खेलने गया तो वो कल वाले लड़के (जय और रघु) मुझे ग्राउंड पर मेरे दोस्तों के साथ दिखे। मैं जब उनके नजदीक पहुँचा तो मुझे पता चला कि वो मेरे बाकी दोस्तों से उन्हें भी हमारे साथ खिलाने की बात कर रहे थे। हम बहुत कम लोग खेलते थे तो हमने उनको ओके बोल दिया। वो हमारे साथ खेल रहे थे तो बीच-बीच में बहुत गाली-गलौज भी कर रहे थे। उनकी पावर और उम्र हमसे कहीं ज्यादा थी तो हम उनको कुछ नहीं बोल पा रहे थे। उस दिन खेलने के बाद वो लोग हमारे साथ बात करने लगे कि हमलोग कहाँ से आते हैं, घर कहाँ है आदि। कुछ देर बाद जब सब अपने-अपने घर जाने को हुए तो उन्होंने मुझसे पूछा।

रघु: ओ हर्ष तू विश्वास नगर में रहता है ना?

मैं: हाँ भाई। (वो मुझसे बड़े थे तो मैं उन्हें भाई ही बुलाने लगा था)

रघु: अच्छा चल बैठ। हम वहीं जा रहे हैं तुझे छोड़ देते हैं।

मैं: नहीं भाई इसकी कोई जरूरत नहीं। मैं चला जाऊँगा।

रघु: चल बैठ जा साले। इतना भाव तो कोई लड़की भी नहीं खाती। वहीं जा रहे हैं छोड़ देते हैं। (ये उन्होंने बिल्कुल शांत स्वभाव में कहा था, लेकिन मुझे पता था इन्हें गुस्सा दिलाना मेरे लिए ही खतरा है तो मैं उनके साथ बैठ गया)। पहले जय बैठा फिर मैं और फिर रघु मेरे पीछे। रास्ते भर वो कोई न कोई लड़की को देखके उसके बारे में गलत कमेंट करते हुए जा रहे थे, जैसे उनके बूब्स के बारे में या गाँड के बारे में आदि। थोड़ी देर बाद मेरा घर आ गया। मैं बीच में बैठा था तो पहले रघु उतरा फिर मैं उतरा। जय अभी भी बाइक पे ही बैठा था। फिर मैंने उनको बाय बोला और घर के अंदर चला गया।

मैं डायरेक्ट अपने रूम में गया। मेरे रूम में एक खिड़की है। उस खिड़की के थ्रू मेरे को एक आवाज आई। वो आवाज स्कूटी की थी। जब मैंने खिड़की से बाहर देखा तो वो मेरी दीदी की स्कूटी की आवाज थी। वो आज जल्दी घर आ गई थीं। जब मैंने बाहर देखा तो पाया कि रघु और जय अभी भी बाहर खड़े थे और जैसे ही मेरी दीदी की स्कूटी रुकी और दीदी उतरीं वो तो जैसे सपने में ही चले गए। उन्होंने आज तक इतनी गोरी सुंदर और इतने मस्त फिगर वाली लड़की देखी भी नहीं होगी। उस टाइम दीदी ने टाइट जींस और ब्लू टॉप पहना हुआ था। टाइट टॉप में उनके दो दूध बिल्कुल शेप में थे और टाइट जींस में गाँड और भी सुंदर लग रही थी। अभी तो वो स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। उन्हें इस टाइम देखके तो किसी बुड्ढे का लंड भी खड़ा होकर पानी छोड़ दे।

अभी जय और रघु मेरी खूबसूरत दीदी को घूरे जा रहे थे और रघु ने तो एक बार अपना लंड भी मसल दिया था। उसके बाद दीदी घर के अंदर आ गईं। कुछ देर आपस में बात करने के बाद वो दोनों भी चले गए। कुछ देर बाद मम्मी ने भी मुझे खाने के लिए बुला लिया। जब मैं खाना खाने गया तो दीदी भी वहीं थीं। और आज वो सच में एक सेक्स बॉम्ब लग रही थीं। फेस से तो वो बिल्कुल इनोसेंट थीं और फिगर तो उनका माशाल्लाह बॉम्ब था। कुछ समय हल्की-फुल्की बात करने के बाद दीदी चली गईं अपने कमरे में और मैं भी खाना खाने के बाद अपने कमरे में आ गया।

