हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 5
Housewife aur panwale ki chudai kahani:- इस hindi sex stories के पिछले पार्ट मे आपने पढ़ कि हुमा ने मिश्रा की पीठ पर तेल की मालिश की और मिश्रा ने शांता को हुमा और सैफ के बीच मे दरार डालने को बोला। शांता ने भी हुमा से सैफ की बुराई की और मिश्रा की तारीफ की। फिर सैफ ने शंकर दादा से पैसे लिए थे तो शंकर दादा घर आ गया और हुमा पर बुरी नजर डालने लगा। शांता ने कॉल करके मिश्रा को बुलाया और शंकर और मिश्रा के बीच हाथापाई हुई जिसमे मिश्रा को चोट लगी और मिश्रा ने शंकर को सैफ के कर्जे के पैसे भी दिए। इससे हुमा के दिल मे मिश्रा के लिए और हमदर्दी पैदा हो गई। लेकिन अब भी वो सैफ के बारे मे कुछ गलत नहीं सुन सकती थी। अब पढिए आगे..
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 4
Housewife aur panwale ki chudai kahani
हुमा – चुप कर कुछ भी मत बोल सैफ ने आज जो किया बहोत बुरा किया मगर जो भी है जैसे भी है वो मेरे शौहर है, पता नहीं आखिर उनको पैसे की आज कल इतनी क्या ज़रुरत पड़ रही है।
शांता – मालकिन कही उनका बहार किसी और औरत के साथ चक्कर तो नहीं?
हुमा – चुप कर बेकार की बात मत कर।
शांता – आपने कहा न पैसो की इतनी क्या ज़रूरत पड़ रही होगी इसलिए बोली।
हुमा – उनको बहोत टेंशन रहती है बिज़नेस की वजह से इसलिए लिए होंगे मगर ये सच है की आज जो भी हुआ उसके लिए मै उनसे बहोत खफा हूँ।
शाम को शांता चली गयी, घर जाते ही शांता को कॉल आया उसने कॉल लिया।
शान्ता – हेलो बोलो।
सामने मिश्रा था।
मिश्रा – हेलो मेरी जान आज जो हुआ तो क्या सीन बना? मेरी बुलबुल मेरे हाथ में आयी या नहीं?
शान्ता – आयी भी और नहीं भी!
मिश्रा – मतलब?
शांता – अरे क्या बताऊँ वो तो बड़ी सती सावित्री है, जैसा भी है मेरा पति, मेरा देवता है उस टाइप की है वो! मैंने उसको भड़काने की काफी कोशिश की, ताकि आज रात को मिया बीवी के बीच जमकर झगड़ा हो, मगर लगता नहीं दोनों का झगड़ा होगा।
मिश्रा – इन दोनों पति पत्नी के बीच बड़ी दरार बनानी होगी, मेरा आखरी प्लान।
मिश्रा शांता को प्लान समझाता है।
शांता – अब मिश्रा तुम मुझ से ये सब भी करवाओगे? चल कर लूँगी मगर इसके पैसे अलग से लूँगी।
मिश्रा – ठीक है दे दूंगा।
शान्ता – चल रखती हु।
मिश्रा – ठीक है।
अब मिश्रा ने क्या प्लान बनाया है, हम आगे देखेंगे। ऐसे ही दिन गुजर जाता है, हुमा, सैफ का इंतज़ार कर रही थी बहोत गुस्से में, जैसे ही सैफ आये तो वो उस पर बरस पड़ी अब तक सैफ का फ़ोन स्विच ऑफ आ रहा था।
जैसे ही सैफ घर आया हुमा सैफ पर बरस पड़ी किस किस से पैसे लेते हो? कैसे कैसे लोग घर आ रहे है? आज हो हुआ हुमा ने सब सैफ को बताया। हुमा को लगा था की सैफ शॉकड हो जायेगा मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सैफ – ओह्हो तुम भी न छोटी छोटी बातो का पहाड़ बना लेती हो।
हुमा – ये छोटी बात है उस आदमी ने मुझ से ऐसे बातें की, उस नेक इंसान का माथा फूट गया, खून आ गया उसमे और तुम कह रहे हो छोटी बात है कैसे इंसान हो तुम? आज हुमा पहली आप से तुम पर आ गयी थी।
सैफ चिल्ला कर – तो मै क्या करू पैसो को ज़रुरत थी, तो मांग लिए अब मुझे क्या मालूम था वो ऐसा करेगा?
