भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 3

Bhabhi ne mummi ki chut dilayi:- अगर आपने इस कहानी के पिछले पार्ट नहीं पढे है तो पहले वो पढ़ ले, तभी आपको कहानी का पूरा मज़ा आएगा। पिछले पार्ट का लिंक नीचे है। मैं अपनी घड़ी के वाइब्रेशन से उठ गया। और मेरा लंड मुझसे पहले ही जाग गया था। मैंने लंड अंडरवियर के छेद से बाहर निकाला। और मम्मी की तरफ करवट करके लेट गया। मम्मी भी मेरी तरफ मुँह करके लेटी हुई थीं। और उनका हाथ बेड पर था। मैंने हल्के से मम्मी का हाथ अपने लंड पर रख दिया। और सोने का नाटक करने लगा।

पार्ट 2 यहाँ ==>भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 2

Bhabhi ne mummi ki chut dilayi hindi sex story

ठीक 6 बजे अलार्म बजा। और मम्मी उठ गईं। मगर आज उनके हाथ में मेरा लंड था। मम्मी ने अभी तक अपना हाथ नहीं हटाया था।

और मैं लंड से झटके मार रहा था। तभी मैंने देखा मम्मी उठके चली गईं। मगर आज उन्होंने मेरे ऊपर चादर नहीं डाली थी। मेरा लंड वैसे ही छोड़ के वो चली गईं।

और कुछ देर में फ्रेश होकर वापस आ गईं। मैंने देखा आज मम्मी मेरी तरफ देखते हुए अपना ब्लाउज पहन रही थीं। और उनके बड़े-बड़े दूध देखकर मेरा लंड झटके खा रहा था।

फिर वही सब हुआ। मम्मी चाय देने आईं। तब उन्होंने चादर मेरे ऊपर डाल दी। और मुझे हिला के बाहर निकल गईं। मैं अब रोज मम्मी की नाभि से खेलता था।

और हर दूसरे या तीसरे दिन उन्हें अपना लंड दिखा देता था। अगर रोज-रोज मैं लंड दिखाता तो वो शक करने लगतीं। मगर कभी-कभी लंड के बाहर होने से वो इसे बस देखकर चली जाती थीं।

मम्मी अब जब भी मेरे सामने आतीं, उनकी नाभि हमेशा मुझे दिखाई देती थी। और मेरा लंड झटके मारने लगता था। मैं हमेशा उनकी नाभि में उंगली कर देता।

मगर मम्मी बस हँसने लगती हैं। और गुदगुदी हो रही है बोलके मेरा हाथ हटा देती थीं।

मुझे ऐसा करते हुए 2 महीने हो गए थे। मगर मम्मी ने अभी तक मुझे कुछ नहीं कहा था।

ऐसी ही एक दिन भाभी अपने मायके चली गईं। और भाई भी उन्हें छोड़ने चले गए। भाभी का प्रोग्राम 1 हफ्ते का था।

भाभी के जाने के बाद मैं छत पर बैठा हुआ काम कर रहा था। बाबू के न होने पर मम्मी का भी मन नहीं लग रहा था।

इसीलिए वो चाय लेकर ऊपर आ गईं। और मेरे बगल में खड़ी हो गईं। मम्मी की गहरी नाभि बिल्कुल मेरे सामने थी। मम्मी के हाथ में कप थे।

और मैंने अपनी उंगली मम्मी की नाभि में डाल दी। मेरी आधी से ज्यादा उंगली नाभि में घुस गई।

मम्मी: ये क्या कर रहा है तू बदमाश। अभी चाय गिर जाती मेरे हाथ से।

मैं: मम्मी अब तो आप भी मेरे सामने नाभि दिखा देती हो।

मम्मी: बेटा तेरी सोच और लोगों जैसी नहीं है। जो मेरी कुएँ जैसी नाभि का मजाक उड़ाते हैं। तेरे सामने तो मुझे कोई परेशानी नहीं है। बस तू बार-बार इसमें उंगली डाल देता है। रात में भी ऐसा करता रहता है। लगता है तेरे हाथ बाँधने पड़ेंगे।

