घर मे वासना का खेल – 2

Family me chudai ki sex story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि आदित्य और प्रिया अपना हनीमून मनाके वापस आए थे और आदित्य ने अपनी वाइफ को नए प्रोजेक्ट के बारे मे नहीं बताया था। ये प्रोजेक्ट मिलने के बाद उसके पास अपनी वाइफ के लिए ज्यादा समय नहीं बचने वाला था, इस वजह से प्रिया आदित्य से नाराज थी। आदित्य जानता था कि अपनी वाइफ को कैसे मनाना है इसलिए वह ज्यादा टेंशन नहीं ले रहा था। अब पढिए आगे..

Part 1 ==>घर मे वासना का खेल – 1

Family me chudai ki sex story

अलोक- हाँ श्लोका बहु थक गयी होगी सफर से, आराम करने दो उसे.

श्लोका- ठीक है बहु जा आराम कर ले.

प्रिया- जी मोम जी.

फिर प्रिया स्टैर्स चढ़ कर चली जाती है. आदित्य थोड़े देर बातें करने के बाद अपने रूम मे चला जाता है. वहां जाकर वो देखता है के प्रिया एक तरफ मुंह किये हुए बेड में लेटी हुई थी. आदित्य स्माइल करते हुए अंदर आता है और डोर लॉक करता है, जिसका अहसास प्रिया को हो जाता है और वो ब्लैंकेट को पूरा अपने ऊपर ले लेती है. आदित्य भी बेड में लेट जाता है और प्रिया से सट जाता है  प्रिया जो मुंह फुला कर बैठी थी, उसको पीछे धकेलती है।

आदित्य – मेरी जान अभी भी गुस्सा है क्या मुझसे?

प्रिया- बात मत करो तुम मुझसे और मुझे सोने दो।

आदित्य- लगता है मेरी जान को अब मेरे तरीके से मनाना पड़ेगा.

प्रिया सतर्क हो जाती है, उसे पता था अब आदित्य कुछ न कुछ नॉटी करेगा. आदित्य अब ब्लैंकेट के अंदर आ जाता है।

प्रिया- आदित्य सोने दो न मुझे।

ब्लैंकेट में आकर वो प्रिया से सट जाता है और उसकी कोमल कमर को भींच लेता है.

प्रिया- आह्ह्ह आदित्य नहीं.

फिर आदित्य प्रिया की कमर में टिकलिंग करने लगता है जिससे प्रिया की हंसी निकल पड़ती है।

आदित्य- हाहाहा.

प्रिया- छोड़ो न मुझे सोने दो।

आदित्य- पहले बोलो मुझे माफ़ कर दिया.

प्रिया- बिलकुल नहीं।

फिर तो वो फिरसे टिकलिंग करने लगता है.

प्रिया- आ आदित्य रुकक्क जाओ ठीक है माफ़ कर दिया.

आदित्य- चलो ठीक है।

प्रिया- ठीक है मुझे सोने दो अब.

इतना बोलकर वो दूसरी तरफ घूम कर लेट जाती है ब्लैंकेट लेकर. प्रिया के चेहरे पर स्माइल थी अब वो ब्लैंकेट में से ही बोलती है.

प्रिया- मैं अभी भी गुस्सा हूँ तुमसे.

आदित्य- हम्म तो और मनाना पड़ेगा मेरी जान को, ओके तो एक रास्ता है मेरे पास।

ब्लैंकेट में से ही प्रिया- कौनसा रास्ता? वो स्माइल करते हुए बोलती है.

आदित्य- शाम में बताऊंगा, तुम आराम करो अब।

फिर आदित्य शावर लेने चला जाता है. किचन में विमला रामु से बात कर रही थी.

विमला- देखिये बहु रानी आ गयी हैं. अब से थोड़ा धयान रखिये. कहीं कहीं भी शुरू मत हो जाईये और इस घर में जवान लोग रहते हैं. अच्छा लगता है क्या इस उम्र ये सब करना.

रामु उसके लटके हुए चूचे ब्लाउज के ऊपर से मसलते हुए

रामू- मेरी पत्नी को चोदने के लिए अब मैं लोगों की परवाह करू क्या?

विमला- क्या आप भी, ऐसी गन्दी बातें यूँ खुले में मत कीजिए।

रामु- तू वो सब छोड़ चल कमरे में.

