दीदी की पलंग तोड़ चुदाई – 1
Didi ki hardcore chudai ki story:- हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम राहुल है और मै 18 साल का हूँ। मेरे घर में 3 लोग रहते है मैं, माँ डैड एंड मेरी बहन जो की 24 साल की है और उनकी शादी हो गई है। दीदी कॉलेज में टीचर है और उनके हस्बैंड जॉब करते है और 5 बजे घर आते है. मेरे माँ डैड ज्यादातर गाँव में ही रहते है। हमारा गाँव कानपुर के पास है लेकिन हम दिल्ली में रहते है। यह बात तब की है जब मेरे माँ एंड डैड 2 महीने के लिए गाँव गए हुए थे और मेरी दीदी और जीजा भी दिल्ली में ही रहते थे लेकिन उनका घर हमारे घर से थोड़ा दूर था। जब भी मम्मी पापा गाँव जाते है तो मै दीदी के घर चला जाता था। तो चलिए स्टोरी पे आते है..
Didi ki hardcore chudai ki story
दीदी रोज सुबह 8 बजे कॉलेज जाती थी और 3 बजे आ जाती और मै भी सुबह 8 बजे कॉलेज जाता और 5 बजे आता और जीजा का भी यही था 10 से 5. तो एक बार मेरे एक्साम्स चल रहे थे तो मेरे 4-5 दोस्त मेरे घर पे आकर पढाई करते थे. जिनमे से एक दोस्त था जिसका नाम अब्दुल था और वो बहुत बड़ा लोंड़ियाबाज़ था।
वो कॉलेज बहुत कम जाता था. उसकी एक बात बताता हूं जब वो 12th क्लास में था, तब उसने अपनी एक कॉलेज टीचर जिनकी उम्र 38 होगी उन्हें पटा के चोदा था और तब से वो ये सोचता था की वो किसी को भी पटा के चोद सकता है. दीदी घर पे 2 बजे आ जाती और मै और जीजा 5 बजे और अब्दुल आता 6 बजे. फिर एक दिन अब्दुल आया और मै और अब्दुल अपने कमरे में पढ़ने लगे, तो अब्दुल को प्यास लगी तो वो किचन में पानी पीने गया.
फिर मुझे भी प्यास लगी थी तो मै भी उसके पीछे चल दिया. जैसे ही वो किचन में घुसा वो रुक गया और खड़ा होकर दीदी को देखने लगा. मैंने जब देखा तो दीदी उस समय खाना बना रही थी और गर्मी की वजह से वो पूरी पसीने से भीगी थी. उनके बगलो से लेकर मोटे मोटे बूब्स तक पसीना था. पीठ पूरी गीली हो रही थी, ब्लाउज भी पूरा गीला था. उनके ब्लैक ब्लाउज में वाइट ब्रा ट्रांसपेरेंट हो रही थी. दीदी पीछे को खड़ी थी, तो उनकी उभरी हुई मोटी गांड बड़ी मस्त लग रही थी. तभी मैंने देखा की अब्दुल अपना हाथ लंड पे रख रहा है तभी दीदी उसे देख लेती है।
दीदी – अरे अब्दुल कुछ चाहिए क्या?
अब्दुल – हाँ दीदी पानी.
दीदी – रुको.
फिर पानी पीकर हम अपने कमरे में आ जाते है.
अब्दुल – यार अब पढ़ने मे मन नहीं लग रहा.
मै – क्यों?
अब्दुल – यार क्या बताऊ तू बुरा मान जाएगा.
मै – बता तो?
अब्दुल – छोड़ यार.
मै – भोसडीके बता!
अब्दुल – यार तेरी दीदी कितनी हॉट है!
मै – अबे चुप हो जा दीदी है वो मेरी!
फिर वो चुप हो गया, फिर अगले दिन जब मै कॉलेज से घर आया तो देखा की अब्दुल मेरे घर पे था. वो आज कॉलेज नहीं गया था और वो और दीदी बैठ कर बाते कर रहे थे. फिर मै आ जाता हु.
दीदी – अरे तू आ गया चलो, अब तुम दोनों बाते करो मै तेरे लिए खाना लाती हु.
