मेरा हरामी भाई -1
Bhai ne mujhe chodne ka plan banaya:- मेरा नाम अनामिका है। मैं दिल्ली से हूँ। अपने बारे में बता दूँ, मैं बहुत ही मस्ती करने वाली लड़की हूँ। मुझमें सबसे ज्यादा अट्रैक्टिव बात है मेरी गाँड। सीधे खड़े रहने पर भी मेरी गाँड अलग से निकली हुई दिखाई देती है। एकदम कर्वी बॉडी है मेरी। नेचर की बात करूँ तो सेक्स की बातें करना बहुत पसंद है।
उन दिनों मैं जयपुर में पढ़ रही थी। हमारा घर दिल्ली में है। मैं 3-4 महीनों में घर आया करती थी वेकेशन्स में। मेरा शुरू से ही मेरे जीजा (कजिन के हस्बैंड) से काफी इंटरैक्शन था। पहले तो मैं उनसे नॉर्मल चैट किया करती थी मोबाइल से। फिर धीरे-धीरे बातें बढ़ती गईं और फिर हम गंदी बातें भी करने लगे। हर रात 11-12 हम फोन पे बात करते। वो मेरी तारीफ करते रहते और मैं खुश होकर उनसे प्यार भरी बातें करती रहती। वो मुझसे पूछ लिया करते—
Bhai ne mujhe chodne ka plan banaya
जीजा: तुम्हें लंड की सवारी पसंद है क्या?
और मैं हँसके कह दिया करती—
अनामिका: आपका लंड तो एक बार जरूर लेना चाहूँगी।
हमारा तो फिक्स हो चुका था कि इस बार जब मैं वेकेशन्स में आऊँगी तब पक्का सेक्स करेंगे। कब और कैसे एडजस्ट करेंगे वो तो बाद की बात थी।
जून में मैं घर आई। मुझे आए कुछ ही दिन हुए थे कि जीजा मॉम-डैड से मिलने के बहाने घर आ गए। वो मुझे देखके बहुत खुश हो रहे थे, आँख मार रहे थे, अपने लंड की तरफ इशारा कर रहे थे और मैं भी बहुत खुश हो रही थी। उस दिन तो बस एक बार जब मैं उन्हें खाना देने गई तो उन्होंने मेरी गाँड पे हाथ फेर दिया। शाम तक फिर वो चले गए। रात को उनका मैसेज आया—
जीजा: आज तुम्हारे पापा ने बताया है कि 4 दिन बाद वो गाँव जा रहे हैं किसी शादी में।
अनामिका: हाँ प्लान तो कर रहे थे पर जाना पक्का नहीं था… पर अब शायद श्योर हो गया हो उनका जाना।
जीजा: तो मैं उस दिन आऊँगा।
अनामिका: मॉम-डैड तो चले जाएँगे पर दीपू (मेरा भाई) तो घर पर ही होगा।
जीजा: कोई बात नहीं। वो हम एडजस्ट कर लेंगे। किसी काम से भेज देंगे या अलग रूम में आ जाएँगे।
मैंने भी खुश होकर हाँ कह दिया।
जीजा: जानू मैं तो बस इंतजार कर रहा हूँ उस दिन का। आज इतने दिनों बाद तुम्हें देखने के बाद तो और भी तड़प उठा हूँ मैं। बहुत ही सेक्सी दिख रही थी आज तुम।
अनामिका: आप चिंता मत करो। आपके लंड की प्यास बुझाने का वादा करती हूँ मैं।
उस दिन सुबह-सुबह ही मॉम-डैड चले गए। 11 बजे बेल बजी। मैं बहुत खुश हुई। दीपू को डोर खोलने भेजा। उस दिन मैंने पिंक सूट पहना था। बड़े गले का सूट, पीछे चेन है उसमें और गाँड से एकदम टाइट है कुर्ता। बहुत सेक्सी दिखती हूँ मैं उस ड्रेस में। जान-बूझकर ब्रा-पैंटी भी नहीं पहनी थी मैंने। बाल भी मैंने खोलके आगे की ओर कर रखे थे। दीपू आया उनके साथ जीजा थे। मैंने उसे पानी लाने को कहा। वो पानी लाने गया और हम किस करने लगे। लेकिन कंट्रोल करते हुए हम रुके और सोफे पर बैठ गए। मैंने फिर दीपू को कह दिया—
अनामिका: तू रूम पे जा। जीजाजी मुझे पढ़ाने आए हैं (कामचलाऊ से मैथ्स के टीचर थे वो)। डिस्टर्ब मत करना हमें।
वो वहाँ से चला गया अपने रूम में। हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। बौखलाए हुए थे हम दोनों। मैंने तुरंत उनके लंड निकाल लिया और उसे हिलाने लगी। वो सूट के ऊपर से ही मेरे चूचे दबा रहे थे। थोड़ी देर तक हम एक-दूसरे से चिपटे हुए कुछ-कुछ करते रहे। अचानक से वहाँ दीपू आ गया।
