दादाजी से चुदकर उनकी पत्नी बन गई 1

Dada poti ki chudai aur sex ki kahani:- कहानी के टाइटल से ही समझ गए होंगे कि मैं इस hindi kahani के माध्यम से क्या कहना चाहती हूँ (yeh ek hot sex story hindi me hai) — कि मैंने अपने दादा जी से शादी करके उनकी बीवी बन गई।

उनसे शादी करने से पहले मैं ये नहीं जानती थी कि वो मेरे दादा है… खैर, वो आप बताइए, अब वो मेरे क्या लगे? मैं शुरू से बताती हूँ — मेरा नाम मधु है।

Dada poti ki chudai aur sex ki kahani

अब सुनिए मेरी ज़िंदगी की yeh hot sex kahani — मेरे सीने पर निंबुओं में रस भरना शुरू हो गया था। और मेरे निंबुओं के ऊपर जो गुलाबी मोती थे, उन्होंने अपना कद निकालना शुरू कर दिया था और वो सख्त होने लगे थे।

दुनिया के लोग इसको निप्पल कहते हैं, जिनसे बच्चा दूध पीता है और मर्द — जवान हो या बुढ्ढा — हमारे इन निप्पलों से रस पीता है। मेरे रंग की तरह मेरे निप्पल भी एकदम गुलाबी हैं।

मगर मेरे नींबू से रस पीने वाला मर्द कौन था? कौन था जो मेरे इन गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह में भरकर इनका रस पिएगा? कौन मर्द मेरे इन नींबुओं को मुँह में लेकर अपनी कुर्दरी ज़ुबान से इनको चूसेगा, इनको चाटेगा-चूसेगा? कौन ऐसा मर्द होगा जो मेरे निंबुओं को चूस-चूसकर बड़े-बड़े नागपुरी संतरे बनाएगा?

खैर, कोई तो मर्द होगा ही इनसे खेलने के लिए। मेरी टाँगों के बीच हल्के-हल्के रेशमी रोएँ आने शुरू हो गए और कई बार अपनी टाँगों के बीच अपनी उँगलियों से अपने रेशमी बालों को सहलाती, पर जो मज़ा मर्द की उँगलियों में था, वो मज़ा खुद की उँगलियों में कहाँ?

अब मेरा दिल भी किसी मर्द की बाहों में आने के लिए मचलने लगा। जब मैं बाज़ार या कॉलेज जाती तो जवान लड़कों की नज़र तो मेरे बदन पर होती ही थी, बड़ी उम्र के मर्दों की नज़र भी मुझ पर होती थी।

और वो मर्द मेरे बदन को ऐसे घूरते, मेरे बदन के हर अंग को ऐसे ताड़ते जैसे आँखों से मुझे चोद डालेंगे। मेरी टाँगों के बीच मर्दों को कुबर का खज़ाना दिखाई देता था, पर मैंने अपने कुबर के खज़ाने को बड़ी हिफ़ाज़त से संभाल कर रखा था।

पर पता नहीं क्यों मुझे जवान लड़के अच्छे नहीं लगते थे। और जवान लड़कों की बजाय किसी मैच्योर मर्द को इस तरह हसरत भरी नज़रों से अपने बदन को घूरते देखती तो मेरे बदन में कुछ होने लगता।

उनको इस तरह मेरे बदन को देखते देख मेरे छोटे-छोटे गुलाबी निप्पल भी खड़े हो जाते, मेरी टाँगों के बीच गुलाबी छेद फड़कने लगता और उसमें मीठी खुजली होने लगती, उनमें अमृत की धारा बहने लगती और ना चाहते हुए मेरी आँखें उसकी आँखों से टकरा जातीं और मेरे होठों पर मुस्कान आती।

तो पैंट में उनके बम्बू ऐसे तन जाते जैसे उसको फाड़कर बाहर किसी भी पल आ सकते थे। मुझे घूरते देख मुझे एक अलग ही एक्साइटमेंट होती और खुद अपने मन में कहती — “आज ये अंकल घर पर अकेले में मुझे सोचकर अपना लौड़ा ज़रूर हिलाएँगे और मुझे सोचकर अपना कीमती माल मुझे ख्यालों में लाकर बर्बाद करेंगे।”

