एक प्यासी माँ की मजबूरी

Ek pyasi maa aur bete ki chudai kahani:- ये कहानी मेरी एक रीडर ने भेजी है। अब कहानी उसी की जुबानी सुनिए। हेलो, मेरा नाम कमना शुक्ला है। उम्र 37 साल, दो बेटे हैं। पति का नाम राजीव शुक्ला है और उनका देहांत हो चुका है। हम शुरू से इतने अमीर नहीं थे। हमने भी गरीबी देखी है। शादी के वक्त मेरी उम्र सिर्फ 19 साल थी। हम यूपी के एक गाँव में मिर्जापुर डिस्ट्रिक्ट में रहते थे। मेरी शादी बहुत धूमधाम से हो गई थी।

Ek pyasi maa aur mete ki hindi chudai kahani

मेरे शौहर न्यूयॉर्क में कामयाब बिजनेसमैन थे और उनके पास बहुत ही दौलत थी। मुझे दुनिया की हर दौलत मिली हुई थी लेकिन अंदर से मैं अभी भी बहुत ही उदास और वीरान थी।

यहाँ जिन लोगों को मेरे बारे में मालूम हुआ वो सब हैरान हो गए। मैं एक बहुत ही हसीन लड़की थी और काफी लंबा कद था।

अगर मेरे शारीरिक गुणों का वास्तविक वर्णन करना हो तो वो इस प्रकार होगा— चेहरा गोल-लंबा, कद लगभग 5’7″, आँखें मोटी-मोटी, रंग गोरा और चेहरे पे पानी (शाइन) बहुत ही ज्यादा, जुल्फें बड़ी लंबी एकदम कमर तक आती हुई, गर्दन एकदम पतली, चुचियाँ 38″ C छाती पे लगी किसी फल की तरह, कमर भी लगभग 26″, नाभि गहरी खाई समान और चूतड़ लगभग 36″ के।

इतने साल होने पर भी मैं जरा भी मोटी नहीं हुई। आज भी मैं किसी 22-23 साल की लड़की जैसी लगती थी। बढ़ती उम्र का मुझ पर कोई असर नहीं हुआ था। पता नहीं क्यों, मैं जो कुछ भी खाती थी शरीर पर उसका कोई बुरा असर नहीं होता था। इतना कुछ था मेरे पास जो किसी भी मर्द को अपना दीवाना बना दे पर मेरे पास एक अदद लंड भी नहीं था जो मुझे अपना दीवाना बना सके।

मेरी बड़ी-बड़ी आँखें और लंबे बालों के अलावा मेरी V शेप बॉडी भी बहुत ही पुरकशिश थी। यहाँ, अमेरिका में इंडियन मर्द दिलचस्पी लेते थे लेकिन मैंने कभी किसी को मौका नहीं दिया। मेरे पति को मुझ पर पूरा विश्वास था और इस यकीन की वजह से कभी मुझ पर शक नहीं किया।

राजीव की मौत के बाद मैं बहुत डिस्टर्ब्ड हो गई थी। रात भर नींद नहीं आती थी। शरीर की प्यास बढ़ती जा रही थी। मुझे डॉक्टर को मिलना पड़ा। कभी-कभी सोने के लिए मुझे डॉक्टर ने स्लीपिंग पिल्स लेने की सलाह दी। मगर बिना स्लीपिंग पिल्स के मैं सो नहीं पाती थी। हमेशा राजीव की याद सताती थी। मैंने खुद को बच्चों में ही व्यस्त रखना शुरू किया।

मेरा बेटा आशु और निशु बहुत ही प्यारे थे और हम तीनों एक-दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे।

आशु और निशु करीब ही स्कूल में पढ़ते थे। उस वक्त मैं शोरूम की देखभाल करती थी और शाम को हम तीनों एक्सरसाइज के लिए क्लब में जाते थे। अब आशु 18 साल का और निशु 19 का था और मैं 36 साल की हो चुकी थी।

मेरे पति की जिंदगी में बच्चों का बेडरूम अलग था लेकिन उनके मौत के बाद वो मेरे कमरे ही में रहने लगे। हमारे कमरे में किंग साइज डबल बेड है और हम तीनों उसी पर सोते थे। एक दिन की बात है। डिनर के बाद दोनों बेटे अपनी शॉर्ट्स पहनकर बेड पर चले गए और मैं किचन में बर्तन वगैरह वॉश करने लगी। काफी देर के बाद मैं सोने के लिए कमरे में गई तो देखा निशु और आशु सो रहे हैं।

मैं बहुत थक चुकी थी सो मैंने वहीं बेडरूम में लाइट ऑन करके अपने कपड़े उतारकर नाइटी पहनने लगी। जब कपड़े उतारे तो मैंने निशु की तरफ देखा कि कहीं जाग न रहा हो। जब मैं नाइटी पहनने लगी तो मुझे लगा कि निशु एक आँख से मुझे ताक रहा है। मैंने जल्दी से नाइटी पहन ली और बेड पर आ गई।

मैंने बेड पर लेटी थी निशु को हल्के से आवाज दी लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। शायद मेरा वहम था क्योंकि वो तो सो रहा था। मैं भी सो गई और फिर उसके देखने के ख्याल को जहन से झटक दिया। अब मैंने एहतियात कर ली थी और बेडरूम में कपड़े नहीं बदलती थी। इसी तरह एक दिन निशु के सोने के बाद मैं दूसरे कमरे में ड्रेस चेंज कर रही थी कि मुझे लगा कि निशु कर्टन के पीछे से मुझे देख रहा है।

मैं नाइटी बदलकर फौरन कर्टन के पास गई लेकिन निशु वहाँ नहीं था लेकिन कर्टन हिल रहा था। मैं तेजी से बेडरूम में आई तो देखा वो सो रहा था। मैं इस बार वहम नहीं समझ रही थी लेकिन फिर ख्याल आया कि शायद वहम ही हो।

मुझे यकीन हो चुका था कि निशु जरूर देख रहा था लेकिन अब भी मेरे पास कोई वाजिब सबूत नहीं था।

