नौकर का मोटा लंड देख मालकिन की चूत पनिया गई
naukar ne ki malkin ki chut chudai:- नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम राधिका है और मेरी उम्र 34 साल है। फिगर 36-30-38 है। मैं एक अच्छे खानदान से हूं। मेरे पति का नाम विक्रम है। वो एक बड़े मल्टीनेशनल कंपनी में हाई पोस्ट पर हैं। उनका काम ऐसा है कि महीने में 15-20 दिन विदेश में रहना पड़ता है। हमारा घर शहर के सबसे पॉश इलाके में है।
घर में काम करने के लिए हमारे पुराने नौकर रामू काका थे, लेकिन वो बीमार पड़ गए और फिर उनको हमने उनके गांव भेज दिया। उनकी जगह उनके बेटे राहुल को रख लिया गया। राहुल की उम्र 24 साल है। वो पढ़ा-लिखा है (बीए किया है), लेकिन परिवार की मजबूरी की वजह से नौकरी कर रहा है। वो बहुत मेहनती, शांत रहने वाला और ईमानदार लड़का है। घर के सारे काम अच्छे से करता है — सफाई, खाना, बागवानी, गाड़ी चलाना सब।
naukar ne ki malkin ki chut chudai
जब भी मेरे पति के विदेश तो उनके बाद घर में मुझे बहुत अकेलापन लगता था। रातें लंबी लगतीं थी और मैं अक्सर वाइन पीकर स्विमिंग पूल के किनारे बैठी रहती थी। कई बार तो मेरा मन होता कि काही बाहर किसी से चक्कर चला लूँ, लेकिन बदनामी के डर से मै कभी ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर पाई।
एक रात मैं स्विमिंग पूल में तैर रही थी। रात के 11:30 बज चुके थे। राहुल पूल साफ करने आया। मैंने हल्का बिकिनी पहना हुआ था। मैंने उसे देखकर कहा, “राहुल, तुम कल सुबह साफ करना।” लेकिन वो बोला, “मेम साहब, आज बाहर आ जो मै आज ही कर लूंगा, कल फिर घर का काम भी करना है।”
मैं पूल से निकली। मेरा शरीर गीला था। राहुल ने अपना ट्राउजर उतारा और अपने बरमूडा मे ही पूल की सफाई करने लगा। ये पहली बार था जब मै राहुल को बरमूडा मे देख रही थी। जब वो सफाई के लिए झुका तो बरमूडा मे से उसका लंड बाहर दिखने लग गया। मै हैरान रह गई कि भला बिना खड़े ही किसी का लंड बरमूडा मे से कैसे झांक सकता है। राहुल का लंड बहुत लंबा और मोटा था। एक पल के लिए मेरा गला सूख गया और बदन मे झुरझुरी सी दौड़ गई।
मैं चुपचाप वहाँ से चली आई, लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आई। राहुल का वो मोटा लंड बार-बार आंखों के सामने आ रहा था। मेरे पति का लंड उससे काफी छोटा था। मैंने कई सालों बाद किसी दूसरे मर्द के लंड को देखा था। मैंने पहली बार राहुल को उस नजर से देखा।
मैंने बिस्तर पर करवट बदली। मेरे बूब्स भारी हो रहे थे। मैंने अपना नाइट सूट ऊपर किया और अपने बूब्स को सहलाने लगी। मेरे निप्पल्स कड़े हो गए थे। फिर मै नीचे हाथ ले गई और अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से रगड़ने लगी। राहुल के लंड का वो सीन याद करके मैं तेजी से उंगलियां चला रही थी। “आह्ह्ह… राहुल…” मेरे मुंह से अनजाने में निकल गया। मैं दो बार झड़ गई, लेकिन फिर भी मन जैसे तृप्त नहीं हुआ था।
सुबह राहुल अपना काम कर रहा था। वो वफादार नौकर था। लेकिन मेरे मन में अब एक नई आग लग गई थी। वो वफादार नौकर की तरह चाय बना रहा था, बागवानी कर रहा था। उसकी नजर में कोई गलत इरादा नहीं था। वो मुझे “मेम साहब” कहकर पुकार रहा था। लेकिन मेरी नजर अब उस पर अलग तरह से पड़ रही थी। अब मैं जानबूझकर उसके सामने हल्के कपड़े पहनने लगी।
घर में रहते हुए मैं अब ज्यादातर शॉर्ट नाइट सूट या लूज टॉप और शॉर्ट्स पहनती। जब वो कमरे में सफाई करता तो मैं जानबूझकर उसके सामने बैठ जाती।
