साली की अदला बदली करके चुदाई
Desi sali ki swap krke chudai:- मेरा नाम अनुज है। ये मेरी पहली स्टोरी है। मेरी उम्र तीस साल है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और दिल्ली में ही एक अच्छी पोस्ट पर नौकरी करता हूँ। मेरी शादी एक साल पहले कानपुर (यूपी) की रहने वाली शिप्रा के साथ हुई। शिप्रा की दो सास-ससुर बहनें कंचन (Age 32), प्रीति (Age 28), दो छोटी कुँवारी बहनें कामिनी (Age 20), प्रिया (Age 19) और एक छोटा भाई अरुण (Age 18) है, जो दिल्ली में ही एक हॉस्टल में रहकर पढ़ रहा है। आज मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो एकदम से रियल है और ये शिप्रा से शादी से पहले और बाद की पहली चुदाई की कहानी है। इससे पहले मैंने किसी और लड़की को कभी नहीं चोदा था।
शिप्रा की सबसे बड़ी बहन कंचन की शादी जयपुर के रहने वाले सतीश के साथ कम उम्र में ही हो गई थी। उसकी एक लड़की भी है जिसका नाम आकांक्षा है। शिप्रा की सभी बहनों में कंचन और प्रिया सबसे सुंदर हैं। दोनों ही किसी मॉडल/एक्ट्रेस से कम नहीं लगती हैं। सतीश और कंचन हम दोनों को हमेशा जयपुर घूमने के लिए बुलाते रहते थे लेकिन हमें दिल्ली की बिजी लाइफ में समय ही नहीं मिलता था। लेकिन इस बार की गर्मियों में मैंने शिप्रा के काफी कहने से पाँच दिन की छुट्टी ले ली और जयपुर के लिए रवाना हो गए।
Desi sali ki swap krke chudai hindi sex story
हमने जैसे ही उनके घर पहुँचकर डोर बेल बजाई कंचन और सतीश बाहर आए और कंचन शिप्रा से गले मिली और मैं सतीश से। तभी मुझे मजाक सूझा और मैं सतीश से मिलने के बाद कंचन से मिलने के लिए आगे बढ़ा तो कंचन झेंप गई। ये देखकर सतीश बोला—
सतीश: मिल लो अनुज तुम कंचन से मिल लो। मैं शिप्रा से मिल लेता हूँ। क्या हुआ दोनों ही एक-दूसरे की सालियाँ हैं।
और शिप्रा की तरफ बढ़ने लगा। इस हरकत को देखकर दोनों ही शर्मा गईं और कंचन, शिप्रा को ये बोलते हुए अंदर ले गई—
कंचन: ज्यादा मस्ती आ रही है क्या?
सतीश: क्या करें तुम दोनों बहनें हो ही इतनी मस्त।
इसके बाद उन्होंने हमें अपने कमरे से लगा हुआ एक कमरा दिखाया और कहा—
सतीश: ये आप लोगों का कमरा है। आप लोग बहुत थक गए होंगे। आराम करो।
कंचन बोली—
कंचन: मैं आपके लिए जब तक कुछ खाने को लाती हूँ।
मै: हम लोगों ने रास्ते में खा लिया था। आप बस एक कप टी ले आओ।
कंचन: ठीक है।
और कुछ देर बाद टी लेकर रूम के दरवाजे पर आ गई। जब वो टी लेकर आई तो मैं रूम में अकेला था। शिप्रा बाथरूम गई थी। वो जैसे ही अंदर आई मैं उसे घूरकर देखने लगा। आखिर थी ही वो इतनी सुंदर लेकिन शिप्रा की उपस्थिति में घूरने का मौका नहीं मिल पा रहा था। मैं उसके 36-28-36 जिस्म को देखे ही जा रहा था और वो मुझसे नजरें चुरा रही थी। कंचन की हाइट ५’७” है, एकदम गोरी, बड़ी-बड़ी आँखों वाली, सेब जैसे गाल, शरीर पूरा भरा हुआ है। सतीश उसके सामने कहीं भी नहीं टिकता। सतीश की हाइट 5.6 और थोड़ा मोटा है। कंचन दरवाजे से मेरे पास तक आ गई लेकिन मैंने नजर उसके बूब्स से नहीं हटाई। वो मेरे पास आकर बैठ गई और बोली—
कंचन: अनुज चाय पी लो।
मैंने उसके बूब्स की तरफ देखकर कहा—
मै: चाय तो पीनी ही पड़ेगी। आजकल दूध कहाँ मिलता है।
वो समझ गई और झेंपकर बोली—
कंचन: मैं चलती हूँ। आप आराम करो।
वो चली गई और हम लोग शाम तक आराम करते रहे।
