हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 6
Panwala aur housewife ki hindi sex story:- दूसरे दिन सुबह सैफ अपनी शॉप पर नहीं गया, आज वो घर पर ही आराम करना चाह रहा था। शांता को ये सही मौका लगा, शांता का भी किस्मत ने साथ दिया, हुमा को मटन लेने मार्किट जाना था. असल में हुआ ये था की रात को हुमा को फील हुआ की उसके शौहर को बहार पचासो तरह के काम होते है, पैसे कमाना इतना आसान नहीं है, इसलिए उसने अपने शौहर को माफ़ किया और उससे प्यारी प्यारी बातें की रात को उनका सेक्स भी हुआ, मगर हमेशा की तरह 10 मिनट मे सैफ का पानी निकल गया, इतने कम सेक्स में भी हुमा खुश थी।
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Panwala aur housewife ki hindi sex story
आज सैफ ने घर पर रुकने का कहा तो हुमा ने बोला आज आप घर पर है तो मै मटन बिरयानी बनाती हु और वो शांता को बोलकर बहार चली गयी। शांता ने दोनों पति पत्नी का प्यार पहले जैसा देखा और मिश्रा को बताया, मिश्रा ने कहा जो प्लान बनाया है उसको आज ही अंजाम दो। जैसे ही हुमा बहार गयी शांता हॉल में बैठे सैफ के पास गयी और कहा-
शांता – मालिक आप आज आराम करने के लिए छुट्टी की?
सैफ क्यों तुमको कोई परेशानही है?
शांता – नहीं मालिक मुझे क्या परेशानी आप इतना काम करते है आप ही मुझे सैलरी देते है आपकी वजह से ही मेरा घर चलता है इसलिए मै सोच रही थी की आपकी सेवा करू।
सैफ – सेवा कैसी सेवा?
शांता सैफ के पैरो के पास बैठ कर उसके एक पैर को पकड़ कर दबाने लगती है.
सैफ उठ कर खड़ा हो जाता है ये क्या कर रही हो शांता?
शांता – आपकी सेवा मेरा धरम है मालिक।
सैफ – मुझे नहीं दबवाने तुमसे पैर।
शांता – आप शर्मा क्यों रहे है?
शांता सैफ को खींच कर सोफे पर बिठाती है और उसके पैर दबाने लगती है.
सैफ – नो यार मत करो प्लीज अच्छा नहीं लगता।
तभी शांता अपनी साड़ी का पल्लू गिरा देती है उसके बड़े से सावले से दूध आधे बहार झाकने लगते है उन पर सैफ की नजर पढ़ती है और उसकी ना ना बंद हो जाती है। वो कभी शांता के चेहरे को देखता, तो कभी उसके आधे खुले बूब्स जो ब्लाऊज़ से बहार आने को मचल रहे रहे थे।
सैफ – (धीरे से) शांता रुक जाओ।
शांता अपने लिप्स को अपने दांतों से काटते हुए कहती है – क्या आप भी मालिक औरतो की तरह शरमाते हो।
शांता सैफ के पैर दबा कम रही थी सहला ज्यादा रही थी, ऊपर से उसके आधे नंगे बूब्स के दर्शन सैफ को मज़ा देने लगे। आखिर वो भी एक मर्द था, जिस अंदाज़ से शांता उसके जांघ से लेकर घुटने के नीचे तक सहला रही थी, सैफ का लंड खड़ा हो गया। सैफ इस वक़्त टी शर्ट और टाइट बरमूडा में था, उसका तना हुआ लंड शांता ने देखा और कहा।
शांता – मालिक आप का लंड तो खड़ा है?
सैफ को शर्म सी आ गयी उसने अपने बरमूडा पर हाथ रख दिया, जिससे उसका तना हुआ लंड तो तम्बू बना था उसको छुपा सके।
शांता मुस्कुरा दी और सैफ के हाथ पर अपने हाथ रख कर उसको वहाँ से हटा दिया और अपना हाथ सैफ की बरमूडा पर रख कर सैफ का लंड सहला दिया.
सैफ – सीइइइइइ आह्ह्ह्हह्ह्।
शांता – मालिक मै आपकी नौकरनी हु आप मेरे मालिक आप जैसे चाहे मुझसे काम ले सकते है मै आपको मना नहीं कर सकती।
सैफ को सेक्स चढ़ने लगा, तभी शांता ने सैफ का इलास्टिक वाला बरमूडा खींच लिया और सैफ का बरमूडा सरक गया, मगर ज्यादा नहीं क्योंकी सैफ की गांड के नीचे वो फसा था। शांता ने फिर ज़ोर लगाया तो सैफ थोड़ा ऊपर आ गया और उसका बरमूडा उसके घुटनो से होते हुए शांता ने बहार निकाल कर साइड में रख दिया। शांता बार बार सैफ को देख कर अपने लिप्स अपने ही दातो से काट रही थी, शांता भले ही सावली थी मगर उसके नैन नक्श और उसका ये सेक्सी रूप अच्छे अच्छों को पागल कर दे। सैफ पूरी तरह से शांता के हवाले हो गया था. सैफ टी शर्ट और अपनी जॉकी की अंडरवियर में सोफे पर बैठा था, उसके तने हुए लंड को शांता ने देखा और आगे बढ़ कर उसके जॉकी के अंडरवियर पर से लंड को चुम लिया। सैफ शॉकड था आजतक हुमा ने ऐसा कुछ किया नहीं था। ऐसे सेक्सी अंदाज़ में वो शांता को देख पागल हो गया, तभी सैफ को झटका लगा जब शांता ने उसका अंडरवियर भी जोर से पकड़ कर नीचे खींचना चाहा। सैफ सुन्न पड़ा था।
शान्ता – मालिक जरा उठिये।
सैफ थोड़ा उठा तो उसकी अंडरवियर भी निचे आ गयी, अब सैफ सिर्फ टी शर्ट में था उसका 5 इंच का गोरा लंड तना हुआ था.