मैं: मम्मी अगर तुम हाथ बाँध दोगी तो मैं अपनी जीभ डाल दूँगा।

मम्मी: छी शैतान कैसे बातें करता है। तेरी बीवी आएगी उसी के जीभ डालना।

मैं: ठीक है मम्मी। मगर उसकी नाभि बिल्कुल आप जैसी होनी चाहिए। वरना मैं शादी नहीं करूँगा।

मम्मी: मतलब अब जब लड़की देखने जाएँगे तो उनसे कहूँगी लड़की को चाहे कुछ न आता हो। मगर उसकी नाभि गहरी होनी चाहिए।

मम्मी ये बात बोलके हँसने लगीं। और मैं भी ये बात सुनके हँसने लगा।

मैं: इसीलिए तो मैं शादी नहीं करूँगा। जिंदगी भर अपनी मम्मी की सेवा करूँगा।

मम्मी: मतलब सारी उम्र मेरी ही नाभि में उंगली करता रहेगा। ना बाबा ना। मैं तो तेरी शादी जरूर करवा दूँगी। कहीं फिर से कोई कांड न कर दे।

मम्मी के मुँह से कांड सुनके मैं समझ गया। मम्मी मेरे और भाभी का किस्सा याद कर रही हैं।

मैं: मम्मी अब गलती हो गई थी। इसमें मेरा क्या दोष है। गलती तो भाभी की थी। अब उस बात को जाने भी दो।

मम्मी: ये आजकल की लड़कियाँ भी मूवी देख-देखकर बिगड़ गई हैं। ये तो अच्छा हुआ कि तेरे साथ ही सब हुआ। कहीं बाहर किसी के साथ होता तो घर की कितनी बदनामी होती।

मैं: बाहर कैसे होता मम्मी। आप कहीं उन्हें अकेले बाहर जाने ही नहीं देती हो।

मम्मी: बेटा मैंने दुनिया देखी है। बहू के ऊपर कोई पाबंदी नहीं लगाई तो उसने अपने देवर के साथ ये सब किया। अगर उसे बाहर भी जाने देती तो बाहर भी ऐसा कर सकती थी।

मैं: मम्मी वो भी मेरी तरह बहक गई थीं। बस मेरी बीवी ऐसी न आ जाए।

मम्मी: तू अपनी बीवी को संभाल लेगा। मैंने देखा है… मतलब मैं अपने बेटे को जानती हूँ।

मम्मी मेरे बारे में बात करती-करती बदल गईं। मैंने देखा है से मतलब मेरा लंड देखा है।

मम्मी: चल अब नीचे चल। खाना खा ले फिर काम कर लेना।

मैं और मम्मी नीचे आ गए। और हम दोनों ने खाना खा लिया। और मैं और मम्मी वहीं बैठक में दीवान पर लेट गए। कुछ देर बातें करने के बाद मम्मी बोलीं।

मम्मी: बेटा वो गोले के तेल की बोतल ले आ।

मैं: मम्मी गोले के तेल का क्या करोगी?

मम्मी: बेटा वो होंठ सूख रहे हैं। और फट भी रहे हैं। गोले का तेल नाभि में लगाने से कई बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। और होंठ भी सही हो जाते हैं।

मैं: मम्मी पहले तो आप ऐसे तेल नहीं लगाती थीं।

मम्मी: बेटा ये तो मैं शुरू से लगाती हूँ। बस तूने कभी देखा नहीं है। वैसे भी मैं अपनी नाभि को छुपा के रखती थी।

मैं: मम्मी वैसे मैंने इंटरनेट पर देखा था कि नाभि में शहद लगाने से भी फायदा होता है।

(मैंने तो अपना आइडिया लगाया। और मम्मी इसमें फँस गईं।)

मम्मी: हाँ बेटा मैंने सुना है। मगर शहद से सब चिप-चिप करने लगता है। तू तेल ही ले आ। वही लगा लेती हूँ।

मैं: मम्मी आप शहद ही लगाओ। मैं लगा देता हूँ। फिर पानी से साफ कर दूँगा।

मैं किचन से जाके शहद की छोटी वाली शीशी ले आया। और एक साफ सा कपड़ा पास में रख लिया। मैं मम्मी के पेट के पास बैठा था। और मम्मी मुझे देखकर हँस रही थीं।

