भाभी की चुदाई की इच्छा 1

Bhabhi ki chudai ki iccha hindi kahani:- मेरा नाम मै: है। मैं 24 साल का हूँ। अपनी लाइफ के कुछ डार्क डिजायर्स और कुछ रोमांचक किस्से हैं जो मैंने आप सबके साथ शेयर करने का सोचा है। अपनी लाइफ की रियल स्टोरी, रियल कैरेक्टर्स के साथ बता रहा हूँ। उम्मीद है आपको पसंद आएगी और आपका पानी निकल जाएगा। मुझे यकीन है।

तो स्टार्ट करते हैं। सॉरी इतना बोर किया तो। बस ये पहली बार है ताकि हर चीज को अच्छे से फील कर पाओ और इस सीरीज को कभी नहीं भूल पाओगे।

Bhabhi ki chudai ki iccha hindi kahani

तो मेरे बारे में जान ही चुके हो। मेरी बॉडी-पर्सनालिटी की बात करें तो मैं जिम करता हूँ, तो अच्छी मेंटेंड बॉडी है मेरी। हाइट में टॉल हूँ जो लड़कियों को अट्रैक्ट करती है। मेरा लंड 6.5 इंच का अच्छा लंबा और मोटा है, जिससे बहुत चूत का रस निकालकर संतुष्ट किया है।

मेरी फैमिली में पापा बिजनेस करते हैं, मम्मी हाउसवाइफ हैं, और एल्डर सिस्टर शालू दीदी हैं। डिटेल में किसी और पार्ट में बताऊँगा। मेरी रिच फैमिली है लेकिन टिपिकल ओल्ड माइंडसेट वाली है क्योंकि ओल्ड रूट्स राजस्थान से हैं। पर हमारे बर्थ से हम इंदौर में रहते हैं। बाकी आगे और बताते जाऊँगा।

तो बात 3 साल पहले की है जब राजस्थान सूरत में पापा के अच्छे दोस्त हॉस्पिटल में एडमिट थे। तो पापा और मैं उनसे मिलने गए थे काफी सालों बाद। उनकी फैमिली कंडीशंस थोड़ी ठीक नहीं थीं। जब पापा ने देखा तो मेडिकल बिल्स पापा ने दिए।

फिर हम दोनों ICU में अंकल से मिले और उनकी फैमिली से। फिर 2 दिनों बाद अंकल की डेथ हो जाती है। उनकी सभी तरह से 12-15 दिन हेल्प करने के बाद हम आ गए।

ऐसे ही 1 साल बीत गया था। फिर आंटी का फोन आया कि उनके लड़के पवन का ट्रांसफर इंदौर में ही हो गया था। तो यहाँ उनकी रेंट से घर ढूँढने में हेल्प करनी थी।

फिर मेरे मम्मी-पापा ने डिसाइड किया कि कहीं और बहुत महंगा पड़ेगा उनको। इसलिए हमारे ही नीचे का पोर्शन खाली है, तो वो रहने के लिए दे देंगे। ये जानकर वो बहुत खुश हुए। फिर उनकी फैमिली 1 महीने बाद इंदौर आ गई।

उनकी फैमिली में—

  1. शिल्पा आंटी: जो पार्लर करती हैं। जिनका फिगर कड़क बूब्स, कर्वी कमर और उनकी गाँड उफ्फ बवाल।
  2. पवन: उनका बड़ा बेटा, 27 साल का। जॉब करता है, बहुत सीधा-सिंपल। अभी न्यूली मैरिड।
  3. आयुषी: बड़ी बेटी, 25 साल की, जिसकी शादी हो चुकी है।
  4. मुस्कान: छोटी बेटी, 22 साल की, जिसे अभी कॉलेज में एडमिशन दिलवाया है।
  5. रचना भाभी: पवन की वाइफ। अभी नई शादी हुई है। 24 साल की है जो कि मिडिल क्लास फैमिली से है। बहुत शर्मीली है।