हुमा – और तुमने मोबाइल भी बंद कर रखा था।
सैफ – उसकी बैटरी डाउन हो गयी थी।
हुमा – आप से ये उम्मीद न थी।
सैफ फिर चिल्लाकर – ऐसा कौन सा जुर्म कर दिया मैने?
हुमा को बहोत बुरा लगा वो रोते हुए अपने रूम में चली गयी, सैफ ने भी हुमा को मनाने को कोई कोशिश नहीं की। रात गुजर गयी, सुबह भी दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई, सैफ चला गया। शांता आयी और आज का दिन भी रूटीन गया, दूसरे दिन भी सैफ और हुमा की कोई बात नहीं हुई. सैफ के जाने के बाद जब शांता आयी तो हुमा भी मार्किट जाने के लिए निकली, कुछ दूर जाने के बाद उसने सामने एक शख्स को देखा और उसको देख घबरा गयी वो शख्स शंकर दादा था. हुमा बुर्क़े में थी, शंकर ने उसको पहचाना नहीं मगर एक नज़र देखा ज़रूर।
हुमा घबराते हुए आगे बढ़ी, इत्तेफ़ाक़ से शंकर भी उसके पीछे पीछे चलने लगा, मगर ये इत्तेफ़ाक़ था हुमा को लगा की शंकर उसका पीछा कर रहा है उसने सैफ को कॉल लगाया, सैफ ने कॉल नहीं उठाया। हुमा को बहोत गुस्सा आया उसने दोबारा कॉल किया मगर उसने नहीं उठाया, कुछ दूर चलने के बाद मिश्रा की पान की शॉप हुमा को दिखाई दी, उसको देख उसकी जान में जान आयी वो जल्दी से आगे बढ़ी सामने मिश्रा बैठा रेडियो सुन रहा था। हुमा जैसे मिश्रा की पान की शॉप के करीब पहुंची तो मिश्रा ने हुमा को पहचान लिया। मिश्रा की नज़रे अब बुर्क़े में भी हुमा का हॉट जिस्म पहचान जाती थी।
मिश्रा – अरे भाभी जी आप इतनी दौड़ी दौड़ी? क्या हुआ?
हुमा घबराते हुए – वो वो भाई साहब उस दिन वाला गुंडा मेरा पीछा कर रहा है, मिश्रा ने देखा शंकर दादा आ रहा था मगर कुछ दुरी पर था।
मिश्रा – आप एक काम करिये पीछे जो मेरा छोटा सा कमरा है वहाँ चले जाईये।
हुमा भागते हुए अंदर चली जाती है अंदर वही छोटा सा कमरा जिसमे कुछ पान की शॉप का सामान पड़ा था। यही छोटी सी जगह पर हुमा जाकर बैठ जाती है.
शंकर आता है मिश्रा को देख कर राम राम मिश्रा क्या हाल है?
मिश्रा – ठीक है।
शंकर – उस दिन के लिए माफ़ कर देना! वैसे शंकर दादा किसी से माफ़ी नहीं मांगता मगर तुझ से मांगता हूँ।
मिश्रा कुछ नहीं कहता
शंकर – चल एक बनारसी पान लगा दे।
मिश्रा पान लगाने लगता है।
शंकर – मिश्रा कुछ भी बोलो, साले उस सैफ की जोरू बहोत कड़क माल है।
मिश्रा – शंकर भाई जरा जुबान संभल कर।
शंकर – तुझे क्या हमदर्दी है बे उससे?
मिश्रा – मै उनको दिल से अपना मानता हूँ वो मेरे भाई भाभी है।
शंकर – तेरी भाभी तो क़यामत है।
मिश्रा – अब तुम हद से आगे बढ़ रहे हो।
ये सब बातें अंदर हुमा सुन रही थी और घबरा रही थी.
शंकर – साले तेरी बहोत चलने लगी है अभी बताता हूँ।
शंकर ने मिश्रा का कालर पकड़ लिया, तभी वहाँ एक सिक्योरिटी अफसर वाला आ गया।
सिक्योरिटी अफसर – क्या हो रहा है?
