हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 3

Ek Housewife ki hindi sex story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ कि मिश्रा ने शांता को हुमा के घर मे नौकरानी लगा दिया। शांता को मिश्रा ने ही हुमा को पटाने के लिए वहाँ लगाया था। शांता ने मिश्रा की तारीफ कर करके हुमा को मिश्रा के बारे मे सोचने पर मजबूर कर दिया। आखिर हुमा ने मिश्रा की दावत करने के बारे मे सोचा। और फिर हुमा खुद ही मिश्रा की दावत करने के लिए मिश्रा की पान की दुकान पर चल पड़ी। अब पढिए आगे…

Part 2 => हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 2

Ek Housewife ki hindi sex story

हुमा के जाते ही शांता ने मिश्रा को कॉल किया शांता – हेलो मिश्रा जी आप की बुलबुल आप की पान की दुकान पर आ रही है आप को खाने की दावत देने को।

मिश्रा – बहुत अच्छी खबर सुनाई तूने।

मिश्रा अपनी पान की दुकान में बैठा था, जैसे की पान की दुकान के बीच के स्क्वायर बॉक्स जैसा होता है, जिसमे अपनी दोनों टंगे डाल कर पानवाला बैठा होता है, अगर वो खड़ा हो जाये तो उसकी कमर के नीचे का हिस्सा उस बॉक्स में होता है। उसी बॉक्स में निचली तरफ एक छोटा सा दरवाज़ा मिश्रा ने बनाया था, जो पीछे की रूम की तरफ निकलता था। वो रूम 7×8 का था, जिसमे वो अपना पान का सामान रखता था। जैसे ही मिश्रा को हुमा आते दिखाई दी, वो नीचे बॉक्स में घुसकर उस दरवाज़े से उस रूम में चला गया।

हुमा पान की दुकान पर आयी, यहाँ वहाँ देखा मगर उसको कोई दिखाई नहीं दिया.

हुमा मन ही मन उफ़ अब कहा चले गए मिश्रा जी।

तभी मिश्रा ने रूम में कुछ गिरा दिया, जान बूझ कर जिसकी आवाज़ बाहर खड़ी हुमा को सुनाई दी।

हुमा मन में अरे शायद अंदर कोई है कही मिश्रा जी तो नहीं? आवाज़ लगाती हु।

हुमा – मिश्रा जी! मिश्रा जी! आप अंदर है क्या?

तभी मिश्रा अंदर से- कौन! कौन है? क्या चाहिए?

हुमा –  जी मै हुमा।

मिश्रा – अरे भाभी जी आप यहाँ?

हुमा –  जी आप से कुछ काम था।

मिश्रा – भाभी जी बुरा मत मानिये मैंने कुछ सामान निकाला हुआ है आप अंदर आ सकती है क्या?

हुमा – जी आती हूं मगर आना कहा से है?

मिश्रा – भाभी जी साइड के जनरल स्टोर्स में आईये, थोड़ा आगे आकर एक दरवाज़ा दिखेगा, आप  उससे अंदर आ जाइये।

हुमा स्टोर्स के अंदर जाती है थोड़ा आगे एक 5 फ़ीट का लकड़ी का दरवाज़ा दीखता है वो दरवाज़ा भी उसी रूम का था, हुमा उस दरवाज़े को थपथपाते हुआ बोली-

हुमा – मिश्रा जी! भाई साहब!

मिश्रा – आ जाइये।

हुमा डोर ओपन करती है अंदर मिश्रा उस रूम में एक बड़ी सी पान की टोकरी लिए बैठा था।

मिश्रा – भाभी जी ये पान ख़राब हो जाते है न तो इनको रोज़ देखना पड़ता है, कोई सड़ा है या नहीं।

उस रूम में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था।

हुमा – अरे अंदर इतना बड़ा रूम है, बाहर से पता नहीं चलता बस एक छोटी सी पान की दुकान और स्टोर्स दीखता है।

मिश्रा मुस्कुराते हुए – भाभी जी जब गाँव से आया था तो जिसको आप रूम कह रही है इसी को मैंने ख़रीदा था, फिर धीरे धीरे आस पड़ोस वालो ने सामने की जगह पर कब्ज़ा कर लिया तो मैंने भी अपनी 6 फ़ीट जगह आगे बढ़ा ली और उस 6 फ़ीट में पान की दुकान बन गयी और यहाँ पीछे गोडाउन। पैसा अच्छा मिलने लगा तो ये पड़ोस की जगह खरीद कर जनरल स्टोर्स बना लिया, सब आप जैसो की दुआ है।

हुमा- आप की नेकिया है और कुछ नही।

मिश्रा – अरे मैंने आपको बैठने को बोल ही नहीं।

तभी एक छोटा सा स्टूल उठा कर हुमा को दिया और अपने बिलकुल करीब बैठने को कहा, मगर हुमा दूसरी तरफ बैठ गयी। मिश्रा चांस मारना चाह रहा था, हुमा को उस छोटे रूम में बुलाकर, मगर उसका प्लान फेल हो गया।

हुमा – दरअसल मै आपको दावत देने आयी थी।

मिश्रा – दावत! कैसी दावत?

