माँ की गन्ने के खेत मे चुदाई 1
Maa ki ganne ke khet me chudai dekhi:- मेरा नाम विनोद है। इस कहानी में पढ़िए कि मैंने कैसे अपनी माँ को गन्ने के खेत में चुदवाते देखा। ये कुछ साल पहले की बात है। उस समय मैं एक बड़े यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग कॉलेज में फाइनल ईयर में पढ़ता था। मुझसे छोटी बहन कविता भी उसी यूनिवर्सिटी के साइंस कॉलेज के फाइनल ईयर में थी। वो मुझसे सिर्फ डेढ़ साल ही छोटी थी। कविता से छोटी एक और बहन थी। अनिता 12वीं में पढ़ रही थी। दोनों बहनों में मुझे कविता ही ज्यादा पसंद थी।
Maa ki ganne ke khet me chudai dekhi hindi sex story
मुझे जब मालूम हुआ कि कविता अपने कॉलेज के एक टीचर से चोरी-छिपे मिलती है तो मैंने उसे फुसलाकर चोद लिया। अपनी प्यारी बहन की सील मैंने तोड़ी। भाई-बहन की चुदाई की कहानी बाद में, पहले माँ की चुदाई की कहानी सुनाता हूँ।
मेरी माँ रंजना गाँव में एक अमीर घर में जन्मी, पली, बढ़ी थीं। जवानी चढ़ी ही थी कि शादी भी हो गई। बाद में पता चला कि शादी के पहले ही कई लंड को निगल चुकी थीं। लेकिन पति को उनकी चूत कोरी ही मिली थी। शादी के पाँच साल में ही माँ ने तीन बच्चे भी पैदा कर दिए।
जब मैंने माँ को गन्ने के खेत में चुदवाते देखा उस समय वो 38 साल की थीं। अगर एक सेंटेंस में कहा जाए तो मेरी माँ रंजना बहुत ही आकर्षक और मालदार औरत थीं। दूसरों की बात छोड़ो, मैं जब भी उसे देखता था तो लौड़ा कपड़ा फाड़कर माँ की बुर में घुसने के लिए तरपता रहता था।
5 फुट 5 इंच लंबी, हेल्दी लेकिन बॉडी पर कहीं भी एक्स्ट्रा मांस नहीं था। जब वो गाँव से बाहर जाती थीं या जब किसी ऐसी जगह जाती थीं जहाँ लोगों की भीड़-भाड़ हो तभी ब्रा पहनती थीं। पैंटी तो उन्होंने कभी पहना ही नहीं। 36 इंच से भी बड़ी मांसला चुचियाँ, 26-27 इंच की कमर और 36 इंच के चूतड़ सभी को पागल करते थे। लंबी, मांसला और सुडौल जाँघें उसे एक के बाद एक सैकड़ों मर्दों से चुदवाने की ताकत देती थीं। गुलाबी और रसीले होंठ सबको ललचाते थे। और सबसे ज्यादा कयामत ढाती थीं उनकी बिना काजल की कजरारी और नशीली आँखें। और मुस्कुराना तो उनकी आदत थी।
एक्स-मास की छुट्टियाँ मंगलवार से होना था लेकिन ज्यादातर लोगों ने शनिवार को ही हॉस्टल खाली कर दिया। हम दोनों भाई-बहन भी स्टेशन पहुँचे। रुपया-पैसों की कमी नहीं थी। चीफ टिकट कलेक्टर को घूस देकर फर्स्ट क्लास के कंपार्टमेंट में एक बर्थ का अरेंजमेंट किया। समय पर ट्रेन आई और टीटी हम दोनों को फर्स्ट क्लास के एक कूपे में ले गया। वहाँ एक 55 साल के आदमी, 50 साल की उनकी पत्नी और एक 25-26 साल की बेटी बैठे थे। लड़की मैरिड थी। उसका नाम अलका था। हम कुछ कहते उससे पहले टीटी ने ही हमें पति-पत्नी कहकर उनसे इंट्रोड्यूस करवाया।
