Bhai bahan ki chudai kamukta story:- हैलो दोस्तों, जैसा कि आपने पिछले पार्ट मे पढ़ कि मै अपने भी का लंड अपनी चूत मे ले चुकी थी लेकिन मम्मी को ये बात पता नहीं थी। मम्मी बस इतना जानती थी कि मै भी के सामने नंगी हो जाती हूँ और कपड़े बदल लेती हूँ। अब पढिए आगे-
Part 9 यहाँ पढ़ें => मुझे अपने भाई से चुदना है – 9
Bhai bahan ki chudai kamukta story
अगले दिन की सुबह जैसे बिलकुल नए दिन की शुरुआत थी. मेरा और मेरे भाई का अब एक नया रिश्ता बन गया था. 4-5 दिन और निकल गए और इस बीच हमने 7-8 बार सेक्स किया. और हर बार वो मेरे अंदर ही अपना माल डालता था. मुझे भी बहुत अच्छा लगता था जब मेरे भाई की गरम मलाई मेरे चूत में गिर के चूत भर जाती थी. अब चूत में दर्द भी नहीं हो रहा था. एक सुबह मैंने महसूस किया की अब और भी फ्री लग रहा था. वैसे रोज़ ही भाई के सामने नंगी रहती थी. पर अब मानो जैसे थोड़ा बहुत जो हिचकिचाहट थी वो भी जा चुकी थी. मुझे नंगे रहना और भी अच्छा लगने लगा. यहाँ तक की पैंटी पहनने से भी चिढ होने लगी.
मेरे प्लान के हिसाब से ये सब धीरे-धीरे करना था. पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मन करता था सब कुछ उतार दू कोई कुछ भी बोले. हमेशा की तरह नहाते वक़्त मैंने भाई से टॉवल माँगा. ऐसे तो अपने बूब्स को हाथो से ढक के बाहर आती थी. पर आज पूरी तरह से खुले बूब्स के साथ बाहर आ गयी. मम्मी ने भी देखा पर अब उनको भी आम बात लगने लगी. मैंने इसी मौके पर अगला स्टेप ले लिया. मैं ऐसे ही मिनी स्कर्ट पहनती थी जिससे झुकने पर मेरी गांड आधी दिख जाती थी. अब मैंने स्कर्ट को और भी कमर के ऊपर से पहन लिया ताकि सामने से चूत भी दिखे. स्लीवलेस टॉप भी वैसा पहना जो जब तब कंधे से उतर आएगी. हम दोनों नाश्ते के लिए टेबल पर बैठे.
मम्मी बार-बार मेरी तरफ देख रही थी. थोड़ी देर में लेफ्ट कंधे से टॉप की पट्टी उतर गयी और लेफ्ट बूब आधा दिखने लगा. मैंने ठीक नहीं किया और खाती रही. जैसे ही मम्मी की नज़र हटी मैंने राइट वाली पट्टी भी उतार दी. इससे मेरा टॉप ऑलमोस्ट मेरी छाती से उतर गयी और बूब्स आधे से ज़्यादा दिखने लगे. बस थोड़ी और नीचे होती तो निप्पल्स दिखने लगते. मम्मी से बर्दाश्त नहीं हुआ.
मम्मी: रूपाली थोड़ा तो ठीक कर ले ड्रेस.
मैं: क्या करू बार-बार उतर रहा है.
मम्मी समझ गयी की मैं नहीं सुनने वाली. मेरा भाई मुँह छुपा के हंसने लगा.
मम्मी: तू ज़्यादा मत हंस! बहुत ज़्यादा शैतान हो गए हो तो तुम लोग.
थोड़ी देर बाद मैंने भाई को इशारा किया और कहा नीचे देखने को. उसने किसी बहाने से टेबल के नीचे देखा तो मैं स्कर्ट धीरे-धीरे नीचे खिसकाने लगी. मम्मी वहीँ बैठी थी पर उनको कोई आईडिया नहीं था इसका. फाइनली एक दम से मेरी स्कर्ट उतर के नीचे गिर गयी. भाई ऊपर आके मुस्कुराने लगा.
