बड़े घर की बहु बेटियाँ 2

Ghar me bahu betiyo ki chudai kahani:- जो दरवाज़े पर थी वो कोई और कोई नहीं नेहा थी। वो थोड़ी देर पहले ही किचन की तरफ़ आई थी और वो अपने मुँह पर हाथ रखे उन दोनों की हरकतों को देखने लगी।

करीम और नीलू दोनों अनजान अपनी हवस में अंधे बने हुए ऐयाशी कर रहे थे। इसी बीच नेहा की नज़र करीम के काले बड़े लौड़े पर जाती है और उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है। वो लगातार उसके काले लौड़े को निहारने लगती है कि तभी नीलू की आहें सुनकर वो होश में आती है..

पिछला पार्ट नहीं पढ़ा तो पहले वो पढ़ लें ==> बड़े घर की बहु बेटियाँ 1

Ghar me bahu betiyo ki chudai hindi sex story

नीलू- करीमम्म, आह्ह रुक जा ना.. यहाँ नहींईई कोई आआ जाएगाआआ… हम तेरे रूम में करते हैं नाआआ…

करीम- नील्ललू रानी… बस एक बार चोद लेने दे तुझेईई फिर चला जाऊँगा… बस एक बार..

नेहा चोदने के नाम सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है, लेकिन उससे घिन आ रही थी करीम को नीलू के साथ देखकर… शादीशुदा नीलिमा का एक बुड्ढे लॉरीवाले से अफ़ेयर देख उसको अजीब सा लग रहा था। वो वहाँ से जाना चाहती थी पर उसके पैर हिल नहीं पा रहे थे। वो बस एक कोने से लगातार दोनों का नंगा नाच देख रही थी.. करीम अब अपना काला लौड़ा नीलू की गोरी चूत में घुसाने ही वाला था कि तभी नीलू की नज़र किचन के एक ग्लास पर जाती है, जहाँ से उसे नेहा की परछाई दिखती है। नीलू झट से करीम से अलग हो जाती है और अपनी साड़ी ठीक करती है।

करीम – क्या हो गया चिनाल.. अभी तो मूड बना था..

नेहा करीम के मुँह से चिनाल वर्ड सुनकर गुस्सा हो जाती है.. एक औरत को कोई मर्द गाली दे ये बात उससे बिल्कुल पसंद नहीं थी… नेहा अपना गुस्सा कंट्रोल नहीं कर पाती और किचन में चली आती है..

नेहा- नीईलू…. ये सब क्या चल रहा है?

नेहा की आवाज़ सुनकर करीम भी उसकी तरफ़ घूम जाता है और नेहा उसके काले लौड़े को देख अपनी नज़र दूसरी तरफ़ कर देती है। करीम एकदम से अपनी लुंगी को एडजस्ट करके अपने सख़्त लौड़े को लुंगी में छुपा देता है..

नीलू : वो…वो…मा.. मालकिन..वो

नेहा – तुम दोनों ने इस घर को समझ क्या रखा है। और तू… क्या नाम है तेरा?

नेहा करीम की तरफ़ गुस्से से देख रही थी…

करीम : करीम..मालकिन..

नेहा : थोड़ी देर पहले ही मैंने तुझे बोला था ना कि कोई गलत चीज़ मत करना.. तो तेरी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि हमारे घर में आकर नौकरानी के साथ ये सब कर रहा है तू…

करीम : मा… मालकिन गलती हो गई मुझसे। एक बार माफ़ कर दीजिए..

नेहा कुछ बोले बिना गुस्से से देखते रहती है। करीम तिरछी नज़र से नेहा को निहारने लगता है। उसकी पतली सफ़ेद कमर देख उसका लौड़ा फिर से सख़्त होने लगता है।

नेहा : माफ़ी ? तुझे सुबह माफ़ किया था और अब ये हरकत कर रहा है तू? और नीलिमा तुम.. तुम्हें शरम नहीं है? शादीशुदा हो ना तुम? पति के पीठ पीछे ऐसे गंदे बुड्ढे के साथ ऐसा काम करते शरम नहीं आती तुझे।

नीलू शरम के मारे नीचे सर करके खड़ी रहती है और करीम बेशरम बना नेहा की जिस्म को देखने लगता है।

करीम (मन में) : साली ने दूसरी बार डिस्टर्ब किया है मुझे… वैसे साली माल है। क्या चुचे हैं, क्या गाँड है… क्या मस्त कमर है साली की.. एकदम मस्त रंडी लग रही है। साली एक बार हाथ लग जाए तो मेरे लोडे के मज़े हो जाएँ…

करीम को घूरता हुआ देख नेहा उसको पकड़ लेती है और अपनी कमर को साड़ी से ढक देती है..