करीब 2 घंटा बातों-बातों में ही गुजर गया। जब सोने का समय आया तो दोनों एज्ड लोगों ने नीचे का बर्थ लिया। मैं अपनी बहन कविता को अपने बर्थ पर साथ सुलाना चाहता था। लेकिन कविता मेरे साथ नहीं अलका के बर्थ पर चली गई। अंकल ने लाइट बंद कर दिया। कूपे में धुँधला अँधेरा छा गया और मुझे बगल के बर्थ से कपड़ों की सरसराहट और गिगल की आवाज सुनाई देने लगी। नीचे से आंटी की आवाज आई।
आंटी: लड़कियो बहुत रात हो गई है, अब सो जाओ। सुबह बात करना।
ठंडी का समय था। सबने ब्लैंकेट ओढ़ रखा था। मैंने बगल के बर्थ पर देखा लेकिन अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दिया। दोनों ने ब्लैंकेट्स से फेस और हेड भी कवर कर रखा था। कविता के साथ मस्ती मारने का कोई ऑपर्चुनिटी न देखकर मैं भी सोने का ट्राय करने लगा।
सुबह हॉकर्स वालों की आवाज सुन नींद खुल गई। इधर-उधर देखा तो दिल धक् से रह गया। नीचे फ्लोर पर 2-2 सेट पैंटी और ब्रा इधर-उधर बिखरे थे। मतलब साफ था। दोनों नंगी सोई थीं। नीचे झाँका तो दोनों अंकल और आंटी बैठे बातें कर रहे थे। खैर मैं नीचे उतरा और दोनों को प्रणाम कर बाहर आ गया। 10 मिनट के बाद टॉयलेट्स से फ्रेश होकर आया तो देखा कि दोनों माल कपड़े पहनकर अंकल के बगल में बैठी हैं। मुझे कूपे में आता देख दोनों बाहर चली गईं।
अंकल: बेटा, आज जिंदगी में पहली बार 2-2 जवान लड़कियों को नंगा देखा। हमारी बेटी अलका जो है सो है। तुम्हारी पत्नी कविता बहुत ही बढ़िया माल है। सालों बाद उसकी नंगी जवानी देखकर मेरे सोए हुए लौड़ा में हलचल हुई है। बेटा, तुम अलका को जितना चाहो चोद लो, उसकी गाँड मारो लेकिन एक बार मुझे अपनी पत्नी (कविता) की जवानी को छूने दो। कविता को बोलो कि एक बार मेरा लौड़ा सहला दे, लौड़ा चूस दे।
एक 55 साल का आदमी मेरी बहन के लिए गंदी बातें कर रहा था। मुझे गुस्सा नहीं आया। मैंने उसकी 50 साल की घरवाली की जाँघों को सहलाते हुए कहा—
मैं: अंकल, जल्दी मैं कविता को लेकर आपके घर आऊँगा। आप खुद ही कविता से बोलना। मेरी पत्नी बहुत दिलदार है, आपका लौड़ा चूस देगी। वैसे आंटी अभी भी बहुत मस्त हैं।
बोलते हुए मैंने आंटी की दोनों चुचियों को मसलते हुए उनके होठों को चूसा।
मैं: आंटी, अलका के साथ-साथ आपको भी चोदूँगा। विश्वास दिलाता हूँ कि आपको मेरे साथ की चुदाई में बहुत मजा आएगा।
मेरी बातों से ना आंटी नाराज हुईं ना ही अंकल।
अंकल: बेटा, 4-5 सालों से मैंने अपनी घरवाली को नहीं चोदा है। किसी को चोदने लायक नहीं हूँ। दूसरे मर्द ही चोदते हैं इस औरत को। तुम भी चोद लेना लेकिन जब कविता मेरा लौड़ा चूसेगी उसके बाद ही आंटी की बुर तुम्हें मिलेगी।
ये दोनों अंकल-आंटी भी हमारे माँ-बाबूजी जैसे ही चुदासी और चुदक्कड़ थे।
दोनों लड़कियाँ अंदर आईं।
हमारा स्टेशन पहले आया। कविता और अलका ने आपस में एड्रेस और फोन नंबर एक्सचेंज किया। आंटी ने भी हमें घर आने के लिए कहा। हम उतर गए।
स्टेशन से हमने ऑटो लिया। ऑटो में बैठते ही मैंने अंकल-आंटी के साथ हुई बातचीत के बारे में बताया। मैंने आंटी का चुची मसका, चूमा वो भी बताया।
मैं: वो बुड्ढा तुझसे लौड़ा चुसवाना चाहता है। चूसेगी? लेकिन तू मेरे साथ क्यों नहीं सोई?
