नवरात्रि पर अंकल ने चोदी मेरी चूत 1
Navratri par uncle se chudai story:- नमस्कार फ्रेंड्स, मैं प्रियंका। सबसे पहले मेरी स्टोरी पढ़ने वाले सभी नए और पुराने रीडर्स को बहुत बड़ा थैंक यू। मुझे आप सबके इतने मेल्स पढ़कर बहुत खुशी हुई और मैं कोशिश करूँगी कि सबका रिप्लाई कर पाऊँ। आप सभी रीडर्स में से एक रीडर ने मुझे अपनी एक स्टोरी बताई है जो आज मैं आप सबके लिए पेश करने वाली हूँ। तो अब ज्यादा टाइम नहीं लगाते हुए स्टोरी स्टार्ट करती हूँ।
Navratri par uncle se chudai story
मेरा नाम दिव्या है। मैं गुजरात की रहने वाली हूँ और मेरी उम्र 20 साल है। यह कहानी मेरे और मेरे एक अंकल के बीच की है जो बिल्कुल सच है। अंकल का नाम महेश है और वो मेरे पापा के बहुत ही अच्छे फ्रेंड हैं कुछ सालों से।
मेरे बचपन से ही जब भी अंकल घर आते तो मुझे अपनी गोद में बिठाते या मेरे लिए कोई गिफ्ट लेकर आते और मुझे किस करते और छूते थे। पर उम्र छोटी होने की वजह से मेरे में तब उतनी अक्ल नहीं थी। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई वैसे मुझे उनकी हर हरकतें समझ में आने लगीं।
अब वो हर दिन हमारे घर आने लगे थे क्योंकि वो पापा की ऑफिस में ही काम करते थे और वो यहाँ गुजरात में एक किराये में रहते थे तो मम्मी उनका खाना हमारे घर ही बनाती थीं। अब तो उनका रोज का मुझे छूना, मेरे चुचियों पर दबा देना या कभी गांड पे मार देना यह चल ही रहा था।
ऐसे सब चलते ही नवरात्रि का त्योहार आ गया और आप सब तो जानते ही होंगे कि यहाँ की नवरात्रि कितनी मशहूर होती है। हर जगह रौनक रहती है।
पर हर साल नवरात्रि में मेरी पूरी फैमिली हम गाँव में जाते हैं पूजा करने 10 दिनों के लिए। इसलिए यह साल भी ऐसे ही था पर तभी मेरी कॉलेज से मुझे एक इंपॉर्टेंट असाइनमेंट मिला था जिस वजह से मैं नहीं जा सकती थी।
रात को खाने पर जब मैंने यह मम्मी और पापा को बताया तो वो सोचने लगे कि वे लोग भी इस साल गाँव नहीं जाकर यहाँ ही रहेंगे। पर पापा की यह बात सुनकर मम्मी और अंकल दोनों उदास हो गए। अंकल क्यों उदास हुए यह तो आप सोच ही सकते हैं।
पर मम्मी का उदास चेहरा देखकर मैंने पापा से कह दिया कि वो यह प्लान कैंसल न करें और मैं 10 दिन या किसी फ्रेंड को घर बुला लूँगी या मैं किसी के घर चली जाऊँगी।
मेरी यह बात सुनकर अंकल बोल पड़े—
महेश: और मैं भी हूँ ना यहाँ। मैं भी दिव्या का ध्यान रख लूँगा अच्छे से। कभी-कभी मैं यहाँ रात में रुक जाऊँगा।