शाम को हम सभी लोग बैठकर इधर-उधर की बातें और मजाक करते रहे। कंचन ने शाम को नाइट सूट और शिप्रा ने स्कर्ट-टॉप पहन रखा था। इस दौरान मैंने देखा कि सतीश बातें करते-करते मेरी बीवी को बहुत बुरी तरह से घूरता था और शिप्रा भी उसके इरादे समझकर सतीश से नजरें चुरा रही थी। सतीश को देखकर मैंने भी कंचन को घूरना शुरू कर दिया था। हमें बातें करते-करते रात के आठ बज गए। सतीश ने कहा—
सतीश: अनुज चलो यार काफी दिनों बाद मिले हैं। चलो एक-एक पैग लेते हैं।
तो मैंने कहा—
मै: नहीं यार तुम पियो।
क्योंकि मैं नहीं के बराबर लेता था कभी-कभी। तो वो शिप्रा की तरफ देखते हुए बोला—
सतीश: शिप्रा इजाजत दे दो।
तो शिप्रा बोली—
शिप्रा: मेरी इजाजत की क्या जरूरत है। पी लो दोनों लोग।
इसको डबल मीनिंग से और शिप्रा के बूब्स की तरफ निगाह गड़ाते हुए सतीश बोला—
सतीश: ये दूध नहीं है जो इजाजत न लेनी पड़े। इसमें तो इजाजत लेनी पड़ेगी अनुज को और हम तो बिना इजाजत के दूध भी नहीं पी सकते हैं।
कंचन, मैं और शिप्रा तीनों समझ गए कि सतीश किस दूध की बात कर रहा है। आज से पहले कभी उसने ऐसा मजाक नहीं किया था। सतीश ने कंचन को भी कहा—
सतीश: कंचन प्लीज आज हम सब लोग एक साथ मिलकर पीते हैं थोड़ी-थोड़ी, जिससे ये लोग भी जयपुर विजिट को याद रखें कि कुछ नया हुआ था।
कंचन की शराब से दुश्मनी थी लेकिन सतीश ने उसे कसम देकर बैठा ही लिया। शायद कंचन भी इसलिए मान गई क्योंकि उसे लग रहा था कि मना करने से सतीश से उसका झगड़ा हो सकता है। इसके बाद शिप्रा भी बिना ना-नुकुर किए हमारे पास आकर बैठ गई।
सतीश दो बोतल, एक वोदका की और एक रॉयल चैलेंज निकाल लाया और कंचन से झूठ बोला—
सतीश: ये वोदका की बोतल है। इसमें बहुत कम नशा होता है।
टेबल पर दो स्टील के और दो काँच के ग्लास थे। उसने बड़ी चालाकी से दोनों स्टील के ग्लास में तीन-चौथाई हिस्से में वोदका भर दी और बाकी में कोल्ड ड्रिंक मिला दी।
उसने अपने और मेरे लिए एक-एक पैग आरसी का बनाया। उन दोनों ने ही एक ही घूंट में पूरा ग्लास खाली कर दिया और कंचन बोली—
कंचन: पता नहीं क्या है इसमें। लोगों को क्या मजा आता है जो इसको पीते हैं।
शिप्रा बोली—
शिप्रा: हाँ दीदी बहुत कड़वी है।
इस पर सतीश ने कंचन को हमारे सामने ही हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया और उसका एक बूब दबाते हुए शिप्रा की तरफ देखते हुए बोला जैसे शिप्रा से ही बोल रहा हो—
सतीश: हमें तो इनमें मजा आता है। ये पिला दो।
शिप्रा समझ गई कि सतीश उसको ही बोल रहा है।
इतने में मैंने भी शिप्रा को पकड़कर अपनी गोद की तरफ खींच लिया और उसके दोनों बूब्स को दबाते हुए कंचन की तरफ इशारा किया और बोला—
मै: कड़वा है तो मीठा निकाल दूँ।
कंचन ने सिर झुका लिया और दोनों ही अपने आप को छुड़ाते हुए बड़बड़ाती हुई चली गईं। कंचन बोल रही थी—
कंचन: दोनों पागल हो गए हैं।
सतीश, शिप्रा को जाते हुए देखता रहा और एक आह भरी और बोला—
सतीश: काश……
मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहता है लेकिन मैं उससे ही सुनना चाहता था।
मै: सतीश कुछ कहा क्या?
तो वो बोला—
सतीश: यार कुछ नहीं। ऐसे ही।
और एक और पैग बनाने लगा तो मैंने बोला—
मै: यार हमसे क्या छुपाना। बोलो।
वो बोला—
सतीश: यार बुरा मत मानना।
तो मैं बोला—
मै: यार बोल तो सही।
वो बोला—
सतीश: यार शिप्रा बहुत खूबसूरत है। तू बहुत लकी है जो शिप्रा जैसी खूबसूरत बीवी मिली है।
इस पर मैं और एक्स्ट्रा बोलने की हिम्मत करके बोला—
मै: यार कंचन के सामने शिप्रा कुछ भी नहीं। क्या बदन है, क्या पिछवाड़ा और क्या दूध हैं। मुझसे ज्यादा तो तुम लकी हो।
सतीश तुरंत बोला—
सतीश: ठीक है तो अपना लक आज बदल लेते हैं। हो तैयार…?
इस पर मैंने कहा—
मै: क्यों नहीं। लेकिन वो लोग मानेंगी क्या?