नेहा : ईईई….क्या देख रहा है तू बेशरम कहीं के..

करीम : कु…कुछ नहीं मालकिन.. बस एक बार माफ़ी दे दीजिए हमें.. ये गलती फिर नहीं होगी..

नीलू : माफ़ कर दीजिए मालकिन.. मैं ये गलती कभी नहीं करूँगी.. एक बार माफ़ कर दीजिए..

नीलू के आँखों से आँसू आने लगते हैं पर करीम के चेहरे पर किसी भी तरह का पछतावा नहीं था। नेहा को अब और गुस्सा आने लगता है करीम का..

नेहा- नीलू.. ये गलती नहीं है गुनाह है.. तुम अपने पति से बेवफ़ाई कर रही हो और ये ठीक नहीं है.. मैं वार्निंग दे रही हूँ कि ये सब बंद कर दो वरना तुम और ये बुड्ढा दोनों घर से निकाले जाओगे..

नीलू : जी..जीईई…मालकिन… मैं कभी नहीं करूँगी ये सब..

नेहा : ठीक है.. अब तुम बाहर जाओ और दूसरे काम करो.. मुझे इस आदमी से बात करनी है थोड़ी..

नीलू एक बार करीम को देखती है और हल्की मुस्कान के साथ बाहर चली जाती है। उसके जाने के बाद नेहा और करीम दोनों ही किचन में खड़े थे।

नेहा : और तुम… क्यों घूर रहा था तुम मुझे??

करीम- मैं? मैंने? नहीं मालकिन.. मैंने नहीं घूरा आपको..

नेहा : झूठ मत बोलो। सच-सच बताओ सब कुछ। अब अगर एक भी झूठ भी बोला ना तो मैं डैडी जी (रवि वर्मा) को तुम्हारी करतूतें बताकर तुम्हें काम से निकाल दूँगी.. समझे?

करीम : वोह मालकिन…मैं… वोह आप ख़ूबसूरत हैं ना इसलिए बस आपको देख रहा था..

नेहा का गुस्सा अपनी तारीफ़ सुनकर थोड़ा सा कम हो जाता है। उसको हमेशा अपनी ख़ूबसूरती की तारीफ़ सुनाना अच्छा लगता था और करीम के मुँह से तारीफ़ सुनकर उसको थोड़ा सा अच्छा लगता है, लेकिन वो अपने चेहरे पर कोई रिएक्शन नहीं दिखाती..

नेहा : बेशरम हो क्या तुम? शरम नहीं आती ऐसी बातें करते हुए?

करीम : आ…आपने ही तो कहा था कि सच-सच बताना इसलिए बता रहा हूँ.. आप ख़ूबसूरत दिख रही थीं तो…

नेहा उसकी बात काटते हुए

नेहा : मैं ख़ूबसूरत हूँ ये मैं जानती हूँ, तुम्हारे जैसे बदसूरत आदमी से सुनाने में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है…

करीम को एकदम से गुस्सा आ जाता है जब नेहा उसको बदसूरत आदमी कहती है, पर वो अपने गुस्से को क़ाबू में रखता है और नेहा के चेहरे पर आई हुई हल्की शरम को देख उसकी तारीफ़ करने लगता है..

करीम : आप सही कह रही हो मालकिन.. आप जैसी ख़ूबसूरत तो इस घर में क्या पूरी शहर में नहीं है और तो और आपके ..

करीम रुक जाता है और नेहा उसको देखने लगती है। करीम के ऐसे बीच में रुकने से..

नेहा : मेरे क्या?