एक दिन मैं स्विमिंग पूल में तैर रही थी। राहुल पूल के किनारे खड़ा था। मैंने जानबूझकर उसके सामने से निकलते हुए अपना बिकिनी का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सरका दिया। मेरे एक बूब्स का निप्पल थोड़ा दिख गया। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और शर्म से सिर झुका लिया। वो बोला, “मेम साहब, मैं पूल साफ कर दूं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां राहुल, कर दो।”
उस दिन शाम को मैं जिम में वर्कआउट कर रही थी। मेरा टॉप पसीने से भीग गया था। राहुल पानी लेकर आया। उसकी नजर मेरे भीगे बूब्स पर अटक गई। मैंने देख लिया, लेकिन कुछ नहीं कहा।
राहुल अभी भी पूरी तरह वफादार था। वो कभी गलत नजर से नहीं देखता था। लेकिन मैं अब उसे देखकर खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर मैं राहुल को याद करके मुठ मारने लगी थी। कभी-कभी मैं जानबूझकर उसे बुलाती और उसके सामने हल्के कपड़ों में घूमती।
एक रात बिजली चली गई। पूरा घर मे अंधेरा छा गया था। मैंने राहुल को बुलाया। वो टॉर्च लेकर आया। मैंने जानबूझकर हल्का नाइट सूट पहना हुआ था। सूट का एक स्ट्रैप सरक गया था। मेरा एक बूब्स आधा बाहर था। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और बोला, “मेम साहब, मैं जनरेटर ऑन कर दूं?”
Naukar aur malkin ki sex kahani
मैंने कहा, “राहुल, तुम बैठो। अकेले डर लग रहा है।” उसने मेरे पास बैठकर बातें शुरू कर दीं। उसकी नजर बार-बार मेरे भीगे बूब्स पर जा रही थी। मैंने जानबूझकर स्ट्रैप और सरका दिया।
राहुल शर्म से सिर झुकाए बैठा था। वो वफादार नौकर की तरह व्यवहार कर रहा था। लेकिन मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
राहुल मेरे पास बैठा था। अंधेरे में सिर्फ उसकी टॉर्च की रोशनी थी। मैं जानबूझकर नाइट सूट का स्ट्रैप और सरका दिया था। मेरा एक बूब्स अब पूरा बाहर था। राहुल की नजर बार-बार वहां जा रही थी, लेकिन वो तुरंत नजर हटा लेता था। वो बहुत शर्मीला और वफादार था। उसने कहा, “मेम साहब, मैं जनरेटर ऑन कर दूं? अंधेरा है, आपको तकलीफ हो रही होगी।”
मैंने धीरे से कहा, “राहुल, अभी मत करो। तुम बैठो। अकेले डर लग रहा है।” मैंने जानबूझकर उसके और करीब बैठ गई। मेरा घुटना उसके घुटने से टच हो रहा था। राहुल थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन हटा नहीं।
मैंने बातें शुरू कीं। “राहुल, तुम्हें यहां काम करते हुए कितना समय हो गया?” वो बोला, “मेम साहब, तीन महीने हो गए। आप और साहब बहुत अच्छे हैं।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम भी बहुत अच्छे हो राहुल। इतने जवान लड़के हो, फिर भी इतनी इज्जत से काम करते हो।”
बातों-बातों में मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। उसका शरीर सख्त था। मैंने हल्का दबाव डाला। राहुल शर्म से सिर झुका लिया। मैंने और करीब सरककर कहा, “राहुल, तुम्हें कोई गर्लफ्रेंड है?” वो बोला, “नहीं मेम साहब।”
उस रात मैं काफी देर तक उसके पास बैठी रही और बातें करती रही। जब वो गया तो मैं बिस्तर पर लेटकर राहुल को याद करके मुठ मार रही थी। उसका लंड, उसका शरीर, उसकी शर्म — सब याद आ रहा था। मैं तीन बार उसके लंड को याद करके झड़ गई।
सुबह राहुल सामान्य था। वो चाय बना रहा था। मैं जानबूझकर शॉर्ट नाइट सूट पहनकर किचन में गई। सूट बहुत छोटा था, मेरी जांघें और बूब्स का बड़ा हिस्सा दिख रहा था। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली। वो बोला, “मेम साहब, चाय तैयार है।”
मैंने जानबूझकर झुककर चाय ली। मेरा क्लेवेज साफ दिख रहा था। राहुल की सांस तेज हो गई, लेकिन वो कुछ नहीं बोला। वो वफादार नौकर बना हुआ था।