सतीश: ट्राय तो करो। थोड़ा ड्रामा तो करेंगी लेकिन क्या उनका दिल नहीं है? उनका दिल भी तो करता होगा नए मजे को, नए अनुभव को।
मै: ओके। ट्राय करते हैं।
तभी कंचन और शिप्रा लड़खड़ाते हुए खाना लेकर आ गईं। उनको नशा हो रहा था। फिर हम सबने एक साथ मिलकर खाना खाया। शिप्रा और कंचन दोनों ने नशे के कारण थोड़ा ही खाया और अपने कमरे में सोने चली गईं।
हम दोनों ने तसल्ली से खाना खाया और अपने-अपने रूम्स की तरफ जाने लगे तो सतीश बोला—
सतीश: अनुज इरादा नहीं है क्या?
तो मैं बोला—
मै: अभी से? अभी तो नौ ही बजे हैं।
तो वो बोला—
सतीश: रात ज्यादा लंबी नहीं लगेगी। कंचन के साथ तुम्हें पता भी नहीं चलेगा और दिन निकल आएगा।
मै: ठीक है। तुम शिप्रा के पास जाओ। मैं कंचन के पास जाता हूँ। लेकिन शिप्रा का ख्याल रखना। ज्यादा बेरहमी मत दिखाना। बहुत नाजुक है।
सतीश: यार क्यों चिंता करते हो। आज वो मेरी बीवी है और मुझे पता है कि बीवी का ख्याल कैसे रखना है।
और गुड नाइट कहकर गेट बंद कर लिया। मैं भी अपने कमरे में आ गया लेकिन मुझे सतीश के बिहेव से लग रहा था कि वो आज शिप्रा को बुरी तरह से चोदेगा।
मैंने अपने रूम की खिड़की से देखने की कोशिश की कि शायद उस कमरे में कुछ दिख जाए क्योंकि मुझे सतीश ज्यादा बहासी लग रहा था। कहीं वो शिप्रा से ज्यादा जबरदस्ती न करे। तभी मुझे खिड़की में एक बोल्ट वाली खाली होल दिखी जिसमें से मैंने देखा तो रूम का सारा सीन क्लियर दिख रहा था। मैंने देखा कि सतीश पूरी तरह से नंगा होकर बेड के नीचे खड़ा है और उसका कोयले से भी काला लंड उसके हाथ में है। उसका लंड मेरे लंड से मोटा जरूर था लेकिन लंबाई कम थी। वो अपने लंड को पकड़कर ऊपर बेड पर चढ़ गया। शिप्रा एक टाँग फोल्ड करके लेफ्ट साइड मुँह करके सोई हुई थी।
उसका एक बूब जैसे बाहर ही निकला जा रहा था और उसकी दोनों जाँघें स्कर्ट ऊपर होने से साफ दिखाई दे रही थीं। सतीश ने सबसे पहले उसकी स्कर्ट को उसके पिछवाड़े से धीरे से थोड़ा ऊपर किया जिससे उसकी पैंटी का पीछे वाला हिस्सा उसे साफ दिखाई देने लगा। उसने अपना मुँह उसके चुत्तर के पास ले जाकर किस किया। अब उसने उसके टॉप को थोड़ा ऊपर किया और पीछे से उसकी ब्रा को खोल दी। उसने शिप्रा को अपनी बाँहों में भरते हुए सीधा करके बैठाया और उसकी टॉप को उतार दी। शिप्रा के ऊपर वाले हिस्से पर अब एक भी कपड़ा नहीं था।
सतीश ने उसे बैठे-बैठे ही होठों पर एक लंबी किस की और उसके बूब्स को मुँह में भरकर धीरे-धीरे चूसने लगा। शिप्रा ने अभी तक कोई हरकत नहीं की थी। उसने वापस शिप्रा को लिटा दिया और उसके पिछवाड़े पर हाथ लगाते हुए उसकी स्कर्ट को भी उतार दी। सतीश अब उसकी पैंटी को भी उतारने लगा। पैंटी को उतारते ही शिप्रा अब उसके सामने बिल्कुल नंगी हालत में थी और सतीश के शरीर में कंपन साफ दिखाई दे रहा था। वो उसे देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था। सतीश उसकी चूत की किस लेते हुए सीधे ही उसके ऊपर चढ़ गया था और उसके होठों को बुरी तरह से चूसने लगा था।
उसका एक हाथ शिप्रा के सिर के नीचे और एक हाथ से वो उसके बूब्स को मसल रहा था। वो जिस तरह बूब्स पर दम लगा रहा था और होठों को चूस रहा था उससे तो लगता था कि शिप्रा कहीं जाग न जाए और वही हुआ। शिप्रा ने दर्द के कारण मुँह बनाते हुए आाह-आाह करते हुए आँखें खोल दीं। अपने ऊपर सतीश को देखकर वो कुछ समझ नहीं पाई और उसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी, लेकिन एक तो वो लड़की और दूसरा नशे के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर सकी।