कविता: तुम हमारे बर्थ पर आते तो एक के बदले 2 माल चोदने के लिए मिल जातीं। हम दोनों रात भर नंगे थे। एक-दूसरे को खूब नोचा, खाया। वो भी तुमसे चुदने को तैयार थी। अभी मायके में एक महीना रहेगी। वो तुम्हारा इंतजार करेगी। जाकर चोद लो। और अगर अलका तुम्हारी गोदी में नंगी बैठ गई तो मैं भी बुड्ढे को खुश कर दूँगी।
मैं: अलका क्या तुम्हारे सामने अनिता (हमारी छोटी बहन) भी बेकार है। लेकिन, तू बोलती है तो अलका को भी चोद लूँगा। तुझे भी साथ चलना होगा। ट्रेन में तो नहीं हो पाया उसके घर में तुम दोनों को अगल-बगल लिटाकर चोदूँगा।
कविता: मैं तैयार हूँ। जब बोलो तब चलूँगी लेकिन भाई, बेकार में मेरी इतनी चापलूसी कर रहे हो। मैं तो तुम्हारी मुफ्त की माल हूँ ही। सिर्फ अपनी और तुम्हारी सिक्योरिटी के लिए विक्रम दादा से चुदवाना शुरू किया। वो भी बढ़िया है लेकिन तुम्हारे जैसा दम नहीं है उस दादा में। अनिता को चोदोगे, उसे तैयार करूँ!
मैंने चलती ऑटो में सलवार के अंदर हाथ डाल चूत को मसलते हुए कहा—
मैं: तुझे अगर भाई को खुश करना है तो अपनी माँ को तैयार कर। मेरा लौड़ा माँ की बुर में घुसने के लिए पागल रहता है।
कविता: तुम खुद कोशिश करो। वो तुम्हारे जैसे जवान लंड को बुर में लेने के लिए तरसती हैं।
कविता ने जिस अंदाज से कहा, मुझे लगा कि माँ को कोई जवान आदमी चोद रहा है।
मैं: माँ का कोई यार है क्या? बोल ना कौन चोदता है अपनी माँ को?
कविता: मैं क्यों बोलूँ, खुद पता करो।
कविता के बोलने के अंदाज से मुझे पक्का विश्वास हो गया कि माँ किसी बाहर वाले से चुदवाती हैं और कविता उस माँ के यार को जानती भी हैं। बहुत पूछा, चूत में उँगली अंदर-बाहर करते हुए भी पूछा लेकिन उसने नहीं बताया।
खैर करीब 9 बजे हम घर पहुँचे। अनिता ने मेरा पैर छूकर प्रणाम किया और कविता से गले मिली। मैंने भी माँ-बाबूजी का पैर छुआ। मैं चाहता था लेकिन माँ ने मुझे गले नहीं लगाया।
फ्रेश होकर मैंने हेवी नाश्ता किया और सो गया। जब नींद खुली तो शाम का 5 बज रहा था। मैं बाहर आया तो देखा कि बरामदे पर माँ और दोनों बहनों के साथ एक बहुत ही खूबसूरत, जवान, मजबूत कद-काठी का आदमी बैठा है। मैंने उस आदमी को कई बार बाबूजी से बात करते देखा था वो भी आउटर/मेल्स एरिया में। ये पहला मौका था जब मैं उसे अपने घर के भीतरी हिस्से में देख रहा था। माँ और अनिता के साथ कविता भी उससे बहुत हँस-हँसकर बातें कर रही थीं।
मुझे देखते ही माँ चुप हो गईं और दूसरी तरफ देखने लगीं।
कविता: भाई मिलो इनसे। ये राजनगर गाँव के मुखिया जी के बेटे समरेंद्र हैं। इनका मुंबई में कपड़ों की एक फैक्ट्री है और बहुत बड़ी दुकान भी है। सभी इन्हें समर के नाम से ही बुलाते हैं।
मैंने मुस्कुराते हुए समर से हाथ मिलाया। मैं भी हैंडसम, स्ट्रॉन्ग लड़कों की कैटेगरी में गिना जाता था लेकिन समर की पर्सनालिटी हर तरफ से मुझसे बढ़िया थी। मैं कविता को हमेशा अपने साथ ही रखना चाहता था लेकिन मेरे दिल में ख्याल आया कि अगर कविता की शादी इससे हो जाए तो बढ़िया होगा।
अनिता: भैया, आप समर से बातें कीजिए। मैं आप लोगों के लिए खाने-पीने का सामान लाती हूँ।
अनिता किचन की ओर चली गईं। तब मैंने ध्यान दिया कि मेरी माँ और समर सिर्फ अगल-बगल ही नहीं बैठे हैं। दोनों की जाँघों के बीच एक इंच का भी गैप नहीं है।
साफ दिख रहा था कि मेरे घर की तीनों फीमेल इस जवान आदमी समर को बहुत पसंद करती हैं।
हम बातें करने लगे। समर मुझसे बहुत पूछ-ताछ करने लगा। उसने यह भी पूछा कि मैं शादी कब करना चाहता हूँ।
मैं: इतनी जल्दी नहीं। अनिता की शादी हो जाएगी तब सोचूँगा। आपकी शादी कहाँ हुई है?