फिर हम दोनों बाते करने लगते है. मै अब्दुल के अपोजिट साइड में बैठा हुआ होता हूं और बीच में टेबल होती है. फिर दीदी खाना लाती है और खाना रखने के लिए झुकती है तो दीदी की गांड अब्दुल के सामने होती है. वो उनकी गांड घूरने लगाता है. फिर जैसे ही वो मुझे देखता है वो अपनी निगाह इधर उधर कर लेता है. उसके बाद दीदी बैठ जाती हैं फिर दीदी मुझसे बोलती है-
दीदी – राहुल कल तू फ्री है क्या?
मै – नहीं दीदी मुझे अपना प्रोजेक्ट करना है.
अब्दुल – कुछ काम था क्या?
दीदी – हां वो कल मेरे दोस्त के बेटे का जन्मदिन है तो उसने बुलाया है.
अब्दुल – ओह तो अगर आपको दिक्कत न हो तो मै चलू?
दीदी – अरे तुम्हे भी तो पढ़ना होगा?
अब्दुल – अरे नहीं दीदी कोई दिक्कत नहीं.
दीदी – अरे नही।
मै – अरे दीदी कोई बात नहीं आप चली जाओ अब्दुल के साथ.
दीदी – तो फिर ठीक है.
अब्दुल – दीदी आप मुझे फ़ोन कर लेना.
दीदी – तुम मुझे अपना नंबर तो दे दो.
फिर अब्दुल अपना नंबर देता है और फिर चला जाता है फिर शाम को अब्दुल का फ़ोन मेरे पास आता है-
अब्दुल – यार थैंक यू.
मै – हां ठीक है.
अब्दुल – तो तू मान ही गया.
मै – क्या?
अब्दुल – अब ज्यादा भोला मत बन.
मै – तू पागल है क्या यार कुछ भी सोचता है.
अब्दुल – बेटा तू बहुत हरामी चीज़ है साले छुपे रुस्तम!
मै – नहीं यार तू जैसा सोच रहा है वैसा कुछ नहीं है पर मुझे कोई दिक्कत नहीं है की वो किसी और के साथ कही आये जाए.
अब्दुल – दिक्कत क्यों नहीं है ये बता?
मै – चल अब चुप हो जा!
अब्दुल – ओके.
फिर अगले दिन शाम 5 बजे दीदी मेरे कमरे में आती है. मै उन्हें देख कर चौंक जाता हूँ उन्होंने ब्लू कलर का साड़ी ब्लाउज पहना हुआ होता है जिसमे उनके बूब्स बहुत मोटे लग रहे होते है और गांड तो निकली जा रही थी और फेस पे फुल मेकअप. तभी थोड़ी देर बाद जीजा आ जाते है और वो दीदी को देखते ही रहते है.
जीजा – अरे आज कैसे कहर ढा रही हो.
दीदी – अरे आप भी न राहुल घर पे ही है.
जीजा – इतनी सज धज के कहा जा रही हो?
दीदी – वो एक जन्मदिन की पार्टी में.
तभी थोड़ी देर बाद अब्दुल आ जाता है और वो जैसे ही दीदी को देखता है चौंक जाता है और देखता ही रह जाता है. तभी जीजा दीदी से बोलते है जरा कमरे में आओ कुछ इम्पोर्टेन्ट काम है.
दीदी – अरे अब्दुल भी आ गया है बाद में काम हो जाएगा.
जीजा – अरे एक चेक पे तुम्हारे साइन चाहिए.
दीदी – अच्छा ठीक है अब्दुल बेटा तुम बैठो.
अब्दुल – जी दीदी.
फिर जीजा दीदी को ले जाते है और कमरे के गेट लगा लेते है और अब्दुल मेरे कमरे में आ जाता है.
अब्दुल – भाई तेरी दीदी तो आइटम लग रही है तेरे जीजा से कण्ट्रोल नहीं हुआ.
मै – साले उन्हें कुछ जरुरी काम था तेरे दिमाग में तो बस एक ही चीज़ चलती है.
अब्दुल – तू देख लिओ.
मै – हाँ चल ठीक है देख लेंगे.
फिर दीदी आधे घंटे बाद निकलती है पर मै और अब्दुल उन्हें देख कर चौंक जाते है, क्यूंकी अब उन्होंने पिंक कलर का साड़ी ब्लाउज पहन रखा था. मेरी और अब्दुल की कुछ बात होती, इसे पहले दीदी ने अब्दुल को बुलाया और वो दोनों चले जाते है. फिर जीजा भी बाहर घूमने निकल जाते. फिर मै उनके कमरे में जाता हूं तो देखता हूं की दीदी की ब्लू साड़ी और ब्लाउज एक कोने मे पड़ा है. ब्लाउज पूरा गीला था और उस पर स्पर्म लगा हुआ था.