शंकर ने मिश्रा की कॉलर छोड़ते हुए – कुछ नहीं साहब मज़ाक मस्ती चल रही थी।
सिक्योरिटी अफसर – मिश्रा जी हमारा कलकत्ता वाला पान लगाना जरा।
मिश्रा शंकर का पान बनाता है शंकर लेकर चला जाता है, फिर मिश्रा उस सिक्योरिटी अफसर वाले का पान बनाता है और उसके जाने के बाद मिश्रा अपनी पान की दुकान से उसमे झुक कर नीचे चला जाता है और उस कमरे का छोटा सा दरवाज़ा धकेलकर रूम में चला जाता है, अंदर जाकर देखता है तो हुमा ने नक़ाब हटा दिया था उसको देख मिश्रा देखता ही रह जाता है।
हुमा – अब भी घबराई हुई थी।
हुमा – वो गया?
मिश्रा – हाँ आप घबराओ मत भाभी मै हूँ ना।
हुमा – आपको उस घटिया इंसान से उलझने की कोई ज़रुरत नहीं थी.
मिश्रा – कोई आपके बारे में ऐसे गन्दी बातें करे और मै कुछ ना बोलूँ? छि: प्रभु उससे अच्छा तो मुझे डूब मरना चाहिए।
हुमा सोच में चली जाती है, मिश्रा जी को कितनी फ़िक्र है मेरी और मेरे इज़्ज़त की मेरे शौहर को जरा भी फर्क नहीं पड़ा था, उस दिन ये सब सुनकर। तभी मिश्रा की आवाज़ से वो अपनी सोच से बहार आयी।
मिश्रा जी – कहा खो गई?
हुमा – जी कुछ नहीं भाई साहब आप अपनी जान मत खतरे में डालिये हमारे लिए।
मिश्रा – आप कौन सी परायी है भाभी जी, जब भी आप के पास होता हूँ तो लगता नहीं की इस शहर में मै अकेला हु, पता नहीं किस जनम का रिश्ता है आपसे? मै तो नसीब वाला हु इतनी खूबसूरत और अच्छी भाभी मिली मुझे.
हुमा आज पहली बार मिश्रा की बातो से कुछ शर्मा गयी.
हुमा – मुझे मार्किट जाना है।
मिश्रा – रुकिए आप अकेले मत जाईये, सैफ भाई को साथ ले जाइये।
हुमा के चेहरे पर कुछ गुस्से के भाव आए।
हुमा – उनको कहाँ फ़िक्र है मेरी? मेरा कॉल तक नहीं उठाया और आज भी आप ही काम आए।
मिश्रा – सब उपरवाले की मर्ज़ी है जो बार बार आपको मुझ से मिला रहा है, आप बुरा न माने तो मै आता हु आपके साथ मार्केट?
हुमा – मगर आपकी शॉप?
मिश्रा – मेरी शॉप मेरा बिज़नेस आपकी इज़्ज़त से बढ़कर थोड़े ही है, वो गुंडा फिर मार्किट में मिल सकता है.
हुमा की नज़र में हीरो तो था ही मिश्रा, आज उसने जो हमदर्दी अपनापन जताया, उस बात से आज हुमा के दिल में मिश्रा के लिए अलग जगह बन गयी थी। मिश्रा ने अपनी शॉप बंद की और अपनी पुरानी सी बाइक निकाल कर उसपर हुमा को बैठने को कहा, हुमा ने कुछ देर यहाँ वहाँ देखा और बाइक पर बैठ गयी।
आखिर हुमा एक घरेलु औरत थी, उसको अजीब लग रहा था मिश्रा के पीछे बाइक पर बैठने से, मगर कही न कही वो अपने आपको मिश्रा के साथ महफ़ूज़ समझने लगी थी। मगर हुमा ने मिश्रा से कुछ इंच की दुरी बनाकर पीछे लगे स्टैंड को अपने एक हाथ से पकड़ा और दूसरा हाथ बाइक की सीट पर रखा, मिश्रा की गांड की कुछ इंच दुरी पर। मिश्रा ने जैसे बाइक आगे बढ़ाई तो रोड पर एक छोटा सा गड्ढा आया और बाइक उछल गयी और मिश्रा और हुमा की बीच की दूरिया ख़तम हो गयी।
हुमा की बड़ी गांड मिश्रा की गांड से टच हुई, मिश्रा को बड़ी रहत हुई। एक हाथ अब भी पीछे स्टैंड पर रखा था हुमा ने, दूसरा हाथ जो सीट पर था वो अब हुमा की जांघ पर था, हुमा की गांड टच हो गयी थी की मिश्रा ने तभी एक हल्का सा ब्रेक लगाया तो हुमा का हाथ जो उसके जांघ पर था, वो मिश्रा की पीठ पर आ गया, बैलेंस के लिए। साथ ही हुमा का राइट साइड का बड़े बूब्स का हिस्सा भी टच हुआ मिश्रा को। मिश्रा को लगा कुछ सेकंड के लिए रुई जैसा कुछ एहसास उसको हुआ।