मैंने पूछा उससे लेकिन जवाब दिया माँ ने—
माँ: समर भी अभी तुम्हारे ही जैसा कुँवारा है। शायद अगले साल शादी कर ले।
ऐसे ही बातचीत होती रही। अनिता खाने-पीने का सामान लेकर आईं। खाते-पीते मैंने कई बार देखा कि माँ ने समर के हाथों को छुआ, 2 बार थाइज़ भी दबाया। और मेरी छोटी बहन अनिता तो बार-बार उसका हाथ पकड़ लेती थीं। मुझे लगा कि समर मेरी माँ को नहीं मेरी छोटी बहन अनिता का यार है। शायद उसे चोदता भी है।
तब शायद मैंने पहली बार अनिता को ध्यान से देखा। अनिता भी पूरी जवान हो गई थीं। फिर भी मुझे मेरी अपनी माल कविता ही सबसे बढ़िया लगी। हम सब काफी देर बातें करते रहे। अनिता और माँ ने भी समर से रात का खाना खाकर जाने कहा लेकिन वो चला गया।
रात को खाना खाने के बाद मैं अपने बेड पर था। कविता अंदर आईं और मैं उस पर झपट पड़ा। उसे बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया।
कविता: मैं तुमसे यही कहने आई हूँ कि मेरे साथ कभी ऐसी हरकत मत करना जिससे किसी को हमारे ऊपर शक हो जाए। जब भी मौका मिलेगा मैं खुद तुमसे चुदवाएंगी।
मैंने कविता के गालों और होठों को चूसा। चुचियों को मसलने लगा।
मैं: रानी, सच बोल। ये समर अपनी माँ को चोदने आता है या अनिता को? या फिर दोनों माँ-बेटी को चोद रहा है?
कविता मुझे धक्का देकर बेड से नीचे उतर गईं।
कविता: सबको अपनी ही तरह बहनचोद और मादरचोद समझ लिया है क्या? मैं तो तुम्हारे साथ ही रहती हूँ। उन दोनों रंडियों से ही पूछो कि समर किसे चोदता है। दरवाजा लॉक मत करना।
मैंने ज्यादा माथा-पच्ची नहीं की। दिन में बहुत सोया था इसलिए एक नॉवेल पढ़ने लगा। कब सो गया मालूम नहीं। नींद खुली तो सवेरा हो गया था। मैंने आवाज लगाई तो कविता ही आईं।
कविता: क्या करूँ यार, चुटकी (अनिता) ने छोड़ा ही नहीं। साली मुझसे ऐसे चिपककर सोई मानो अपने यार के साथ सो रही हो।
कविता तो अपनी माल थी ही। मुझे अपनी माँ रंजना को चोदना था। करीब 9 बजे माँ ने कहा कि बाबूजी चाहते हैं कि मैं भी उनके साथ खेत (फार्म्स) पर जाऊँ, देखो तो सही कि अपने खेतों में कैसी फसल है। मैंने नोड किया।
मैं: हाँ माँ, मैं बाबूजी के साथ जाऊँगा।
माँ: कविता बेटी, अभी 7-8 दिन तुम दोनों बहन घर संभालो। मैं बहुत दिनों से तालाब पर नहीं गई हूँ। तू जब तक घर में है रोज जाऊँगी।
कविता: हाँ माँ, तुम आराम से जहाँ जाना है जाओ। मैं घर संभाल लूँगी। और भाई खेत पर जा रहे हैं तो कुछ बढ़िया गन्ने भिजवा देना।
मैंने नोड किया।
कुछ देर बाद कुछ कपड़े लेकर माँ घर से बाहर निकल गईं।
अनिता: भैया, तुम भी खेत पर जाओ। हम बहनें बहुत दिन बाद मिली हैं। हमें आराम से बात करने दो।
मैं भी बाहर आ गया। बाबूजी मेरा ही वेट कर रहे थे। हम दोनों भी फार्म की ओर चल दिए।
इधर घर के अंदर—
कविता: छोटी, विनोद को डाउट हो गया है।
अनिता: क्या डाउट?