और सोचती — “काश ये मुझे अपनी बाहों में भरकर निचोड़ते, मेरे ऊपर चढ़कर मेरी रेल बना देते!” खैर, ये तो बाद की बात थी कि मेरी रेल कौन बनाएगा।

अब मैं अपने बारे में, अपनी फैमिली के बारे में आप लोगों को बता दूँ — क्योंकि यहीं से meri is love story hindi ki जड़ें जुड़ी हैं।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि मेरा नाम मधु है, वैसे अपने नाम की तरह मीठी हूँ या नमकीन, ये तो आप मर्द ही बता सकते हैं क्योंकि अक्सर मर्द मुझे चखने के बाद कभी मीठी बोलते हैं या कभी नमकीन। खैर, मैं मीठी हूँ या नमकीन, इसका फैसला बाद में होगा।

मैं अपनी उम्र आप लोगों को पहले ही बता चुकी हूँ। अपने बदन के बारे में आप लोगों को बता दूँ — मेरी हाइट इतनी नहीं है, मेरी हाइट मात्र 5.1 इंच है, पर एकदम दूध-सी गोरी मेरा रंग, जैसे दूध में चुटकी भर सिंदूर मिला दिया जाए, वैसा ही गुलाबी।

मेरी आँखें नीली, जैसे उनमें न जाने कितना नशा हो। मेरे गाल एकदम फूले, बिल्कुल लाल-लाल टमाटर जैसे नरम। मेरे होठ एकदम सुर्ख, जिनको चूमने के लिए न जाने कितने दीवाने थे।

और मेरे नींबू जो अभी 30 के हैं और उनमें रस भरना शुरू हो गया था — मेरे निंबुओं को मौसमी बनाने के लिए कितने लड़के-मर्द तड़प रहे थे! मेरी इन कड़क चुचियों के ऊपर अनार के दाने जैसे छोटे-छोटे निप्पल किसी के दिल पर छुरियाँ चलाने के लिए काफी थे।

और मेरी नाभि के नीचे, मेरी टाँगों के बीच जो तिजोरी — जिसको लूटने के लिए न जाने कितने लुटेरे घात लगाए बैठे थे — पर मेरी तिजोरी को मैंने बड़ी हिफ़ाज़त से रखा था अपने राजकुमार के लिए।

मेरी चूत अभी एकदम कुँवारी थी और मैंने कभी अपनी चूत में उँगली नहीं डाली क्योंकि मेरी चूत टाइट होने के कारण मेरी चूत मेरी उँगली ले नहीं पाती। मुझे क्या पता था जो मेरी चूत मेरी छोटी-सी उँगली नहीं ले पा रही, उसमें एक दिन 12 इंच का, मेरी कलाई जितना लंबा बम्बू मेरी चूत में चला जाएगा!

खैर, वो तो सब लड़कियों की चूत में जाता ही है। और मेरे बदन का सबसे खास हिस्सा — मेरे 32 साइज़ के बाहर निकले हुए चूतड़। और जब मैं अपने चूतड़ों पर टाइट जींस चढ़ाकर — जिससे मेरे दोनों चूतड़ों का साफ़ दिखाई देता — किसी भी मर्द को दीवाना बनाने के लिए काफी था।

और जब जवान लड़कों के साथ मैं किसी मैच्योर मर्द को अपनी गाँड़ को निहारते देखती, उससे अपना लुंड मसलते देखती, मुझे इतनी खुशी होती — मैं बता नहीं सकती। और मन में सोचती कि आज ये बुढ्ढा ज़रूर मेरे नाम की मुठ मारेगा।

खैर, ये तो मेरी बात हुई। मेरे घर में मेरे सिवाय मेरी माँ थीं — मेरे जन्म के कुछ महीनों के बाद ही मेरे पिता जी का देहांत हो गया था और मेरी माँ ने बड़ी मुश्किल में मुझे पाला। मेरी माँ एक ऑफिस में जॉब करती हैं। ये तो मेरे और मेरे घर के बारे में।

मैं अभी पढ़ती थी और अक्सर मैं अपनी सहेली के साथ कॉलेज ही जाती थी। ऐसे ही एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ अपने कॉलेज के बाहर थी कि तभी एक बहुत बड़ी गाड़ी हमारे आगे रुकी और उसमें से एक बड़ी उम्र का आदमी उतरा।

उस आदमी को देखते ही मेरी नज़र तो उस पर टिक गई — yahin se meri is indian sex story me naya mod shuru hua।