मिश्रा की धोती में हलचल हुई तभी मार्किट आ गया, मिश्रा ने बाइक रोकी, हुमा उतर गयी। मिश्रा ने बाइक पार्क की, तब तक हुमा कुछ आगे बढ़ी और मिश्रा की नज़र उसकी बड़ी गांड पर पड़ी, मिश्रा की धोती में लंड ने हलचल मचा दी।
तभी हुमा ने मुड़कर कहा – चलिए भाई साहब।
मगर हुमा ने नहीं देखा की मिश्रा की नजर कहा है।
मिश्रा – भाभी जी आप आगे आगे चलिए मै पीछे पीछे चलता हु आखिर मै आपका बॉडी गार्ड जो हूँ।
हुमा के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी मगर बुर्क़े में वो मुस्कराहट मिश्रा देख नहीं पाया।
हुमा आगे चलती रही उसकी गांड की गोलाईयाँ यहाँ वहाँ होती रही और मिश्रा की नज़र उन पर गड़ी रही। ऐसे ही मार्किट की शॉपिंग हुई और मिश्रा ने हुमा को घर छोड़ दिया, मगर इस बार बाइक पर दोनों टच नहीं हुए। हुमा घर आयी, शांता ने उसको पानी दिया। पानी पीने के बाद हुमा ने पूरी बात शांता को बता दी.
शांता – क्या बोल रही हो मालकिन ऐसा हुआ? हे भगवान अच्छा हुआ मिश्रा जी ने आज भी बचा लिया आपको? मालिक तो पता नहीं किस धुन में रहते है? अगर मिश्रा जी नहीं होते वो गुंडा आपको उठा ले जाता और पता नहीं क्या क्या करता आपके साथ!
ये सुनकर हुमा घबरा गयी और कहा – चुप कर डरा मत।
हुमा – मिश्रा जी का नुकसान भी हुआ होगा उनकी शॉप बंद थी मेरे मार्किट जाकर आने तक।
शांता – मिश्रा जी है ही महान! बस्ती के लोगो की मदद के लिए अपनी पान की दुकान बंद करके निकल जाता है वो इंसान। सच कहु मालकिन जैसी आप नेक है वैसे ही मिश्रा जी भी है आपको उनके जैसा पति मिलना चाहिए था। मालिक तो कुछ भी नहीं मिश्रा जी के सामने।
हुमा – चुप कर मैंने कहा न वो जैसे भी है मेरे शौहर है समझी?
शांता मन में लगता है अब कुछ करना ही पड़ेगा – रात को जब सैफ आया उसको हुमा ने बताया आज क्या हुआ, सैफ ने ज्यादा रियेक्ट न करते हुआ कहा-
सैफ – अरे तुम भी न ख्वामखा डरती हो! शंकर दादा लोगो को पैसे बाँटता है, तो घूम रहा होगा और तुम भी ना।
हुमा – तुम्हारी बीवी के साथ ये सब हुआ और तुम ऐसे बोल रहे हो?
सैफ गुस्से से – तो क्या करू जाकर मार दू उस गुंडे को और खुद फांसी पर चढ़ जाऊँ? तुम भी न राइ का पहाड़ बनाती हो।
हुमा – कम से कम उस फ़रिश्ते इंसान का तो शुक्रिया अदा कर दो, जिसने तुम्हारी बीवी की मदद की।
सैफ – हाँ बोल दूंगा उसको! किया तो कौन सा बड़ा काम कर दिया मैंने भी किया है उसके लिये।
हुमा की नज़र में आज सैफ की इज़्ज़त कुछ कम हो गयी थी और जो कल होने वाला था उसके बाद सैफ की इज़्ज़त हुमा के दिल में ख़तम ही होने वाली थी। हुमा नहीं जानती थी की जिसे वो अपना सबसे करीबी मानने लगी थी, वो दोनों ही उसके असली दुश्मन है- एक शांता और दूसरा मिश्रा। मगर हर हल में मिश्रा को हुमा चाहिए थी। हुमा को पता ही नहीं चला था एक पानवाला उसको ट्रैप में फसा रहा था।
आगे क्या हुआ पढिए अगले पार्ट मे।
Next part ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 6