कविता: पिछली रात भी और आज सुबह भी बार-बार पूछ रहा था कि समर माँ को चोदने आता है या तुम्हें चोदता है। बहुत तेज है उसका दिमाग। वो फिर पूछेगा तो क्या बोलूँ उससे?
अनिता: कुछ भी हो जाए माँ को बदनाम मत करना। तुम भी देख रही हो ना, पिछले ढाई साल से, जब से समर माँ को प्यार करने लगा है, चोदने लगा है तो माँ कितना खुश रहने लगी हैं, कितनी मस्त हो गई हैं। और दीदी, समर बहुत ही बढ़िया आदमी है। मुझसे 6-7 साल बड़ा है और मुझे अपनी बेटी समझता है। अपना भाई समर के बारे में बहुत पूछ-ताछ करे तो उसे बोल देना कि वो मुझे ही चोदने आता है। पिछली रात भी माँ को 2 बार चोदकर गया। प्लीज माँ का नाम मत लेना।
कविता: मुझे भी माँ और समर के रिश्ते में कोई बुराई नहीं दिखती है। जिसका घरवाला दूसरों की बुर के अंदर ही घुसा रहता है तो वो औरत क्या करे! दूसरों से ही चुदवाएगी! अपनी माँ खुश रहें बस हमें और क्या चाहिए। वो 4-5 महीना के बाद आता है, 7-8 दिन माँ को चोदता है और माँ अगले 4 महीना तक खुश रहती हैं। मैं माँ का नाम नहीं लूँगी। लेकिन विनोद को भटकाने का एक आसान तरीका है!
अनिता: क्या, कौन सा तरीका?
कविता: विनोद तो मेरे साथ बहुत खुला हुआ है। उसके सामने नंगी भी रहूँगी तो उसे फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर तू उसे अपना दूध पिला दे तो वो माँ की रंडीपना को भूल तेरी ही जवानी को पीने के लिए पागल हो जाएगा।
अनिता: क्या बोलती है रंडी, वो मेरा भाई है!
कविता: तो क्या हुआ, मैं तुम्हें उससे चुदवाने नहीं बोल रही हूँ। सिर्फ उसका मुँह बंद रख। तेरे सिन्हा सर ने तेरा गेट खोला कि नहीं (तुझे चोदा कि नहीं)।
अनिता: नहीं दीदी अभी नहीं। गेट अभी लॉक्ड ही है लेकिन सच कहूँ, मैं चाहती हूँ कि माँ के साथ समर मुझे भी चोदे। अपनी चूत का दरवाजा मैं उसकी चाबी से ही खुलवाना चाहती हूँ। बहुत ही मस्त लौड़ा है उसका। 8 इंच लंबा और मेरी कलाई जैसा मोटा है। तू भी देखेगी तो तुझे भी समर का लौड़ा बहुत पसंद आएगा। माँ कहती हैं कि जैसा पावरफुल धक्का समर मारता है वैसा बाबूजी ने जवानी के दिनों में भी नहीं मारा था।
कविता: माँ को बोल कि अपने यार से तुझे भी चुदवा दे लेकिन तब तक विनोद को अपना दूध पिलाकर उसका मुँह बंद कर। मैंने विनोद से चुदवाया नहीं है लेकिन वो मेरा दूध अक्सर पीता रहता है। बनारस में ही मेरा एक यार है जो कभी-कभी चोद लेता है। बहुत मस्त करता है मुझे।
कविता झूठ बोल रही थीं। अपने बनारस वाले दोस्त से महीना में एक-दो बार ही चुदवाती थीं जबकि अपने भाई के साथ महीना में 5-6 बार चुदवाती ही थीं। वो भी अपने भाई विनोद को बहुत ही ज्यादा प्यार करती थीं। उसे अपने भाई विनोद के सामने कोई भी दूसरा मर्द समर भी पसंद नहीं था। वो चाहती थीं कि छोटी बहन भी उसके यार विनोद से चुदवाए।
दोनों बहनें ऐसे ही सिर्फ अपनी और दूसरों की सेक्स की बातें करती रहीं। करीब 3 घंटा बाद माँ दोनों बहनों के पास आईं।
अनिता: माँ क्या हुआ? इतनी परेशान क्यों हो? समर नहीं मिला क्या? या हरामी ने तेरे ही सामने किसी और को चोदा?