इसी तरह एक दिन मैं वॉशरूम में बाथ ले रही थी तो मुझे लगा कि निशु की होल में से देख रहा है क्योंकि मेरे घर में निशु के अलावा कोई और नहीं था। मैं जल्दी से फारिग होकर आई तो निशु लाउंज में टीवी देख रहा था। मेरा शक अब यकीन में बदल रहा था कि ऐसा उसी वक्त होता है जब निशु घर में होता है। मैं भी लाउंज में आ गई और निशु से बात करने लगी और वो तो बिल्कुल नॉर्मल था।

मुझे बहुत दुख हुआ कि मेरा बेटा मुझे नंगी हालत में देखता है। संडे को मैं और निशु करीब ही बीच पर सन बाथ लेने गए। वो विंटर की सुबह थी और बीच पर बहुत ही रश था। तमाम लोग वहाँ सन बाथ ले रहे थे। हम दोनों भी स्विमिंग कॉस्टयूम पहनकर हमेशा की तरह कुछ देर समुंदर में नहाने के बाद बीच पर आकर लेट गए।

मैंने बॉडी लोशन लिया और अपने जिस्म पर लोशन लगाने लगी जो कि आम सी बात थी।

निशु कुछ देर तक तो लेटा रहा और फिर कहा—

निशु: मॉमी मैं लोशन लगा दूँ।

मैं अभी उसको इनकार करने ही वाली थी कि उसने लोशन की बोतल ली और कुछ लोशन लेकर मेरी टाँगों में लगाने लगा। मैं कुछ न बोली कि कोई बात नहीं मेरा बेटा ही तो है और बीच पर सब ही एक-दूसरे को लोशन लगा रहे थे।

मैं सीधी लेटी हुई थी और निशु मेरी टाँगों पर लोशन लगा रहा था। निशु टाँगों पर लोशन लगाते हुए मेरी रानों (थाई) पर आ गया और लोशन लगाते हुए वो बिल्कुल चूत के करीब आ गया और वहाँ लोशन लगाते हुए उसका अंगूठा मेरी चूत पर इस तरह टच हो रहा था जैसे वो गलती से लग रहा हो।

उसके हाथों में बहुत सख्ती थी और वो खूब जोर लगाकर लोशन लगा रहा था साथ ही मसाज भी कर रहा था। अब उसके हाथ मेरे पेट पर थे और वहाँ भी उसकी उँगलियाँ मेरी नाभि से नीचे होकर चूत की ऊपरी सतह तक पहुँच रही थीं।

मैं खामोश थी और कुछ भी नहीं सोच रही थी।

एक हाथ से वो मेरे सीने के करीब लोशन लगा रहा था और दूसरे हाथ से मेरी नाभि के करीब ही अपनी उँगलियाँ फैला रहा था। सीने पर लोशन लगाते हुए वो मेरी चुची को भी टच कर रहा था और मसाज करने में डूबा हुआ था। कुछ देर तक इसी तरह मसाज करते हुए और लोशन लगाते हुए उसके हाथ पोशीदा जगहों को भी टच कर रहे थे।

अब मैं पेट के बल लेट गई और निशु मेरी कमर पर लोशन लगा रहा था। वो बहुत ही अच्छी तरह मसाज कर रहा था। उसके हाथ मेरी कमर पर से होते हुए बटॉक्स तक बिना किसी रुकावट के जा रहे थे। मुझे उसका मसाज करना अच्छा लग रहा था और इसके अलावा मेरे जहन में कुछ नहीं था। मैं पेट के बल लेटी हुई थी और वो मेरे पहलू में बैठा हुआ मसाज कर रहा था।

अचानक मेरी नजर उसकी शॉर्ट पर पड़ी तो देखा कि उसका लंड (पेनिस) उसकी शॉर्ट से बिल्कुल बाहर निकला हुआ था। मैं देखकर हैरान हो गई कि उसका लंड बहुत ही बड़ा और मोटा था और उस वक्त शॉर्ट से बाहर झाँक रहा था। मुझे एकदम अपने शौहर का ख्याल आया कि उनका लंड तो बहुत छोटा और काला था।

जबकि निशु का लंड बहुत ही पुरकशिश था।

उसका लंड बिल्कुल खड़ा हुआ था और मुसलसल हरकत में था। मैं चौंक गई कि निशु का लंड अपनी मॉमी के ऊपर तना हुआ था यानी वो अपनी माँ से उत्तेजित हो रहा था। मैं फौरन सीधी हो गई और निशु से कहा—

मै: थैंक्स अब चलते हैं मुझे काफी काम हैं।

मैं बिना निशु के जवाब के खड़ी हो गई और अपने कपड़े पहन लिए।

निशु खड़ा होने से झिझक रहा था। मेरे मजबूर करने पर वो खड़ा हो गया और अब वो अपने खड़े हुए लंड को छुपाने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपना चेहरा एक तरफ कर लिया और हम लोग घर चले आए। रास्ते में मेरा मुँह खुश्क हो चुका था और मैं हैरान थी कि किस तरह निशु के जहन में अपनी मॉमी के बारे में ऐसा ख्याल आ गया।

घर पहुँचकर मैं नॉर्मल नहीं थी लेकिन निशु बिल्कुल नॉर्मल था। मेरे जहन में मुसलसल यही ख्याल रहा लेकिन मैंने इजहार न किया।

मुझे घर में अजीब-अजीब सूरतेहाल नजर आ रही थी। कभी मेरी पैंटी गायब हो जाती और कभी कपड़े बदलते हुए एहसास होता कि वो डोर के होल में से देख रहा है क्योंकि मैंने अब ओपन डोर में ड्रेस चेंज करना बंद कर दिया था।

मैं रोजाना निशु को स्कूल जाते हुए और घर वापिस आते हुए किस करती थी लेकिन अब वो किस के दौरान मुझसे देर तक लिपटने की कोशिश करता। लाउंज में वो मेरे जिस्म को घूर-घूर कर देखता रहता। सूरतेहाल बदलती जा रही थी और मैं फैसला नहीं कर पा रही थी कि क्या करूँ। सारे दिन और रात बस यही एक फिक्र थी जो मुझे खाए जा रही थी।