विमला- क्या आप भी आपको इस उम्र में भी ये सब की पड़ी हुई है. इस वक़्त नहीं कोई भी आ सकता है.

रामु- विमला तू बहुत नाटक करने लगी है आजकल.

विमला- मुझे काम है बहुत आप जाकर बाहर गार्डन में पानी दीजिए. विमला ठहरी अधेड़ उम्र की, अब उसे इस उम्र में सेक्स करना अच्छा नहीं लगता था. लेकिन रामु बूढ़ा होने के बावजूद भी ठहरा अपने लंड से मजबूर, इसी बात को लेकर दोनों में अन बन होती रहती थी।

रामु फिर उधर से बाहर चला जाता है पानी देने.

उधर जाकर, रामु- ससुरा ज़िन्दगी झंड हो रखी है. हरिया भी नहीं है बात करने के लिए.

शाम में करीब 5 बजे हवेली में कार एंटर होती है, कार रुकते ही अंजली जल्दी से डोर खोलकर अंदर चली जाती है. हॉल में ही उसे उसका भाई आदित्य मिल जाता है.

अंजली- भैया।

आदित्य- अंजली आ जा आ जा.

अंजली- सब कुछ छोड़िये मेरा बोला हुआ सामान लाए या नहीं??

आदित्य- जाकर तेरी भाभी से ही पूछ ले, मुझे कुछ नहीं पता.

श्लोका- अंजली पहले फ्रेश तो हो लो।

अंजली- माँ मुझे पहले मेरी प्यारी भाभी से मिलना है, भैया कहाँ हैं भाभी?

आदित्य- रूम में.

अंजली चली जाती है ऊपर 2ण्ड फ्लोर पर सीधा और डोर खोलती है रूम का. प्रिया जो बेड में बैठी हुई अपना मोबाइल use कर रही थी. अंजली को देखते ही.

प्रिया- अंजली.

अंजली- भाभी।

प्रिया मोबाइल साइड में रख कर उधर जाती है और अंजली भी आगे चली जाती है और दोनों गले लगते हैं। फिर अलग होकर.

प्रिया- कैसी है तू??

अंजली- ठीक हूँ भाभी आप बताईये, कैसा रहा हनीमून?  

प्रिया थोड़ा शर्मा जाती है.

प्रिया- अंजली आ बैठ. दोनों बेड पर बैठ जाते हैं। दोनों में अच्छी बनती थी. प्रिया साइड में रखा हुआ बैग ओपन करती है और दोनों भाभी ननद बातों में लग जाती है.

उधर हरिया कार पार्क करके पीछे वाले कमरे में जा चुका था. वहां जाकर वो अपना शर्ट निकाल देता है. शर्ट निकलते ही उसकी सफ़ेद काले बालों वाली छाती दिखती है फिर वो अपनी पैंट भी निकाल देता है. अब वो सिर्फ एक बड़ी सी अंडरवियर में था. थका हुआ वो अब नीचे बिछी हुई चटाई पर लेट जाता है. उसकी बड़ी सी अंडरवियर में एक बड़ा सा तम्बू बना हुआ था. हरिया कुछ सोचते हुए अपना लंड अंडरवियर के ऊपर से पकड़ लेता है. थोड़ा और सोचने के बाद वो अपना अंडरवियर झट से नीचे कर लेता है और अपना बड़ा काल लौड़ा पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगता है. हरिया काल कलूटा बूढ़ा था, लेकिन उसके पास अच्छा खासा ड्राइविंग एक्सपीरियंस था इसलिए उसे काम दिया गया था. लेकिन राजपूत फॅमिली को ये नहीं पता था के जिस आदमी के साथ वो अपनी लाड़ली अंजली को हर रोज़ भेजते हैं वो कितना बड़ा ठरकी है।

हरिया ने जब पहली बार अंजली को देखा था, तबसे ही वो उसकी जवानी के पीछे था, लेकिन राजपूत खानदान का पुरे गौण में रुतबा था, जिससे हरिया बखूबी वाकिफ था, अगर कोई गलत हरकत की तो उसकी क्या हालत होगी, वो अच्छे से जानता था। हर रोज़ वो अंजली को पिक और ड्राप के दौरान घूरता था. अब इस वक़्त वो अंजली के बारे में सोचते ही अपना काला लौड़ा हिला रहा था. उसे पता था के अंजली जैसी इतने बड़े घर की जवान बेटी, उसके नीचे कभी नहीं आने वाली. इसलिए तो वो अपना लौड़ा हिलाने में लगा हुआ था।

हरिया- क्या लग रही थी आज ओह्ह्ह आह्ह्ह्हह्हह.