मै समझ गया था की जीजा ने दीदी को अंदर क्यों बुलाया था. रात 12 बजे दीदी वापस आती है और वो अपने कमरे में जा कर सो जाती है. अगले दिन जब मै उठता हूं तो जीजा ऑफिस चले जाते है और मेरी छुट्टी होती है मै फ्रेश होकर नीचे जाता हु.
मै – दीदी आज आप कॉलेज नहीं गयी?
दीदी – नहीं आज नहीं गयी तबियत थोड़ी ठीक नहीं है.
मै – अच्छा.
दीदी – तुम्हारा दोस्त बड़ा नालायक है उससे दूर रहा करो.
मै – क्या हुआ दीदी?
दीदी – हुआ कुछ नहीं लेकिन वो सही नहीं है तेरे लिए.
मै (मन में) – कुछ तो काण्ड किया है अब्दुल ने.
फिर मै नाश्ता करके अब्दुल को फ़ोन लगाता हु-
मै – क्यों बे कल तूने क्या हरकत की?
अब्दुल – मैंने कुछ नहीं किया क्यों दीदी कुछ कह रही थी?
मै – हाँ कह रही थी की तू बहुत नालायक है.
अब्दुल हंसने लगता है और बोलता है-
अब्दुल – कल तेरी दीदी जब बाइक पे पीछे बैठी थी तो इतने ब्रेक लगाए की पूरे रस्ते भर मेरा लंड खड़ा रहा.
मै – ओए तू पागल है क्या यार वो मेरी दीदी है!
अब्दुल – दीदी नहीं माल है यार वो।
मै – देख यार तू ठीक नहीं कर रहा।
अब्दुल – तू तो बड़ा शरीफ बन रहा है मादरचोद!
मै – अरे यार चल ठीक है बाय.
फिर अगले दिन जब मै कॉलेज से आता हूं तो दीदी अपने कमरे में सो रही होती हैं और पास में ही उनका फ़ोन था. तो मैंने उनका फ़ोन उठाया लेकिन उसमे फिंगरप्रिंट लॉक था. मैंने हलके से मोबाइल उनकी ऊँगली पे रख दिया और फ़ोन अनलॉक हो गया. फिर मै बाहर आ गया तो मैंने व्हाट्सप्प खोला, जिसमे सब से ऊपर अब्दुल का ही नाम था.
मैंने चैट खोली वो मै आपको शुरू से बताता हु-
अब्दुल – हेलो दीदी.
दीदी – कौन?
अब्दुल – मै अब्दुल.
दीदी – ओह तो तुम हो.
अब्दुल – हम..
दीदी – तुम बाइक चलना सीख लो तुम्हे चलानी नहीं आती.
अब्दुल – क्या करू दीदी रास्ता ख़राब था.
अब्दुल – दीदी आज बहुत सेक्सी लग रही थी.
दीदी – ये शब्द मुझसे दोबारा मत बोलना अच्छा नहीं लगता.
अब्दुल – दीदी आज अपनी साड़ी चेंज क्यों कर ली थी?
दीदी – वो उसपे पानी गिर गया था.
अब्दुल – ओह अच्छा.
दीदी – मुझे नींद आ रही है अब तुम भी सो जाओ.
अब्दुल – ओके गुड नाईट दीदी.
दीदी – गुड नाईट.
फिर आज की चाट है-
अब्दुल – दीदी कहा हो?
दीदी – क्यों?
अब्दुल – बस ऐसे ही.
दीदी – कॉलेज में हूँ।
अब्दुल – तो घर कब तक आओगी?
दीदी – करीब 2 बजे तक.
अब्दुल – ओके.
फिर २ बजे-
अब्दुल – घर पे आ गयी क्या आप?
दीदी – हाँ कुछ काम है क्या? पर राहुल नहीं आया अभी.
अब्दुल – नहीं मुझे आपसे काम है मै आता हु. बस इतनी ही थी फिर मै अपने कमरे में चला जाता हूं आगे की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में.
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