निशु ने अब दोस्तों के बजाय ज्यादा वक्त घर में गुजारना शुरू कर दिया था। उस रात को भी सोने से पहले मैं दरवाजा बंद करना भूल गई और बिल्कुल नंगी होकर नाइटी पहन रही थी कि फिर मुझे कर्टन हिलता हुआ नजर आया। मैंने नंगी ही कर्टन के करीब गई तो देखा कि निशु तेजी से अपने कमरे की तरफ जा रहा है।

मैं पत्थर की हो गई क्योंकि अब तो सबूत मिल गया कि निशु काफी अरसे से मुझे देख रहा है।

मैं बहुत परेशान हो गई और अब तो खौफजदा भी हो गई कि निशु के जहन में अपनी मम्मी के बारे में क्या है। मैं अपने बेड पर आ गई और एक-दूसरे को किस करते हुए सोने की तैयारी करने लगी। मैं तमाम रात करवट बदलती रही और सोचती रही कि क्या करूँ। तमाम रात सो न सकी। बार-बार निशु का वो लंड भी मुझे याद आ रहा था। उस दिन अपने पति की बहुत याद आ रही थी।

कुछ दिन के बाद रात को मैं कपड़े बदलने के लिए जाने से पहले निशु से कहा—

मै: बोतल फ्रिज में रख दो। मैं वॉशरूम से फारिग होकर कपड़े चेंज करके बेडरूम में आती हूँ।

वॉशरूम से फारिग होकर मैं कमरे में गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। अपने कपड़े उतारकर मैं नंगी हो गई और कपबोर्ड में से नाइटी निकालने लगी। नाइटी लेते हुए फ्लोर पर गिर गई और मैंने उठाने के लिए नीचे झुकी तो विंडो कर्टन के पीछे से किसी के पैर नजर आए।

निशु कमरे के अंदर ही था और न जाने कितने दिनों से ऐसी देखता रहा है।

मैंने नाइटी उठाकर पहनी और बाहर चली गई। वो यह समझ रहा था कि मैंने उसे देखा नहीं। थोड़ी ही देर बाद निशु भी बेड पर आ गया और अब तो सबूत मिल गया कि वो एक अरसे से मुझे नंगा देखता था। उसे मालूम ही नहीं था कि मैंने उसे देख लिया था।

वो बिल्कुल नॉर्मल था और ऐसा लगा कि उसके जहन में जो कुछ है इस पर वो शर्मिंदा नहीं है। रात भर मेरी हालत खराब रही और अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि अब उसको रोकना होगा। मैं मौके की तलाश में थी और चाहती थी कि सेमेस्टर के बाद उससे बात करूँ। मैं रात को आदत के मुताबिक लेटी हुई थी और न जाने कब मेरी आँख लग गई और सो गई।

रात किसी वक्त आँख खुली तो मैंने देखा कि मेरी नाइटी उठाकर मेरे ऊपर इस तरह आ गई है कि मेरे नाभि से नीचे का हिस्सा नंगा था। मैंने फौरन निशु की तरफ देखा तो वो बेखबर सो रहा था। मुझे शक हुआ कि निशु रोज मेरे नींद की दवा लेने का फायदा उठाता है।

अगले दिन आशु के फ्रेंड का बर्थडे था जिसमें स्लंबर पार्टी था जिसमें लड़के रात भर उस फ्रेंड के ही रहेंगे। मेरा मन घबरा रहा था निशु के साथ अकेले सोने में। और मैंने दूसरे दिन सोने से पहले निशु से कहा—

मै: मुझे नींद आ रही है। मैं जल्द सोना चाहती हूँ।

हम दोनों ने एक-दूसरे को किस किया और मैं उसकी तरफ करवट करके लेट गई। मैंने अपना स्लीपिंग पिल्स खाया नहीं बल्कि नीचे गिरा दिया ताकि निशु समझे मैंने दवा ले ली।

मैं सो नहीं रही थी बल्कि इंतजार कर रही थी कि निशु क्या करता है। काफी देर तक इस तरह लेटने के बाद मैं समझी कि निशु सो गया लेकिन उसी लम्हे उसने मुझे हल्के से आवाज दी और मैंने जवाब नहीं दिया तो वो मेरे बाजू को आहस्ता-आहस्ता हिलाने लगा। मैंने कोई हरकत नहीं की और शो किया कि जैसे मैं सो रही हूँ। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।

थोड़े से वक्त के बाद उसने मेरी नाइटी को बहुत ही आहिस्ता से हटाना शुरू कर दिया और कुछ ही देर बाद ही मेरे नाभि का निचला हिस्सा नंगा हो गया। मैंने पैंटी नहीं पहना था। निशु यह कुछ करने के बाद मेरी कमर के करीब आ गया और उसका लंड मेरे गाँड को छूने लगा।

यानी वो नंगा था। मेरे धड़कन का रफ्तार बढ़ता जा रहा था।

मैं उसे मना करना चाहती थी मगर फिर और देखना चाहती थी वो किस हद तक जा सकता है अपनी सगी माँ के साथ। उसने बहुत ही आहिस्ता से मेरी ऊपर की टाँग को जाँघ के पास से जरा ऊपर किया और अपना लंड मेरी टाँगों के दरमियान दाखिल कर दिया। मैं डर से काँप रही थी फिर भी जानना चाहती थी आगे क्या होगा।

उसने लंड टाँगों के दरमियान इस तरह रखा कि उसका लंड मेरी चूत को छूने लगा। उसने पीछे से मेरी ढीली-ढाली नाइटी को और ऊपर कर दिया और दूसरे हाथ से उसने मेरे बूब्स को छूना शुरू कर दिया। मेरे निप्पल्स खड़े हो रहे थे। निशु मेरी कमर के इतने करीब आ गया कि उसका जिस्म मेरे जिस्म को छूने लगा और उसकी साँसें मेरी गर्दन पर महसूस होने लगीं। मुझे दुख था कि वो अपनी मम्मी के साथ कैसे कर रहा है।

उसका लंड मेरी चूत के बिल्कुल करीब था और गरम-गरम लंड के छूने से मेरे जिस्म में बिजली की करंट दौड़ने लगी। मुझे पहली बार अपने जिस्म में कुछ ऐसा महसूस हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था। लगा कि मुझे बस इस लम्हे को यादगार बनाना चाहिए।