जब ये सब यहाँ आए तो नीचे से पूरा घर रेडी था, 2 बेडरूम, किचन, हॉल, लेट-बाथ।

एक दिन मम्मी ने कहा कि भिंडी बनाई है, रचना को पसंद है तो नीचे दे आ। मैं फिर नीचे गया तो घर पर कोई नहीं था। लेकिन पीछे बेडरूम में रचना भाभी की आवाज आ रही थी। मैं समझ गया था कि चुदाई चल रही थी। मैं जाने लगा सब्जी रखकर। पर मुझे कुछ होने लगा और मेरा लंड खड़ा होने लगा।

फिर मैं बेडरूम के पास गया और वहाँ एक विंडो से मैंने अंदर देखा तो मैं शॉक रह गया। रचना भाभी एकदम नंगी लेटी हुई थीं और पवन भैया चोद रहे थे। भाभी हिल रही थीं। लेकिन भाभी के फेस पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था। और मैं देखता हूँ कि तभी भैया ने भाभी की चूत से सिर्फ 4-5 मिनट में लंड बाहर निकाल लिया। और उनका लंड बहुत ही छोटा था जैसे बच्चे का।

तभी भाभी बोलीं—

रचना भाभी: क्या हुआ? निकाल क्यों दिया?

पवन भैया: मेरा हो गया। तुम्हारा नहीं हुआ क्या?

रचना भाभी: नहीं… मतलब हम्म ठीक है, हो गया। चलो हटो। नहाना है और बहुत काम है।

पवन भैया: हाँ बहुत थक गया हूँ। मुझे रेडी होकर ऑफिस निकलना है।

फिर भैया नहाने गए और भाभी वहीं रजाई में लेटी रहीं अधूरी। फिर वो खुद के 34 साइज के सेक्सी बूब्स पर हाथ फेरती हुई चूत रब करती रहीं। ये देख मेरा लंड गीला हो गया था। मेरा भाभी के लिए नजरिया बदल गया।

फिर वो अपना काम करने लगे और मैं ऊपर आ गया। फिर मुझे वही ख्याल आँखों के सामने आ रहे थे कि इतनी शर्मीली देसी भाभी और इतना कामुक बदन। यही सोचता हुआ मैं सो गया। मेरा रूम सबसे ऊपर टेरेस पर है, तो मैं अंडरवियर में सोता हूँ।

फिर अगले दिन मैं उठा तो मेरा लंड खड़ा था। मैं रूम के बाहर छत पर निकला तो देखा कि सामने गीले बालों में गोरी चमकने वाले चेहरे और कमर पर साड़ी बाँधे रचना भाभी खड़ी कपड़े निचोड़कर सुखा रही थीं। उफ्फ ये देखकर तो मेरा लंड लोहे जैसे हो गया।

तभी भाभी पीछे घूमीं और मुझ पर नजर पड़ी उनकी। तभी उन्होंने नजरें चुरा लीं और कपड़े सुखाने लगीं क्योंकि वो बहुत शाय हैं। फिर मैंने उन्हें कहा—

मै:: हेलो भाभी, गुड मॉर्निंग।

भाभी ने मेरी साइड देखा और उनकी नजर मेरे खड़े लंड पर पड़ी। वो एक पल के लिए देखती रह गईं। फिर नजरें चुराकर फिर काम करने लगीं और कोई जवाब नहीं दिया।

फिर वो बाल्टी से झुककर कपड़े उठाईं। तब उनके बूब्स देख मेरी हालत खराब हो रही थी। वो भी चोरी-चोरी 1-2 बार मेरे अंडरवियर में बने तंबू को ही देखतीं। फिर वो जल्दी नीचे चली गईं।

फिर रात को 12 बजे नीचे गया तो रचना भाभी के बेडरूम के बाहर देखा। भैया रचना भाभी के ब्लाउज से एक चुची बाहर निकालके चूस रहे थे। और भाभी “आआह उफ्फ हाँ” आहें ले रही थीं।