लेकिन वो विरोध करती रही। वो सतीश से जोर-जोर से कुछ बोल रही थी लेकिन मुझे सिर्फ दिखाई दे रहा था। सतीश भी उसे कुछ बोल रहा था और सतीश ने हमारे रूम की तरफ इशारा भी किया था जैसे कि बोल रहा हो कि कंचन और मैं इस कमरे में हैं। तभी सतीश ने अपना फोन कहीं लगाया। ये क्या मेरे पास बेल आई। मैं समझ गया कि वो मेरी बात कराना चाहता है। मैंने डरते हुए फोन उठा लिया।
सतीश: यार अनुज शिप्रा तो बहुत जिद कर रही है। मान ही नहीं रही है। तुम ही इसको समझाओ।
और शिप्रा को फोन दे दिया।
शिप्रा रोते हुए बोली—
शिप्रा: अनुज… सतीश मेरे साथ…
और चुप हो गई।
मै: जान कोई बात नहीं। सतीश भी तो हमारे ही घर का मेंबर है। आज तुम्हें एक नया आनंद मिलने वाला है तो तुम नए आनंद का मजा लो।
मैंने झूठ बोलते हुए कहा—
मै: कंचन भी तो मेरे साथ है। वो तो बड़े ही मजे से मेरा साथ दे रही है। उसने तो कुछ नहीं कहा। वो तो तुम्हारी ही बहन है। समझ से काम लो और मजा लो। और मैं सतीश को कह देता हूँ कि तुमको ज्यादा परेशान न करे। फोन उसको दो।
शिप्रा ने फोन सतीश को दे दिया।
मैंने सतीश को बोला—
मै: सतीश शिप्रा को आज मस्त कर दो। उसका पूरा रस निकालकर पी जाओ। पूरा चूस ले आज उसको। उसको इतना मजा दे के उसको हमेशा याद रहे। ओके गुड लक।
ये कहकर मैंने फोन रख दिया। अब मैंने देखा कि शिप्रा सतीश का विरोध नहीं कर रही थी। सतीश उसकी दोनों जाँघों को चाटते हुए आगे बढ़ रहा था। शिप्रा का मुँह हमारे रूम की खिड़की की तरफ था और वो अपनी आँखें बंद किए हुए मुँह से लंबी-लंबी साँसें भर रही थी जैसे उसको काफी मजा आ रहा हो। अब सतीश उसकी चूत तक पहुँच चुका था और उसकी चूत को कुत्तों की तरह चाट रहा था। शिप्रा को शायद अब ज्यादा मजा आ रहा था इसलिए उसने थोड़ा सा ऊपर उठते हुए सतीश के सामने सिर हिलाते हुए, जैसे उसे अब चूत को और चाटने को मना कर रही हो, उसकी बाँहों को अपनी बाँहों में पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया। सतीश के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। अब उसे लगने लगा था कि शिप्रा अब उसका पूरा साथ देगी एक बीवी की तरह और मुझे भी अब शांति थी कि चलो शिप्रा मान गई।
अब शिप्रा की सहमति पाकर सतीश शिप्रा पर टूट पड़ा और उसकी दोनों चुचियों को लेकर पागलों की तरह उन्हें मसलने लगा। शिप्रा भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर सतीश का ताना हुआ काला लंड पकड़कर सहलाने लगी। सतीश ने अब बिना देरी किए अपना लंड शिप्रा की चूत के मुँह पर रख दिया और उसके होठों को अपने होठों में लेते हुए एक जोर से झटका दिया और लंड चूत में अंदर दाखिल हो गया।
शिप्रा, सतीश को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी क्योंकि सतीश का लंड मेरे लंड से मोटा था और शायद जिससे उसको तकलीफ हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो लंड का पहली बार मजा ले रही हो। तभी अचानक सतीश ने शिप्रा को चोदते-चोदते अचानक चोदना बंद कर दिया और अपना लंड शिप्रा की चूत से निकालकर उसे बेड से उठने का जैसा इशारा करने लगा। जैसे ही शिप्रा अपनी जगह से हटी सतीश उसकी जगह पर लेट गया और उसको अपने ऊपर आने का इशारा करने लगा।
शिप्रा मुस्कुराकर उसके ऊपर आ गई और उसकी कमर के दोनों तरफ अपने हाथों को रखकर सतीश के लंड को अपने हाथों से पकड़कर उसके सुपाड़े को एक किस किया और सतीश के ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपनी चूत के छेद पर रखकर ऊपर-नीचे करने लगी और उसके मोटे लंड को अपनी चूत में लेने लगी। सतीश भी शिप्रा की चुचियों को हाथ से दबाते हुए उनको मुँह में लेने की कोशिश करने लगा। शिप्रा थोड़ा नीचे की तरफ झुक गई जिससे वो उनको चूस सके और सतीश एक चुची को चूसने लगा और एक को दूसरे हाथ से मसलने लगा। सतीश ने थोड़ी देर बाद फिर से पोजीशन बदल ली और ऊपर आ गया और शिप्रा को तेजी से चोदने लगा। उसने अपना मुँह उसके सीने में गड़ा रखा था। ऐसा लग रहा था जैसे आज चुचियों को पूरा ही निचोड़ देगा उनका सारा दूध खत्म कर देगा। सतीश ने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी थी और कुछ ही देर बाद दोनों शांत हो गए और सतीश शिप्रा के ऊपर ही लेटा रहा।
