जवान बेटी ने दिया बीवी का प्यार 2

Jawan beti wife bankar chud gyi:- आज आपके सामने मेरी पहली स्टोरी “जवान बेटी ने दिया बीवी का प्यार” का पार्ट 2 बताने जा रहा हूँ। स्टोरी पढ़ने के बाद कृपया कमेंट्स जरूर करें। अब ज्यादा समय न लेते हुए स्टोरी पर आता हूँ। और हाँ, कृपया पहले वाला पार्ट पढ़ना न भूलें।

Part 1 ==>जवान बेटी ने दिया बीवी का प्यार 1

Jawan beti wife bankar chud gyi hindi sex story

जैसा कि मैंने पिछले पार्ट में आपको बताया था कि कैसे मेरी बेटी शालू दिन-प्रतिदिन एक सेक्स की बाँध बनती जा रही थी जिसकी लहर में कोई भी बह सकता था। और ये बात उसको भी मालूम थी। पर जहाँ तक उसे मैं कई दिनों से देख रहा हूँ, वो अपना जवानी का रस कहीं बाहर नहीं बल्कि मुझे ही पिलाना चाहती थी।

और मैं भी यही चाहता था कि कब उसका बदन मेरे बदन से चिपके और दोनों बदनों में जल रही ज्वालामुखी कब शांत हो। पर आपको पता ही है हम दोनों सिर्फ उस शानदार मौके की तलाश में थे। उस रंगीली और खूबसूरत रात की तलाश में थे। उस हसीन पल की तलाश में थे जब हम दो जिस्म उस नशे में डूब जाएँ जहाँ से हम चाहकर भी बाहर न निकल पाएँ।

ऐसे पल के बारे में सोचने मात्र से ही मेरा पूरा लंड खंभे की तरह खड़ा हो गया था जो पायजामा फाड़ने को हो रहा था। तो सोचिए जब ये हकीकत में होगा तो क्या हाल होगा।

ये सब सोचता-सोचता मैं शालू के मामा को बस स्टैंड छोड़कर सीधा शॉप पर चला गया। जैसा कि आज संडे था तो संडे को अक्सर मैं दोपहर को घर चला जाता था और शाम को ही कुछ समय के लिए शॉप पर आता। चूँकि मैं घर से नहाकर और बिना नाश्ता किए आया था तो मैं दोपहर होने से पहले ही घर जाने लगा।

निकलने से पहले याद आया कि शालू के नए सूट्स भी लेकर जाने हैं आज। क्योंकि उसके पुराने सूट भीड़ हो चुके थे। मैंने शॉप से 8-10 सूट्स उठा लिए और घर की तरफ निकल गया। रास्ते में याद आया कि शालू के अंडरगारमेंट्स भी नए खरीदने हैं। तो सोच लिया कि उसको मैं पैसे दे दूँगा इनके लिए। पर एक आइडिया और आया दिमाग में कि क्यों न इस बहाने थोड़ा रिस्क लिया जाए। क्योंकि आज संडे है और शालू आज पूरा दिन घर पर है और मुझे शॉप पर भी नहीं जाना। तो मैंने रास्ते में से शालू के साइज के अंडरगारमेंट्स ले लिए और 2 साइज के लिए क्योंकि मुझे एग्जैक्ट साइज नहीं मालूम था शालू का।

दोस्तों, जैसे ही घर पहुँचा तो शालू को आवाज लगाई पर उसका कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद घर के अंदर ढूँढने के बाद देखा कि शालू घर के पीछे स्टोर में है।

बस फिर क्या था। मैंने जल्दी से सामान रूम में रखा और स्टोर की तरफ चल पड़ा। स्टोर में शालू को देखते ही मेरा लंड पायजामे से बाहर आने के लिए बेताब होने लगा। क्योंकि उसने उसकी मम्मी का सूट पहना हुआ था ब्लू कलर का जो बहुत खुला था और पीछे से ऊपर उठा रखा था जिसकी वजह से उसकी व्हाइट पैंटी साफ दिखाई दे रही थी। उस समय उसको थोड़ा पसीना आया था पूरे शरीर पर और फेस पर थोड़ी टेंशन भी थी। लग रहा था वो कुछ ढूँढ रही है स्टोर में।

मैं इस मौके को खाली नहीं छोड़ना चाहता था। और मैंने शालू से पूछा—

मैं: क्या हुआ शालू?