हुमा – आज दोपहर का खाना आप हमारे साथ खाएंगे, आप क्या खाने में क्या पसंद करते हो?

मिश्रा – वैसे मैंने अपना खाना सुबह ही बना लिया था, मगर आप इतने प्यार से कह रही है तो आ जाऊंगा। हाँ मेरी पसंद ज्यादा कुछ नहीं, आप प्यार से जो खिला देगी खा लुंग। मिश्रा हुमा से खुलने की कोशिश कर रहा था।

हुमा – मगर फिर बता देते तो अच्छा होता।

मिश्रा – ठीक है पूरी भाजी और सूजी का हलवा।

हुमा मुस्कुराते हुए जैसे आप सीधे सच्चे इंसान है आप की पसंद भी वैसी ही है।

हुमा स्टूल से उठते हुए – ठीक है ज़रूर आईयेगा अब मै चलती हूं.

जब हुमा स्टूल से उठ रही थी उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बाहर को आ गयी थी, जिसे देख कर मिश्रा की धोती में हलचल हुए थी।

मिश्रा – अरे रुकिए न कुछ लीजिये ठंडा गरम।

हुमा – अरे नहीं मिश्रा जी घर जाकर खाना भी बनाना है।

मिश्रा – रुकिए मै बाहर आता हु।

हुमा उस रूम से बाहर आती है तो मिश्रा कहता है मै दूसरे रास्ते से आता हूं, आप चलिये।

हुमा बाहर आकर पान की दुकान के बाहर रूकती है ,तो मिश्रा उस स्क्वेर होल से बाहर आता है, हुमा उस देख चौक जाती है।

हुमा – अरे ये कौन सा रास्ता है?

मिश्रा मुसकुराते हुए ये नीचे से छोटा सा शार्ट कट है।

हुमा मुस्कुराते हुए अब मै चलती हूं आप कब तक आएंगे?

मिश्रा – भाभी जी दोपहर 2 बजे तक।

हुमा – ओके मै इंतज़ार करुँगी।

इतना कह कर हुमा मुड़कर जाने लगी, जाते वक़्त उसको बड़ी साइज़ की गांड जो हिल रही थी उसपर मिश्रा की नजर पड़ी और उसका लंड फिर झटका खा गया।

मिश्रा मन में – मैंने इस पान की दुकान पर बहुत औरते चोदी है बहुत जल्द ही तुम्हारी इस बड़ी गांड का भी मज़ा लूंगा भाभी जी।

हुमा घर पहुंच कर सोफे पर बैठ कर- शांता जरा पानी लाना बाहर बहुत धूप है।

शांता – मिश्रा जी मिले आपको?

हुमा – हाँ और दावत भी कबूल कर ली।

शांता – क्या बनाना है?

हुमा मुस्कुराते हुए – बड़े सीधे है मिश्रा जी, कहा की सिर्फ पूरी भाजी और सूजी का हलवा बना दे।

शांता – जी उसमे तो मै माहिर हु।

हुमा – हाँ मै नॉन वेग अच्छा बना लेती हूं, ये सब ज्यादा नहीं बनाती उनको पसंद नहीं है न।

शांता ने जल्दी जल्दी वेज खाना बना लिया, हुमा ने भी उसको हेल्प किया। ठीक 2 बजे डोर बेल बजी हुमा ने घडी की तरफ देखा और समझ गयी की मिश्रा जी आये होंगे। हुमा ने जाकर डोर ओपन किया तो मिश्रा जी हाथ में एक कैरी बैग लिए खड़े थे। हुमा उनको देख मुस्कुरा दी, मिश्रा भी मुस्कुरा दिया। हुमा ने उसको अंदर आने को रास्ता दिया, मिश्रा अंदर आ गया।

मिश्रा अंदर आते ही – भाभी जी ये लीजिये मिठाई लाया था।

मिश्रा ने कैर्री बैग आगे बढ़ाते हुए कहा।

हुमा – इस की क्या ज़रूरत थी भाई साहब?