मैंने शीशी का ढक्कन खोला। और ऊपर से शहद मम्मी की नाभि में गिराने लगा। शहद की एक लंबी सी धार ऊपर से नीचे मम्मी की नाभि में गिरने लगी।

अगर मैं 2 बूँद शहद डालता तो वो शायद पता भी नहीं चलता। मम्मी की गहरी नाभि में काफी शहद भर गया था। छोटी वाली शीशी आधी से ज्यादा खाली हो गई थी।

मम्मी: ये तूने क्या किया। थोड़ा सा डालना होता है। तूने तो आधी शीशी शहद मेरी नाभि में भर दिया।

मैं: मम्मी मैं इसे दुबारा शीशी में डाल देता हूँ।

मम्मी: तेरा दिमाग खराब हो गया है। मेरी नाभि का निकला हुआ शहद तू वापस शीशी में डालके रखेगा। ये अब गंदा हो चुका है। अब इसे फेंकना पड़ेगा।

मगर मैं जानता था। ये शहद अब तो और भी ज्यादा मीठा हो गया होगा। मम्मी उसे साफ करने ही वाली थीं। मगर उससे पहले मैंने अपना मुँह लगा दिया।

मम्मी को समझने का मौका ही नहीं मिला। इतनी जल्दी मैंने अपना मुँह और अपनी जीभ मम्मी की नाभि में डाल दी।

मम्मी: ये क्या कर रहा है बेटा। अब ये गंदा हो चुका है। इसे मत चाट। बाजार से दूसरा ले आना।

मगर मम्मी को क्या पता था कि नाभि से शहद चाटना मेरे लिए जन्नत जैसा है। मैंने दोनों हाथों से मम्मी का पेट पकड़ रखा था। और अपनी जीभ को नाभि की गहराई में और नाभि के आसपास चाट रहा था।

ये बात मुझे भाभी ने भी बताई थी कि अगर बहुत अच्छे से नाभि और उसके आसपास चाटा जाए तो कोई भी औरत गरम होकर झड़ जाती है।

और आज मुझे इस मौके का फायदा उठाना था। मैं मम्मी की नाभि के साथ-साथ उनके पेट को भी चाट रहा था। मम्मी कुछ देर तक तो मुझे मना करती रहीं।

मगर फिर वो चुपचाप आँखें बंद करके लेट गईं। मैं नाभि को चाटते हुए देख रहा था। मम्मी ने कई बार खुद के होंठों को अपने दाँतों से काटा था।

यानी वो भी मेरी नाभि चटाई से गरम हो गई थीं। मैं अपने हाथ से मम्मी के पेट को हल्का-हल्का दबा रहा था। आज 4 साल बाद किसी मर्द ने मम्मी की सोई हुई जवानी को अपनी जीभ से चाखा था।

मैं बहुत हल्के-हल्के नाभि को चाट रहा था। कुछ पल के लिए तो शायद मम्मी भूल गई थीं कि मैं उनका बेटा हूँ। और उनका हाथ मेरे सिर पर आ गया था।

मैं मम्मी की नाभि को चाटते हुए उनकी चूत के थोड़ा ऊपर के पेट को चाट रहा था। मम्मी कसमसा रही थीं। और उन्हें भी मजा आ रहा था।

मैं और मम्मी दुनिया से बेखबर होकर मजे ले रहे थे। मगर तभी किसी ने बेल बजा दी। और मुझे और मम्मी को होश आ गया।

मैंने अपना मुँह मम्मी की नाभि से हटा लिया। और मम्मी मेरा मुँह देख रही थीं। जो पूरा गीला पड़ा था।

मम्मी: बेटा बाहर कोई आया है। जल्दी से हट। मैं खुद को साफ कर लेती हूँ।

मैं: मम्मी रुको। मैं साफ कर देता हूँ। फिर आप बाथरूम में जाके पानी से साफ कर लेना।

मैंने कपड़े से मम्मी की नाभि साफ कर दी।

और उनके सामने खड़ा हो गया। मम्मी की नजर मेरे खड़े हुए लंड पर गई। जो साफ-साफ दिख रहा था। मम्मी की नाभि को मैंने चाट-चाट के लाल कर दिया था।