शांता – मालिक आप का लंड तो काफो गोरा है, ऐसा लंड तो आज तक नहीं देखा दिल कर रहा है इसको खा जाऊँ।
अगले ही पल शांता ने सैफ के तने हुए लंड को मुह में ले लिया .
सैफ – ssssssshhhhhhhhhhhh आअह्हह्ह्ह्ह।
सैफ को ये मज़ा आज तक नहीं मिला था, उसने बहोत बार हुमा को मुह में लेने को कहा था मगर उसने नहीं लिया था। कुछ ही देर में शांता के मुह में आधा लंड फसा हुआ था। शांता ने 3 से 4 बार उसका आधा लंड चूसा और कहा.
शांता – मालिक यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा, आईये उस कमरे में चलते है और शांता उठ खड़ी हुई और सैफ का हाथ पकड़ कर उसको सैफ के बैडरूम में ना ले जाते हुए, गेस्ट रूम में चली गयी। गेस्ट रूम में ले जाने की वजह भी आपको आगे पता चलेगी। वहीं हुमा इन सब से बेखबर मटन शॉप से मटन लेकर लौट रही थी की मिश्रा का उसको कॉल आया.
हुमा – हाँ भाई साहब.
मिश्रा – वो आपसे बहोत ज़रूरी बात करनी थी और दिखाना भी था।
हुमा – भाई साहब आज वो छुट्टी पर है और मै उनकी फवरेट मटन बिरयानी बनाने जा रही हु तो माफ़ करना आज नहीं मिल सकती.
मिश्रा – बहोत ज़रूरी है आप के शौहर के बारे में ही है।
ये सुनकर हुमा चौक गयी और कहा – मै यही बहार हु आप कहा है भाई साहब?
मिश्रा – मै आपके घर की गली के पास ही हु।
हुमा – ठीक है मै मिनट में आयी.
मिश्रा – ठीक है।
फोने काटते ही मिश्रा खुश हुआ और सोचने लगा अब आएगा असली मज़ा, अब मै अपनी बुलबुल को पटा कर ही छोडूंगा।
कुछ ही देर में हुमा मिश्रा के बताई जगह पर आई। हुमा बुर्क़े में थी।
हुमा – क्या हुआ भाई साहब? ऐसी क्या बात है?
मिशरा यहाँ वहाँ देखते हुए – बहोत दिनों से बताना चाह रहा था आप मेरी भाभी है आप जैसी नेक औरत मैंने आज तक नहीं देखि, जब भी मै आपसे ये छुपाता मुझे नींद नहीं आती, एक ऐसी बात सोचता हु की आपको बताओ या न बताओ! मगर मै आपको धोका नहीं दे सकता, मै आपका वफादार हु सैफ भाई जैसे घटिया इंसान जैसा नही।
हुमा के दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
हुमा – यु पहेलियाँ न बुझाइए और आप उनके बारे में ऐसा क्यों बोल रहे है? मै उनके बारे में ऐसा नहीं सुन सकती।
मिश्रा – मै भी सैफ भाई के बारे में सुन नहीं सकता था, मगर उन्होंने जो हरकत की है नफरत हो गयी मुझे उस शैतान से.
हुमा ज़ोर से – ये आप क्या बोल रहे है भाई साहब? आपको होश है? अगर आपने उनके बारे में और लफ्ज़ भी कहा था मुझ से बुरा नहीं होगा.
मिश्रा – आप की वफादारी सैफ भाई की तरफ देख दिल दुखता था, इसलिए आज तक नहीं बताया।
हुमा – मगर क्या?