आज अंजली की सलवार और कमीज़ की तस्वीर दिमाग में बना कर वो लगा हुआ था. थोड़ी देर बाद वो झड़ जाता है.

हरिया- आह्ह्ह्हह ससूररा! आह्ह्ब्ह!

उसके काले लौड़े से गाढ़ा सा सफ़ेद पानी निकलता है. वो वही हांफते हुए लेटा रहता है. रात में खाने के बाद सब हॉल में बैठे बातें कर रहे थे.

अलोक- आदित्य वो मीटिंग का क्या हुवा?

आदित्य- अरे हाँ पापा मैं वो भूल गया, मैं अभी आया।

श्लोका- कहा जा रहे हो बेटा।

आदित्य- अभी आया माँ.

वो किचन में चला जाता है.

श्लोका- बहु क्या लेने गया है वो?

प्रिया- नहीं पता मोम जी.

विमला काकी वहाँ काम कर रही थी.

विमला- छोटे मालिक कुछ चाहिए था?

आदित्य- हां वो मैंने वो तब फ्रिज में प्लास्टिक का डब्बा रखने को दिया था, वो दे दीजिए।

विमला- हां अभी देती हूँ।

वो बड़ा सा प्लास्टिक कवर निकाल कर उसे दे देती है.

आदित्य वहाँ से जाते हुए – हां काकी वो रामु काका किधर हैं?

विमला- वो अंदर हैं आदित्य उस कवर से 2 बड़े से आइस क्रीम केस निकाल कर देता है.

विमला- ये किसलिए छोटे मालिक?

आदित्य- वो काकी मेरा एक बड़ा काम हुआ है आज उस ख़ुशी में।

विमला- बधाई हो छोटे मालिक.

आदित्य- धन्यवाद काकी.

और हां वो हरिया काका को भी ये एक दे देना.

विमला- ठीक है छोटे मालिक.

फिर आदित्य चला जाता है बहार. उसको एक प्लास्टिक बैग लेकर आता देख.

अलोक- अरे ये क्या है.

आदित्य आइस क्रीम केस निकाल कर बाहर रख देता है.

अंजली- भैया आइस क्रीम?

आदित्य- बताता हूँ बताता हूँ. तो सब सुनो आज की मीटिंग सक्सेस्फुल रही और हमारी कंपनी को बहुत बड़ा प्रोजेक्ट मिला है.

अलोक- अरे वाह ये तो बहुत बड़ी खबर है.

श्लोका- हां बेटा।

अंजली- कॉंग्रट्स भैया।

प्रिया भी स्माइल कर रही थी लेकिन अंदर से वो खुश नहीं थी, उसे पता था अब आदित्य बिजी हो जायेगा इस प्रोजेक्ट में.

आदित्य- हाँ पापा अब हमारे कंपनी को अच्छा खासा exposure मिलेगा इंटरनेशनल मार्किट में.

अलोक- अच्छी बात है।

अंजली- भैया इतनी बड़ी ख़ुशी की बात है और आप ये आइस क्रीम की पार्टी दे रहे हो. कहीं घुमा कर ले आते ना.

आदित्य- अभी नहीं अंजली, फिर कभी, मुझे बहुत काम है।

अंजली- हम लोगों का छोड़िये कम से कम मेरी भाभी को तो किसी रोमांटिक डिनर पर ले जाईये।

इसपर प्रिया स्माइल करती है, अंजली के तरफ देख.

श्लोका- हां बेटा बहु को कहीं घुमा ला, इस ख़ुशी के मौके पर कल.

आदित्य- देखता हूँ माँ टाइम निकाल पाउ तो.

अलोक- चलो ठीक है रात काफी हो गयी है, जाकर सो जाओ सब लोग.

फिर सब चले जाते है. उधर किचन का काम करके विमला साइड में बने हुए छोटे से कमरे में चली जाती है वहां पर रामु काका लेटा हुआ था।

विमला- सुनिए वो छोटे मालिक का कुछ बड़ा काम हुआ है उस ख़ुशी में ये खाने के लिए दिया है आप ज़रा हरिया भाई को भाई को दे आईये.

रामु- अच्छा कैसा काम.

