Bahan ki chudai ki kamukta story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि दीदी मुझसे चुदवाने के लिए मेरे रूम पर या गई थी और मैंने उनको ऊपर से नंगा भी कर दिया था । फिर मै नीचे से नंगा हुआ और मैंने अपना लंड दीदी के मुंह के सामने कर दिया। अब पढिए आगे ।
Part 4 यहाँ पढ़ें => बहन को चोदने की तलब – 4
Bahan ki chudai ki kamukta story
दीदी ने मुझे घूरते हुए देखा, जब मैंने उसको अपना लंड मुँह में लेने को कहा. दीदी ने मुझे मना किया तो मैंने उसको साफ़ बता दिया की बिना उसके मुँह में गए मेरा लंड उसकी चूत में नहीं जायेगा. तो उसके पास अब कोई ऑप्शन नहीं था. इस बात से दीदी को थोड़ी दिक्कत सी हुई फिर हंस कर उसने कहा-
दीदी: अरे नाराज़ क्यों हो रहा है? मैं तो बस इसलिए कह रही थी की तुम्हारा फर्स्ट टाइम है. तो कही मेरे मुँह में ही न निकल जाये.
और उसने मेरी तरफ टौन्टिंग वाली स्माइल की. इसको सुन कर तो मेरी झांटे फायर हो गयी. दिल में आया की अब तो पहले अपने लंड का पानी उसके मुँह में निकाल कर उसको पिलाता हूँ और फिर उसको चोदूँगा. तब इस साली को पता चलेगा. पर वक़्त की नज़ाक़त (कायरा का मूवी टाइम और वीडियो कैमरा की बैटरी टाइम) को देख कर मैं अपने मन की बात को पी गया.
फिर थोड़ी मुस्कान के साथ कहा “नहीं निकलेगा दीदी इतना तो भरोसा है मुझे अपने इसपे.” (और फिर अपना लंड उसके होंठो के सामने हिलाने लगा)
मै: अब जल्दी भी करो कही मेरे रूममेट्स न आ जाये. उनके हिसाब से तो आज यहाँ प्रियंका चुदने वाली थी. पर यहाँ पे तो… इसलिए अब जल्दी भी करो.
दीदी: ओके. –
ये बोल कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उस पर अपनी जुबान घूमा ने लगी. आह… आह… क्या मस्त एहसास था. फिर मैंने थोड़ा प्रेस करके अपने लंड को उसके मुँह में डाला जिसको अब वो अंदर-बाहर कर रही थी. उसको ऐसे चूसता हुए देख मैं जोश में आ गया और थोड़ी पोजीशन को ठीक करके उसके मुँह को ही चोदने लगा. पूरा गीला लंड बाहर निकाल के वापस उसके मुँह में डाल कर उसके गले तक उतारता. कई बार तो सांस न आने की वजह से वो छटपटाती और खांसती भी.
उसकी आँखों से आंसू भी निकल आये. मैंने देखा की मजबूरी इंसान से क्या-क्या करवाती है. आज मेरी शादी-शुदा फॉरेन रिटर्न दीदी को ये मजबूरी मेरा लंड चुसवा रही थी. कुछ देर बाद फिर मुझे होश आया और अपना लंड बाहर निकाल के दीदी को खड़ा किया. फिर मैं उसके बूब्स को देखने लगा.
दीदी: क्या देख रहे हो कभी बूब्स देखे नहीं क्या?
मै: देखे तो है पर तुम्हारे अब तक नहीं देखे. बहुत ही कम भाइयों को ये मौका मिलता है अपनी सिस्टर के शरीर से उसकी ब्रा को हटाने का. (और मैंने ब्रा को निकाल फेंका) वाह! क्या मस्त गोर मुलायम बूब्स थे. बिना ब्रा के सपोर्ट के भी अभी तक टाइट थे. शायद दीदी उनको रोज़ मेन्टेन करती होंगी. मैं सीधे अपने मुँह में एक बूब को दबा के उसको चूसने लगा जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ को लिपट जाता है वैसे ही.
दीदी भी मेरे बालों को सहला रही थी. आह चूसो इसको आह पूरे पी जाओ. मैंने फील किया की दीदी यहाँ आयी तो मजबूरी में थी पर एन्जॉय तो वो भी कर रही थी). मैंने उसको चूसते हुए अब उसके लिप्स को चूसने लगा. एक दम वाइल्ड वाली स्मूचिंग करते हुए मैंने उसको बेड पे पटक दिया. मैं हर पोजीशन कैमरा के एंगल को ध्यान में रख कर दीदी को उसमे रखता. सिचुएशन ये थी की मैं नीचे से और दीदी ऊपर से नंगी थी. तो मैंने खड़े हो कर अपने बाकी के कपडे निकाल दिए और दीदी की सलवार को भी उतार दिया.