करीम : कुछ नहीं मालकिन.. कुछ भी नहीं…

नेहा : बता रहे हो या…

नेहा गुस्सा दिखाते हुए बोलती है

करीम : वोह मालकिन, आपके बड़े चुचे भी बड़े ख़ूबसूरत हैं। मैं तो काफ़ी समय से इन्हें ही निहार रहा था..

करीम बेझिझक बोलता है और उसकी बात सुनकर नेहा गुस्सा हो जाती है..

नेहा : क्या कहा तूने? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे चुचों की तरफ़ देखने की।

नेहा एकदम से अपने मुँह पर हाथ रख देती है क्योंकि उसने खुद “चुचे” कह दिया था जल्दबाज़ी में.. जैसे ही उसको अपनी गलती समझ आती है वो अपने मुँह पर हाथ रखकर शरम से नीचे देखकर अपनी ब्लाउज़ पर साड़ी ठीक करने लगती है। करीम नेहा के मुँह से चुचे वर्ड सुनकर अब और ज़्यादा खुल जाता है और बिंदाश होकर नेहा से बात करने लगता है।

करीम : मालकिन, अब आपके चुचे इतने बड़े और भरे हुए हैं तो हर किसी की नज़र जाएगी ही उन पे..

करीम के मुँह से फिर से ‘चुचे’ सुनकर नेहा हैरान होती है। उसको यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये बुड्ढा बदसूरत आदमी इतनी बेशर्मी से उसके बॉडी के बारे में बोल रहा है। करीम का रवैय्या देख नेहा फिर से गुस्सा हो जाती है।

नेहा : ईईई.. क्या बोल रहे हो तुम।

करीम : जो आपने पूछा मालकिन.. आपने ही तो कहा था ना कि मैं क्या घूर रहा हूँ.. मैं आपके इन बड़े-बड़े चुचों को घूर रहा था.. कितने मस्त हैं..

करीम नेहा के चुचों को अब लगातार घूरने लगता है। नेहा को करीम के ऐसे घूरने से घिन आ रही थी। एक बुड्ढा लॉरीवाला उसके चुचों को घूर रहा था इतनी पास से, ये बात नेहा को बहुत गुस्सा दिलाती है। लेकिन वो सोचती है कि ये सब उसकी ही गलती है क्योंकि उसने ही ये बात छेड़ी थी। वो अपने पल्लू को फिर से ठीक करती है और करीम को देखती है।

नेहा : सुनो.. तुम अपनी औक़ाद से ज़्यादा बात कर रहे हो। तुम किससे बात कर रहे हो और क्या बात कर रहे हो उसका ध्यान रखो, वरना डैडी जी को बोलकर सीधा सिक्योरिटी ऑफिसर के हवाले कर दूँगी तुझे..

सिक्योरिटी ऑफिसर की बात सुनकर करीम थोड़ा सा नॉर्मल हो जाता है और नेहा के चुचों से नज़र हटाकर उसको देखने लगता है।

करीम : अरे मालकिन, आप तो बुरा मान गई मेरी बात का.. मैं तो वही बोल रहा था जो आप सुनाना चाहती थीं। मैं आपके इन ख़ूबसूरत चुचों को निहार रहा था..

करीम फिर से एक बार नेहा के चुचों पर से नज़र फेरते हुए अपने होठ चाटता है। करीम की बातें सुनकर अब नेहा अनकंफ़र्टेबल फ़ील करने लगती है.. करीम की बातें उससे अजीब सी फ़ीलिंग दे रही थीं, जो उसने आज तक महसूस नहीं की थी.. वो इतने बड़े घर की बहू थी और वो एक मामूली लॉरीवाला उससे गंदी बातें कर रहा था और वो भी उसी के घर में..

करीम : वैसे मालकिन…

नेहा उसको देखने लगती है। करीम अपनी लुंगी को ठीक करते हुए किचन काउंटर के पास खड़ा हो जाता है।

नेहा : क्या?

करीम : सच में.. आप काफ़ी ख़ूबसूरत हो..

करीम की बात सुनकर अब नेहा को पहले जैसा गुस्सा नहीं आता। वो उसकी बात सुनकर वहीं खड़ी रहती है। वो अब उसके साथ ज़्यादा बात नहीं करना चाहती थी।

नेहा : अच्छा अच्छा.. ठीक है..