माँ: समर मिला भी और उसने मुझे बहुत प्यार भी किया, बढ़िया से 2 बार चोदा भी लेकिन तुम्हारे भाई विनोद ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है।
कविता: क्या हुआ, क्या कहा उसने?
माँ: तुम्हारा भाई, मेरा अपना बेटा मुझे चोदना चाहता है। थोड़ी ही देर पहले उसने कहा कि “जब तुम बेटे के उम्र के आदमी समर से चुदवा सकती हो तो फिर अपने बेटे, मुझसे क्यों नहीं?”
कविता, जरूर तूने ही अपने दुलारे भाई को सब बता दिया होगा।
कविता: माँ अपनी कसम, तेरे बेटे विनोद की कसम, मैंने विनोद क्या किसी और से भी तुम्हारे और समर के बारे में बात नहीं की है, ना कभी किसी से कहूँगी। उसने ही तुम दोनों को चुदाई करते देखा होगा। तुमने समर से कहाँ चुदवाया?
माँ: अपने ही गन्ने के खेत में?
कविता: रंडी, तू भी बेवकूफ है। विनोद को बाबूजी अपने गन्ने के खेत की तरफ ही ले गए हैं। मैं पूरे विश्वास से कह सकती हूँ कि विनोद ने अपनी आँखों से ही तुम दोनों की चुदाई देखी है। अपनी मस्त मालदार माँ को देखकर उसका लौड़ा भी माँ की बुर में घुसने के लिए तरपने लगा होगा। क्या फर्क पड़ता है। चुदवा ले बेटे से।
कविता चाहती थीं कि उनकी माँ भी उनकी तरह विनोद से चुदवाएँ लेकिन अनिता नहीं।
अनिता: भैया का मुँह बंद करना ही होगा।
घर की तीनों औरतें इस बात को लेकर चिंता में थीं कि विनोद कहीं माँ और समर की चुदाई पर रोक न लगा दे।
खेत में क्या हुआ?
बाबूजी, इधर-उधर घूमते हुए मुझे एक जगह ले गए जहाँ चारों तरफ सिर्फ गन्ने के ही खेत थे। अगल-बगल के 2 खेतों में गन्ने की कटाई चल रही थी। गन्ना काटने वालों में बहुत सी औरतें भी थीं। सभी की सभी जवान थीं। तभी एक आदमी मेरे पास आकर बोला—
आदमी: विनोद मालिक, कोई माल पसंद है तो बोलिए। आपके पास पहुँच जाएगी। कुँवारी माल चाहिए तो वो भी मिल जाएगी।
मैंने मुस्कुराकर मना कर दिया।
गन्ना खाते हुए मैं उन लोगों से थोड़ा दूर हो गया। तभी मैंने देखा कि खेत के दूसरे किनारे से एक मर्द और औरत की जोड़ी हमारे ही खेत में घुसी और आँखों से गायब हो गए।
गाँव में खेत में चुदाई आम बात है। मुझे पक्का विश्वास था कि दोनों चुदाई करने उसी खेत में घुसे हैं जिसके दूसरे किनारे पर हम खड़े थे।
मैं गन्ना खाते हुए खेत के अंदर घुस गया। वो जोड़ी जिधर से अंदर घुसे मैं भी उसी ओर जाने लगा। 6 एकड़ का लंबा-चौड़ा खेत था। 7-8 मिनट इधर-उधर घूमने के बाद मुझे दोनों मर्द और औरत की आवाज सुनाई देने लगी। थोड़ी दूर आगे बढ़ा तो देखा कि दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए पागलों जैसा एक-दूसरे को चूम रहे हैं, बदन सहला रहे हैं।
खेत में गन्ने की फसल बहुत ही बढ़िया थी। मेरा लौड़ा जैसा ही मोटे-मोटे और 8 फीट से ज्यादा लंबे गन्ने थे। बहुत घनी (डेंस) फसल थी लेकिन अगर वे दोनों ठीक से देखते तो आराम से मैं उन्हें दिखाई दे जाता। दोनों मुझसे सिर्फ 15-16 फीट की ही दूरी पर थे।
चुम्मा-चाटी के बाद दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मैं मुस्कुराया। मेरी माँ रंजना और समर मेरे सामने खड़े थे।
माँ: लगातार तीन रात से 2-2 बार चोद ही रहे हो फिर दिन दहाड़े यहाँ क्यों बुलाया?