यही वो लम्हा था जिसने पहली बार मेरी रूह में एक खुशगवार सी क़फ़ियत पैदा कर दी। उसने मेरे टाँगों के बीच में तूफान मचा दिया। इतने सालों के बाद मेरे सोए अहसासों को जगा रहा था। मेरे बदन में चीटियाँ रेंग रही थीं। मगर ऐसा करने वाला मेरा बेटा था। मन बेचैन हो गया क्या करूँ क्या नहीं। हालत काबू से बाहर हो रहे थे।

इन्हीं विचारों में खोई मैं लेटी रही और अब उसके लंड ने हल्के-हल्के आगे-पीछे होना शुरू कर दिया और साथ ही मेरी नेक पर अपनी जुबान रख दी। मैं सोच रही थी कि वो कब से ऐसा कर रहा होगा और ये सोचकर मुझे कुछ खुशी सी होने लगी। मुझे उसकी हरकतें अच्छी लगने लगीं। मैं सोच रही थी कि इस उम्र में उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है और शायद हो भी तो मुझे नहीं मालूम।

मगर निशु की हिम्मत की दाद देनी होगी। अपनी मम्मी को चोदने की सोच रहा था।

उसका लंड एक गरम लोहे की तरह मेरी चूत के लबों को रगड़ रहा था और मुझे अब सिर्फ अच्छा लग रहा था। मैं अब भूल गई कि कुछ देर पहले मैं कितनी दुखी और परेशान थी। और अब मैं खुद ऐसा चाह रही थी कि निशु को न रोकूँ। उसकी जुबान मेरी गर्दन पर अजीब सी लज्जत पैदा कर रही थी और मेरे बूब्स और निप्पल्स भी उसके सहलाने की वजह से सख्त हो गए थे।

मैं उस वक्त 37 साल की थी लेकिन मेरी चुचियाँ लटकी नहीं थीं बल्कि एक कम उम्र लड़की की तरह खूब तनी हुई थीं। मेरे मरहूम शौहर ने कभी मेरे चुची को चूसा नहीं था और शायद इसी वजह से वो अभी तक नौजवान थीं। निशु भी शायद मेरे कड़क होते निप्पल्स को महसूस कर रहा होगा। वो यह समझने लगा कि मैं जागी हुई हूँ।

मेरी क़फ़ियत बिल्कुल बदल गई थी और मेरी रूह में सिर्फ और सिर्फ खुशी थी और कुछ भी नहीं था। मेरी हालत बिल्कुल जाहिर हो गई थी और अब कुछ भी मेरे इख्तियार में नहीं था। उसके लंड ने, और उसकी हरकतों ने वो जादू कर दिया था कि मेरा वजूद सुरूर और मस्ती में डूब गया।

मेरा बदन बिल्कुल मेरे आप से बाहर था। दिल कुछ कह रहा था और दिमाग कुछ और। मेरा मन बेवफाई को तड़पने लगा।

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। जिस्म की भूख माँ-बेटे के रिश्ते को भूल चुका था। सिर्फ मर्द और औरत ही नजर आ रहे थे मुझे। मैंने कुछ न सोचा और न समझा और एक ही झटके में मैंने निशु की तरफ करवट बदली और हाथ बढ़ाकर बेड लैंप ऑन कर दिया। लैंप रोशन होते ही मैंने निशु को सँभालने का मौका नहीं दिया और उसको अपने सीने से लगा लिया।

निशु को सीने से लगाकर मैंने प्यार करना शुरू कर दिया। वो इसके लिए तैयार नहीं था। निशु खुशी से दीवाना हो गया और मुझे भी जवाब में प्यार करने लगा। जब मैंने उसे गले लगाया तो देखा कि वो बिल्कुल न्यूड है। उसका लंड मस्त नाग की तरह फनफना रहा था।

मैंने आव देखा न ताव और इसके साथ ही मैंने अपनी नाइटी जो कि गले के पास सिमट गई थी को एक ही झटके में अपने बदन से अलग करके बिल्कुल नंगी हो गई।

निशु के होंठ मेरे होंठों में थे और मैंने जिंदगी में पहली बार अपने पति के अलावा किसी दूसरे इंसान को प्यार कर रही थी। निशु भी मेरे होंठों को चूसने लगा और मैंने तो उसके पूरे चेहरे को अपनी जुबान से चाट-चाट कर गीला कर दिया। अब उसका ध्यान मेरी चुचियों पर गया।

वो मेरा निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा।

वो बोला—

निशु: मॉम तुम्हारी खूबसूरत, गोल-गोल कश्मीरी सेब जैसी चुचियाँ मेरे मन को लुभा रही हैं।

जैसे उसने चुची के घुंडी को मुँह में लेकर चूसा, मेरा बदन सिहर गया और मैं बोली—

मै: बस… इसी तरह से… मुँह में लेकर आहिस्ते से चूसो… हाँ… अभी जोर से नहीं… हाँन… इसी तरह… अभी बस चूसो…

उसका लंड अब सामने से मेरी चूत के दोनों होंठों को टाँगों के बीच में जाकर उत्तेजित कर रहा था। मैं दीवानी हो रही थी और उसको दाँतों से काट रही थी।

हमने कोई बात नहीं की और निशु एक ही सेकंड में मेरी चूत के पास जाकर अपनी जुबान से चाटने लगा। मैं बोल पड़ी—

मै: लो, तुम मेरी चूत के दाने को प्यार करो। जब तक मैं तुम्हारे इस लौड़े को एक गरम लोहे का हथौड़ा बना देती हूँ!