दिन भर मैं उसे बार-बार बुलाती। कभी पानी मांगती, कभी कुछ सामान उठवाती। हर बार उसके करीब जाती। शाम को मैं जिम में वर्कआउट कर रही थी। पसीना बह रहा था। राहुल पानी लेकर आया। मैंने जानबूझकर उसे रोककर बात की। मेरा टॉप भीगा हुआ था। मेरे बूब्स साफ दिख रहे थे। राहुल की नजर अटक गई। वो शर्म से लाल हो गया।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल, तुम शर्माते क्यों हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।” वो बोला, “मेम साहब, आप बहुत अच्छी हैं।”
उस रात मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। राहुल का वो लंड, उसकी शर्म, उसकी नजरें — सब याद आ रहा था। मैंने अपना नाइट सूट ऊपर किया और बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगी। फिर उंगलियां चूत में डाल दीं। “राहुल… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड…” मैं फुसफुसा रही थी। मैं कई बार झड़ गई, लेकिन मन था की मान ही नहीं रहा था।
अब मैं राहुल को देखकर खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। वो वफादार नौकर था, लेकिन मैं उसकी मालकिन बनकर उसकी भूख मिटाना चाहती थी।
राहुल अब मेरी नजर में एक साधारण नौकर नहीं रह गया था। हर बार जब वो मेरे सामने आता, मेरी नजर उसके लंड पर चली जाती। एक दिन मैं पूल में तैर रही थी। राहुल पूल के किनारे खड़ा था। मैंने जानबूझकर उसके सामने से निकलते हुए अपना बिकिनी का ऊपरी हिस्सा थोड़ा सरका दिया। मेरे बूब्स का बड़ा हिस्सा दिख गया। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली और शर्म से सिर झुका लिया। वो बोला, “मेम साहब, मैं पूल साफ कर दूं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां राहुल, कर दो। लेकिन पहले ये पानी का ग्लास ले आओ।” जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर झुकी। मेरे भीगे बूब्स उसके सामने थे। राहुल की सांस तेज हो गई, लेकिन वो कुछ नहीं बोला।
एक दिन मैंने जानबूझकर राहुल को बुलाया। मैंने हल्का नाइट सूट पहना हुआ था। सूट बहुत छोटा था। मैं बेड पर लेटी हुई थी। राहुल आया तो मैंने कहा, “राहुल, मेरी पीठ में दर्द हो रहा है। थोड़ा मालिश कर दो।”
राहुल हिचकिचाया, लेकिन बोला, “जी मेम साहब।” वो मेरे पास आया। मैंने सूट का ऊपरी हिस्सा नीचे सरका दिया। मेरी पूरी पीठ नंगी थी। राहुल ने तेल लगाकर मालिश शुरू की। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैं “आह्ह्ह…” कर रही थी।
धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। राहुल का हाथ मेरी गांड के पास आ गया। वो काँप रहा था। लेकिन वो वफादार था, उसने कुछ नहीं किया।
मैंने कहा, “राहुल, और नीचे भी कर दो।” उसका हाथ मेरी गांड पर आ गया। मैंने हल्का-हल्का कराहना शुरू कर दिया। राहुल की सांस तेज हो गई थी।
Naukar ne ki memsad ki chudai
अब मेरी तड़प दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। राहुल का वो मोटा लंड, उसकी शर्मीली नजरें, उसका सख्त शरीर — सब मेरे दिमाग पर छा गया था। मैं अब उसे देखकर खुद को रोक नहीं पा रही थी।
एक दिन मैंने जानबूझकर राहुल को अपने बेडरूम में बुलाया। मैंने एक हल्का सा शॉर्ट गाउन पहना हुआ था, जिसके नीचे कुछ नहीं था। राहुल आया तो मैं बेड पर लेटी हुई थी। मैंने कहा, “राहुल, मेरी टांगों में बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा मालिश कर दो।”
राहुल हिचकिचाया, लेकिन बोला, “जी मेम साहब।” वो मेरे पैरों के पास बैठ गया। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें थोड़ी फैला दीं। मेरा गाउन ऊपर सरक गया था। मेरी जांघें और चूत का हिस्सा साफ दिख रहा था। राहुल की सांस तेज हो गई। उसने तेल लगाकर मेरी टांगों की मालिश शुरू की।