फिर भाभी ने साड़ी ऊपर उठाके बोलीं—

रचना भाभी: अब डालिए।

भैया ने चूत पर लंड रगड़ा जो पूरी रसीली पानी-पानी हो रही थी। मेरा मन कर रहा था कि अंदर जाकर चूत में मुँह लगाके चूस लूँ।

तभी भैया ने लंड डाला, भाभी को जरा भी नहीं लगा कि अंदर गया।

रचना भाभी: डालिए ना जल्दी। उफ्फ पूरा घुसा दो, रहा नहीं जाता।

पवन भैया: रचना चूत में ही तो है तुम्हारी।

और झटके मारने लगे।

पवन भैया: आआह… आआह्ह्ह… हम्म… आआह्ह्ह रचनाआआ… आईईई… ओह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह…

भाभी चूत की आग में तड़पती हुई खुद के बूब्स मसलती हुई, गाँड उठाकर लंड और अंदर लेने की कोशिश करती हुई, तरसती हुई सिसकियाँ लेती रहीं—

रचना भाभी: आआह्ह्ह… स्स्सीईई… उफ्फ… उम्मम… करिए जोर से… आआह्ह्ह…

और तभी भैया का लंड झड़ जाता है और वो रुक जाते हैं और साइड में लेट जाते हैं। भाभी साइड में जाँघें खोले लेटी थीं। उनकी चूत दिख रही थी जिसमें गरम तरंगें दिख रही थीं और रसीली चूत में भाभी लंड चाह रही थीं।

मैं ये सब देख खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं अपना लंड मसल रहा था। भैया तो वाशरूम में चले जाते हैं। भाभी टाँगों के बीच गरम गीली चूत मुँह खोले रगड़ते हुए मचल रही थीं। कि तभी उनकी नजर खिड़की पर पड़ती है और उन्होंने मुझे देख लिया। मैं बहुत डर गया। भाभी अपने पेटीकोट और साड़ी नीचे कर उठ बैठीं।

मैंने तभी जल्दी से लंड शॉर्ट्स में डाला और ऊपर निकल गया। रात भर रचना भाभी का वो चूदने की आग में तड़पता चेहरा ही मेरे दिमाग में चलता रहा। उनकी कड़क गोरी दूध जैसी चुची जिसपे निप्पल, उफ्फ मन करता है चूस लूँ! और सबसे प्यारी उनकी टाइट चूत, एकदम गोरी। उस पर हल्के से भूरे बाल और वो लंबी चूत की लाइन। उसमें गुलाबी छेद। उफ्फ क्या किस्मत वाले हैं पवन भैया! उस पूरी रात मेरी हालत खराब हो गई।

अगले दिन सुबह नींद खुली और रूम के बाहर पायल की आवाज आई। मैं समझ गया था कि ये रचना भाभी ही थीं। मैं उठकर बाहर गया तो वो कपड़े सुखा रही थीं। उन्हें पीछे से देख रहा था और कल रात का ख्याल आँखों के सामने दिख रहा था।

वो लंड की भूखी रचना भाभी और एक ये सीधी शाय भाभी! मेरे अंडरवियर में लंड फूल गया। तभी भाभी पीछे घूमीं और मैंने नजरें चुरा लीं। पर वो मुझे ही देख रही थीं। क्योंकि कल रात मैं उनको चोरी से किस हालत में छुपकर देख रहा था।

फिर से वो कपड़े सुखाने लगीं और वो जींस निचोड़ नहीं पा रही थीं तो मैंने कहा—

मै:: हेलो, गुड मॉर्निंग रचना भाभी।

रचना भाभी: गुड मॉर्निंग।

पहली बार रिप्लाई आया और उन्होंने मुझसे कुछ कहा।

मै:: जींस मोटी है, आपसे नहीं होगा। मैं हेल्प कर देता हूँ।

भाभी कुछ नहीं बोलीं। मैं समझ गया और उनके पास गया। हाथ से जींस लेने के लिए उनके हाथ को टच किया। वो एकदम चुपचाप खड़ी हो गईं। फिर मैंने उनके साथ जींस सुखवाई।