निशु मेरी चूत को खोलकर अंदर के दाने को सहलाने लगा, उसपर उँगली को फेरने लगा। मुझसे पूछा—

निशु: इस तरह? मॉम आपकी बुर भीतर से एकदम लाल और गहरी है।

मैंने आँख मूँद ली। वो मेरी चूत को ऐसे बिल्कुल मशगूल होकर देख रहा था जैसे कि किसी प्यारी चीज का मुकम्मल जायजा ले रहा हो। जैसे कुछ माप रहा हो। जैसे अंदर वापस घुसना चाहता हो। उसने अपनी जीभ मेरे दाने पर रख दी।

मैं मस्ती में उछल पड़ी। मैं पागल हो रही थी। इतना आनंद आया क्या बताऊँ। मेरा बेटा मेरी चूत चाट रहा था। मैं बोली—

मै: हाँ… इसी तरह… आहिस्ता… आहिस्ता… हाँन…

वो मेरे ऊपर ही घुटनों के बल बैठा रहा और मेरी चूत को और भी गरम करता रहा था, और जैसे-जैसे मैं उसके चूत चूसने का मजा लेती रही वैसे-वैसे मेरी चूत गीली होती गई। मैं अपनी उँगली चूत में डालने लगी।

निशु मेरी चूत में जुबान डाल रहा वो भी इस तरह कि वो मेरी चूत के अंदर से अपनी जुबान से कुछ तलाश कर रहा हो। पहले मेरे चूत की दीवार चाटनी शुरू की फिर दाने को चाटा। उसकी हर हरकत मेरे वजूद को हिला रही थी। मेरी चूत उसकी हरकतों से मानो पिघलने लगी।

मेरा पानी बाहर झरने की तरह बह रहा था।

उसका लंड यानी मेरे सगे बेटे का लंड मेरे चेहरे के पास था। मैंने उसका लंड अपने हाथों में लिया और गौर से देखने लगी। मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार शौहर के अलावा किसी और का लंड देखा था। टमाटर की तरह लाल और बहुत ही लंबा और खूब मोटा। बीच पर जो लंड देखा था अब वो बिल्कुल मेरे सामने था। वो मेरी चूत में उँगली घुमा रहा था। मैंने अपने गर्दन को आगे बढ़ाकर उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया।

उसके लंड का सुपाड़ा अजीब मस्त था। खूब फैला हुआ जैसे लंड पर एक छतरी लगी हुई थी। मुझे अपने बेटे पर गर्व हुआ। खुद पर भी गर्व हुआ कि मैंने ऐसा मस्त लंड अपने चूत से निकाला है। मैं खुशी बर्दाश्त नहीं कर सकी और लंड को बेसाख्ता मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

निशु का लंड हेल्दी और खूबसूरत तो था ही लेकिन मेरे बेटे का लंड होने की वजह से उसपर मुझे बहुत प्यार आ रहा था। मैंने लंड को एक हाथ से थामा हुआ था और पूरे लंड को मुँह में लेकर जुबान से इस तरह चूस रही थी जैसे बचपन में कुल्फी चूसती थी।

कभी लंड को बाहर निकालकर देखती, कभी अपनी जुबान से लंड के जड़ से चाटते हुए टोपी तक चाटती और कभी पूरा लंड मुँह में लेकर लंड को खूब प्यार करती। निशु ने लेटे ही लेटे मुझे कमर के बल लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गया। मैंने बेटे का लंड को छोड़ा नहीं।

उसने मेरी दोनों टाँगें फैलाई हुई थीं और उसकी नाभि से निचले हिस्से ने मेरे दोनों बूब्स को दबाया हुआ था जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वो मेरी चूत को चाटते हुए इतनी नीचे जा रहा था कि उसकी जुबान मेरे गाँड के छेद तक पहुँच रही थी।

मैं एक हाथ से उसके चूतड़ को खूब जोर-जोर से मसल रही थी और मेरा महबूब लंड मेरे मुँह में मेरी जुबान से रगड़ खाकर मस्त हो रहा था। मुझे इस बात का सबसे ज्यादा प्यार था कि मुझे मेरा बेटा चोदने वाला है। जिसको उसने जन्म दिया। वो उसी चूत को चोदने वाला था जिससे वो पैदा हुआ है।

मैं जज्बात में डूबी हुई थी और फिर अपने दोनों टाँगों को निशु की गर्दन के चारों तरफ करके उसके फेस को मैंने अपनी चूत में दबोच लिया। निशु मेरी चूत को और गाँड को चाट रहा था और अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ को अलग-अलग करके अपनी जुबान को अंदर ले जा रहा था। वो चूत को चाटते हुए गाँड तक चाटने में मसरूफ था और मैं अब तक उसके हसीन तरीन लंड को न सिर्फ सेक्स बल्कि मोहब्बत से बुरी तरह चूम रही थी।

उसके लंड से मैं इस तरह खेल रही थी जैसे कोई रोता हुआ बच्चा खिलौने से खेलता हो। निशु मेरे गाँड के होल को चूसते हुए बिल्कुल नीचे हो गया और मेरी थाईज को चूमता हुआ मेरी टाँगों तक चला गया। वो अब मेरे पैरों में बैठकर मेरी टाँगों को चूस रहा था और जब उसने अपनी जुबान से मेरे पैरों के तलवों को चाटना शुरू किया। मैं तो इस नई लज्जत को बर्दाश्त ही नहीं कर सकी। क्या अजीब सी गुदगुदी हो रही थी कि पूरा जिस्म मचल गया।

निशु मेरे तलवों को अपनी जुबान से गीला कर चुका था। वहाँ से फारिग होकर वो मेरी दोनों टाँगों के दरमियान आ गया।

मैं देख रही थी कि उसका लंड एक वहशी जानवर की तरह मेरी चूत की तरफ देख रहा था। निशु को मैं पहली बार अपने बेटे के अलावा किसी और रूप में देख रही थी।

निशु को इस नजर से मैंने कभी नहीं देखा था। वो एक भरपूर नौजवान और मस्कुलर बॉडी में एक मुकम्मल मर्द (मेल) की तरह नजर आ रहा था। उसके लंबे बाल और चौड़ा सीना जिसके साथ उसके भरे हुए मर्दाना बाजू एक मजबूत इंसान की नवीद सुना रहे थे। निशु का पेट कमर से चिपका हुआ था जबकि उसकी बड़ी-बड़ी चमकदार आँखें रोशनी और सेक्स से भरी हुई थीं। मेरा बेटा कितनी जल्दी बड़ा हो गया। ये सोचकर मेरी आँखों में पानी आ गया।