और यह कहते हुए उनके चेहरे की मुस्कान कुछ और ही कह रही थी जो सिर्फ मैं समझ पा रही थी।
अंकल की बात सुनकर पापा और मम्मी दोनों ने कहा—
पापा: महेश आप यहाँ हो तो फिर हमें कोई बात की टेंशन नहीं। हम जानते हैं आप दिव्या का बहुत अच्छे से ध्यान रखोगे।
दूसरे ही दिन मम्मी-पापा दोपहर की ट्रेन से गाँव के लिए निकल गए और अंकल और मैं घर आ गए। घर आते समय मैं अंकल की बाइक पे पीछे बैठी थी पर अंकल जानबूझकर इतने ब्रेक लगा रहे थे कि मैं जाकर उनसे चिपक जाऊँ और वो मेरे चुचियों को महसूस कर सकें।
हम घर पहुँचे और घर आते ही मैंने अंकल से पूछा कि वो क्या लेंगे तो अंकल ने कहा—
महेश: जो चाहे वो तो ले ही लूँगा पर अच्छा मौका देखकर।
उनकी यह बात सुनकर तो मैं पूरी तरह से समझ चुकी थी कि इन नवरात्रि के 10 दिनों में अंकल जरूर मुझे चोदेंगे। नहीं और मुझसे सेक्स करके ही दम लेंगे।
उस दिन नवरात्रि का पहला ही दिन था और हर साल की तरह मैं गरबा खेलने मेरी फ्रेंड्स के साथ एक ग्राउंड में जाती हूँ। इस साल भी हमारा वही प्लान था। मैं तैयार हो गई पूरी तरह से सज-धज कर। पर प्रॉब्लम यह थी कि वो ग्राउंड मेरे घर से बहुत दूर था। इसलिए पापा मुझे हर साल वहाँ कार से छोड़ते थे। पर अब आज मैं कैसे जाऊँगी क्योंकि मेरी सब फ्रेंड्स भी दूसरी एरिया की थीं।
तभी मुझे दूर से महेश अंकल आते दिखे। वो भी बिल्कुल नवरात्रि के कपड़ों में तैयार होकर आ रहे थे। उन्हें आते देख मैं पूरी चौंक गई थी। क्योंकि सच कहूँ तो वो बहुत ही हैंडसम दिख रहे थे। एकदम तना हुआ शरीर, मसल्स अच्छे से बनी हुई, हर अंग उनका उभरा हुआ अच्छे से इन कपड़ों में नजर आ रहा था।
वो जैसे ही मेरे पास आए मुझे ऐसे देखने लगे कि शेर अभी इतना भूखा है कि तुरंत शिकार करके पूरा खा जाएगा। पर वो क्या, कोई भी देखता तो ऐसे ही देखते रह जाता क्योंकि मैंने पहना ही वैसा कुछ था।
मेरा फिगर है 32-26-28 और उस दिन मैंने जो चोली पहनी थी वो आगे से सिर्फ मेरी चुचियों को ढक रही थी और पीछे से पूरी बैकलेस थी। सिर्फ एक डोरी से बंधी हुई। और लहंगा मैंने हमेशा की तरह नाभिल के 3 उंगलियाँ नीचे से पहना था। कमर भी बिल्कुल कसी हुई।
उस लहंगा-चोली के साथ एक पतला सा दुपट्टा था जो ऐसे कुछ काम का नहीं था क्योंकि वो पूरा ट्रांसपेरेंट था पर मैंने लगाया हुआ था।
अंकल को होश में लाते हुए मैंने उनसे पूछा—
दिव्या: अंकल आप यहाँ कैसे?
तो उन्होंने कहा—
महेश: दिव्या इस साल क्या मैं भी तुम्हारे साथ चल सकता हूँ नवरात्रि के लिए?