फिर से वो नीचे झुकीं और उनका डीप ब्लाउज में से उनके बूब्स का उभार दिखा, और फिर वो पेटीकोट उठाके निचोड़ने लगीं। तो मैंने भी बाल्टी में से एक कपड़ा लिया और मेरे हाथ में उनकी ब्रा आई। उफ्फ, ब्लैक ब्रा! मैंने ली और उसे दोनों बूब्स की जगह से पकड़कर दबाया जोर से, आआह्ह्ह! मेरा लंड बहुत बड़ा हो गया। लगा अंडरवियर फाड़कर बाहर आ जाएगा।

ये सब देखकर रचना भाभी मूर्ति जैसे जम गईं और कुछ नहीं कह पाईं। उनकी नजर मेरे लंड की लंबाई पर थी। फिर मैंने बाल्टी से लास्ट कपड़ा निकाला, वो उनकी पैंटी थी, एकदम नेट वाली। उसे लेकर मसला और सुखा दिया।

फिर जाने के लिए अपनी बाल्टी उठाने लगीं। तो तभी उनके मुँह के सामने मेरा लंड था। वो जल्दी से बाल्टी लेकर नीचे चली गईं।

फिर मैं नहाने चला गया। मैं नीचे आया तो देखा किचन में वो मेरी मम्मी के पास थीं। मैं किचन में गया तो वो एकदम मुझे देखने लगीं। तो मैंने कहा—

मै:: मम्मी, ये रचना भाभी यहाँ क्या कर रही हैं?

मम्मी: क्यों? तुझे कोई दिक्कत है? इसके यहाँ दिन में कोई रहता नहीं। बोर होती है तो मेरे पास आ गई मेरी हेल्प करने।

मै:: नहीं, मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था। क्या बना रहे हो, बहुत भूख लगी है।

मम्मी: आलू के परांठे बन रहे हैं, गरम-गरम खा ले।

मै:: ठीक है, मैं ऊपर अपने रूम में हूँ, वहीं भेज देना।

मम्मी: अरे रुक जा ना, ऊपर कौन आएगा देने… चला ही गया। रचना बेटा, तू खिला आना।

रचना भाभी: हाँ कोई नहीं, मैं चली जाऊँगी।

फिर भाभी थाली लेकर ऊपर आने ही वाली थीं, कि मैंने रूम का गेट पूरा लॉक नहीं किया और रचना भाभी की बाहर से पैंटी लेकर अंदर वाशरूम में चला गया। गेट खुला ही रखा और शावर के नीचे नहाने लगा। मैं पैंटी सूंघने लगा और लंड हिला रहा था। मैं मिरर में पीछे देख रहा था।

तभी पीछे से रचना भाभी आईं रूम में और शावर की आवाज सुन लीं। फिर भी वो और आगे आईं और चोरी से देखने लगीं। उनकी नजर मेरे नंगे लंड पर ही थी। आँखें बड़ी-बड़ी होकर देख रही थीं। मैं फिर उस पैंटी को चूत के हिस्से से चाटने लगा और लंड सहलाते रहा।

उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने अपना हाथ चूत पर रखकर साड़ी के ऊपर से ही रब करना शुरू कर दिया। अच्छे से नहीं होने से वो साड़ी उठाकर चूत रगड़ने लगीं। मुझसे रहा नहीं गया और सारा माल पैंटी में निकाल दिया। बाहर आने से पहले ही वो बाहर चली गईं।

फिर 2 मिनट रुककर वो आईं जब मैं टॉवल में था। फिर थाली रखकर जाने लगीं, तो मैंने कहा—