विमला- मुझे नहीं पता।

रामु- ठीक है मैं आता हूँ.

फिर रामु काका बाहर से होते हुए पीछे चला जाता है हरिया के रूम में. दोनों बैठ जाते हैं।

रामु- पिने का मन कर रहा है निकाल न बोतल और ये ले आदित्य साहब ने किसी ख़ुशी में दिया है।

हरिया- कैसी ख़ुशी?

रामु- नहीं मालूम।

हरिया- रुक मैं बोतल निकालता हूँ, फिर दोनों शराब पिने बैठ जाते हैं। इधर उधर की बातों में लग जाते हैं।

उधर आदित्य और प्रिया के रूम में. प्रिया नीचे से नंगी थी और आदित्य भी. आदित्य उसके ऊपर चढ़ा हुआ धक्के लगा रहा था और प्रिया की सिसकारियां वहां गूंज रही थी, जो वहां के माहौल का और गरम कर रही थी.

प्रिया- अह्ह्ह आई अह्ह्ह्ह औरर ज़ोररसीए अह्ह्ह्हह्हह्हह अह्ह्ह्ह आदित्य.

प्रिया आदित्य को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही थी अपने हाथ उसके कमर में डालकर.

आदित्य- आह्हह्ह्ह्ह प्रिय्या मैं नज़दीकक हुन्न्न.

प्रिया- नहीं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देरर औरर कार्रो ना प्लसससस आह्ह्ह्हह .

आदित्य- मैं छूट रहा हुन्न्न अह्ह्ह्हह.

आदित्य झड़ जाता है. वो झट से अपना लंड बाहर निकाल लेता है चूत के बहार. आदित्य के छोटे गोरे से लंड पर कंडोम लगा हुआ था. कंडोम लगाने की ये वजह थी के दोनों ने अभी तक फॅमिली प्लानिंग नहीं की थी. झड़ते ही आदित्य उठकर बाथरूम चला जाता है और वहां डस्टबिन में कंडोम डाल देता है फिर वही फ्रेश होने लगता है. प्रिया वैसे ही लेटी हुई थी, किसी सोच में डूबी हुई. नीचे उसकी चूत हल्का हल्का रस छोड़ रही थी, जो खुद उसका ही था. उसकी चूत के पास हलके हलके बाल थे.

प्रिया किसी सोच में थी वैसे ही लेटी हुई, थोड़ी देर बाद आदित्य फ्रेश होकर बाहर आता है.

आदित्य-  प्रिया जाओ फ्रेश हो लो।

प्रिया जवाब नहीं देती।

आदित्य- प्रिया।

प्रिया- हाहहहह अब वो उसकी तरफ देखती है।

आदित्य- जाओ फ्रेश हो लो।

प्रिया- हां.

फिर प्रिया चली जाती है अंदर, वहां जाकर खुद को आईने में देखने लगती है. हालाँकि दोनों अभी अभी हनीमून मनाके आए थे, लेकिन प्रिया उतनी खुश नहीं लग रही थी। उसका मतलब ये नहीं था के दोनों की सेक्स लाइफ अच्छी नहीं थी, दोनों खुश थे एकदूसरे से, लेकिन प्रिया इन पर्टिकुलर कुछ मिस कर रही थी अपने पति से वो कुछ ज़्यादा एक्सपेक्ट कर रही थी. इस वक़्त वो मिरर के सामने खुदको निहार रही थी. थोड़ी देर और वैसे ही रुकने के बाद शावर लेकर वो बाहर चली आती है. आदित्य सो चुका था।

प्रिया को अच्छी तरह से पता था के सेक्स करने के बाद आदि गहरी नींद में सो जाता है. प्रिया फिर एक वॉर्डरोब पहनकर बेड में आकर लेट जाती है. प्रिया को भी थोड़ी देर में नींद आ जाती है. अगली सुबह हमेशा की तरह श्लोका नौकरों को ऑर्डर्स देने की आवाज़ आने लगती है. अंजली अपने पिंक बेड में आराम से लेटी हुई थी. बहुत ही प्यारी लग रही थी वो इस वक़्त. उसके क्यूट चेहरे पर बाल बिखरे हुए थे, जिससे वो और क्यूट लग रही थी.