शालू: पापा मैं मेरे स्पोर्ट्स शूज ढूँढ रही हूँ। मुझे कल से रेसलिंग की प्रैक्टिस पर जाना है। मैं दोबारा रेसलिंग स्टार्ट करना चाहती हूँ। और ऊपर से मेरा शरीर भी कुछ ज्यादा मोटा होता जा रहा है।

उसकी ये बात सुनकर मेरी तो हवस जैसे और बढ़ गई हो। और मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था जो शायद वो भी देख रही थी।

मैं: चलो दोनों देखते हैं।

मैंने बोला कि शालू तुम टंकी के नीचे देखो ध्यान से। (हम व्हीट वाली टंकी को स्टैंड के ऊपर रखते हैं जिसके कारण उसके नीचे स्पेस रह जाता है और वहाँ हम कई बार कुछ सामान भी रख देते थे।)

चूँकि स्टैंड बिल्कुल जमीन के पास था तो वो दोनों घुटने नीचे रखकर झुककर देखने लगी। जिससे उसके आधे से ज्यादा गोरे-गोरे बूब्स मुझे साफ दिख रहे थे। मैं भी उसके साथ नीचे झुककर देखने लगा। पर वो कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रही थी और मुझसे बचने की कोशिश कर रही थी।

तो मैंने जानबूझकर उसके ऊपर गिरने का नाटक किया। और जैसे ही मैं उसके ऊपर गिरा तो मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। मेरी हवस पूरी चरम सीमा पर थी। मुझे लगा शायद यही सही मौका है और शालू भी मुझे पूरा रिस्पॉन्स देगी। पर हुआ इसका उल्टा जो मैंने सोचा भी नहीं था।

शालू मेरी इस हरकत से चिढ़ गई और अपने आप को मुझसे छुड़ाकर अंदर कमरे में चली गई।

मैं पूरा चौंक गया उसका ऐसा रिस्पॉन्स देखकर। और मेरा लंड की लुल्ली बन गई थी और माथे पर पसीना ही पसीना आ गया था। मैं कुछ देर वहीं बैठा और सोचने लगा कि ये क्या हो गया। मैंने क्यों गलती कर दी।

मुझे लगा कि शायद शालू को मेरी उसके प्रति हवस नहीं पसंद आई। और मुझे भी अपने आप पर शर्म आई कि मैंने अपनी ही बेटी को हवस की नजरों से देखा। अब मैं उठा और अंदर जाकर चुपचाप शालू के कमरे में जो सामान लेकर आया था वो रखकर सीधा शॉप पर चला गया नहाकर।

शाम को जब घर आया तो शालू अपने कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रही थी। मुझे देखकर कुछ बोली नहीं। और मुझमें भी हिम्मत नहीं हुई बात करने की। मैं रसोई में गया तो देखा खाना बना हुआ था। मैंने जल्दी से खाना खाया और सोने के लिए चला गया।

कल से वही नॉर्मल शेड्यूल शुरू हो गया। शालू सुबह जल्दी उठकर रनिंग पर जाने लगी और फिर हमारा नाश्ता बनाकर कॉलेज। मैं भी नहा-धोकर खाना खाकर शॉप पर चला जाता।

फ्राइडे को हमें गाँव के लिए निकलना था और शालू के मामा की लड़की की शादी में जाना था। इसलिए शालू ज्यादातर शादी की तैयारी में बिजी रहती थी कॉलेज से आने के बाद। हम दोनों के बीच सिर्फ काम से रिलेटेड बात होती थी। शालू को अगर पैसे लेने होते तो वो मुझसे माँग लेती।

अब उसने अपने नए सूट्स भी सिलवा लिए थे। आखिर फ्राइडे आ ही गया देखते-देखते। हमारा गाँव शहर से करीब 50 किमी दूर पड़ता है और जाने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। हम बस से जाने वाले थे।

शादी में जाते वक्त शालू बड़ी खुश लग रही थी। हमें 4 बजे घर से निकलना था क्योंकि बस का समय 5 बजे का था। हम सारा सामान ले 4 बजे घर से निकल दिए। शालू ने ग्रीन कलर का नया सूट पहना था जो काफी पतला था और उसमें शालू की व्हाइट ब्रा और ब्लू पैंटी साफ दिख रही थी।

लेकिन कोई ऑटो वाला नहीं मिल रहा था आसपास। और ऑटो ढूँढने में हमें काफी समय लग गया। और हम सिर्फ 5 मिनट पहले ही बस स्टैंड पहुँचे। वहाँ देखा तो बस पूरी भरी हुई थी। (हमारे हरियाणा में गाँव वाली बसेस हमेशा भरी ही मिलती हैं क्योंकि गाँव और शहर के बस रूट्स कम होते हैं।)

खड़े होने के लिए बस में कुछ ही स्पेस खाली था। अगर अकेला होता तो बस के ऊपर चला जाता। पर शालू भी साथ में थी और ऊपर से उसका सुडौल शरीर जिसकी वजह से सबकी नजर शालू पर पड़ रही थी। गाँव के कुछ लड़कों ने हमें बस के अंदर जाने का रास्ता दिया। और जैसे ही हम सामान लेकर अंदर गए सब पीछे से बस में चढ़ गए और बस पूरी भर गई।