साली बोल रही है कि “तीन रात से लगातार चोद रहे हो”। लेकिन रात में ये कहाँ चुदाई करते होंगे!
समर: रंजू रानी, ढाई साल से हम प्यार कर रहे हैं लेकिन मुझे लग रहा है हम आज पहली बार मिल रहे हैं। लाज-शर्म छोड़ो, मेरे साथ मुंबई चलो। हम शादी करेंगे और वहीं अपना बच्चा भी पैदा करेंगे।
रंजू: फालतू बात मत करो। तुम जानते हो कि मैं ऐसा नहीं कर सकती। मेरी बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। जिस काम के लिए लाए हो जल्दी करो। लेट होगा तो विनोद डाउट करेगा।
मैं देखता रहा और दोनों ने एक-दूसरे को नंगा किया। कुछ देर दोनों चिपककर एक-दूसरे का बदन सहलाते रहे। उफ्फ कितनी चिकनी पीठ थी माँ की और उनकी उभरी हुई लेकिन सुडौल चूतड़ देखकर मेरा लौड़ा फड़फड़ाने लगा। मैंने ट्राउजर और अंडरवियर दोनों नीचे गिरा दिए। लौड़ा को सहलाने की जरूरत नहीं थी। 15-16 फीट की दूरी पर खड़ी औरत, अपनी माँ की बुर में ही घुसने को पूरा तैयार था।
अचानक समर ने माँ को घुमाया और अपनी छाती से सटाकर उनके आर्म पिट्स से हाथ घुसाकर दोनों मांसला चुचियों को मसलने लगा। माँ का सामने का हिस्सा मेरी आँखों के सामने था। दोनों में से कोई भी अगर ठीक से सामने देखता तो उन्हें मैं साफ-साफ दिखाई देता। लेकिन मेरी किस्मत, दोनों अपने में ही इतने मस्त थे कि उन्हें और कुछ देखने की जरूरत नहीं थी।
माँ 38-39 साल की थीं। 3-3 बच्चों को पैदा कर लिया था फिर भी अपने बदन को बहुत बढ़िया से संभालकर रखा था। प्यूबिक एरिया इतना चिकना था मानो कुछ घंटा पहले ही हेयर रिमूवर क्रीम से झांट साफ किया गया हो। बेली पर बच्चों के पैदा होने के निशान थे। उसके अलावा माँ लाख रुपये की माल लग रही थीं।
5-6 मिनट ही सामने के हिस्से को सहलाया होगा, माँ खुद नीचे लेट गईं। तब मुझे समर का नंगा बदन दिखाई दिया। आकर्षक कसरती बदन था। बाँहों और जाँघों के मसल्स बहुत स्ट्रॉन्ग दिख रहे थे। वो मुझसे एक डेढ़ इंच ज्यादा लंबा था लेकिन मेरा लौड़ा ज्यादा लंबा और मोटा था।
कोई ओरल नहीं, समर माँ के थाइज़ के बीच बैठा। लौड़ा को बुर पर एडजस्ट किया और धक्का लगाने लगा। समर माँ के बॉडी के ऊपर-नीचे रगड़ते हुए चोद रहा था और मुझे बुर के अंदर-बाहर होता लौड़ा साफ-साफ दिख रहा था। कुछ ही देर बाद माँ की मस्ती की सिसकारियाँ सुनाई पड़ने लगीं। चुदाई की “फचक फचक” आवाज के साथ माँ की आवाज सुनाई पड़ी।
माँ: राजा, पिछले ढाई सालों में तुमने मुझे 200 से ज्यादा बार चोदा होगा लेकिन हर बार लगता है कि पहली बार ही बुर में लौड़ा घुस रहा है।
समर: रानी, यही हालत मेरी भी है। तुमसे बढ़िया औरत और कोई हो ही नहीं सकती। लेकिन चोरी-छिपे चुदाई करने में बहुत डर लगता है। उफ्फ रानी, मैं तुमसे एक दिन भी अलग नहीं रहना चाहता हूँ। ये चोरी-छिपे हम कब तक मिलते रहेंगे। कविता को मुझसे शादी करने के लिए तैयार करो ना!