अब मैंने सोचा कि चलो अब बहुत सब्र कर लिया और संतुष्टि भी मिल गई कि शिप्रा ने कोई हंगामा नहीं किया और शिप्रा की पहले ना-नुकुर और फिर थोड़ी देर बाद सतीश का ऐसे साथ देना जैसे उसी की बीवी हो से ये तो साफ हो गया कि कंचन भी मान ही जाएगी और अब तो शिप्रा भी हमारा साथ देगी कंचन को मनाने में क्योंकि वो एक नया मजा जो लूट चुकी थी। ये सब सोचकर मैं कंचन के बेड की तरफ अपना पैंट-शर्ट उतारकर सिर्फ अंडरगारमेंट्स में आगे बढ़ने लगा और उसके पास आकर बैठ गया। वो सीधी लेटी हुई थी। सबसे पहले मैंने उसको होठों पर किस किया और उसकी चुचियों पर हाथ रखकर उन्हें प्रेस करने लगा।
धीरे-धीरे उसके नाइट सूट के सारे बटन खोल दिए। मेरे सामने अब उसका सुंदर मखमली पेट और काली ब्रा से बाहर झाँकता शरीर था। ऐसा लग रहा था कि उसकी चुचियाँ कभी भी उसकी ब्रा को तोड़कर बाहर आ जाएँगी। अब मैंने बिना देरी किए उसकी नाइट सूट की लोअर का नाड़ा खोलकर नीचे खिसकाकर बाहर निकाल दिया और उसकी पीठ के नीचे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा भी खोल दी और ब्रा को एक किनारे रख दिया। मैं उसकी दोनों टाँगों को फैलाकर उसके बीच में बैठ गया और उसकी बाँहों को अपनी बाँहों में लेकर उसकी नाइट सूट की अपर उतार दी। अब वो मेरे सामने उसी अवस्था में थी जैसी कि पैदा हुई थी। उसे देखकर मेरा चेहरा लाल हो गया। मैंने कभी इतनी खूबसूरत लड़की को चोदने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था।
मैंने उसके होठों को अपने होठों के कब्जे में लिया और बुरी तरह से चूसने लगा। मैंने सोच लिया था कि आज उसको इतनी बुरी तरह से चोदना है कि वो सतीश को भूलकर हमारे जाने के बाद मेरी चुदाई के बारे में जरूर सोचे। मैं पहले धीरे-धीरे और फिर उसकी कड़ी चुचियों को बुरी तरह से उसको बैठाए-बैठाए ही मसलने लगा। वो थोड़ा सा हरकत करने लगी तो मैंने उसे छोड़ दिया और लिटा दिया।
और खुद भी उसके ऊपर लेट गया। अब मैंने फिर से वही काम शुरू कर दिया। एक चुची को पूरी ताकत के साथ हाथ से और दूसरी चुची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। वो दर्द के मारे उऊह्ह… उऊन्ह्ह करने लगी और आँखें बंद करते हुए ही बोली—
कंचन: सतीश प्लीज मान जाओ। पेन होता है।
मैं फिर भी नहीं माना और काम जारी रखा तो उसने आँख बंद रखते हुए ही अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ पर दोनों हाथों से थप्पड़ रख दिए जैसे कह रही हो मान जाओ। अब मुझे और जोश आने लगा और मैंने अपने होठ उसके होठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा।
पता नहीं उसे क्या लगा कि उसने झटके के साथ आँखें खोल दीं और जैसे ही मुझे अपने ऊपर देखा अपना मुँह हटा लिया। उसका सारा नशा जैसे गायब हो गया और बोली—
कंचन: अनुज तुम…?
मैंने शांत रहते हुए जवाब दिया—
मै: मुझे ये हिम्मत तुम्हारे इस रूप ने दी है। तुमने दी है। ऐसे रूप को देखकर तो मुर्दे भी जिंदा हो जाएँ।
वो रोने लगी और छुड़ाने का प्रयास करते हुए बोली—
कंचन: हटो मेरे ऊपर से। मैं तुम्हारी करतूत के बारे में अभी सतीश को बताती हूँ।
मै: कंचन यार तुम क्यों परेशान हो रही हो। सतीश ने ही मुझे यहाँ भेजा है और तुम तो पागल हो। वो एक-दूसरे के साथ मजा ले रहे हैं और तुम टाइम बर्बाद कर रही हो।
कंचन: वो दोनों कौन?
मै: शिप्रा और सतीश।
कंचन: तुम झूठ बोल रहे हो।
तो मैं बोला—
मै: सुनोगी या देखोगी? मेरा मतलब फोन पर बात करोगी या खुद आँखों से देखोगी।
कंचन: देखूँगी।
फिर मैंने कहा—
मै: यदि ठीक हुआ तो फिर…?