दीदी ने अपनी आँखें बंद कर ली थी. अब वो बस पैंटी में थी जो गीली हो चुकी थी. ये देख कर मेरे चेहरे पे स्माइल आ गयी और मैं से ये बोझ हट गया की दीदी मुझसे आज जबरन या मजबूरी में चुदेगी.
मै: आँखें क्यों बंद कर दी तुमने?
दीदी: मुझे शर्म सी आ रही है.
मै: तो क्या तुम पूरी चुदाई में आँखें बंद रखोगी?
दीदी: नहीं जब तुम उसको मेरे अंदर डालोगे तब तुम्हारे हर धक्के के साथ मेरी शर्म भी जाती रहेगी.
मै: हम्म पर इसके पहले एक और काम बाकी है और मैं दीदी की पैंटी को खींचने लगा). वो सुख जो फॉरेन में तो कॉमन है. पर इंडिया में बहुत कम औरतों को ये नसीब होता है. तुम्हे जीजू से मिला, ये पता नहीं पर आज तुम इसकी हक़दार हो.
दीदी (आँखें खोल कर): क्या?
मै: तुम्हारी चूत की चुसाई.
और मैं झुक कर दीदी की चूत के लिप्स को चूसने लगा. मैं उसकी चूत के दाने (क्लाइटोरिस) को भी मुँह में लेकर चूसने लगा. दीदी तो जैसे स्वर्ग में चली गयी थी. वो मेरे बालों को सहलाने लगी.
दीदी: आह आह भाई चूस अच्छे से. तेरे जीजू ने तो कभी इसका स्वाद नहीं चखा. आह कब से मेरी ख्वाहिश थी की कोई चूसे इसको. आज वो पूरी हो गयी. आह! ये सुन कर मैं और भी जोश में आ गया और दीदी की चूत में अपनी जुबान डाल कर उसको चोदने लगा. और कुछ देर में दीदी की चूत भी अच्छे से गीली हो गयी और दीदी ने कहा-
दीदी: अब में काम पे आजा भाई. अब रहा नहीं जाता. डाल दे अंदर.
मै: ओके दीदी.
और मैं खड़ा हो कर पास के ड्रावर से कंडोम निकाल के ले आया. मुझे पता था की दीदी मुझको कंडोम पहनने से रोकेगी. क्यूंकि मैंने उसको मैसेज में अपने भाई से बिना कंडोम के सेक्स की शर्त रखी थी.)
दीदी: पूरी तैयारी पहले से की है तूने लगता है.
मै: हां दीदी वो रखना पड़ता है. एक तो प्रेगनेंसी का खतरा नहीं रहता और अपनी भी सेफ्टी. आज कल की लड़कियों का क्या भरोसा?
दीदी: तो तुझे मैं तेरी गर्लफ्रेंड जैसी चालु दिखती हूं जो तुझे मुझे फ़क करने के लिए कंडोम चाहिए हम्म?
मै: अरे ऐसी बात नहीं. मुझे लगा तुम इसके लिए इंसिस्ट करोगी इसलिए मैंने पहले निकाल दिया. क्यूंकि कही आपको प्रेगनेंसी न रह जाये.
दीदी: बुद्धूमल प्रेगनेंसी को रोकने के लिए टेबलेट्स भी आती है. और बिना कंडोम के चुदवाने में ही असली मज़ा आता है दोनों को. और मुझे तेरे लंड से ज़्यादा उसके पानी में इंटरेस्ट है.
मै: मतलब?
दीदी: तू पहले डाल फिर बताती हु.
और दीदी ने खुद मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत के गेट पे रखा. तो मैंने भी देर न करते हुए उसको अंदर धक्का लगाया. चूत गीली होने की वजह से लंड अंदर जा रहा था पर चूत के दबाव से लगा की दीदी इस साइज को फर्स्ट टाइम ले रही थी.
दीदी तकिये को दबाते हुए अपने होंठ भींच रही थी. उसके चेहरे पे साफ़ दिख रहा था की ये साइज उसके लिए नया था. और वो uncomfortable लग रही थी.
मै: दीदी तुम्हे तकलीफ हो रही हो तो निकाल दू क्या? अभी आधा ही गया है.
दीदी: तू रुक मत और इसको जल्दी ख़तम कर.
तो फिर मैंने भी और ज़्यादा न सोचते हुए बाकी का लंड भी अंदर प्रविष्ट कर दिया. पूरा अंदर लेटे ही दीदी हांफने लगी. कुछ देर तक मैं ऐसे ही रहा. जब दीदी थोड़ी कम्फर्टेबल हुई और मुझे हलकी स्माइल देकर उसने मुझे सिग्नल दिया. तो मैंने धक्के लगाने शुरू किये. शुरू में सलौली मैं अपने लंड को आधा ही बाहर और अंदर करने लगा. और हर धक्के के साथ दीदी की आह निकल जाती.
आगे की स्टोरी पढ़ने के लिए अगले भाग का इंतज़ार करें।
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