हर साल तो नहीं जाता क्योंकि तुम्हारा परिवार नहीं होता है पर इस साल तुम हो तो सोचा नवरात्रि का मजा लिया जाए।
पता नहीं कैसे पर मैंने भी बिना सोचे-समझे तुरंत ही उन्हें हाँ कह दिया और उनके साथ कार में बैठकर ग्राउंड में पहुँच गई।
ग्राउंड पे पहुँचते ही मेरी सारी फ्रेंड्स मुझसे पूछने लगीं कि वो कौन है और मेरे कहने के पहले सब मुझे छेड़ने लगीं और बोलने लगे कि मैंने बॉयफ्रेंड ढूंढ लिया और बताया भी नहीं।
यह सुनकर मुझे बहुत शर्म आई पर एक खुशी भी हुई और मेरी मुस्कान देखकर अंकल ने तुरंत ही मेरा हाथ पकड़ लिया और सबको कहने लगे—
महेश: मैं उनकी गर्लफ्रेंड हूँ।
उसके बाद हम सब गरबा खेलने लगे। तभी अंकल ने मुझे साइड में बुलाकर कहा—
महेश: दिव्या, मेरी फ्रेंड्स के सामने मुझे गलती से भी अंकल नहीं कहना। नहीं तो हमारा झूठ पकड़ा जाएगा।
उनकी बात सुनकर मैं सोच ही रही थी कि उन्हें क्या कहूँ तभी अंकल ही बोल पड़े—
महेश: तुम मुझे नाम से ही मतलब महेश कहकर बुलाओ।
पहले मुझे थोड़ा अजीब लगा पर फ्रेंड्स के साथ अपना रौब रखने के लिए मैं मान गई और हम फिर से आकर सबके साथ जॉइन होकर गरबा करने लगे।
रात के कुछ 1 बजे गरबा खत्म हुआ और सब इतने थक गए और सब पसीने से इतने भीग गए थे क्योंकि तब गर्मी के ही दिन चल रहे थे।
तब मैंने अंकल से पता नहीं क्या सोचकर कहा—
दिव्या: चलिए घर चलते हैं। वहाँ ए.सी. ऑन करके हम सो जाएँगे।
मेरी बात सुनकर वो इतने खुश हुए कि उनकी आँखों की रोशनी चमकने लगी।
हम पहुँच गए और घर में आते ही मैंने ए.सी. 16 टेम्प पर ऑन कर दिया और हम ऐसे ही सोफे पर बैठ गए। कुछ ही मिनट में पूरा रूम इतना ठंडा हो गया और हमें भी फ्रेश लगने लगा। तो मैं उठकर अपने कपड़े ठीक करने लगी जो पसीने से चिपक गए थे। मुझे वो ठीक करते देख अंकल मुझे घूरे ही जा रहे थे और अपना लंड अपनी धोती से ऊपर से खुजा रहे थे जो मैं देख चुकी थी।
तब मैंने अंकल का ध्यान तोड़ते हुए कहा—
दिव्या: आप पापा के रूम में जाकर कपड़े बदल लें। तब तक मैं हम दोनों के लिए कॉफी बना देती हूँ।
मेरी बात सुनते ही अंकल उठकर रूम में जाने लगे और मैं अपना दुपट्टा हटाकर किचन में जाकर कॉफी बनाने लगी।
कुछ ही टाइम में अंकल सिर्फ एक शॉर्ट्स पहनकर बाहर आए और किचन में मेरे पीछे आकर खड़े हो गए। मैं अभी भी सिर्फ लहंगा-चोली में खड़ी थी वहाँ।
जब मैं कॉफी बनाकर पीछे घूमी तब मुझे पता चला अंकल वहाँ खड़े रहकर मुझे घूरे जा रहे हैं। मैंने उन्हें 3 बार आवाज लगाई पर उनका सारा ध्यान सिर्फ मेरी चुचियों पे ही था। तब मैंने उनकी एक उंगली गरम कप पर रखी। उन्हें तब ध्यान आया और उनकी नजरें झुक गईं।
उस वक्त पता नहीं कैसे मैंने उनसे पूछ लिया—
दिव्या: अंकल आप मुझे इतना क्यों घूर रहे थे?
तो वो बोल पड़े—
महेश: कोई इतनी खूबसूरत अप्सरा सामने खड़ी होगी तो ध्यान कहीं और कैसे जाएगा।
उनकी बात सुनकर मुझे इतनी शर्म आई कि मैं कॉफी के दोनों कप उठाकर बाहर की रूम में आ गई और वो भी मेरे पीछे-पीछे बाहर आ गए।
आगे की कहानी नेक्स्ट पार्ट में लिखूँगी।
आशा है आपको मजा आएगा पढ़कर। मुझे फीडबैक देने के लिए या मुझसे बातें करने के लिए नीचे कमेन्ट करें।