इस पर वो बोली—
कंचन: ठीक है।
उसका मतलब था हाँ। मैं उसको ऐसी ही हालत में खिड़की के पास ले गया। पहले मैंने खुद देखा कि वो लोग क्या कर रहे हैं। उनका दूसरा राउंड शुरू हो चुका था और इस बार शिप्रा चुचियों के बल लेटी थी और सतीश उसकी पीठ पर सवार था। यानी इस बार शिप्रा की गाँड की बारी थी। मैं खिड़की के होल से हट गया और उसे बोला—
मै: लो देख लो। तुमने अभी एक बार भी मजा नहीं लिया और वो दूसरा राउंड शुरू कर चुके हैं।
और वो खिड़की के छेद से झाँकने लगी और अंदर देखते ही उसे सबूत मिल गया। अब मैंने उसे एक हाथ से पीठ के नीचे और एक हाथ उसके घुटनों के नीचे लगाकर अपनी गोदी में उठा लिया और उसके लिप्स को किस करते हुए बेड की तरफ ले गया। कंचन कुछ नहीं बोली। बेड के पास ले जाकर मैंने उसे वहीं लिटा दिया और उसकी टाँगें सीधी कर दीं।
मैंने अभी तक उसकी चूत का दीदार नहीं किया था। मैंने देखा उसकी चूत एकदम साफ थी। एक भी बाल नहीं था। शायद आज ही सफाई की थी। कंचन ऐसे भी सभी मामलों में साफ-सफाई पर काफी ध्यान देती थी। उसकी चूत का रंग उसके रंग से ही मिलता-जुलता था जबकि शिप्रा की चूत शिप्रा के गोरे होने के बाद भी काला था। यही सेम सतीश और मेरे लंड के रंग के साथ था। ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आई।
अब मैं उसकी टाँगें फैलाकर उसके बीच में बैठ गया और उसकी चूत को किस करने लगा। वो अभी भी कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रही थी। मैं धीरे-धीरे उसकी चूत को चाटने लगा और उसमें जीभ घुसाने लगा। वो शांत ही रही। मैंने अब एक उँगली उसकी चूत में डाल दी और उसे आगे-पीछे हरकत करने लगा और जीभ से उसकी चूत के त्रिकोण को चाटने और हिलाने लगा। मैंने थोड़ा सिर उठाकर देखा कंचन का मुँह थोड़ा खुला हुआ था और आँखें बंद थीं। मैं समझ गया कि अब कंचन थोड़ी देर में अपने हथियार डाल देगी। मैंने अपनी उँगली और जीभ की स्पीड बढ़ा दी।
तभी कंचन ने मेरे सिर के ऊपर अपने दोनों हाथ रख दिए और मेरे सिर को चूत के ऊपर ही जोर से दबा दिया। उसको मजा सहन नहीं हो रहा था। मैंने अपना सिर ऊपर उठाकर उसकी तरफ इशारा करते हुए पूछा कि क्या हुआ। इस पर उसने एक हल्की सी मुस्कान दे दी। मैं समझ गया था कि अब कंचन ने अपना समर्पण कर दिया है।
मैं फिर से चूत पर मुँह रखने लगा तो कंचन बोली—
कंचन: अनुज प्लीज ऊपर आ जाओ। अब बर्दाश्त नहीं हो रहा।
इस पर मैंने कहा—
मै: ओके कंचन।
और मैं उसके ऊपर आ गया। अब मैं कंचन के ऊपर था और कंचन ने अपना मुँह आगे बढ़ाकर खुद ही मेरे होठों से अपने होठ मिला दिए और मुझे बुरी तरह से चूसने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे काफी दिनों की प्यासी हो।
कंचन ने मेरी पीठ को अपने दोनों हाथों से बुरी तरह से जकड़ रखा था जैसे कि मैं कहीं भाग न जाऊँ। मैं उसके ३६” बूब्स का दीवाना था और मैंने उसके होठों से अपना मुँह हटाकर उसके बूब्स पर रख दिया और अपने गाल उनसे रगड़ने लगा। मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था। अब मैं उसके एक बूब को धीरे-धीरे दाँतों से काटने लगा और साथ ही साथ उसके एक बूब को हाथों से बुरी तरह से निचोड़ने लगा। कंचन अब अपने मुँह से आाह-आाह की आवाज निकाल रही थी जिससे मुझे और जोश आ रहा था।
कंचन: अनुज तुम बहुत चालाक हो।
मै: क्यों?
कंचन: तुमने हमारा सब कुछ देख लिया और अपना कुछ भी नहीं दिखाया।
मै: देख लो जान। आज तो तुम मेरी बीवी हो और ये तुम्हारा ही माल है। कुछ भी करो।
कंचन बैठ गई।
उसने अपने दोनों हाथों से मेरी बनियान उतार दी और मेरे अंडरवियर को भी उतार दिया। मेरे लंड को देखकर हाथ में लेते हुए बोली—
कंचन: अनुज क्या बात है। तुम्हारा लंड तो काफी लंबा है और सतीश के लंड से रंग भी साफ है?