हम दोनों बुरी तरह घबरा गए। जब वो आया तब जीजा सोफे पर बैठे थे। मैं उनके एक पाँव पे बैठी। मैंने कुर्ता उतारके साइड में गिरा रखा था। हम दोनों किस कर रहे थे। उनका एक हाथ मेरी कमर पे था और एक हाथ से मेरी चूची मसल रहे थे। मैंने एक हाथ उनकी गर्दन में रखा हुआ था और एक हाथ से उनका लंड खूब जोर-जोर से हिला रही थी। हमें तो एक बार पता भी नहीं चला था कि वो आ गया है। हम किस करने लगे हुए थे। फिर जब मैं लंड चूसने के लिए झुकने लगी तब हमें वो दिखाई दिया। हम बहुत घबराए हुए थे। वो हमें गुस्से से देख रहा था। गुस्से में उसने जीजा को कहा—
दीपू: निकल ले यहाँ से नहीं तो पिट जाएगा।
मैंने भी उन्हें जाने को कहा। फिर दीपू वहाँ से चला गया। मैंने जीजा को समझाया—
अनामिका: कुछ दिनों तक कोई फोन और मैसेज वगैरह मत करना।
उनके जाने के बाद मैं दीपू के पास गई। थोड़ी देर तक हम चुप ही बैठे रहे। फिर मैं बोली—
अनामिका: प्लीज घर में मत बताना।
तो गुस्से से बोला—
दीपू: इतनी तो अक्ल है मुझमें। बात बढ़ाने का शौक नहीं है मुझे।
और गुस्से में मुझे डाँटने लगा। शाम तक हम चुप ही रहे। फिर धीरे-धीरे हम नॉर्मल हो गए 2-4 दिन में।
फिर कुछ दिनों बाद मैं ड्राइंग रूम में बैठके पढ़ रही थी। दीपू बार-बार इधर-उधर घूमे जा रहा था। हर दो मिनट में वो ड्राइंग रूम में आ जाता और कुछ देर इधर-उधर घूमता रहता। पहले तो मैंने नोटिस नहीं किया पर बाद में देखा कि उसने बॉक्सर्स पहन रखे थे और उसका लंड एकदम सीधा खड़ा था। बॉक्सर में बहुत बड़ा तंबू बना रखा था उसके लंड ने। उसने मुझे देखते हुए देख लिया। तो वो फिर मेरे आस-पास ही घूमने लगा। मैं इग्नोर कर रही थी। वो लंड पे हाथ भी रख रहा था। पर मैं ध्यान ना देने की कोशिश कर रही थी। फिर मुझे गुस्सा सा आया तो मैंने उसे कह दिया चिल्लाके—
अनामिका: क्या है??
तो वो डरके बोला—
दीपू: कुछ नहीं।
और चला गया वहाँ से। उसने तो रूटीन बना लिया था। जब भी मम्मी-पापा बाहर सैर करने जाते वो आ जाता अपना लंड खड़ा करके। मैं परेशान हुए जा रही थी उससे।
एक दिन मैं अपने दोस्त के घर से आई तो वो मेरे लैपटॉप पे बैठा कुछ कर रहा था। मैंने इग्नोर कर दिया। कुछ देर बाद उसने मुझे बुलाया। मैं गई तो उसने पूछा—
दीपू: ये क्या है?
लैपटॉप पे पॉर्न मूवी चल रही थी। मैं चिल्लाके बोली—
अनामिका: बेशरम ये क्या दिखा रहा है तू।
तो वो बोला—
दीपू: अच्छा बेशरम मैं हूँ या तू जो उस दिन जीजा का लंड हाथ में लिए बैठी थी।
मैं कुछ नहीं बोली और गुस्से से वहाँ से चली गई। उस दिन शाम को उसने मुझसे कहा—
दीपू: मेरे दोस्त के पास बहुत अच्छी पॉर्न मूवीज हैं। लेके आऊँ क्या? बहुत पसंद आएगी तुझे।
मैं बहुत गुस्सा हो गई।
दीपू: गुस्सा क्यों हो रही है। खुश रह…… साथ बैठके देखेंगे ना। अब शर्म क्या है एक-दूसरे से। मैंने तो तुझे नंगा देख ही लिया है। तू भी मेरा लंड देख ले।
और उसने अपना लंड बॉक्सर से बाहर निकाला। एकदम सख्त खड़ा था उसका लंड। कम से कम 7 इंच का था। मैं गुस्सा होकर वहाँ से चली गई। तो वो पीछे-पीछे आया और बोला—
दीपू: मैं ये थोड़ी ना कह रहा हूँ कि मेरा लंड चूस…… मैं तो बस कह रहा हूँ कि अब पर्दा क्या रखना…… मस्त रहेंगे दोनों…… साथ बीएफ देखेंगे…… गंदी-गंदी बातें करेंगे और खुश रहेंगे।
तो मुझे कुछ समझ नहीं आया। उस सिचुएशन से भागने के लिए मैंने कह दिया—
अनामिका: थक गई हूँ। नींद आ रही है। सोने दे मुझे।
अगले दिन से तो वो एकदम खुल गया था। गंदे-गंदे जोक सुनाता मुझे…… और मेरे सामने ही मुठ मारने लगता…… सीधा-सीधा उसने मुझे चुदाई के लिए तो नहीं कहा पर मैं जानती थी इंटेंशन्स तो ये ही थीं उसकी।
आगे की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में। अगले पार्ट में आप लोगों को बताऊँगी किस तरह उसने मुझे अपने लंड पे बिठा ही लिया।
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