कुशादा पेशानी और सुरखा चेहरे पर मोती (पर्ल) जैसे चमकते हुए दाँत (टीथ) अजीब बहार दे रहे थे। निशु मेरी आँखों में प्यार से देख रहा था और मैं भी पहली बार अपने प्यारे बेटे को नई हैसियत से देख रही थी। निशु ने मेरी टाँगों को फैलाया और मेरी चूत पर अपना फौलादी लंड रख दिया। मेरे शौहर को तो सेक्स करते हुए अपने हाथों से लंड को सहारा देना पड़ता था लेकिन निशु का लंड तो फौलाद (आयरन) का बना हुआ था।

शायद निशु का लंड मेरे तरफ के मर्दों पे गया है।

उसने लंड को चूत के मुँह (एंट्री) पर रखा और अपने दोनों हाथों को मेरी दोनों जाँघों पर रखा और लंड को अंदर धकेलना शुरू कर दिया। मेरी चूत में यूँ तो सैकड़ों बार मेरे शौहर का लंड दाखिल हुआ था लेकिन मैंने कभी उसको महसूस नहीं किया बल्कि एक سرد लाश की तरह लेटी रहती थी। वो भी जमाने से मेरी चूत को दर्शन नहीं मिला था।

निशु का लंड अभी तो चूत के ऊपर सहला रहा था लेकिन चूत को छूते ही मेरे जिस्म में आग भड़क गई। एक-एक हिस्से से शोले (फ्लेम) भड़क रहे थे। निशु का लंड अभी बाहर ही था और चूत के दोनों होंठ को सहला रहा था और इसी तरह वो मेरे ऊपर आ गया। मेरे ऊपर आते ही उसने मेरी चुची को अपने हाथों से पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया और इसके साथ ही मेरे होंठों को चूमने लगा।

मैंने भी उसको अपनी बाँहों में ले लिया और उसके होंठों को काटने लगी। उसका लंड मेरी चूत में दाखिल हो रहा था।

और ज्यों-ज्यों लंड अंदर जाता मेरे जिस्म को गरम करता जा रहा था। निशु का लंड अंदर हो रहा था और मैं उसके होंठों को ऐसे जोर से अपने होंठों में ले रही थी जैसे उसको खा जाऊँगी। मैंने उसको दाँत काटना भी शुरू किया। वो दर्द से बिलबिला उठा मगर मुझे अच्छा लगा।

उसका लंड अपना रास्ता बनाते हुए अंदर जा रहा था और मैं उसके एक-एक इंच को दिल और चूत की गहराइयों से महसूस कर रही थी और स्वागत कर रही थी। जब-जब लंड अंदर जाता मेरी चूत की दीवार उसको अंदर दाखिल होने में मदद करती। निशु का लंड पूरा अंदर आ चुका था। उस वक्त निशु का लंड तो क्या पूरा का पूरा निशु अंदर दाखिल हो सकता था।

मैं बेसाख्ता बोल पड़ी—

मै: उई………माँ………आ……आआआआआआ। जरा धीरे से डालो बेटा बहुत……दर्द……हो……रहा……है। और जोर से बेटा क्या मजा आ रहा है। अपनी जिंदगी में मैंने इतना बड़ा लंड नहीं देखा था बेटा। तेरे पापा का भी इतना बड़ा नहीं था, बड़ा मजा आ रहा है लगे रहो मेरे बेटे लगे रहो……!!!

मैं तो बेवा थी लेकिन मैं समझती हूँ कि मैंने पहली बार अपनी कुंवारी चूत अपने बेटे को पेश कर रही थी और मेरा बेटा भी अपनी खूबसूरत मम्मी को बहुत प्यार से अपनी नई जिंदगी में दाखिल कर रहा था।

मैं प्यार से बोली—

मै: उउईईमाआ! मार डालोगा क्याआ??

निशु अपने लंड को मेरी चूत में गायब करने के बाद मुझसे कहा—

निशु: मम्मी मैं बहुत खुश हूँ कि आज ये दिन आया। मैं आपसे बेइंतहा मोहब्बत करता हूँ और हमेशा आपका ही रहूँगा।

उसकी जुबान से ये बातें सुनकर मुझे अंदाजा हो गया कि वो मुझसे सिर्फ सेक्स नहीं बल्कि मुझसे मोहब्बत भी बहुत करता है। निशु ने ये कहा तो मैंने उसकी पेशानी पर प्यार किया और गले लगा लिया। निशु ने अब अपने लंड को खूब जोर से मेरे चूत के अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और अब पहली बार मुझे मालूम हुआ कि सेक्स और लंड क्या होता है।

निशु ने मेरी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया और मेरी तरफ झुककर अपने लंड को मजीद तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था और निशु मेरे चुची को हाथों से पकड़कर हौले से दबा भी रहा था। वो लंड को برق रफ्तारी से अंदर-बाहर कर रहा था। जब उसका लंड मेरी चूत के आखिरी हिस्से को पहुँचता तो एक झटका सा लगता और मैं मदहोश हो जाती।

मेरे शौहर का लंड तो कभी भी वहाँ तक नहीं पहुँचा था जहाँ तक मेरा बेटा पहुँच रहा था। निशु काफी देर तक इसी तरह मुझे चोदता रहा और फिर मेरी टाँगों को बेड पर रखकर मेरे चुची को चूसने लगा।

वो जब छोटा था तो इन्हीं चुचियों को चूसता था और आज फिर चूस रहा था। उसका लंड मुसलसल हरकत में था और मैंने अब अपनी टाँगों को उसकी कमर के गिर्द कर लिया था और अपनी टाँगों की मदद से उसको खुद भी अंदर-बाहर कर रही थी।

निशु अब मेरे होंठों पर आ गया और अब उसकी चोदने की रफ्तार तेजतर हो गई थी। मुझे लगा कि मैं डिस्चार्ज होने वाली हूँ और वो भी लग रहा था कि अब डिस्चार्ज होने वाला है। वो मेरे होंठों और गालों को प्यार कर रहा था और फिर वो जरा ऊपर हुआ और कहने लगा—

निशु: हैप्पी बर्थडे मॉमी।

और उसने तीन बार ऐसा कहा और फिर एक लम्हे को पूरी ताकत से अपने लंड को चूत में डाला और वहीं रुक गया।