मम्मी बाथरूम में चली गईं। मैंने बाहर जाके देखा तो पड़ोस वाली आंटी आई थीं। मैंने उन्हें अंदर बुला लिया।

लगभग 10 मिनट के बाद मम्मी बाहर आईं। और मैंने उनकी आँखों में देखा। आज मुझे वो एक कामसिन और प्यासी औरत की तरह दिख रही थीं।

जिसकी आँखों में मुझे सिर्फ वासना दिख रही थी। जो कुछ देर पहले मैंने ही जगाई थी। आंटी के सामने मम्मी ने अपनी नाभि को छुपा रखा था।

मैं अपना काम करने चला गया। और मम्मी आंटी से बातें करने लगीं। शाम 4 बजे मम्मी चाय देने ऊपर आ गईं। मम्मी आकर मेरे बगल में खड़ी हो गईं।

और उन्होंने अपना पल्लू बिल्कुल साइड में कर रखा था। जिससे मुझे मम्मी की नाभि दिख रही थी। मैंने मम्मी की तरफ देखने से पहले मम्मी की नाभि को देखा।

मम्मी: बेटा चाय पी ले। और शाम को जब काम से जाएगा तो सब्जी लेते आना।

मैं: ठीक है मम्मी। मैं सब्जी ले आऊँगा।

मम्मी जैसे ही जाने लगीं, मैंने उन्हें रोक दिया।

मैं: मम्मी ये देखो आपके पेट पर कुछ लगा है।

मम्मी अपना पेट देखने लगीं। मगर उन्हें कुछ नहीं दिखा।

मम्मी: बेटा कुछ नहीं लगा है।

मैं: मम्मी मेरे पास आओ। मैं आपको दिखाता हूँ।

मम्मी मेरे पास आ गईं। मेरा मुँह बिल्कुल उनकी नाभि के सामने था। और मैंने उनकी कमर पकड़ के अपनी जीभ मम्मी की नाभि में डाल दी।

मम्मी तुरंत पीछे हो गईं। मगर तब तक मैं नाभि में अपनी जीभ को घुमा चुका था।

मम्मी: तू फिर से शुरू हो गया शैतान। दोपहर में सारा गंदा शहद मेरी नाभि से चाट लिया। अभी भी वही कर रहा है। जानता है नीचे पड़ोस वाली आंटी बैठी हैं। क्या कहेगी कैसी माँ है जो अपने बेटे से नाभि चटवाती है।

मैं: मम्मी थोड़ा सा शहद और लगा था। इसीलिए आपकी नाभि अभी भी मीठी-मीठी लग रही है। और मैं आंटी के सामने थोड़ी आपकी नाभि चाट रहा हूँ।

मम्मी: अब तुझ शैतान को कौन समझाए। बेटा ये गंदा होता है। इसे ऐसे नहीं चाटते हैं।

मैं: मम्मी गंदा तो दूसरों के लिए है। मगर मेरे लिए तो अच्छा है।

मम्मी अपने माथे पर हाथ मारके हँसने लगीं। और नीचे चली गईं।

शायद अब मम्मी को मेरे इरादों के बारे में पता चल गया था। आज उन्होंने अपने बेटे की जीभ का कमाल देखा था। अब मम्मी वो नहीं रही थीं जिनसे मेरी गाँड फटी रहती थी।

अब मैं उनके साथ बहुत मजे लेता था। मगर मम्मी बिल्कुल भी नाराज नहीं होती थीं। मैंने मम्मी को 3 दिन लंड नहीं दिखाया था। मगर आज रात में कुछ नया करने की सोच रहा था।

शाम को जब मैं मार्केट से आया तब मम्मी किचन में काम कर रही थीं। मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। जैसे एक पति अपनी पत्नी को पकड़ लेता है।

मेरा हाथ मम्मी के बड़े-बड़े दूध से थोड़ा नीचे था। मगर फिर भी मेरा हाथ मम्मी के दूध से लग रहा था।