मै: जान तुम्हारी चूत भी तो शिप्रा की चूत से गोरी है और बूब्स भी उससे बड़े और मस्त हैं।
ये सुनकर वो खुश हो गई और अपने होठों से मेरे लंड के सुपाड़े को चूमने लगी और बोली—
कंचन: वूऊऊऊह क्या नमकीन माल है।
और पूरे लंड को मुँह में लेने का प्रयास करने लगी और बोली—
कंचन: ये तो पूरा नहीं जा रहा। सतीश का तो पूरा ले लेती हूँ।
मै: ये मुँह में पूरा नहीं जाएगा। ये तो तुम्हारी चूत में ही पूरा जाएगा मेरी जान।
ये कहकर मैंने उसको नीचे लिटा दिया और उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए। ये आसन मैंने इसलिए किया ताकि उसे मेरे लंड की लंबाई का पता तो चले और मेरे और सतीश के सेक्स का अंतर याद रहे। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रख दिया और उसके दोनों कंधों को जकड़कर पकड़ लिया। मैंने धीरे-धीरे से लंड को आधा ही अंदर किया और आगे-पीछे करने लगा और १५-२० झटकों के बाद एक जोर का झटका दिया और साथ ही साथ उसके दोनों कंधों को अपनी ओर खींचा जिससे मेरा पूरा लंड अंदर चला गया। कंचन के शरीर में कंपन सा हो गया और वो आआआह्ह… स्स्स्स्… आआआह्ह की आवाज निकालने लगी जैसे किसी ने उसको तीखी मिर्चा खिला दी हो।
कंचन: अनुज प्लीज थोड़ा पीछे करो।
मैंने लंड को थोड़ा सा पीछे किया तब उसने एक लंबी साँस ली। मैंने ५-७ झटके धीरे-धीरे से मारे और फिर दोबारा से एक जोर का झटका देकर लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा दिया।
कंचन: अनुज आज मार ही डालोगे क्या?
तो मैंने कहा—
मै: कंचन तुमको नहीं मारेंगे लेकिन तुम्हारी चूत को तो आज जान से मार ही डालेंगे। पता नहीं ऐसी चूत फिर मिलेगी कि नहीं।
कंचन: फिक्र मत करो। अभी तो कई दिन रहोगे। आज मार डालोगे तो बाद में किसको मारोगे।
बातों ही बातों में वो दर्द को भूल गई और मैं उसको लंबे-लंबे शॉट मारने लगा। कंचन अब मुँह से उऊन्ह्ह… उऊन्ह्ह्ह्ह की आवाज निकाल रही थी। मैंने उससे जान-बूझकर पूछा—
मै: क्या हुआ जान?
कंचन: बहुत मजा आ रहा है। ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया। और जोर-जोर से करो। आज मुझे अपना बना लो अनुज।
मै: थोड़ी देर पहले तो तुम बोल रही थी कि— ये क्या बदतमीजी है। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे पास आने की, मुझे छूने की और अब कह रही हो मुझे अपना बना लो।
कंचन: मुझे नहीं पता था कि ये तुम सतीश और शिप्रा की सहमति से कर रहे हो वरना हमारा भी तो दिल है। मुझे अगर सतीश की सहमति मिल जाए तो ऐसी अदला-बदली के लिए हमेशा तैयार हूँ और मैं तो समझती हूँ कि इसमें कुछ बुरा भी नहीं है यदि दोनों ही जोड़े समझदार हों और एक-दूसरे पर विश्वास रखें।
मै: हाँ कंचन। जिंदगी का कुछ पता नहीं इसलिए जितना समय मिलता है मजा करो।
कंचन: सतीश तुम ठीक कह रहे हो।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। कंचन भी नीचे से अपने चुत्तर उठा-उठाकर मजा ले रही थी। थोड़ी देर बाद कंचन ने मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया। शायद वो झड़ रही थी और कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया और उसके ऊपर ही पड़ा रहा। इसके बाद वो बोली—
कंचन: चलो शिप्रा और सतीश को चोरी से देखते हैं।
मैंने कहा—
मै: ठीक है।
और उसी हालत में खिड़की के पास जाकर बारी-बारी से उनको सेक्स करते देखते रहे। हमें उनको सेक्स करते देखकर बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि सतीश और शिप्रा की जोड़ी भी एक-दूसरे के साथ खुलकर मजा ले रहे थे। जब वो सेक्स करके शांत हो गए तो हम फिर से लग गए। मैंने पूरी रात में उसके साथ तीन बार अलग-अलग तरीकों से चुदाई की और सुबह चार बजे के करीब हम सभी लोग सो गए।
सुबह मुझे करीब आठ बजे कंचन चाय देने आई तो मैंने चाय किनारे रखकर फिर से अपनी तरफ खींचने लगा तो वो बोली—
कंचन: रात भर से पेट नहीं भरा क्या?