उसके लंड ने मेरी चूत में डिस्चार्ज होना शुरू कर दिया और उसकी गरम-गरम पानी अपने अंदर महसूस करके मेरे जिस्म ने एक अंगड़ाई ली और मैं भी अपने बेटे के लंड का साथ देते हुए डिस्चार्ज हो गई।

डिस्चार्ज होते हुए ऐसा लगा कि पूरे जिस्म का अरक (जूस) निकल गया।

मुझे याद आया कि आज मेरा जन्मदिन है और मेरी जन्मदिन पर मेरे बेटे ने एक अजीम तोहफा दिया था। अब हम दोनों एकदम एक-दूसरे के शरीर से शरीर चिपके एकदम शांत बेड पर पड़े रहे। सिर्फ साँस की आवाज और हार्टबीट की आवाज सुनाई दे रही थी। दोनों के बदन से पूरी तरह पसीना ही पसीना छूट रहा था फिर भी दोनों को एक अलग सा एहसास हो रहा था। क्योंकि अब हम माँ और बेटे के रिश्ते से बढ़कर एक नर और मादा (मेल एंड फीमेल) के रिश्ते में प्रवेश कर चुके थे।

क्योंकि मैं एक प्यासी औरत और वो एक भूखा मर्द जो ठहरा।

तभी हमने देखा कि आशु दरवाजे पर खड़ा होकर हमें देख रहा है। इस सारी गफलत में हमने ध्यान नहीं दिया कि कब आशु पार्टी से घर लौट आया और दरवाजे से खड़ा होकर हमारी चुदाई देख रहा था। मेरा शरीर डर से काँपने लगा। आशु ने मेरी तबीयत समझी और बोला—

आशु: वाह क्या बात है मॉम। भाई के साथ चुदाई और मैं पराया हो गया। मुझे भी तो चोदने दो।

मुझे कोई जवाब न सूझा। निशु ही बोला—

निशु: भाई तुम भी आओ। ये तुम्हारी भी माँ है ना। ये हमारी तरफ से मम्मी को जन्मदिन का तोहफा है।

आशु हँसते हुए बोला—

आशु: मुझे गाँड मारनी है। वो मॉम का वर्जिन होगा। है ना मॉम?

आशु मेरे नजदीक आ गया और मेरा गाँड चाटने लगा। मैं बोली—

मै: अरे वहाँ नहीं बहुत दर्द करेगा।

निशु किचन से बटर ले आया और बोला—

निशु: भाई लो इसे मॉम के गाँड पर लगाओ तो दर्द नहीं करेगा।

निशु खुद बटर लेकर बहुत सारा बटर मेरे गाँड के छेद पर लगाने लगा। उसका लंड एकदम कड़क हो रहा था। मैंने उसका लंड हाथ में लिया और चूसने लगी। मैं सोचने लगी। मेरा बेटा गे है क्या। उसे गाँड पर ज्यादा प्यार क्यों है।

उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरा गाँड का छेद चाटने लगा। मुझे बहुत अजीब लग रहा था मगर मजा भी आ रहा था। निशु का लंड सामने दिख रहा था और मैंने उसे पकड़कर प्यार करने लगी। निशु मेरे चुचियों से खेल रहा था। जरा मंजर का ख्याल करें मैं बिल्कुल नंगी थी, मेरे मोटे गाँड ऊपर उठे हुए थे, और मेरा बड़ा बेटा मेरी चुची दबा रहा था और छोटा बेटा पूरे जोर से मेरा गाँड चाट रहा था, और मैं बड़े बेटे का लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी और एन्जॉय कर रही थी।

आशु बोला—

आशु: मम्मी अब चुदाई के लिए तैयार हो जाओ। मैं तुम्हारा गाँड मारूँगा।

जब आशु ने अपना लंड मेरे गाँड में डाला तो मैं दर्द से बिलबिला गई और गुस्से में सब भूल गई और गालियाँ देने लगी, चिल्लाने लगी—

मै: आशु निकाल मेरी गाँड से अपना लंड, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

हे भगवान ये मैं क्या बोल पड़ी। आशु मेरे गाँड से अपना लंड निकाला और उसको चूत में रगड़ने लगा। आशु ने कहा—

आशु: आज गाँड चुदवाने का मजा भी ले लो।

तो मैं कहने लगी—

मै: मेरी गाँड तो कभी तेरे पापा ने भी नहीं ली।

आशु ने कहा—

आशु: मुझे तो तुम्हारी गाँड मारनी है।

उसने फिर अपना लंड मेरे गाँड के छेद में डालनी शुरू की। मैं रोने लगी, कहने लगी—

मै: मुझे बहुत दर्द हो रहा है। क्या तुम आराम से नहीं कर सकते आआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आराम से करो वरना मेरी गाँड फट जाएगी। हरामी आराम से। अब्बे कोई तेरी गाँड में अपना लंड डालेगा तो तुझे पता चलेगा कि कैसा दर्द होता है।

ओये तुझे मैं कह रही हूँ आराम से।

मैं दर्द से बेहाल हो रही थी।

फिर उसने अपना लंड हाथ में लिया और मेरे गाँड से बाहर निकाल लिया। मैं बैठकर अपनी गाँड को दबाने लगी और कहने लगी—

मै: तुम तो बिल्कुल ही वहशी हो। क्या तुम्हें किसी के दर्द का कुछ ख्याल नहीं है। मुझे इतना दर्द उस भी वक्त नहीं हुआ था जब मैं पहली बार चुदी थी जितना दर्द मुझे आज हुआ है। तुम गे हो क्या जो मेरी गाँड मारने पर पिले हो।

आशु बोला—

आशु: मुझे सिर्फ गाँड ही मारने का शौक नहीं बल्कि मैं गाँड के साथ चूत भी चोदना चाहता हूँ।

वैसे मेरी उम्र उस वक्त 37 साल थी और दूसरी औरतों की तरह मेरी जवानी भरी-भरी और मेरे गाँड बड़े थे। आशु ने अपना लंड मेरे मुँह में डाला।