इतना बोलकर नेहा मुड़कर जाने लगती है, तभी करीम नेहा की बड़ी गाँड देखते हुए…

करीम : वैसे मालकिन… आपकी एक और चीज़ है जो बहुत ही मस्त है।

नेहा करीम की बात पर पीछे मुड़ती है और करीम की नज़र अपनी गाँड पर पड़ती है.. नेहा फिर से करीम की तरफ़ गुस्से से देखने लगती है।

नेहा : क्या.. क्या मतलब है तुम्हारा।

करीम : कुछ नहीं मालकिन.. सच बता दूँगा तो आप फिर से गुस्सा करने लगोगी..

नेहा इस बात पर कुछ नहीं बोलती और करीम को घूरती है।

करीम : आज तक मैंने कई ख़ूबसूरत औरतें देखी हैं मालकिन, लेकिन आपकी जैसी ख़ूबसूरत औरत मैंने ज़िंदगी में पहली बार देखी है..

इस पर नेहा अब शर्मा जाती है और हल्की सी हँसी उसके चेहरे पे आ जाती है.. करीम जानता था कि किसी भी औरत को उसकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ पसंद आती है और नेहा के चेहरे की हँसी देख करीम समझ जाता है कि उसने कही हुई बात नेहा को काफ़ी पसंद आई है।

नेहा : तुम जैसे को देखने मिलती भी है ख़ूबसूरत औरतें?

नेहा थोड़ा चिढ़ाते हुए बोलती है और हँसती है…

करीम – नहीं मालकिन.. हम जैसों की औक़ाद कहाँ आप जैसे बड़े घर की औरतों को देखने की या कुछ करने की..

नेहा थोड़ा हैरान हो जाती है उसकी बात से…

नेहा : क्या कहा तुमने? कुछ करने की? कहने का क्या मतलब है तेरा??

करीम ने जानबूझकर ये कहा था। वो जानता था कि नेहा उससे ये सवाल ज़रूर पूछेगी..

करीम – वोह.. मालकिन मेरा मतलब तो आप समझ ही चुकी होंगी..हेहेहे..

करीम अपने पीले दाँत दिखाते हुए हँसने लगता है जो नेहा को बिल्कुल पसंद नहीं आता..

नेहा : साफ़-साफ़ बोल क्या मतलब है वरना…

करीम : मेरा मतलब चुदाई से था.. हम जैसों की औक़ाद कहाँ आप जैसे बड़े घर की औरतों को चोदने की..

करीम अब इतना खुल चुका था कि उसने नेहा के सामने ही चुदाई की बात छेड़ दी। चुदाई का नाम सुनकर ही नेहा का चेहरा शरम से लाल हो जाता है। एक बुड्ढा काला मामूली आदमी उसके सामने, उसके साथ ही चुदाई की बातें कर रहा था..

नेहा (मन में) : ओह माय गॉड.. कितना बेशरम आदमी है ये…इसको तो कोई शरम ही नहीं है बात करने की.. हाउ कैन ही यूज़ दैट वर्ड इन फ्रंट ऑफ ए वुमन..

नेहा : दे…देखो, तुम्हें कोई शरम भी है? क्या बोल रहे हो तुम मेरे सामने? मैं मालकिन हूँ तुम्हारी और तुम ऐसी बातें कर रहे हो मेरे साथ?

करीम – तो कैसी बात करूँ मालकिन.. अब चुदाई को चुदाई न बोले तो क्या बोले? आप ही बताओ..

नेहा.: मैं?? मु…मुझे नहीं पता..

करीम – बोलिए ना मालकिन.. अगर चुदाई को चुदाई नहीं बोलेंगे तो और क्या बोलेंगे।

करीम फिर से चुदाई वर्ड यूज़ करता है नेहा के सामने.. इन बातों के बीच करीम नेहा के पूरे जिस्म को अच्छे से निहार रहा था। नेहा के मस्त फ़िगर का वो दीवाना हो गया था..

करीम – मालकिन एक बात बोलूँ?