मिश्रा – आप मुझे मिश्रा जी कहिये या भाई साहब फैसला कर लीजिये।

इतना कह कर मिश्रा मुस्कुरा दिया। हुमा ने मिश्रा के हाथ से मिठाई की कैर्री बैग ली और मिश्रा को हॉल में सोफे पर बैठने को कहा। मिश्रा हर दिन की तरह धोती और कुरता पहन कर आया था। मगर मिश्रा की नजर हुमा पर से हट नहीं रही थी। आज उसने ब्लैक कमीज़ और गोल्डन लेग्गी पहनी थी। लेग्गी में उसकी जांघें और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। बूब्स को उसने पूरी तरह से दुप्पट्टे से कवर किया हुआ था। मिश्रा की वासना भरी नज़र हुमा के जिस्म पर घूम रही थी, इस बात से हुमा बेखबर थी वो मिश्रा के लिए किचन में खाना निकाल रही थी।

शांता भी उसकी हेल्प कर रही थी। कुछ देर बाद टेबल पर मिश्रा के लिए खाना लग गया।

हुमा –  भाई साहब खाना लग गया।

मिश्रा – वाह खुशबु तो अच्छी आ रही है।

मिश्रा खाना खाने लगा।

मिश्रा – वाह क्या खाना बना है मज़ा आ गया, किसने बनाया?

शांता – मालकिन ने।

हुमा – चल झूटी मैंने या तूने बनाया, मैंने तो सिर्फ साथ दिया है।

मिश्रा – शायद आपके साथ की वजह से टेस्टी बन गया।

इस बात पर तीनो हंस पड़े। हुमा मिश्रा के करीब ही बैठी थी, लेग्गी में उसकी जांघों पर नज़रे चुरा कर मिश्रा अपनी आँखों का कैमरा मार रहा था।

मिश्रा – घर का बनाया खाना घर का ही होता है, आज घर की याद आ गयी।

इतना बोलकर मिश्रा उदास हो गया, ये बात हुमा ने नोटिस की।

हुमा – क्या हुआ मिश्रा जी? घर की याद आते ही उदास हो गए? आप को आपके घर वालो को यहाँ बुला लेना चाहिए।

मिश्रा ये सुनकर और ज्यादा उदास हो गया और खयालो में खो गया।

हुमा – मिश्रा जी! मिश्रा जी क्या हुआ? कहा खो गए?

मिश्रा – वो वो कुछ नहीं! क्या करू बीवी और बेटे को कई बार बोला, मगर उनका दिल ही नहीं लगता शहर में।

मगर हुमा को मिश्रा का उदास चेहरा कुछ परेशान करने लगा, तभी हुमा किचन में गयी और मिश्रा की फैमिली वाली बात शांता को बतायी।

हुमा – आखिर फैमिली की बात से कोई इतना उदास नहीं होता।

शांता – अब क्या बताऊँ मालकिन! मिश्रा जी के परिवार के बारे में न सुनो तो ही अच्छा है।

दोनों बाटने इतने धीरे से कर रहे थे की डाइनिंग टेबल पर बैठे मिश्रा तक आवाज़ न जाने पाए.

हुमा – बोल ना आखिर क्या बात है?

शांता – मालकिन वो मिश्रा जी की बीवी का मिश्रा जी के चचेरे भाई के साथ चक्कर है और वो मिश्रा जी से बड़े गुस्से से बात करती है।

हुमा – क्या बोल रही हो?

शांता – मिश्रा जी को पता है ये बात, उन्होंने उनकी बीवी को माफ़ कर दिया है मगर उनकी बीवी अपने आशिक के साथ ही गाँव में रहना पसंद करती है।

हुमा – बेचारे मुझे तो यकीन नहीं आ रहा, इतना नेक इंसान होकर क्या सहना पड़ रहा है उनको।

शांता – अब क्या बताये मालकिन, सब भगवन की लीला है।

हुमा – और उनका बेटा।

शांता – वो भी माँ का ही साथ देता है, जब भी मिश्रा जी गाँव जाते है तो माँ बेटे सीधे मुंह बात नहीं करते, मगर फिर भी मिश्रा जी अपने टूटे फूटे संसार को चला रहे है।

हुमा की आँखे हलकी सी नम हो गयी, उसने पलट कर डाइनिंग टेबल पर उदास खाना कहते हुए मिश्रा की तरफ देखा और फिर शांता से कहा।

हुमा – मगर तुझे इतना सब कैसे पता?

शांता – मिश्रा जब से इस शहर में आये है हमारे मोहल्ले में और हमारे घर के बिलकुल करीब रहते है जब से उन्होंने हमारी मदद की तब से मै उनके घर का कुछ करने आ जाया करती थी, एक दिन मिश्रा जी अकेले में रो रहे थे, मैंने उनसे पूछा उन्होंने कुछ कहा नहीं, मगर बहुत ज़िद करने पर मुझे कहा वो मुझे अपनी छोटी बहन मानते है, इसलिए सब कुछ बता दिया।

हुमा को बहुत बुरा लगा मिश्रा के पर्सनल ज़िन्दगी के बारे में सुनकर, मगर ये सब एक झूटी कहानी थी। मिश्रा इतना कमीना था की जो बीवी उसको भगवान मानती थी, उसको भी हुमा को पटाने के लिए रंडी साबित करने पर तुला था और उसका बेटा वो भी मिश्रा को बहुत प्यार करता था। हुमा फिर मिश्रा जी के पास गई। उसको बहुत बुरा लग रहा था, मिश्रा के इस हाल पर, मगर मिश्रा और शांता दोनों बहुत खुश थे अपनी कामयाबी पर।

एक इनोसेंट हाउसवाइफ को आखिर उन्होंने अपने जाल में फ़साना शुरू जो कर दिया था. हुमा अपने आप पर कण्ट्रोल करते हुए।

हुमा – मिश्रा जी खाना पसंद आया ना?