उसे ऐसी आदत है कि गाँड मारते हुए अपना लंड जरूर चुसवाता है।

आशु ने अब मुझे फिर घोड़ी बनाया और अपना लंड फिर से मेरे गाँड में डाल दिया और पूरा जोर से मुझे चोदने लगा। मैंने अपनी गाँड को ऊपर पुश किया और आशु ने पूरा जोर से अपना लंड मेरे गाँड में घुसा दिया। उसका जिस्म काफी भारी था और उसका लंड उसके जिस्म के जोर से मेरे गाँड में जाता तो मुझे बहुत ही मजा आने लगा।

मेरा दर्द जैसे हवा हो गया। इस तरह मेरे गाँड और चूतड़ एक फुटबॉल की तरह बन गए। आशु गाँड मार रहा था और निशु चुची चूस रहा था। अब दर्द नहीं था और मैं भी आशु के धक्के के साथ अपने गाँड भी धक्का दे रही थी। ये मेरे जीवन का सबसे हसीन पल था।

किसी भी माँ के लिए इससे बड़ा दिन क्या होगा। एक बेटा ने गाँड मारी और एक बेटे ने चूत चोदा।

और मेरा चूत और गाँड बिल्कुल उन दोनों की चुदाई के लिए फ्री होता गया। मैंने आशु से कहा—

मै: अपना मोटा लंड से मेरा गाँड मार ले मगर मेरी फुद्दी को भूलना नहीं।

आशु बोला—

आशु: इसके बाद तेरी चूत की बारी है। कैसा लग रहा है मम्मी। ओह यस।

मेरा बड़ा बेटा निशु इस दौरान अपना लौड़ा मेरे मुँह में भी डाला और अपनी उँगलियों से मेरे चूत के छेद सहलाता रहा।

सबसे मजेदार बात ये थी कि जितना वाइल्ड मेरे बेटे हो रहे थे मैं और वाइल्ड होने लगी, गालियाँ देने लगी। आशु ने फिर मुझे ऊपर आने को कहा। (जिसने गाँड मरवाई हो उसे मालूम होगा कि ऊपर से अपनी गाँड में लौड़ा लेना किस कदर मुश्किल है।) मगर आशु ने मेरी गाँड मारकर उसे बहुत ही खुल्ला कर दिया इसलिए मुझे ऊपर से अपनी गाँड मरवाने में कोई मुश्किल नहीं हो रही थी।

अब मैं ऊपर उछल-उछल कर अपनी गाँड को आशु के लौड़े से चुदवा रही थी। मैं कभी-कभी निशु का लौड़ा पकड़ती और लौड़े को एक चूस्सा लगाती फिर अपनी गाँड मरवाने लगती फिर आशु का लौड़ा का टोपा मोटा होना शुरू हो गया। मैं समझ गई कि अब वो झड़ने वाला है। आशु ने पूछा—

आशु: मम्मी मैं पानी छोड़ने वाला हूँ। कहाँ छोड़ूँ? तुम्हारे गाँड में या मुँह में?

मेरा छोटा बेटा बहुत नालायक है, मुझसे कैसे बात कर रहा था। मगर आश्चर्य की बात ये है कि मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने कहा—

मै: मुँह में।

आशु पूरा जोर से अब मेरे गाँड मार रहा था, फिर उसने अपना लौड़ा मेरे गाँड से निकाला और एकदम निशु को हटाते हुए मेरे मुँह में दे दिया और मैंने उसके लौड़े को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया। उसमें मेरे गाँड का माल भी लगा था मगर मैं चूसती रही।

मैं उसकी माँ हूँ इसलिए मैं नीचे उतरकर उसका लौड़ा अपने मुँह में लिया। आशु ने मेरा सर पकड़ा और नीचे से एक झटका मारा तो उसका पूरा 8 इंच का लौड़ा मेरे हलक में उतर गया और अपना सारा पानी मेरे पेट में डाल दिया। आशु चिल्लाया—

आशु: ओह माँ मेरा पानी तुम्हारे मुँह से तेरे पेट में।

मैंने सारा पानी को अपने पेट में उतार लिया। ये इतना उत्तेजित करने वाला मंजर था कि मैं भी पानी छोड़ दी। और निशु ने भी मेरे चेहरे पर पानी छोड़ दी।

कुछ देर के बाद जब हमको साँस में साँस आई तो आशु मुझे किस करते हुए बोला—

आशु: हैप्पी बर्थडे, मम्मी।

ओह यस आपको शॉक तो हुआ होगा मगर ऐसी कोई खास बात नहीं। जब से मैंने गाँड मरवाना शुरू किया है मुझे चैन नहीं आता जब तक एक मोटा और बड़ा लौड़ा मेरे गाँड की तह तक न पहुँचे।

आशु फिर से अपना लौड़ा मेरे गाँड में डाल दिया और मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर बाद निशु ने दोबारा मेरे मुँह को चोदने लगा और फिर सारी रात हमने मजे लिए।

मैंने दोनों बेटों से हर तरह से चुदवाया। कभी डॉगी स्टाइल में, तो कभी घोड़ी बनकर, कभी सीधा लिटाकर, तो कभी उसके लंड पर बैठकर हर तरह से मैंने उन दोनों से चुदवाया। मैंने दोनों बच्चों से खूब चुदाई की और करवाई।

उस रात मैंने आशु और निशु के साथ अपनी सुहाग रात मनाई। निशु ने मुझे गाँड में भी चोदा। मैं कैसे भूल जाऊँ कि उस रात मेरे दोनों बेटों ने मुझे 2-2 दफा चूत से और 2-2 दफा गाँड में चोदा। और आज भी हम तीनों के बीच हर रात एक सुहानी रात बिताई जाती है। अब हम तीनों एक-दूसरे के साथ शादीशुदा की तरह रहते हैं। हम लोग न्यूयॉर्क से अब आर्कन्सास शिफ्ट हो गए हैं और निशु एक कामयाब ब्रेन सर्जन है।

हमारे तीन बच्चे हैं और हमारी जिंदगी हसीन तरीन है। कौन किसका बच्चा है ना हम जानते हैं ना जानना चाहते हैं। हम तीनों जिस तरह एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं और सेक्स करते हैं कि हम भूल गए कि हम तीनों में औरत-मर्द के अलावा भी कुछ रिश्ता है या था।

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