मम्मी: फिर क्या हुआ तुझे? पता नहीं क्या चल रहा है तुम लोग का.
ये कह कर मम्मी उठ के कुछ पल के लिए किचन में चली गयी. मैंने थोड़ा नोटिस किया की मम्मी को टाइम लगने वाला था. इसी मौके में मैंने बाकी का टॉप कमर तक उतार दिया और बूब्स बाहर निकाल दिए. मैं पहली बार डाइनिंग टेबल पे नंगी बैठी थी और मम्मी बिलकुल सामने थी. मैंने भाई की और देखा तो वो मेरे गोरे बूब्स को घूरने लगा. मैं भी गरम होने लगी और उसे पास आने को इशारा किया. उसने मम्मी की और देखा और तुरंत चेयर छोड़ के पास आया और मेरे बूब्स को पकड़ के चूसने लगा.
थोड़ी देर में उसने बूब्स छोड़ा और नीचे बैठ गया. बैठ के उसने मेरी जांघें फैला दी. मैं समझ गयी और उसकी और घूम गयी. घुमते ही भाई मेरी चूत पर टूट पड़ा. मैंने भी एक-दम से उसका सर पकड़ के चूत में घुसा रखा था. आरव चाटता चबाता रहा. मैं पागल होने लगी. मेरी साँसे चढ़ने लगी. मेरे मुँह से चीख निकल ही रही थी की मैंने अपना मुँह दबा लिया. चाटते हुए भाई मेरे छेद में जीभ डालने लगा. मैं एक-दम से उछल पड़ी. मैं पागल हो ही रही थी की भाई ने दो उँगलियाँ मेरी चूत में अंदर तक डाल दी.
आअह्ह्ह्ह क्या फीलिंग थी यार. मुझे पसीने आने लगे. उँगलियाँ अंदर डालते ही वो ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगा. मैंने अपनी दोनों टांगें चेयर पे चढ़ा दी ताकि भाई अच्छे से मेरी चूत से पानी निकाले. बीच-बीच में वो उँगलियों को अंदर तक घुसा के गोल-गोल घूमाता. मैंने किस तरह से अपनी चीखों को रोक रखी थी मैं ही जानती हु. इन सब को बर्दास्त कर ही रही थी की आरव एक और ऊँगली डालने लगा. मैं उछल पड़ी. पहली बार मेरी चूत में तीन उँगलियाँ जा रही थी पर आसान नहीं था. क्यूंकि थोड़ा टाइट हो रहा था. मुझसे और बर्दाश्त नहीं हुआ और मेरे पैर कांपने लगे.
आरव समझ गया की मैं झड़ने वाली थी तो वापस दो ऊँगली से चूत में खेलने लगा. फिर ज़ोरो से गरम पानी का फव्वारा मेरी चूत से छूटने लगा. 5-6 बार मैंने ज़ोरो से पानी फेंका और एक-दो छोटे-छोटे झटको के बाद मैं फाइनली बेहाल होकर चेयर से उतर के बैठ गयी. आरव का चेहरा हाथ और छाती मेरे पानी से भीग गया था. मैं बहुत थक गयी थी. ऊपर से सांसें चढ़ी हुई थी. मेरे मुँह से इतनी आवाज़ भी नहीं निकल रही थी की उसे सॉरी बोलू. मैंने उसे पास आने को इशारा किया पर वो समझ गया और कहा इट्स ओके दीदी. फिर वो बाथरूम में मुँह धोने चला गया.
थोड़ी सी ताक़त आने पर मैंने स्कर्ट वापस पहन ली और बूब्स की ढक लिए. आरव भी वापस आ गया और मम्मी भी. हम दोनों ऐसा खाने लगे जैसे कुछ हुआ ही नहीं.
मम्मी: क्या हुआ इतना ज़ोरो से सांस क्यों ले रही है? और इतना पसीना कैसे हुआ? तबियत तो ठीक है?
मैं: कुछ नहीं बस गर्मी लग रही है.