अगले दिन जब मैं खेलने गया तो सब नॉर्मल था लेकिन इस बार रघु और जय मुझसे कुछ ज्यादा ही फ्रेंडली बात कर रहे थे। वो मुझसे बहुत नरमी से बात कर रहे थे और प्यार से भी। लेकिन वो मुझे तू कहके ही बुला रहे थे और बाकियों से वैसे ही बात कर रहे थे (थोड़ा रफ और गाली देकर)। कुछ देर खेलने के बाद उन्होंने मुझे फिर से घर छोड़ने के लिए लिफ्ट देने की बात की। मैं कर भी क्या सकता था तो मैं मान गया और वो मुझे घर छोड़ने आए। तब करीब 1:30 बज रहे थे। उन्होंने मुझे ड्रॉप किया और मैं घर के अंदर चला गया। जब मैं अपने कमरे में गया तो मैंने ऐसी ही अपनी खिड़की से बाहर देखा तो पाया कि वो दोनों अभी भी मेरे घर के बाहर कुछ दूर खड़े हैं।

मुझे शक हुआ कि ये मेरी दीदी को देखने के लिए ही खड़े हैं। लेकिन दीदी नहीं आईं तो वो कुछ देर रुके, फिर बाइक स्टार्ट करके वहाँ से चले गए। मुझे लगा वो चले गए लेकिन वो हमारे मोहल्ले में बाइक लेकर घूमने लगे, और कुछ देर बाद वहीं आकर रुक गए (मेरे घर सामने)। अब 2 बज गए थे और मेरी दीदी के आने का टाइम भी हो गया था। कुछ देर बाद एक्टिवा के हॉर्न की आवाज आई और मेरी दीदी भी आ गईं। जय और रघु तब बहुत खुश लग रहे थे। दीदी ने आज सलवार सूट पहना था वो भी फिटिंग वाला।

दीदी के बॉडी के कसाव इतने मस्त लग रहे थे जैसे वो सलवार सूट उन्हीं के लिए बना हो। सूट की फिटिंग इतनी टाइट कि मम्मों के शेप का पूरा पता चल जाए, उसके नीचे फ्लैट पेट और उभरी हुई गाँड किसी का भी लैंड खड़ा करने के लिए काफी थी। वो लाल रंग के सलवार सूट में एकदम अप्सरा लग रही थीं। वो स्कूटी से उतरीं और घर के अंदर आ गईं। जब वो घर के अंदर की ओर आ रही थीं तो उनकी पीठ जय और रघु की तरफ थी। वो मेरी मासूम सी दीदी की मस्त गाँड के हिलन को देखने लगे और आपस में कुछ बात की, अपनी घड़ी में टाइम देखा आगे चले गए।

अगले दिन जब मैं खेलने गया तो वो दोनों नहीं आए थे, मुझे थोड़ा शक हुआ, कुछ देर खेलने के बाद मैं घर चला गया। आज मैं जल्दी घर आया था। कुछ देर खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया। मुझे अंदर ही अंदर पता था कि वो आज भी मेरी दीदी को देखने जरूर आएंगे सो मैं अपनी दीदी के आने का इंतजार करने लगा। जब मेरी दीदी के आने का टाइम हुआ तो मैं खिड़की से देखने लगा, कुछ देर बाद दीदी भी आ गईं एक्टिवा से अपनी और कुछ देर बाद बाइक से वो दोनों भी उनके पीछे से आए और आगे चले गए।

दीदी घर के अंदर आईं, खाना खाया और अपने कमरे में चली गईं। अगले दिन भी सेम ही हुआ। मैंने जितना सुना था उनके बारे में कि वो मासूम लड़कियों को अपने जाल में फँसाके उनका फायदा उठाते हैं और मिलकर उनके साथ सेक्स करते हैं, बहुत बुरी तरह चोदते हैं दोनों मिलकर। हमारे पास के मोहल्ले की एक लड़की जो अभी कॉलेज में ही उनके जाल में फँसी थी, उसको उन्होंने प्यार के जाल में फँसाकर उसका वीडियो भी बनाया था और उसको कई लड़कों से भी चुदवाया था। बड़ी मुश्किल से वो लड़की उनके चंगुल से बच पाई थी, वो भी उसकी फैमिली ने जब उसे यहाँ से दूर पढ़ाई के लिए भेज दिया और फिर उसकी शादी करवा दी। अब बैक टू प्रेजेंट।

अगले दिन मैं जल्दी उठा बस ये जानने के लिए कि वो दोनों सिर्फ मेरी दीदी के पीछे दोपहर को ही आते हैं या सुबह भी पीछा करते हैं, तो मैं सुबह उठा और दीदी के जाने के टाइम अपने रूम की खिड़की के बाहर देखा तो कोई नहीं था। मुझे लगा वो दोनों सिर्फ शाम को ही पीछा करते होंगे लेकिन मैं गलत साबित हुआ जब दीदी घर से बाहर अपनी एक्टिवा लेकर निकलीं तो कुछ देर बाद वो भी उनको फॉलो करने लगे। मुझे अब तक तो पता चल गया था कि ये मेरी दीदी को पटाने की सोच रहे हैं, और मैं ये नहीं चाहता था.