मै: तुमसे तो मेरा पेट कभी नहीं भरेगा।
और अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली—
कंचन: जाने दो मुझे। उन दोनों को भी जगाना है और चाय देनी है।
तो मैं बोला—
मै: एक किस तो देती जाओ।
और मेरे पास आकर मेरे होठों से होठ मिला दिए और एक प्यारी सी किस दी। मैं उसको बोला—
मै: चलो मैं भी उनके पास चलता हूँ।
और वो किचन से चाय लाई और हम दोनों उनके रूम में घुस गए। दोनों चादर को गले तक ढककर सो रहे थे।
कंचन ने आवाज लगाई—
कंचन: सतीश, शिप्रा उठ जाओ। चाय तैयार है।
शिप्रा सुनते ही बिस्तर पर बैठ गई और उसकी चादर उसकी जाँघों पर आ गई। शिप्रा नंगी ही सो रही थी। उसकी चुचियाँ दिख गईं। वो मुझे देखने लगी और समझ नहीं पाई कि क्या करे। वो मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी। कुछ झेंप सी रही थी। मैं उसके पास गया और उसे बोला—
मै: गुड मॉर्निंग जान। कैसी रही रात?
उसने कुछ नहीं कहा। मैंने देखा कि उसके बूब्स पर दाँतों के काटने के निशान हैं और बूब्स काफी लाल हो रहे हैं तो मैंने उन्हें सहलाते हुए कहा—
मै: लगता है काफी परेशान किया है सतीश ने। साली।
इतने में कंचन बोल पड़ी—
कंचन: तुमने क्या मुझे कम परेशान किया है। जाओ यहाँ से। बेचारी को चाय पीने दो, और ज्यादा उसको परेशान मत करो।
मैं उसके पास ही बैठ गया और कंचन सतीश को आवाज लगाते हुए—
कंचन: चाय पी लेना रख दी है।
किचन में चली गई। लेकिन सतीश सोता रहा। शिप्रा चाय पीने लगी और कुछ नहीं बोली। मैंने उसकी चूत से भी चादर हटा दी और उसकी चूत को सहलाने लगा। वो चाय पीती रही और मैं उसके बगल में थोड़ा नीचे खिसककर उसके बूब्स में मुँह लगाकर उन्हें बारी-बारी से चूसता रहा। उसने चाय पी ली तो मैंने उसको वहीं लिटा दिया।
मेरा मूड बन गया था। मैंने जल्दी से अपना पैंट खोला और लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो अब बोली—
शिप्रा: रात भर में डीडी से पेट नहीं भरा क्या?
मै: नहीं भरा। तभी तो तुम्हारी ले रहा हूँ।
और उसकी चूत में पच-पच की आवाज आने लगी क्योंकि चूत रात भर की चुदाई से काफी गीली थी। हमारे झटकों की वजह से सतीश जाग गया और उठकर बैठते ही बोला—
सतीश: अनुज क्या बात है। सुबह-सुबह हमारी बीवी को हमसे बिना पूछे………..?
मैंने कुछ नहीं कहा और लगा रहा। सतीश बोला—
सतीश: क्या मैं भी आ जाऊँ?
मै: आ जाओ।
सतीश हमारे करीब आ गया तो मैं खड़ा हो गया और उसे कहा—
मै: लो अब तुम लो।
सतीश: यार मुझे बहुत अच्छा लगेगा अगर तुम खुद मेरा लंड शिप्रा की चूत में लगा दो। और तुम बुरा न मानो तो।
मैंने कहा—
मै: ठीक है।
और उसका लंड पकड़कर उसकी चूत पर रख दिया। सतीश ने लंड को अंदर घुसा दिया। सतीश ने शिप्रा को घोड़ी बनाने के लिए कहा और उसको घोड़ी बनाकर चोदने लगा। मैं आगे आकर उसके मुँह में अपना लंड दे दिया। अब शिप्रा मुँह से मुझे और चूत से सतीश को मजा दे रही थी। थोड़ी देर तक यही चलता रहा। सतीश ने हम दोनों को उठने का इशारा किया और मुझको कहा कि तुम बेड के किनारे पर जाओ और आधा नीचे पैर लटका लो। मैंने वैसा ही किया।
सतीश शिप्रा को अपनी गाँड को मेरे लंड पर रखकर मेरे ऊपर लेटने के लिए बोला। शिप्रा ने वैसा ही किया। मैं समझ गया कि वो अब आगे से लग जाएगा और उसने वैसा ही किया। अब सतीश आगे से और मैं पीछे से शिप्रा को चोद रहे थे। शिप्रा तरह-तरह की आवाजें निकाल रही थी आआआह्ह्ह्ह…… उऊऊऊन्ह्ह्ह…… स्स्स्स्स्स्स्…… उसको भरपूर मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद हम तीनों ही झड़ गए और बिस्तर पर लेट गए। लंच के बाद फिर हम दोनों ने ठीक ऐसे ही कंचन को चोदा। पाँच दिनों में हमने काफी एन्जॉय किया।
जयपुर भी घूमे। वापस आते वक्त हम सभी एक-दूसरे के गले मिले जो कि आते वक्त नहीं मिले थे। मैं और शिप्रा दोनों ही इस विजिट से काफी खुश थे। दोस्तो ये मेरा पहला अनुभव था। आपको कैसा लगा जरूर लिखिएगा।

mst chudai ki bhai tum logo ne jija sali ka mst program
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कोई आंटी,, बॉटम ब्वॉय हो तो msg करे,, पूरा मजा दूंगा
It’s a “fake story”z
दिल्ली में किसी लड़की को मजा करना या चुद वाना है तो msg me on telegram @rjshub70