उस वक्त मैंने जैसे-तैसे मैनेज कर लिया. पर खेल अभी ख़तम नहीं हुआ था. मम्मी एक बार फिर उठी और भाई फिर मेरे पास आया. मुझमे बिलकुल ताक़त नहीं थी पर फिर भी अपने भाई के लिए हमेशा रेडी थी. मैं फिर से स्कर्ट उतारने लगी पर उसने मुझे रोक दिया.
मैंने हलके से पुछा: क्या हुआ?
आरव: आपका हो गया? अब मेरी बारी है न.
मैं उसका इशारा समझी और नीचे बैठने लगी भाई का लंड चूसने. पर फिर से उसने रोक लिया.
आरव: आज कुछ डिफरेंट करूँगा.
ये कह कर वो अपना लंड बाहर निकाल के मुठ मारने लगा. मुझे समझ नहीं आ रहा था पर मैं रेडी थी. थोड़ी देर में वो झड़ने पे आ गया और वो एकदम से टेबल के सामने आ गया. मैंने मुँह खोल लिया पर उसने जो किया मैं सरप्राइज हो गयी. वो मेरी प्लेट की ब्रेड पर अपना माल गिराने लगा. 7-8 झटके मारते-मारते उसने अपना सारा माल मेरी ब्रेड और प्लेट में फैला दिया और अपनी जगह पर बैठ गया.
मैं उसके डेरिंग से बहुत इम्प्रेस हुई. मैंने माल से भरा ब्रेड उठाया और प्लेट पे लगे सारा माल को ब्रेड से साफ़ किया और उसे खाने लगी. कसम से गज़ब का टेस्टी लगा. थोड़ा मीठा थोड़ा नमकीन. थोड़ा थोड़ा करके मैंने सारा ब्रेड खा लिया और ऊँगली चाट ली. मज़ा आ गया. तभी मम्मी आ गयी.
मम्मी: क्या बात है इतनी ख़ुशी क्यों?
हम दोनों एक-दुसरे को देख के मुस्कुराने लगे.
मैं: आज ब्रेड मस्त बना है. तुम भी खाओगी मम्मी?
आरव की आँखें बड़ी हो गयी. लगा कहीं मम्मी ने हां बोल दिया तो? पर मम्मी ने मना कर दिया और सारी प्लेट्स लेके चली गयी. रूम मे जाते ही मैंने आरव को किश किया.
मैं: गज़ब था वो. मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आया? अब से मुझे हमेशा अपनी ब्रेड पे तेरा माल चाहिए ठीक है?
आरव: यो दीदी.
मैं: आई लव यू भाई. और एक और बात आज तूने तीन डालने की जो कोशिश की वो सरप्राइज भी मस्त था.
आरव: हां पर मिस हो गया. काफी टाइट था आपका छेद.
मैं: हां ऊपर से मैं एक-दम से झड़ गयी. कोई बात नहीं. मेरा सब कुछ तेरा है. जब मन करे, कर फिर डाल लेना.
आरव: और 4 का मन किया तो?
मैं हसने लगी और उसके सर पे मारा: अरे मेरे छोटू पति देव पूरा हाथ डाल लेना. मैं नहीं रोकूंगी ठीक है?
आरव: ठीक है दीदी.
पर उसको बात पूरी नहीं हुई. वो वही खड़े-खड़े मेरी चूत पे हाथ फेरने लगा और कहा-
आरव: पर आप ये स्कर्ट इतना ऊपर क्यों पहनी हो? आपकी चूत तो ऐसे ही दिख रही है?
मैं: अब से ऐसे ही पहनूंगी.
आरव: मम्मी ने देखा नहीं?
मैं: तेरे से ज़्यादा तो मम्मी मेरी चूत देख रही थी. बस यही बात मम्मी से सुन्ना है की पहन के फ़ायदा क्या उतार ही दो. कसम से मैं तभी उतार दूँगी.
आरव: पापा को बोल दिया तो?
मैं: कुछ नहीं होगा. पापा को बोलना होता तो तब ही बोल देती जब मैंने तेरे सामने कपडे बदलने के लिए पुछा था. अभी इसके लिए कुछ नहीं बोलेगी पापा से. कुछ दिन नाराज़ रहेगी. फिर नहीं मानेंगी और जब देखेंगी मैं नहीं मान रही तो एक्सेप्ट कर लेंगी.