लेकिन मैं मजबूर था क्योंकि मेरे में इतना दम नहीं था कि मैं उनको रोक सकूँ या उनपे ये इल्जाम लगा सकूँ कि वो मेरी दीदी को छेड़ रहे हैं (क्योंकि वो मेरी दीदी को छेड़ नहीं रहे थे बस फॉलो कर रहे थे), या फिर मैं उन्हें मना कर सकूँ क्योंकि वो मुझसे और मेरी फैमिली से बहुत पावरफुल लोग हैं, उनके पास पॉलिटिकल पावर है और हमारे पास कुछ भी नहीं है वैसा। उस दिन मैं खेलने नहीं गया और घर पर ही बैठा रहा, जब दीदी के घर आने का टाइम हुआ तो मैं फिर खिड़की के पास जाके देखने लगा। आज भी सेम हुआ दीदी आईं और उनके पीछे वो भी फॉलो करते हुए आए (शायद दीदी को पता ना हो या वो इग्नोर करती हों क्योंकि लड़कियों के लिए ये आम बात होती है)।

फिर मैंने सोचा क्यों ना कल से मैं भी इन्हें फॉलो करूँ तो मैं इनका प्लान पता कर सकूँ और अपनी प्यारी और भोली दीदी को बचा सकूँ इन कामिनों से। अपने प्लान को अंजाम देने के लिए मुझे चाहिए थी एक व्हीकल, सो मैं अपने एक दोस्त के पास गया वो नजदीक में ही पीजी लेकर रहता था और उसके पास एक बाइक भी थी, मेरी उससे जान-पहचान क्रिकेट खेलते हुए ही हुई थी और जान-पहचान भी बहुत अच्छी हो गई थी तो मैं उसके पास गया और बोला भाई मुझे तेरी बाइक और हेलमेट कुछ दिनों के लिए सुबह के टाइम चाहिए, तो उसने मुझे ओके कह दिया। फिर मैं अगले दिन का इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे अगले दिन से जासूसी करनी थी।

अगले दिन मैं दीदी के कॉलेज निकलने के कुछ 10 मिनट पहले निकल गया और घर से कुछ चौक तक आकर रुक गया। मैंने घर पे पहले ही बोल दिया था कि मैं खेलने जा रहा हूँ और मुझे कुछ टाइम लगेगा आने में। कुछ देर बाद दीदी भी घर से अपनी एक्टिवा पे निकलीं और विदिन अ मिनट में उन्होंने मुझे क्रॉस किया (वो मुझे नहीं देख पाईं क्योंकि मैंने हेलमेट पहन रखा था), और उसके ठीक बाद वो दोनों भी बाइक से निकले, मैं भी उनका पीछा करने लगा कि ये लोग कहाँ तक पीछा करते हैं मेरी दीदी का। कुछ देर बाद दीदी का कॉलेज आ गया और दीदी कॉलेज के गेट से अंदर चली गईं।

(यहाँ मैं बता दूँ कि दीदी का कॉलेज बहुत बड़ा था और वहाँ 3 से 4 गेट थे एंटर होने के लिए और कोई ज्यादा चेकिंग नहीं थी एंट्री के टाइम)। दीदी के अंदर जाते ही रघु और जय कॉलेज के गेट से ही मुड़ गए और मैं भी मुड़ गया। उसके बाद मैं जिसकी बाइक थी उसको बाइक वापस देकर अपने घर आ गया। बाकी कुछ खास नहीं हुआ उस दिन। अगले दिन भी मैं तैयार था और सेम पिछले दिन की तरह मैं पहले ही दीदी के निकलने से पहले निकल गया घर से और वहीं चौक पे जाकर रुक गया। आज भी दीदी आईं और कुछ देर बाद वो भी आए लेकिन आज वो दो न होकर तीन थे, मुझे कुछ अजीब लगा, मैंने सोचा ये क्या करना चाहते हैं जो आज तीन आए हैं।