मिश्रा – सैफ भाई ने उस बेचारी गरीब मासूम शांता की मज़बूरी का फायदा उठा कर उससे जिस्मानी ताल्लुक बनाये।
ये सुनकर तो हुमा की आँखों से सामने अँधेरा सा आ गया।
हुमा – क्या बक रहे हो आप? वो ऐसा कभी नहीं कर सकते मै जानती हु उनको।
मिश्रा – मुझे पता था आपको यकीन नहीं होगा, इसलिए आपको सबूत भी दूंगा चलिए आपके घर आपको सबूत देता हूँ।
दोनों हुमा के घर जाते है घर के बहार के गेट को मिश्रा धीरे से खोलता है और और अपने लिप्स पर हाथ रख कर चुप रहने को बोलता है, हुमा को दबे पाँव दोनों घर के बहार के छोटे से गार्डन में आते है। आगे आगे मिश्रा पीछे पीछे हुमा। हुमा के दिल की धड़कन बहोत तेज़ हो गयी थी, उसकी आँखे नम थी, उसको लग रहा था मिश्रा जी की बात झूटी निकले। अब आते है घर के अंदर तो शांता ने उस गेस्ट रूम में इसलिए सैफ को ले गयी थी क्योंकी उस कमरे में एक एकजोस्ट फैन था, जिसमे से अंदर का नज़ारा बहार से साफ देख सकते थे। शांता ने पूरा इंतज़ाम कर रखा था, उसने एक छोटा सा स्टूल भी वहाँ जान बूझ कर छोड़ रखा था, मिश्रा ने वो स्टूल उस एकजोस्ट फैन के निचे रखा और यहाँ वहाँ देख कर हुमा को धीरे से कहा-
भाभी जी यहाँ आईये इस स्टूल पर खड़े रह कर देख लीजिये अंदर क्या हो रहा है? जैसे ही हुमा उस स्टूल पर खड़ी हुए उसकी बड़ी गांड मिश्रा के सामने थी, उसको देख उसने अपना लंड को धोती पर सहला दिया। स्टूल पर चढ़ने के बाद भी अपनी एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा कर हुमा ने अंदर को जो नज़ारा देखा उसे देख उसको चक्कर सा आ गया। अंदर शांता झुकी हुए थी उसकी साड़ी उसके कमर पर थी और सैफ पीछे से उसको चोद रहा था। फ़च फ़च की हलकी आवाज़ रूम में गूंज रही थी, हुमा की आँखों से आँसू बहने लगे, उसने अपने मुह पर हाथ रखा ताकि उसके रोने की आवाज़ बहार न निकल पाए।
शांता – मालिक जल्दी कीजिये, मालकिन आती होगी अगर हम पकडे गए तो मै मालकिन का सामना नहीं कर सकती देवी है वो.
शांता ने ट्रैक चेंज कर दिया था, उसको पता चल गया था की हुमा आ चुकी है। सैफ जोश में शांता को चोदते हुए बड़बड़ाने लगा- अरे छोड़ तू मालकिन को, जो मज़ा तुझमें है वो उसमे कहा!
हुमा ने दोनों हाथो से दिवार को पकड़ लिया, निचे मिश्रा हुमा की बड़ी गांड जो की हुमा ने अपनी एड़ियाँ उठाने की वजह से और बहार निकल आयी थी उसे देख अपने लंड को सहलाने लगा और यहाँ वहाँ देखने लगा।
कुछ ही सेकंड में हुमा की हँसती खेलती ज़िन्दगी जैसे बर्बाद हो गयी, वो स्टूल से उतरते हुए गिरने ही वाली थी, मिश्रा जी ने उसको पकड़ लिया। हुमा का जिस्म कितना नरम मुलायम है इसका एहसास आज पहली बार हुआ मिश्रा को।
नीचे आते ही हुमा ने अपने आपको, मिश्रा के जिस्म से दूर किया और बिना बताये चलने लगी। मिश्रा भी शॉकड हुआ हुमा घर के गार्डन से बहार निकल गयी और पागलो की तरह चलने लगी। ज़ोर ज़ोर से हुमा आगे चलने लगी, मिश्रा भी पीछे पीछे आया मगर हुमा कुछ दूर चली गयी। उसकी बड़ी गांड ज़ोर ज़ोर से हिलते हुए मिश्रा को दिख रही थी, मगर अब वो सिचुएशन नहीं थी मिश्रा को लगा की कहा जा रही है।
मिश्रा – भाभी जी।
हुमा मिश्रा की आवाज़ को अनसुना करते हुए, कॉलोनी से काफी दूर आ गयी, कुछ झाडिया लगी उन झाड़ियों को क्रॉस करते हुए वो आगे बढ़ी, आगे एक खाई जैसा था नीचे एक नदी थी, मगर सिर्फ नाम को नदी एक बड़े नाले जैसी हो गयी थी। हुमा जहां खड़ी थी, उसकी उंचाइ इतनी थी कोई भी गिर कर मर सकता था, हुमा आगे बढ़ छलांग ही लगाने वाली थी कि मिश्रा ने आकर पीछे से पकड़ लिया। इस सिचुएशन में मिश्रा को एहसास हुआ की हुमा की गांड बहोत बड़ी है, क्योंकी उसने पीछे से पूरी ताकत लगाकर अपने दोनों हाथो को हुमा के पीठ के इर्द गिर्द रखकर उसको जकड़ लिया था उसका लंड हुमा की नरम गांड पर दब गया था, मगर इस सिचुएशन में मिश्रा ज्यादा फील नहीं कर पाया।