उसके हाथ मेरी जांघों पर घूम रहे थे। मैं “आह्ह्ह राहुल… और ऊपर…” कह रही थी। उसका हाथ मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर आ गया। वो काँप रहा था। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें और फैला दीं। मेरा गाउन अब पूरी तरह ऊपर था। मेरी चूत उसके सामने थी।
राहुल की उंगलियां काँप रही थीं। वो मालिश कर रहा था, लेकिन उसकी नजर मेरी चूत पर अटक गई थी। मैंने धीरे से कहा, “राहुल, तुम डर क्यों रहे हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।”
उसने कुछ नहीं कहा। बस मालिश जारी रखी। लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसनें मालिश खत्म की और वहाँ से चला गया। मै उसके कंट्रोल को देखकर हैरत मे थी और खुश भी थी कि जब इसका मोटा लंबा लंड मेरी प्यासी चूत मे जाएगा तो यकीनन मेरी बरसों की प्यास को बुझा देगा।
दूसरे दिन मैं जानबूझकर नहाने के बाद सिर्फ टॉवल लपेटकर बाहर आई। राहुल हॉल में सफाई कर रहा था। मैंने जानबूझकर टॉवल को थोड़ा ढीला छोड़ दिया। जैसे ही मैं उसके पास से गुजरी, टॉवल सरक गया। मेरे दोनों बूब्स और चूत एक पल के लिए पूरी तरह नंगी हो गई।
राहुल ने देख लिया। उसकी आँखें फैल गईं। वो तुरंत नजर हटा कर बोला, “माफ कीजिए मेम साहब…” और तेजी से दूसरी तरफ चला गया।
मैंने टॉवल ठीक किया और मुस्कुरा दी। उस रात मैं बिस्तर पर लेटकर राहुल को याद करके बहुत जोर से मुठ मार रही थी। “राहुल… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड… मुझे चाहिए…” मैं फुसफुसा रही थी। मेरी चूत मे जैसे सैलाब आ गया हो, वो इतना पानी छोड़ रही थी। अब मुझसे एक पल भी रुकना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मुझे हर टाइम बस राहुल का बड़ा मोटा लंड मेरी चूत मे घुसा हुआ नजर आ रहा था।
तीसरे दिन मैंने राहुल को अपने बेडरूम में बुलाया। मैंने कहा, “राहुल, मेरी पीठ में दर्द हो रहा है। ऑयल लगा दो।” मैंने अपना गाउन उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेट गई। राहुल ने तेल लगाकर मालिश शुरू की।
उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। राहुल का हाथ मेरी गांड के पास आ गया। मैंने धीरे से कहा, “राहुल, और नीचे भी करो।”
उसका हाथ मेरी गांड पर आ गया। वो काँप रहा था। मैंने कहा, “राहुल, तुम डर मत। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं।”
राहुल कुछ नहीं बोला। बस मालिश करता रहा। लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसका लंड उसकी पैंट में खड़ा हो गया था। मैंने देख लिया। वो बहुत मोटा था।
राहुल की मालिश के बाद मेरा मन और बेचैन हो गया था। उसकी उंगलियों का स्पर्श मेरी गांड पर अभी भी महसूस हो रहा था। मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। राहुल कमरे से बाहर चला गया था, लेकिन मेरी चूत अभी भी गीली थी। मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। राहुल की शर्मीली नजरें, उसके काँपते हाथ, उसका सख्त शरीर — सब याद आ रहा था। मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। “राहुल… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड… मुझे चाहिए…” मैं फुसफुसा रही थी। उस रात मैं चार बार झड़ गई, लेकिन फिर भी संतुष्टि नहीं हुई।