एक बात कह दूँ — जिस तरह का आदमी मेरे सपनों का राजकुमार था, ठीक वैसे ही थे — लंबा कद, चौड़ा सीना, लाल-लाल आँखें, बड़ी-बड़ी मूँछें — कोई भी लड़की उनकी ओर आकर्षित हो सकती थी। मेरी सहेली का नाम नीलू।

नीलू मुझसे: “मधु, इनसे मिलो। ये इस शहर के बहुत बड़े बिज़नेसमैन हैं, पिछले साल ही लंदन से आए हैं और यहाँ इनकी होटल्स और फैक्ट्री हैं। मेरे पापा के बहुत अच्छे दोस्त हैं।”

मैं: “नमस्ते अंकल।”

अंकल: “नमस्ते बेटा, क्या नाम है तुम्हारा?”

मैं: “जी, मधु।”

अंकल: “बड़ा अच्छा नाम है।” मैंने नोटिस किया उनकी आँखें मेरी ओर ही थीं और न चाहते हुए भी मैं बस उन्हें ही देख रही थी।

पता नहीं ऐसा क्या था उनमें — वो मेरे दिलो-दिमाग़ में छा चुके थे और ये बात शायद उन्होंने भी नोटिस कर ली थी। वो तो चले गए, पर उनकी तस्वीर मेरे दिल में छप चुकी थी।

क्या यही meri true love hindi story ka aagaz tha?

मैं बार-बार कोशिश कर रही थी उनको भूलने की, पर जितना मैं उनको भूलने की कोशिश करती, मेरा दिमाग़ उतना उनकी ओर खिंच रहा था। मेरा किसी काम में मन नहीं लग रहा था।

मैंने रात को जल्दी-जल्दी खाना खाया और अपने रूम में आकर बेड पर लेट गई, पर आँखों में नींद का नाम-ओ-निशान ही नहीं था। मैं बेड पर लेटी अकेले में उनके बारे में सोच रही थी।

मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरे पास हों और मेरे चेहरे को अपने हाथ से ऊपर उठाकर मेरी आँखों में आँखें डालकर पूछ रहे हों — “क्या सोच रही हो मेरी जान, मेरे बारे में ना?” और ये बात दिमाग़ में आते ही मेरे चेहरे पर शर्म के साथ मुस्कुराहट आ गई।

और धीरे से बोली — “ये मुझे क्या हो गया है, कुछ भी सोचने लगी हूँ! कहीं मुझे उनसे प्यार तो नहीं हो गया?” और मैं फिर से अंकल के बारे में ही सोचने लगी — बड़ी-बड़ी मूँछें, कितना रौब था उनके चेहरे पर, वाकई में! क्या मर्द थे!

क्या सच में यही वो मर्द नहीं जिनकी मुझे तलाश थी — मेरे सपनों का राजकुमार! इन्हीं की बाहों में समाने के लिए तड़प रही थी। मेरा तो दिल कर रहा था कि अभी उनसे जाकर लिपट जाऊँ और कहूँ कि अंकल, कस लीजिए मुझे अपनी बाहों में, मसल डालिए, निचोड़ डालिए नींबू जैसे!

अपने सपनों के राजकुमार के बारे में सोचते ही मेरा चेहरा एकदम से लाल हो गया। सच कहूँ, मैं तो उनकी मर्दानगी पर मर-मिटी थी! कैसे घूर रहे थे — ये भी नहीं देखा कि साथ मेरी सहेली खड़ी है!

पर नहीं, जनाब की आँखें तो मेरे बदन पर थीं! कैसे उनका हथियार तनतना गया था! और ज़रूर वो भी बिस्तर पर लेटे मेरे बारे में ही सोच रहे थे, अपने लुंड को निकालकर हिला रहे होंगे।

यही सोचते-सोचते मेरा हाथ मेरी सलवार के ऊपर चूत पर चला गया और मैं सलवार के ऊपर से चूत रगड़ने लगी। और फिर मैंने तकिया अपनी टाँगों के बीच दबा लिया।

और मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं अपनी कमर को चलाते हुए तकिए पर अपनी चूत रगड़ने लगी।

तकिए पर अपनी चूत रगड़ते मेरी आँखों के सामने अंकल का ही चेहरा था।

और उस रात मैंने पहली बार तकिए पर चूत रगड़ते अपनी चूत का पानी निकाला था।

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