माँ: तुम क्या समझते हो कि मैं कोशिश नहीं कर रही हूँ। कई सुबह से मैंने उससे कई बार कहा लेकिन कुतिया बोलती है कि अपनी माँ की सौतन नहीं बनेगी, माँ के यार के साथ शादी नहीं करेगी।
समर: कविता का कहना भी गलत नहीं है लेकिन मैं हर समय तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।
ऐसे ही प्यार भरी बातें और माँ की सिसकारियों के बीच चुदाई चलती रही। फाइनली दोनों झड़े और एक-दूसरे को बाँहों में बाँधे हुए पलट गए। अब समर नीचे था और माँ ऊपर।
दोनों ने कुछ देर एक-दूसरे को चूमा।
समर: चलो रानी, अब चलते हैं। कोई अंदर आ जाएगा, हमें देखेगा तो बहुत बदनामी होगी।
माँ: कोई देखता है तो देखने दो। मैं तो चाहती हूँ कि मेरा घरवाला भी देखे कि मैं तुम्हारे साथ कितनी खुश रहती हूँ। अब हम यहाँ आ ही गए हैं तो एक बार और लूँगी। लाओ मुझे लौड़ा चूसने दो।
लेकिन समर ने माँ को रोक दिया।
समर: रंडी, ढाई साल से कह रहा हूँ रानी फिर भी तुझे समझ नहीं आती। मुझे लौड़ा चुसवाना पसंद नहीं है। लौड़ा सिर्फ प्यारी-प्यारी चूत में घुसने के लिए है। लौड़ा गरम करना है तो मेरे लौड़ा को अपनी मस्त चुचियों के बीच रगड़।
समर की बात सुन मुझे सरप्राइज हुआ कि कोई जवान आदमी लौड़ा नहीं चुसवाना चाहता है। कविता मुझसे चुदवाए या न चुदवाए, लौड़ा चूसने के लिए, लौड़ा का रस पीने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
मुझे याद है कि जब मैं पहली बार कविता को विक्रम दादा से मिलवाने ले गया तो उसने अपने तीन दोस्तों और मेरे सामने कविता से लौड़ा चूसने के लिए कहा था।
विक्रम: लड़की तू है तो बहुत सुंदर लेकिन लगती है बिल्कुल ठंडी। अगर तू 15 मिनट के अंदर मेरा लौड़ा चूसकर ठंडा कर दे तो तू मेरी सबसे प्यारी माल हो जाएगी। यूनिवर्सिटी क्या पूरे बनारस में भी नंगी घूमेगी तब भी किसी की हिम्मत नहीं होगी कि तेरी ओर आँख उठाकर देखे भी। और अगर मुझे ठंडा नहीं कर पाई तो अभी तेरे भाई के सामने हम पाँचों तुझे चोदेंगे ही, तू हमेशा के लिए मेरी खास रंडी हो जाएगी।
कविता ने चैलेंज एक्सेप्ट किया। मेरे और दूसरे चार जवान लड़कों के सामने कविता ने विक्रम का लौड़ा ऐसा चूसा कि वो 10 मिनट भी नहीं संभाल पाया। कविता के माउथ में ही झड़ गया। और कविता ने सबको दिखाते हुए सारा रस पी लिया।
विक्रम ने डिक्लेयर कर दिया कि कविता को उसके सिवा कोई और टच भी नहीं कर सकता है।
और यहाँ कविता की माँ अपने यार का लौड़ा चूसना चाहती हैं और हरामी उसे मना कर रहा है। खैर माँ ने समर का लौड़ा को अपनी चुचियों से रगड़-रगड़कर दोबारा टाइट कर दिया।
माँ: समर, आज रात भी आना। कविता तुमसे शादी नहीं करना चाहती है लेकिन मुझे लगता है कि अनिता की तरह वो भी तुम्हें बहुत पसंद करती है। मैं उसे तुमसे चुदवाने के लिए तैयार कर लूँगी। एक बार तुम्हारे मस्त लौड़ा से चुदवाएगी तो फिर खुद तुमसे शादी करने के लिए तरसेगी। और अनिता को जब चाहो चोद सकते हो। वो तुमसे चुदवाने के लिए तरप रही है।
माँ की बात सुन सिर्फ मुझे ही नहीं समर को भी बहुत गुस्सा आया। उसने कसकर कई बार माँ के चूतड़ों पर थप्पड़ मारा।