अगले दिन मैंने एक नया प्लान बनाया। मैं जानबूझकर घर में हल्के-हल्के कपड़े पहनने लगी। एक दिन मैंने एक बहुत छोटा सा शॉर्ट गाउन पहना, जिसके नीचे कुछ नहीं था। राहुल हॉल में झाड़ू लगा रहा था। मैं जानबूझकर उसके सामने से गुजरी। गाउन का नीचे वाला हिस्सा इतना छोटा था कि मेरी गांड का निचला हिस्सा दिख रहा था। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली। उसका चेहरा लाल हो गया। वो बोला, “मेम साहब, मैं गार्डन में काम कर आऊं?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल, पहले ये पानी का ग्लास ले आओ।” जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर सोफे पर बैठ गई और अपनी टांगें थोड़ी फैला दी। मेरा गाउन ऊपर सरक गया। मेरी चूत का हिस्सा साफ दिख रहा था। राहुल ग्लास रखते हुए काँप रहा था। उसकी नजर एक पल के लिए वहां अटक गई। फिर वो तुरंत दूसरी तरफ मुड़ गया।
मैंने कहा, “राहुल, तुम इतने शर्मीले क्यों हो? मैं तुम्हें अपना ही समझती हूं।” वो बोला, “मेम साहब, आप बहुत अच्छी हैं। मैं आपका नौकर हूं।”
उसकी ये बात सुनकर मेरी चूत और गीली हो गई। वो वफादार था, लेकिन मैं अब उसे अपना बनाना चाहती थी।
तीसरे दिन मैंने राहुल को पूल साफ करने के लिए बुलाया। मैं पूल के किनारे लेटी हुई थी। मैंने सिर्फ एक छोटा सा बिकिनी पहना हुआ था। राहुल पूल साफ कर रहा था। मैंने जानबूझकर अपनी टांगें फैला दीं। मेरा बिकिनी का नीचे वाला हिस्सा थोड़ा सरक गया। मेरी चूत का हिस्सा दिख रहा था। राहुल की नजर अटक गई। वो काँप रहा था।
मैंने कहा, “राहुल, पानी का ग्लास ले आओ।” जब वो ग्लास लेकर आया तो मैं जानबूझकर उठी और उसके सामने खड़ी हो गई। मेरा भीगा हुआ शरीर उसके सामने था। राहुल की सांस तेज हो गई। उसका लंड पैंट में साफ दिख रहा था।
मैंने कहा, “राहुल, तुम्हें कुछ चाहिए तो बताओ।” वो बोला, “नहीं मेम साहब, मैं ठीक हूं।” लेकिन उसकी आवाज काँप रही थी।
अब मैं फैसला कर चुकी थी। मैं राहुल को अपना बनाऊंगी। वो वफादार नौकर है, लेकिन मैं उसकी मालकिन हूं। मैं उसे अपनी भूख मिटाऊंगी।
मैं अब राहुल को देखकर खुद को रोक नहीं पा रही थी। उसकी शर्म, उसका वफादार व्यवहार, और उसका मोटा लंड — सब मुझे पागल कर रहा था। एक रात मैंने फैसला कर लिया कि अब मैं आगे बढ़ूंगी।
रात के 11:30 बजे थे। मैंने राहुल को बुलाया। कुछ देर बाद राहुल मेरे बेडरूम में खड़ा था। मैं अपना गाउन उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेट गई थी। मैंने उसे देखकर कहा, “राहुल, आज मेरी पूरी बॉडी में दर्द हो रहा है। अच्छे से मालिश कर दो।”
राहुल हिचकिचाते हुए मेरे पास आया। उसने तेल की बोतल ली और मेरी पीठ पर तेल लगाना शुरू कर दिया। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैंने आह भरते हुए कहा, “राहुल, तुम्हारे हाथ बहुत अच्छे हैं। और नीचे भी करो।”
उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। फिर धीरे-धीरे मेरी गांड के ऊपरी हिस्से पर। मैंने जानबूझकर अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई। राहुल काँप रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं। वो वफादार नौकर था, लेकिन मेरी तड़प अब काबू से बाहर हो रही थी।
मैंने मुड़कर उसे देखा और कहा, “राहुल, तुम डर क्यों रहे हो? मैं तुम्हें अपना समझती हूं।” मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिया। राहुल का हाथ काँप रहा था। उसने हल्का-हल्का दबाव डाला। मैं “आह्ह्ह राहुल…” कर रही थी।
उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे ३६ साइज के बड़े बूब्स बाहर आ गए। राहुल उन्हें देखकर बोला, “मेम साहब… ये…” मैंने उसके सिर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबा दिया। उसने एक बूब्स मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगे। मैं उसके बाल पकड़कर कराह रही थी।