मिश्रा – बहुत अच्छा लगा और हलवा तो और भी अच्छा।

हुमा – और लीजिये ना! हुमा ने हलवा मिश्रा के बाउल में डालते हुए कहा।

मिशरा बाउल पीछे करते हुए – बस बस भाभी जी बहुत हो गया, अब तो पेट फट जाएगा।

हुमा से रहा नहीं गया उसने कह दिया – मिश्रा जी आप की बीवी कैसी है?

मिश्रा – मेरी बीवी तो देवी है देवी! नसीब वालो को ऐसी बीवी मिलती है।

मिश्रा ये बात सच कह रहा था, मगर मिश्रा की बात सुनकर हुमा अंदर से और दुखी हुई और सोचने लगी।

मिश्रा जी मैंने फ़रिश्तो के बारे में सुना था, मगर आज देख लिया आपको देख कर आपकी बीवी क्या है कैसी है मुझे पता है मगर फिर भी आप उसकी तारीफ कर रहे है।

हुमा के दिल में उतर चुका था मिश्रा।

हुमा – और आप का बेटा?

मिश्रा – मेरा बेटा तो बहुत प्यार करता है मुझ से, जब भी गाँव जाता हूं न, तो एक पल के लिए मुझे अकेला नहीं छोड़ता।

इतना कह कर मिश्रा ने उदास होने का नाटक किया।

हुमा समझ गयी मिश्रा क्यों उदास है, उसको मिश्रा का उदास चेहरा देखा नहीं गया, वो उठ कर सीधा वाशरूम की तरफ चली गयी। अंदर जाकर हुमा की आंख से आंसू आ गए, मिश्रा के लिए और बाहर मिश्रा ने शांता को आँख मारी और शांता ने भी आँख मार कर इशारो में कहा की प्लान के मुताबिक सब ओके चल रहा है।

अब अगला प्लान – हुमा अपना मुंह धोकर बाहर आयी, मिश्रा हॉल में सोफे पर बैठा था, हुमा चुप थी तो मिश्रा ही शुरू हो गया।

मिश्रा – वैसे कुछ भी कहिए, भाभी जी अपना घर अपना होता है, और अपने अपने होते है अभी कल की ही बात देख लीजिये। मेरे पीठ में दो दिन से दर्द था, डॉ. के पास गया, उसने दवाई और एक बाम लिख दिया, कहा की इससे मालिश कर लीजिये, दिन में दो बार। अब कल से परेशान हूं अपने हाथ से कैसे अपनी ही पीठ पर बाम लगा दू, कोई अपना होता तो लगा देता.

शांता किचन से – बस इतनी सी बात, मालकिन लगा देगी आप वही सोफे पर लेट जाए।

सुनते ही हुमा चौक गयी और शांता की तरफ ऐसे देखने लगी, क्या कह दिया शांता ने उससे रहा नहीं गया वो किचन में जाकर धीरे से शांता से कहा।

हुमा – ये क्या कह दिया तुमने? मै कैसे लगा सकती हूं उनके पीठ पर बाम?

शांता – माफ़ करना मालकिन मुंह से निकल गया।

हुमा – तुमको बहन मानते है तुम जाकर लगा दो।

शांता – मालकिन बेचारे पहले ही घर के सुख से वंचित है, अगर आप की जगह मै गयी तो क्या सोचेंगे उनके परिवार की तरह आप भी स्वार्थी हो, जब आप बीमार थी तो दिन रात भूखे प्यासे आपके लिए भाग रहे थे, आपको इतना सा करना है, तो उनको ना कह दूँ? सोच लो मै जाकर लगा दूँ?

हुमा – तू ठीक कह रही है मगर आखिर वो एक गैरमर्द है मुझे शर्म आएगी।

शांता – गैरमर्द है मगर एक फरिश्ता इंसान भी है न! आप ही ने कहा था।

हुमा आखिर शांता की बातो में आ ही गयी और उसने मिश्रा की पीठ पर बाम लगाने का फैसला कर ही लिया। आगे क्या हुआ पढिए इस कहानी के अगले पार्ट मे।

Next Part ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 4

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