मै:: भाभी, परांठा तो ठंडा है।

भाभी सकपका गईं—

रचना भाभी: हाँ… वो रास्ते में हो गया होगा। दूसरा लाती हूँ।

मै:: नहीं रहने दो, पहले ये खा लेता हूँ फिर ले आना। वरना ये भी ठंडा हो जाएगा। तब तक बैठ जाओ आप।

रचना भाभी: ठीक है।

फिर वो मुझे मेरे टॉवल में मेरे लंड को घूरे जा रही थीं।

मै:: आप ऐसे चुप-चुप क्यों रहती हो? मुझसे कोई नाराजगी है क्या?

रचना भाभी: नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।

मै:: तो फिर कभी बात ही नहीं करते। मतलब मैं आपको पसंद नहीं हूँ या अच्छा नहीं लगता?

रचना भाभी: अरे ऐसा बिल्कुल नहीं है… पसंद हो, मतलब कुछ भी नहीं है।

मै:: मतलब क्या कहना चाहती हो? हूँ या नहीं हूँ?

रचना भाभी: पसंद हो… ऐसा कुछ नहीं है।

मै:: अच्छा सच में? झूठ तो नहीं बोल रही? या भैया ने बात करने से मना किया है, उनसे पूछूँ?

रचना भाभी: अरे नहीं! उनसे कुछ मत कहना, किसी ने मना नहीं किया।

मै:: अच्छा तो फिर, गर्लफ्रेंड?

रचना भाभी: क्या? मतलब?

मै:: लड़की फ्रेंड को गर्लफ्रेंड। बोलो, बनोगी मेरी गर्लफ्रेंड?

रचना भाभी: हम्म, ओके।

मै:: तो इसी बात पर परांठा खाओ।

मैंने उनके आगे हाथ किया, तभी उन्होंने खाया।

मै:: अब मुझे खिलाओ।

वो मुझे खिलाती हैं, मैं साथ में उनकी उंगलियों को भी मुँह में लेकर चूस लेता हूँ। भाभी की सिसकी निकल जाती है!

मै:: हमारी दोस्ती का पहला हग?

रचना भाभी: क्या? अरे नहीं…

मै:: मतलब तुमने मना किया है?

रचना भाभी: अरे नहीं, मतलब मुझे शर्म आती है और कोई आ जाएगा।

मै:: कोई नहीं आएगा, चलो।

फिर हम खड़े होते हैं। तभी मेरा टॉवल गिर जाता है और मैं उन्हें एकदम टाइट हग कर लेता हूँ। मेरा नंगा लंड साड़ी के ऊपर से उनकी चूत पर घुसता है। सीने से सीना लगने पर भाभी के बूब्स दब जाते हैं, उफ्फ! भाभी की सिसकी निकल रही थी—

रचना भाभी: स्स्सीईई… आआह्ह्ह्ह…

और भाभी ने भी मुझे टाइट पकड़ लिया।

मैंने भी लंड चूत पर दबाए रखा। उन्होंने भी हग छोड़ा नहीं, कसे रखा। फिर मेरा मुँह नेक के पास था, तो मैंने हल्का सा स्मूच कर लिया, उम्म्ह्ह!

भाभी की “आआआह्ह्ह्ह्ह” निकली और सीना रगड़ने लग गईं, और छोड़ा अभी भी नहीं।

तभी मेरी मम्मी की आवाज आई और हम अलग हुए। जैसे ही हम अलग हुए, भाभी की नजर मेरे लंड पर पड़ी और उनका मुँह खुल गया और चेहरा लाल हो गया। इतने पास से इतना बड़ा मोटा लंड देखके वो गरम हो गईं और मूर्ति जैसी जम गईं।

बाकी की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में। आप अपना फीडबैक कमेंट्स में और मेल पर जरूर दें। और जो भी चैट करना चाहती हो मेरे लंड से फुल सेफ्टी से, आप कमेंट कर सकते हो।

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