इस वक़्त उसने टॉप और शॉर्ट्स पहनी हुई थी, उन शॉर्ट्स में उसकी गोरी टाँगें मस्त लग रही थी और टॉप के ऊपर से उसके चुचों का शेप उफ़ कहर ढा रहे थे बस. तभी उसके कान में उसकी माँ की आवाज़ गूंजती है. एक दो बार न सुनकर तीसरी बार उसकी आंख खुल जाती है. वो उठकर बैठ जाती है. अपना मोबाइल चेक करने के बाद वो फ्रेश होने चली जाती है.

उधर  प्रिया की आंख भी नीचे हो रहे आवाज़ों से खुल जाती है. लेकिन साइड में आदि नहीं था और न ही बाथरूम से कोई आवाज़ आ रही थी.

प्रिया- कहा चले गए!

वो उठकर फ्रेश होने चली जाती है. नीचे हमेशा की तरह तैयारी हो चुकी थी नाश्ते की. फ्रेश होकर रेडी होने के बाद अंजली नीचे आ जाती है. आज उसने जीन्स और टॉप पहनी हुई थी, टॉप के ऊपर जैकेट. नीचे आकर वो डाइनिंग टेबल पर बैठ जाती है. श्लोका वहीँ थी.

अंजली- मम्मा भाभी नहीं आयी?

श्लोका- अरे हाँ मैं भूल गयी बहुउउ.

प्रिया जो रूम से बाहर निकल ही रही थी.

प्रिया- हां मोम जी आयी।

सीढ़ियों से उतरते हुए जैसे कोई अप्सरा आ रही थी. गुलाबी साड़ी के अंदर मैचिंग कलर का बैकलेस ब्लाउज. उसके काले खुले लम्बे बाल कमर तक आ रहे थे.

श्लोका- आओ बहू.

प्रिया आकर बैठ जाती है।

अंजली- गुड मॉर्निंग भाभी.

प्रिया- गुड मॉर्निंग. मोम जी आदि कहाँ हैं?

श्लोका- बहु वो जल्दी ही चला गया ऑफिस कुछ अर्जेंट काम था उसे. जल्दी में था न इसलिए नहीं बताया होगा तुमको।

प्रिया- हाँ।

दोनों फिर खाने में लग जाते हैं।

प्रिया- मोम जी बैठिये न आप भी।

श्लोका- नहीं बहु खा ले तुझे तो पता मैं उनके साथ ही खाती हूँ.

प्रिया- आए नहीं हैं पापा जी अभी तक?

श्लोका- आते ही होंगे तुम दोनों खावो.

फिर अंजली और प्रिया नाश्ते करने लगते हैं. थोड़ी देर बाद दोनों का हो जाता है. अंजली- चलो मम्मा मैं चलती हूँ।

श्लोका- हां अरे रुक हरिया को बताना तो भूल ही गयी, रुक मैं बोलती हूँ उसे.

अंजली- मम्मा रहने दो अब मुझे देरी हो रही है मैं बोल देती हूँ।

श्लोका- हां ठीक है।

अंजली – बाय भाभी।

प्रिया- बाय अंजली।

फिर अंजली मेन डोर से बाहर निकल कर पीछे सर्वेंट क्वार्टर जाने लगती है, वो यहाँ शायद ही कभी आयी थी, न ही उसे आने की ज़रूरत पड़ी थी, वहां जो छोटा सा रूम सा बना था, उसके डोर के बाहर अब वो खड़ी थी, वो अपनी वाच देखते हुए।

अंजली- हरिया चाचा।

उसको आवाज़ लगाती है, अंदर से कोई आवाज़ नहीं आती, अंजली को लेट हो रहा था.

अंजली- हरिया चाचा.

इस बार थोड़ा जोर से आवाज़ लगाती है. अंदर इस बार हरिया जग जाता है. किसी लेडी की आवाज़ सुनकर वो हड़बड़ा सा जाता है. वो इस वक़्त धोती और बनयान में था, टिपिकल गाँव वाले आदमी की तरह।

वो जल्दी से दरवाज़ा खोल देता है, लेकिन वो खुद का हुलिया ठीक करना भूल गया था. अंजली जो पहली बार यहाँ आयी थी, हरिया को ऐसे देख वो थोड़ा चौंक जाती है. थोड़ी देर में ही वो अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लेती है। हरिया भी अंजली को देख हड़बड़ा सा जाता है और जल्दी से अंदर जाकर खुद को ठीक करता है और आता है।

हरिया- बोलिये अंजली मेमसाब??