आरव: वाह दीदी आप तो बिलकुल सही जा रही हो. पर जब मानेंगी तब मानेंगी. अभी इसका क्या करेंगे?
मैं: अभी? चल तुझे बताती हु.
मैंने भाई को हल्का किस किया और वो बे पे लेट गया. फिर मैं उसके ऊपर चढ़ के अपनी चूत के छेद को भाई के लंड पे सेट करके नीचे उतारने लगी और बिलकुल अंदर तक चला गया. बस मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं अपने भाई के लंड पे उछलने लगी.
मैं: आआअह्ह्ह्ह आह आह आरव अहह सससससस…
आरव: ओह्ह दीदी आप तो कमाल हो. आए आह अह्ह्ह आई लव यू.
मैं: आई लव यू टू मेरी जान.
मैं उछलती रही और कुछ ही देर में लंड पूरी तरह अंदर चला गया. अब मैं ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगी थी. पूरे रूम मे थप थप थप की आवाज़ आने लगी. इतने में भाई ने बोला-
आरव: दीदी दरवाज़ा.
मैंने देखा तो हम दरवाज़ा बंद करने भूल गए थे. मुझे थोड़ी मम्मी की फ़िक्र होने लगी. पर मैं झड़ने वाली थी और हमारी गर्मी चरम सीमा पर थी.
मैं: माँ चुदाए दरवाज़ा. आज देख लेती है तो देख ले. वैसे भी एक न एक दिन राज़ खुलना ही है. मैं जैसे-तैसे मना लूंगी मम्मी को. उसके बाद हम सारा दिन मम्मी के सामने चुदाई करेंगे.
ये कह कर मैं और ज़ोरो से उछलने लगी.
आरव: और नहीं मानी तो?
मैं: तो मैं फिर भी तेरे सामने कपड़े उतारूंगी. आज थोड़े से कपडे किये थे न टेबल पे? नहीं मानी तो अब से नंगी ही बैठूंगी. नंगी ही घूमूंगी घर में. मम्मी के सामने तेरा लंड चूसूंगी. तेरा जब मन करेगा मम्मी के सामने चुदूँगी.
मैं: और तू भी मुझे मम्मी के सामने छूना. मेरे बूब्स पे हाथ लगाना. मेरी चूत में ऊँगली करना. मेरी टॉप उतार के मेरे बूब्स चूसना चूत चाटना. मुझे मम्मी के सामने नंगा करना और वहीँ चोदना. जब तक मम्मी नहीं मानती बस चोदते रहना चोदते रहना…
मैं पागलों की तरह उछाल रही थी. पूरे रूम में मेरी चूत और भाई के लंड के बीच की थप थप थप और बेड के दीवार पर टकराने की ढक ढक ढक गूंजने लगा. आखिर मैं ज़ोर से झड़ गयी और चीख पड़ी और आरव भी उसी वक़्त झड़ गया. मैं ज़ोर-ज़ोर से पानी छोड़ने लगी और आरव अपने माल की पिचकारी मेरे चूत में डालता रहा. हम दोनों 8-10 झटके मार-मार के पूरा का पूरा माल और पानी छोड़ा.
खत्म होते ही मैं बिलकुल कांपते हुए आरव की छाती पर गिर पड़ी और आरव भी बहुत ज़ोर से सांस लेने लगा. मेरी अब ज़रा भी ताक़त नहीं थी हिलने के लिए. हम इतना ज़ोर सांस ले रहे थे की लगा जैसा आज अस्थमा हो जायेगा. कम से कम 10 मिनट तक हम हिले भी नहीं. इधर मेरी चूत से भाई का माल टपक रहा था. थोड़ा सा दायें आने पर मैं जैसे-तैसे कांपते पैरों के साथ उठी और दरवाज़ा बंद किया. वापस आके देखा तो भाई खर्राटे ले रहा था.
मैंने उसे होंठो पे हलके से किश किया और उसके पास में सो गयी. फिर क्या हुआ अगले पार्ट में पढ़िए.
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