नेहा के दिल की धड़कन बढ़ जाती है उसकी बात से। वो कुछ नहीं बोलती और बस करीम को देखती है।

करीम : विशाल साहब बहुत लकी हैं जो उनको आप जैसी आइटम बीवी मिली। एकदम माल दिखती हो आप।

करीम नेहा को खुलके आइटम और माल बोलता है। नेहा को अपनी तारीफ़ अच्छी तो लगती है लेकिन माल, आइटम बोलने पर उसे गुस्सा भी आता है…

नेहा – ईईई… मैंने बोला ना गंदे वर्ड मत यूज़ करो…

करीम – अरे मालकिन.. ये कहाँ गंदे हैं, आप हो माल, एकदम आइटम दिखती हो..

नेहा : अईई श्श्श्श्ह्ह..

नेहा उसको शांत रहने के लिए बोलती है। करीम अब अच्छे से खुल गया था। अब वो एक और स्टेप आगे जाकर बोलता है

करीम : मालकिन.. मेरी ज़िंदगी बीत गई पर एक ही ख़्वाहिश रह गई..

नेहा : कौन सी?

करीम : यही कि मैं किसी बड़े घर की औरत को चोदूं..

करीम थोड़ा रिस्क लेकर ये बोलता है, नेहा उसकी बात पर थोड़ा हैरान हो जाती है। करीम को लगता है कि नेहा अब बहुत ही ज़्यादा गुस्सा होगी पर अगले ही पल नेहा हँसती है जिसपर करीम थोड़ा चौंक जाता है।

नेहा – हाहाहाह.. सपने अच्छे देख लेते हो तुम, लेकिन कभी अपनी शक्ल देखी है आईने में? तेरे जैसी शक्ल वाले बुड्ढे के साथ.. हाहाहाह… जो कभी होने वाला ही नहीं है उसके बारे में क्यों सोच रहे हो। और वैसे भी तुम्हारे पास है ना नीलू… उसी से काम चला लो.. वो भी तुम्हारे औक़ाद से ज़्यादा है तुम्हारे लिए..

इतना बोलकर नेहा फिर से हँसने लगती है।

करीम उसकी बात का बिल्कुल बुरा नहीं मानता क्योंकि नेहा की हँसी से उसने एक तरह से करीम को मौक़ा दे दिया था गंदी बातें करने का..

करीम : लेकिन मालकिन.. नीलू में वो बात नहीं है.. मुझे तो गोरी बदन वाली मस्त माल चाहिए, जो अमीर हो, ख़ूबसूरत हो..

करीम अब डिमांड तो ऐसे कर रहा था जैसे उससे किसी ने पूछा हो कि उसे कैसी लड़की चाहिए। करीम उतना बोलकर नेहा के क़रीब जाने लगता है। करीम को अपने पास आता देख नेहा को थोड़ा अजीब लगता है। एक काला गंदा बुड्ढा, जो एक गंदी सी लुंगी और शर्ट में था एक ख़ूबसूरत औरत की तरफ़ बढ़ रहा था। उसकी लुंगी का एक हिस्सा एक तरफ़ से खुला था जो हवा से इधर-उधर उड़ रहा था, जिससे उसकी काली जाँघें दिख रही थीं। नेहा समझ नहीं पा रही थी कि करीम उसकी तरफ़ क्यों आ रहा है।

नेहा – हेय.. इधर क्यों आ रहे हो?

करीम कुछ नहीं बोलता और नेहा की तरफ़ बढ़ते रहता है। वो नेहा के नज़दीक पहुँचकर…

करीम : मालकिन आपकी साड़ी पर कुछ रेंग रहा है..

करीम की बात सुनकर नेहा एकदम से डर जाती है और…

नेहा – आआआआआआ क्याआआ हैईईईईईईईई…..