मम्मी: आ गया बेटा। सब्जी लाया या वो भूल गया।

मैं: मेरी मम्मी कुछ कहें और मैं न लेके आऊँ। ऐसा कभी नहीं होगा। मेरी मम्मी का कहना मैं कभी नहीं टालता हूँ।

मैं अपना हाथ हल्के-हल्के दूध पर दबा रहा था। और मेरा लंड खड़ा होकर मम्मी की गाँड में लग रहा था।

मम्मी: बेटा अब छोड़ भी दे। मैं खाना बना लेती हूँ। तब तक तू भी कुछ काम है तो कर ले। वरना बैठके टीवी देख।

मैं ऊपर चला गया। और मैं चाहता था मम्मी मुझसे और खुलके बातें करें। मेरी 2 महीनों की मेहनत के चलते मैं मम्मी की नाभि तक तो पहुँच गया था।

अब मुझे उनकी चूत चाहिए थी। ताकि मेरा लंड जो इतने महीनों से सूखा पड़ा है, उसे भी चूत मिल जाए। ताकि उसका भी पानी निकल जाए।

मैं छत पर बैठा बस ऐसे ही कंप्यूटर गेम खेल के टाइम पास कर रहा था।

तभी मुझे एक आइडिया आया। मैंने इंटरनेट से कुछ इंडियन आंटी की पिक्स डाउनलोड कर लीं। जिनमें वो बिकिनी में थीं। और उसे खोल के एडिट करने लगा।

मैं जानता था अगर मैं 8:30 बजे तक नीचे नहीं गया तो मम्मी मुझे बुलाने ऊपर आ जाएँगी। मैं बस उनके ऊपर आने का इंतजार कर रहा था।

ठीक 8:30 मम्मी ने मुझे आवाज दी। मगर मैंने उन्हें कह दिया कि मैं काम कर रहा हूँ। फिर मम्मी 9 बजे सीधे ऊपर आ गईं।

मैंने गेट खुला ही रखा था। मम्मी जैसे ही अंदर आईं, मैंने कंप्यूटर की स्क्रीन बंद कर दी। और घबराने की एक्टिंग करने लगा।

मैं: ओह्ह मम्मी आप कब आईं। मैं तो बस काम कर रहा था।

मुझे घबराया देखकर मम्मी समझ गईं मैं कुछ कर रहा था। मम्मी मेरे पास आकर खड़ी हो गईं।

मम्मी: तू काम कर रहा है तो ये कंप्यूटर बंद क्यों है। क्या देख रहा था तू। मेरे आते ही कंप्यूटर बंद कर दिया। बता मुझे क्या देख रहा था।

मैं: मम्मी आप गलत समझ रहे हो। मैं तो बस काम कर रहा था।

मम्मी: बेटा काम कर रहा होता तो मुझे देखते ही कंप्यूटर बंद नहीं करता।

मैं: मम्मी मैं काम ही कर रहा था। मगर अगर आपको दिखाऊँगा तो आप मुझसे नाराज हो जाओगे।

मम्मी: बेटा मैं तेरे काम करने से क्यों नाराज हूँगी। सच-सच बता क्या काम कर रहा था।

मैंने कंप्यूटर की स्क्रीन ऑन कर दी। और मम्मी की नजर उस औरत पर पड़ी जो बिकिनी पहने खड़ी थी। उस बिकिनी में उस औरत के बड़े-बड़े दूध साफ दिख रहे थे।

और नीचे पैंटी में चूत का शेप साफ-साफ नजर आ रहा था। मम्मी की तो आँखें बड़ी हो गई थीं।

मैं: देखा मम्मी। इसीलिए आपसे छुपा रहा था। आजकल ये सब औरतें पहनती हैं। मगर आप तो मुझे ही गलत समझ रही थीं।

मम्मी: बेटा मुझे माफ करना। मगर मुझे लगा तू कुछ गंदा देख रहा है। मगर ये इस औरत ने कैसे कपड़े पहने हैं। देखने में तो उम्रदार लग रही है।

मैं: हाँ मम्मी उम्रदार ही है। मगर ये फोटो गोवा की है। वहाँ समुंदर के पास औरतें ऐसी ही कपड़े पहनती हैं।