हम बस की सबसे पीछे वाली लंबी सीट के कॉर्नर पर खड़े थे खिड़की के पास। शालू को मैंने बस की खिड़की के पास खड़ा कर दिया और खुद उसके पीछे खड़ा हो गया।

शालू के आगे सिर्फ बस की खिड़की और उसके पीछे मैं खड़ा था। मेरे पीछे गाँव के लड़के खड़े थे जो जानबूझकर धक्के मार रहे थे एक-दूसरे को। मैं चुप था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि शादी में जाने से पहले किसी से कोई झगड़ा करूँ। और ऊपर से शालू को भी कोई प्रॉब्लम नहीं आ रही थी।

अब बस चल पड़ी थी। शहर से बाहर निकलने से पहले बस को कई चौंक पर भी रुकना था। पहले वाले चौंक से कुछ ही लोग खड़े हुए थे जो बस के ऊपर चढ़ गए। जब लास्ट वाला चौंक आया तो वहाँ पर बहुत सारे गाँव के लड़के खड़े हुए थे और उन्हें देखकर ड्राइवर ने वहाँ बस नहीं रोकी।

मगर हमारे हरियाणा के लड़के कुछ ज्यादा ही बदमाश होते हैं। चलती बस में चढ़ना उनके लिए आम बात होती है। वहाँ से भी 8-10 लड़के चलती बस में चढ़ गए। और आगे धक्के मारने लगे। जिनकी वजह से मैं शालू को बिल्कुल चिपका गया था पीछे से। हमारे बीच हवा तक क्रॉस होने की जगह नहीं थी।

पहले तो मुझे और शालू को थोड़ा अजीब लगा। पर जैसे बस आगे चली धीरे-धीरे मेरा लंड पायजामे से बाहर आने लगा था और मुझे फीलिंग्स आने लगी थीं।

शालू चुपचाप मेरे खड़े लंड को महसूस कर रही थी। रास्ता भी टूटा हुआ था और बार-बार धक्के और झटके लगने से मेरा लंड शालू की गाँड की दरार में आधा फँस गया था। जिसकी वजह से शालू थोड़ी सिसकियाँ भरने लगी थी।

वो शायद अब गरम हो चुकी थी। थोड़ी देर बाद उसने उसका राइट हैंड पीछे किया और मेरा राइट हैंड पकड़ लिया। अब मैं भी पूरा गरम हो गया था। और धीरे-धीरे अंधेरा भी बढ़ रहा था। शहर और शालू के मामा के गाँव के बीच 3 गाँव पड़ते थे।

सड़क टूटी होने की वजह से बस स्लो चल रही थी और अभी पहला गाँव ही आया था जहाँ थोड़े-बहुत लोग उतरे। पर उनसे ज्यादा और चढ़ गए। अब पीछे वाले लड़कों ने मुझे पूरा घेर लिया था और मेरे आगे सिर्फ शालू खड़ी थी।

आगे जाकर बस में एक जोर से झटका आया और सभी अचानक आगे जाने लगे। शालू और मैंने एक हाथ पकड़ रखा था तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए शालू के बूब्स को पकड़ लिया और उन्हें थोड़ा सहलाया और हाथ नीचे कर लिए। अब शालू को पूरे मजे आ रहे थे। वो मेरा पूरा साथ देने लगी और उसने अपनी गाँड और पीछे कर ली। और मैंने भी पीछे से उसका सूट थोड़ा उठा दिया अंधेरे में।

अब मेरा हौसला और बढ़ गया। मैंने शालू के आगे हाथ डालकर शालू का नाड़ा खोल दिया। और शालू ने सलवार पकड़ ली। और मैंने शालू की पैंटी थोड़ी नीचे खिसका दी। और शालू ने नाड़ा थोड़ा लूज करके बाँध दिया अब।

मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि बस में हमारी ऐसी हालत होगी। पर जो भी हो हम दोनों को पूरा मजा आ रहा था। पीछे से अब मेरा लंड शालू की गाँड में अंदर-बाहर होने लगा।

अब मैंने अपना एक हाथ आगे से शालू की सलवार में घुसा दिया और शालू की चूत के ऊपर ले गया। शालू की चूत पर बहुत बाल महसूस किए। मैं धीरे-धीरे एक उंगली उसकी चूत में घुसाने लगा। और वो सिसकियाँ भरने लगी लेकिन धीरे-धीरे ताकि किसी को सुनाई न दे। कसम से दोस्तों क्या मजा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद शालू की चूत का पानी निकल गया था और उसे अब राहत की साँस की थी। शायद उसे मेरे से भी ज्यादा मजा आया होगा। और अब मैंने भी अपना हाथ उसकी सलवार से बाहर निकाल लिया था क्योंकि अब गाँव आने वाला था।

शालू ने अपनी सलवार ठीक की और मैंने अपना पायजामा।

दोस्तों, आगे की बेस्ट बाप-बेटी हिंदी पॉर्न स्टोरी अगले पार्ट में।

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