“आह्ह्ह राहुल… और चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है…”
उसने काफी देर तक मेरे दोनों बूब्स को चूसा, चाटा और हल्का-हल्का काटा। मेरे निप्पल्स लाल हो गए थे। मैं तड़प रही थी।
फिर उसका हाथ नीचे सरका। उसने मेरी पैंटी उतार दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी। उसने उंगलियों से बाहर से सहलाना शुरू किया। मैंने अपनी टांगें फैला दीं। उसने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। मैं “आह्ह्ह राहुल… और अंदर…” कर रही थी।
उसने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मैं तड़प-तड़पकर कराह रही थी। “राहुल… और तेज… आह्ह्ह…”
उसने काफी देर तक उंगलियों से मुझे मजा दिया। मैं दो बार झड़ गई। फिर मैंने उसे लिटा दिया। मैंने उसकी पैंट उतार दी। उसका मोटा, लंबा लंड बाहर आ गया। मैंने उसे हाथ में पकड़कर हिलाने लगी। राहुल “आह्ह्ह मेम साहब…” कर रहा था।
मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया। मैंने पूरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। राहुल तड़प रहा था। मैं काफी देर तक उसे चूसती रही।
फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। उसका लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था। मैंने धीरे से उसे अंदर लिया। “आह्ह्ह राहुल… बहुत मोटा है तुम्हारा लंड… धीरे…”
राहुल धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। मैं “आह्ह्ह राहुल… और अंदर डालो…” कर रही थी।
राहुल मेरी गोद में बैठा हुआ था। उसका मोटा लंड मेरी चूत में आधा घुसा हुआ था। मैंने अपनी कमर हिलाकर उसे और अंदर लेने की कोशिश की। “आह्ह्ह राहुल… और अंदर… धीरे-धीरे पूरा अंदर डालो…”
राहुल काँप रहा था। वो अभी भी शर्मा रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई और बाकी लंड भी अंदर कर दिया। अब उसका पूरा मोटा लंड मेरी चूत को भर चुका था। मैंने आह भरते हुए कहा, “राहुल… बहुत दबा लंड है तुम्हारा, पूरा टाइट फिट हो गया है मेरी चुत मे… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”
राहुल ने बहुत धीमी गति से धक्के मारना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ मैं “आह्ह्ह राहुल… और अंदर…” बोल रही थी। वो मेरे बूब्स को चूसते हुए धीरे-धीरे चोद रहा था। मैंने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं और उसे और करीब खींच लिया। “राहुल… मुझे और मजा दो… आह्ह्ह…”
करीब 10-12 मिनट तक वो इसी तरह स्लो स्पीड से मुझे चोदता रहा। फिर मैंने उसे लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। अब मैंने उसका लंड अपनी चुत के मुह पर लगाया और उसके लंड पर बैठ गई। उसका लंड करीब 8 इंच का था और पूरा मेरी चुत मे समा चुका था। अब मै उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। राहुल नीचे से मेरे बूब्स को दबा रहा था। मैं तेजी से उछल-उछलकर चुदवा रही थी। “आह्ह्ह राहुल… बहुत मजा आ रहा है… मैं झड़ने वाली हूं…”
मैं पहली बार उसके लंड पर झड़ गई। राहुल अभी तक नहीं झड़ा था। उसने फिर मुझे कुतिया बनाया और वो पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगा। उसकी टेस्टिस की थैलियाँ मेरी गांड से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
मैंने कहा, “राहुल… और तेज… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चुत को…”
वो तेजी से चोदने लगा। मैं कई बार झड़ गई थी लेकिन राहुल था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। आखिरकार राहुल भी झड़ने वाला था। उसने मेरी चूत के अंदर ही गर्म माल भर दिया।
हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। राहुल मेरे गले लगकर बोला, “मेम साहब… मैंने गलती कर दी…”
मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “राहुल, ये गलती नहीं… ये हम दोनों की इच्छा है।”
उस रात के बाद राहुल और मैं दोनों ही बदल गए थे। राहुल अभी भी दिन में वफादार नौकर बना रहता था, लेकिन रात में मेरे कमरे में आकर वो मेरी भूख मिटाता।
एक रात मैंने उसे बुलाया। मैंने एक सेक्सी रेड नाइट ड्रेस पहना हुआ था। राहुल आया तो मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसे चूमने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस रही थी। मैंने उसकी शर्ट उतार दी और उसके सीने को चाटने लगी। राहुल “मेम साहब… आह्ह्ह…” कर रहा था।
मैं नीचे गई और उसके लंड को मुंह में ले लिया। मैं उसे गहरे तक ले रही थी। राहुल मेरे बाल पकड़कर मेरा मुंह चोद रहा था। मैंने काफी देर तक उसके लंड को चूसा। फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया। उसका लंड मेरी चूत में घुसा। मैं ऊपर-नीचे हो रही थी। राहुल नीचे से मेरे बूब्स को चूस रहा था।
मैंने कहा, “राहुल, आज मेरी गांड मारना।”
राहुल शर्मा गया। मैंने खुद अपनी गांड पर तेल लगाया और उसके लंड को अपनी गांड पर रखा। मैंने धीरे से उसे अंदर लिया। “आह्ह्ह राहुल… बहुत मोटा है… धीरे से अंदर करना…”
राहुल धीरे-धीरे मेरी गांड चोदने लगा। मैं तड़प रही थी। “राहुल… और गहरा… आह्ह्ह…”
वो धीरे-धीरे तेज होता गया। मैंने अपनी चूत को सहलाते हुए उसे गांड चुदवा रही थी। राहुल ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे और तेजी से चोदने लगा।
आखिरकार हम दोनों झड़ गए।
उस रात के बाद हम दोनों की रिश्ते में एक नया अध्याय शुरू हो गया था। राहुल दिन में अभी भी वफादार नौकर बना रहता था। वो चुपचाप काम करता, मेम साहब कहकर पुकारता। लेकिन रात में मेरे बेडरूम में आकर वो मेरी हर इच्छा पूरी करता।
एक रात मैंने उसे बुलाया। मैंने ब्लैक लेस वाली नाइट ड्रेस पहनी थी। राहुल आया तो मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसे गहरी किस करने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस रही थी। मैंने उसकी शर्ट उतार दी और उसके सीने, पेट, नाभि को चाटती हुई नीचे गई। मैंने उसके लंड को मुंह में लिया और गहरे तक चूसने लगी। राहुल मेरे बाल पकड़कर तड़प रहा था।
मैंने उसे लिटाकर अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी। राहुल मेरी चूत चाटने लगा। उसकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मैं उसके चेहरे पर बैठकर उछल रही थी। “आह्ह्ह राहुल… और चूसो… आह्ह्ह…”
काफी देर बाद मैंने उसे कुतिया बनाया। मैंने पीछे से उसका लंड अपनी गांड में लिया। मैं खुद पीछे हिल रही थी। राहुल मेरी कमर पकड़कर धक्के मार रहा था। मैं “राहुल… और तेज… मेरी गांड फाड़ दो…” चिल्ला रही थी।
राहुल ने मुझे फिर से अपनी गोद में बिठाया। मैं उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। वो मेरे बूब्स को चूस रहा था। हम दोनों एक साथ झड़ गए।
अब हम दोनों का रिश्ता गहरा हो गया था। राहुल अभी भी दिन में नौकर था, लेकिन रात में मेरा प्रेमी। मेरे पति जब विदेश जाते, तो हम दोनों पूरी रात साथ बिताते। कभी पूल के किनारे, कभी जिम में, कभी कार में।
मैं राहुल को प्यार करने लगी थी। वो भी मुझे बहुत चाहता था। हम दोनों जानते थे कि ये रिश्ता गुप्त है, लेकिन हम दोनों खुश थे।
कहानी यहीं खत्म होती है। लेकिन हमारी चुदाई की कहानी अभी भी जारी है…
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