फिर मैंने भी उनका पीछा करना शुरू किया। जब दीदी कॉलेज पहुँचके गेट के अंदर दाखिल हुईं तो वो तीनों वहीं बाहर रुक गए। जब मैंने ध्यान से देखा तो मुझे पता चला कि ये तीसरा तो वो लड़का है जिसका उस दिन पार्क में झगड़ा हो गया था और उसके बाद ये ही रघु और जय को बुलाके लाया था फाइट करने। पर ये यहाँ क्या कर रहा है मुझे नहीं पता लग रहा था। उनमें कुछ बात हुई, उन्होंने घड़ी में टाइम देखा और कॉलेज के गेट की आगे वाली सिंगल रोड की तरफ इशारा किया। उस तीसरे लड़के ने हाँ में जवाब दिया और वो तीनों फिर चले गए। मैंने भी घर जाने की सोची और रास्ते भर सोचता रहा कि वो क्या प्लान कर रहे होंगे, पर मुझे पता नहीं चल रहा था क्या।

सो जब मैं घर आया तो पता चला शायद वो मेरी दीदी के घर आने के टाइम कुछ बड़ा करने की सोच रहे हों तो मैंने पता लगाने के लिए मेरी दीदी की कॉलेज खत्म होने के टाइम वहाँ जाकर पता लगाने का सोचा। मेरी दीदी के कॉलेज खत्म होने के कुछ टाइम पहले मैं वहाँ पहुँच गया और सामने की गली में छिपकर सब देखने लगा। कुछ टाइम बाद रघु और जय बाइक पे आए थे वो तीसरा बंदा भी उनके साथ आया था लेकिन अपनी बाइक लेकर। थोड़ी देर बाद दीदी के कॉलेज की छुट्टी हुई और वो बाहर अपनी एक्टिवा से आईं और घर की ओर चल दीं। कुछ दूर जाकर हमारे घर जाने के लिए एक सिंगल हाईवे टाइप रोड जाती है, वहाँ पर ज्यादातर लॉन्ग रूट वाले ट्रक ही चलते हैं और दोपहर को वो रोड सुनसान सी ही होती है।

जब दीदी उस रोड पर जा रही थीं तो वो लड़का और जय वहाँ से दीदी के बिल्कुल बगल से ओवरटेक करते हुए चले गए जिससे मेरी दीदी का बैलेंस बिगड़ा और वो रोड पर एक्टिवा के साथ गिर गईं, उन्हें थोड़ी चोट भी आई (हाथ और पैर थोड़े छिल गए थे) पर बच गईं मेरी दीदी। मैं उनकी हेल्प करने जा ही रहा था कि मैंने देखा रघु वहाँ पहुँचा, अपनी बाइक रोकी और मेरी दीदी को उठाया और स्कूटी भी उठाई और साइड में स्टैंड लगाके खड़ी दी। मैं भी उनके पास जाना चाहता था हेल्प के लिए लेकिन क्या कहता कि मैं इस टाइम यहाँ क्या कर रहा हूँ सो मैं नहीं गया।

उधर उसने दीदी को उठाया और कुछ पूछा। मैं बहुत दूर खड़ा था तो मुझे उनकी बात सुनाई नहीं दे रही थी सो मैं वहीं खड़ा होकर उस काले हब्शी जैसे को मेरी परी सी दीदी से बात करता हुआ देखता रहा। कुछ देर बाद उसने अपनी बाइक से फर्स्ट एड निकाला और दीदी की मरहम-पट्टी की। उसके बाद उनकी हल्की-फुल्की बात हुई। फिर उसके बाद दीदी अपनी एक्टिवा के पास आईं तो देखा कि एक्टिवा के नीचे ऑयल लीकेज कर रहा है और वो परेशान हो गईं। उसके बाद रघु ने शायद उनको घर छोड़ने की बात कही पर दीदी ने मना करके अपनी स्कूटी की तरफ इशारा किया तो उसने अपनी बाइक कुछ देर वहीं झाड़ी के पीछे खड़ी की और किसी को फोन किया.

कुछ देर बात की फिर दीदी की स्कूटी को घसीटता हुआ दीदी के साथ चलने लगा। मैं भी उनके पीछे जाना चाहता था लेकिन वो मुझे देख लेते सो मैं वहीं झाड़ियों के पीछे छुपा रहा। वो कुछ देर में बहुत आगे चले गए। कुछ देर बाद जय और वो लड़का वापस आए, उन्हें देखकर मैं फिर से झाड़ी के पीछे छुप गया। वो आए और जय ने एक चाबी अपनी जेब से निकाली (जो शायद बाइक की डुप्लीकेट चाबी थी), और बाइक चलाके उस लड़के के साथ निकल गया। मैं भी फिर उस दिशा की ओर बाइक लेकर स्लोली चल पड़ा जिस ओर रघु और मेनूका दीदी गए थे।

आगे क्या हुआ पढिए अगले भाग मे

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