मम्मी: ये कपड़े भी क्यों पहनती हैं। सब तो दिख रहा है।

मैं: मम्मी बड़े-बड़े घरों की औरतें पहनती हैं। और सबको दिखाती भी हैं। न इनके पति कुछ कहते हैं। न ही इनके बेटे। और हमारे जैसे घरों की औरतें तो सिर्फ ब्रा-पैंटी ही पहनती हैं।

मम्मी: हाँ बेटा तूने सही कहा। हमारे जैसे घरों में ये सब नहीं होता है।

मैं: अगर मम्मी मैं तुम्हें गोवा ले जाऊँ तो आप भी ऐसे कपड़े पहन सकती हो।

मम्मी: धत्त मार खा लेगा तू मुझसे अभी। ऐसे कपड़े सिर्फ अपने पति के लिए पहने जाते हैं। सबको दिखाने के लिए नहीं। अब छोड़ इसे और खाना खा ले।

मैं और मम्मी नीचे आकर खाना खाने लगे। खाना खाके मैं कमरे में आ गया। और थोड़ी ही देर बाद मम्मी भी आ गईं।

मम्मी ने साड़ी निकाल दी। और मैंने देखा मम्मी ने पेटीकोट नाभि के ऊपर बाँध रखा था। मम्मी ने मुझे उनका पेट घूरते देखा। और हँसने लगीं। मम्मी बेड पर आकर लेट गईं। मैं भी उनके साथ लेट गया।

मैं: मम्मी ये क्या किया आपने।

मम्मी: मैंने क्या किया है बेटा?

मैं: मम्मी ये आपने अपनी नाभि को फिर से छुपा लिया है।

मम्मी: क्या करूँ मेरा बेटा मेरी नाभि के लिए पागल जो हो गया है। जब देखो मेरी नाभि में उंगली करता रहता है। और अब तो मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल देता है।

मैं: मम्मी वो तो मुझे आपकी नाभि अच्छी लगती है। इसीलिए मैं खेलता रहता हूँ।

मम्मी: और जो आज तूने मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल दी थी। वो क्यों किया था?

मैं: अब क्या करता मम्मी। शहद बर्बाद जाता। इसीलिए मैंने सोचा उसे चाट के खा लेता हूँ। और इससे आपकी नाभि और भी ज्यादा मीठी हो गई।

मम्मी: बेटा तुझसे बहस में कोई नहीं जीत सकता है। मगर अब तो मैं तुझे अपनी नाभि नहीं दिखाऊँगी।

मम्मी अपनी नाभि नहीं दिखा रही थीं। मगर अब मैं भी पूरा हरामी बन गया था। मैंने मम्मी के पेट पर हाथ रखा।

मम्मी: बेटा पेट पर हाथ रख ले। मगर अब अपनी नाभि में उंगली नहीं करने दूँगी।

मम्मी को लगा था मैं अब कुछ नहीं करूँगा। मगर मैंने अपना हाथ पेटीकोट के अंदर डाल दिया। और उनकी नाभि तक पहुँच गया।

मम्मी: बेटा ये क्या कर रहा है। अपना हाथ बाहर निकाल मेरे पेटीकोट से। कोई देखेगा तो क्या कहेगा। कैसा लड़का है अपनी मम्मी के पेटीकोट में हाथ डालता है।

मैं: मम्मी मैं कौन सा सबके सामने ऐसा करता हूँ। वो तो आप अपनी नाभि नहीं दिखा रही थीं। इसीलिए मुझे ऐसा करना पड़ा।

मम्मी: चल ठीक है। अपना हाथ बाहर निकाल। मैं पेटीकोट नीचे कर लेती हूँ।

मैं: नहीं मम्मी। पहले अपनी नाभि को बाहर निकालो।

मम्मी ने अपना पेटीकोट थोड़ा नीचे कर दिया। मगर मैंने इस मौके का फायदा उठाया। मैंने अपना हाथ थोड़ा और नीचे सरका दिया।

कहानी जारी रहेगी।

Next Part ==> भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 4

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2 Comments

  1. Komal ji Main ek chij bolna chahta hun kahan ko jaldi pura karo पढ़ते-पढ़ते mood banta hai to pata chalta Hai kahani khatm ho gai yaar pura kahani Dala karo please.

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