नेहा डरते हुए इधर-उधर अपनी साड़ी झटकने लगती है। असल में उसकी साड़ी पर कुछ नहीं था ये सब करीम का किया-धरा था…

नेहा : ईईव्व्व्व्व…..कहाँ है…

करीम : मालकिन इधर आइए.. मैं निकाल देता हूँ।

नेहा, जो काफ़ी डर गई थीं, उसके डर में बिना कुछ सोचे करीम के पास जाती हैं… नेहा अपने पास आते ही करीम उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ़ खींचता है। दोनों एक-दूसरे के बेहद क़रीब आ जाते हैं। नेहा के बड़े चुचे इस वक़्त करीम की छाती से दबे हुए थे.. उसको इस बात का अंदाज़ा नहीं था क्योंकि वो कीड़े के डर में अपनी साड़ी झटक रही थीं.. उसे कुछ भी होश नहीं था कि वो इस वक़्त एक गंदे लॉरीवाले बुड्ढे की बाँहों में है… एक ख़ूबसूरत औरत जो इस घर की बहू है वो एक गंदे लॉरीवाले काले बुड्ढे से चिपकी हुई थी…

करीम – डरिए मत मालकिन.. मैं अभी आपके अंदर से कीड़ा निकाल देता हूँ..

करीम की डबल मीनिंग बात नेहा के पल्ले नहीं पड़ती और वो भी हाँ में हाँ भर देती हैं।

नेहा – हाआआ..हाआ जल्दी निकालोओओ..

करीम अब अपने दोनों हाथ नेहा की बैक पर चलाने लगता है। उसको नेहा के गोरे जिस्म से मदहोश कर देने वाली ख़ुशबू आ रही थी। करीम अब अपने काले हाथ नेहा की गाँड पर धीरे से रख देता है।

करीम (मन में) – ओओफ्फ़्फ़… क्या गाँड हैईई साली की… नेहा मेरी जान, तेरी गाँड.. कितनी टाइट है रे ये… मेरा लोडा मरे जा रहा है तेरी गाँड में जाने के लिए.. एक दिन तेरी गाँड में ऐसे मारूँगा कि तू चलने के लायक़ नहीं बचेगी।

ऐसा सोचते हुए वो एक बार नेहा की गाँड दबाता है हल्के से… नेहा चुपचाप वैसे ही खड़ी थी करीम से चिपके हुए। नेहा के जिस्म की गर्मी से अब करीम का काला मोटा लंड उसकी लुंगी में खड़ा हो चुका था, जो अब नेहा को अपने दोनों टाँगों के बीच में महसूस होने लगता है। इस पोज़िशन में उसका लंड नेहा को साड़ी के ऊपर से अपनी चूत पर लग रहा था। उस चुभन के कारण अब नेहा थोड़ा नीचे देखती है तो वो देखती है कि करीम की लुंगी में एक बड़ा सा तंबू बना हुआ है।

वो तंबू नेहा को चूत के पास चुभ रहा था, जैसे ही नेहा को अहसास होता है कि ओह क्या है वो करीम से दूर हटने लगती है। तभी करीम फिर से नेहा की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ़ खींचता है। इस बार दोनों के चेहरे आमने-सामने थे। नेहा का ख़ूबसूरत चेहरा करीम के काले बदसूरत चेहरे के सामने था। नेहा के मुँह से एक भी वर्ड नहीं निकल रहा था। वो किसी स्टैच्यू की तरह खड़ी थी करीम की बाँहों में। करीम के हाथ नेहा की कमर को जकड़े हुए थे, जिसकी वजह से नेहा हिल भी नहीं पा रही थी। नेहा अपने चेहरे के इतने पास करीम का बदसूरत चेहरा देख नज़रें हटा देती है पर जैसे ही उसको अपने टाँगों के बीच चुभने लगता है वो करीम को सवालों भरी नज़रों से देखने लगती है।

करीम भी अब नेहा को देखते हुए उसकी गाँड को हल्के से मसलता है और उसे थोड़ा ऊपर करता है जिससे नेहा थोड़ा ऊपर हो जाती है। इतनी देर तक देखने के बाद अब करीम नेहा की आँखों में देखते हुए उसके गुलाबी होठों की तरफ़ अपने काले सूखे हुए होठ बढ़ाने लगता है। नेहा के लिए ये बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था। एक काला लॉरीवाला उसको किस करने की कोशिश कर रहा था। करीम के होठ नज़दीक आते ही नेहा अपने हाथ बीच में लाती है जिसकी वजह से करीम के काले होठ एक बार नेहा के गोरे हाथों को चूमते हैं। नेहा अपना हाथ जल्दी से हटा लेती है और फिर एकदम से करीम की पकड़ से निकलकर वहाँ से भाग जाती है..

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