अंजली धीरे से उधर घूमती है और

अंजली- चाचा क्या बोलिये?? मुझे कॉलेज में देरी हो जायेगी चलना नहीं है क्या?

हरिया- हाँ हाँ अंजली मेमसाब मैं अभी आया।

अंजली उधर से आती है मेन एंट्रेंस पर वेट करने लगती है. थोड़ी देर में ही हरिया कार लेकर आ जाता है। अंजली जल्दी से डोर खोलकर बैठने लगती है, बैठते हुए वो थोड़ा झुक सी जाती है, जिससे उसके चुचों की लाइन हरिया के सामने आ जाती है उस टॉप में उसके चूचे और भी मस्त लग रहे थे. .ऊपर से जैकेट. हरिया का लौड़ा उसकी धोती मे फुँकार रहा था. लेकिन वो मजबूर था. अंजली के साथ ज़रा भी छेड़खानी करने का अंजाम वो जानता था.

अंजली के बैठने के बाद वो कार दौड़ा देता है. इधर प्रिया ब्रेकफास्ट करके वापस अपने बैडरूम में जा चुकी थी। उसे बोर हो रहा था, इसलिए वो अपना मोबाइल लेकर अपने पति देव को कॉल लगाती है. पहली बार वो कॉल नहीं उठाता, लेकिन दूसरी बार वो उठाता है.

प्रिया- हेलो।

आदित्य- हां बोलो प्रिया.

प्रिया- सुबह बोले बिना ही चले गए?

आदित्य- अरे हाँ वो तुम सो रही थी इसलिए और मुझे अर्जेंट काम था इसलिए नहीं बोल।

प्रिया- मुझसे भी इम्पोर्टेन्ट?

आदित्य- ये कैसा सवाल है ओफ़्कौर्से नॉट.

प्रिया- हां हाँ पता है.

आदित्य-  प्रिया किसी काम से कॉल किया है क्या तुमने?

प्रिया- क्यों मैं ऐसे ही फ़ोन नहीं कर सकती क्या?

आदित्य-  प्रिया मैं इस वक़्त बिजी हूँ मुझे फालतू चीज़ों के लिए टाइम नहीं है.

प्रिया- क्या? मेरे साथ बात करना फालतू लगता है तुम्हें? बाय!

इतना बोलकर वो कॉल एन्ड कर देती है आदित्य दो तीन बार कॉल बैक करता है लेकिन प्रिया कॉल नहीं उठाती.

आदित्य- शाम को मना लूंगा.

इधर प्रिया का मूड तो जैसे ऑफ हो गया था अब अपने ही पति के ऐसा बोलने से, वो अपने बैडरूम का टीवी ऑन करके एक मूवी देखने बैठ जाती है. उधर करीब आधे घंटे बाद हरिया अंजली को कॉलेज पहुँचा देता है. डोर खोल कर अंजली दौड़ कर जाने लगती है. जाते हुए जीन्स पैंट में उसकी गांड का शेप साफ़ पता चल रहा था। हरिया ड्राइवर सीट पर बैठा हुआ धोती पर से अपना लौड़ा सहलाता है.

हरिया- क्या गांड है इसकी. पता नहीं कब तक बस यूँ इसको देख कर मुठ मारता रहूँगा. हे भगवान कुछ तो रहम खा मुझ बूढ़े पर.

हरिया फिर ड्राइव करके वापस चला जाता है. प्रिया अपने कमरे में मूवी देखते देखते ही सो जाती है. अपने आलीशान बेड पर लेटी हुई उसके खूबसूरत चेहरे पर उसकी ज़ुल्फ़ें किसी पारी से कम नहीं लग रही थी वो इस वक़्त. ऐसे ही दोपहर हो जाती है. खाना खाने का वक़्त हो गया था. रामु और विमला खाना के डिशेस लेकर टेबल पर रख रहे थे. उतने में श्लोका अपने कमरे से बाहर आती है.

अरे विमला!

विमला अंदर किचन में थी, रामु बाहर आकर.

रामु- जी मालकिन!

श्लोका- अरे रामू बहु नीचे आयी के नहीं खाने?

रामु- नहीं मालकिन।

श्लोका- जाके ज़रा बाहर से बहु को आवाज़ दे.

रामु – जी मालकिन

आगे क्या हुआ? क्या रामू बहु को सोते हुए देख पाया? पढिए अगले पार्ट मे,

घर मे वासना का खेल – 3

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