बकरी का दूध – 1

Maa beta ki jabardast chudai kahani:- मेरा नाम आर्य है। मेरी उम्र 25 साल है, हाइट 6 फीट 2 इंच, मस्कुलर बॉडी, वजन 95 किलो। ये कहानी सच्ची है जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ। ये टॉप स्टोरीज़ माँ-बेटा, माँ को चोदा—मेरी और मॉम की है।

मॉम का नाम ज्योति है जो इस कहानी की हीरोइन हैं। हम घर में तीन लोग हैं। डैड की डेथ हो गई और छोटा भाई अनिल। मॉम की उम्र 40 साल है। मॉम दिखने में माधुरी दीक्षित जैसी हैं। भरा हुआ बदन, छोटा कद 4 फीट 5 इंच। चुचियाँ दूध से भरी हुई हैं जिससे चुचियाँ तनी हुई गोल-मटोल हो गई हैं और गाँड उभरी हुई, भरी हुई, बाहर की तरफ।

Maa beta ki jabardast chudai kahani

मॉम के जिस्म के हिसाब से उनकी हाइट कम होने के कारण जिस तरह वो दिखती थीं उस हिसाब से मैंने मॉम का निकनेम बकरी रख दिया। दोस्तों, डैड की डेथ के बाद मैं घर एक हफ्ते बाद पहुँचा क्योंकि मेरा जॉब दिल्ली में लगा था। जब घर आया, बेल बजाई। मॉम ने दरवाजा खोला। मेरी नजर मॉम की चुचियों पर गई। काफी बड़े हो गए थे।

उसमें दूध बहुत आ गया था। दूध का भराव इतना था कि चुचियाँ कॉलरबोन की हड्डी के थोड़ा नीचे तक उभरी हुई थीं। मॉम अक्सर साड़ियाँ पहनती हैं। चुचियों को देखते ही मैंने सोच लिया—आज जी भरकर दूध पीऊँगा।

मॉम को मैं बहुत बार चोद चुका हूँ। मुझे देखकर मॉम की साँसें तेज होने लगीं जिससे चुचियाँ ऊपर-नीचे होने लगीं और नजरें नीचे कर लीं। वो मुझसे बहुत डरती थीं क्योंकि मैं बहुत गुस्से वाला हूँ और हाइट बड़ी होने से मेरी और मॉम की जोड़ी साँड़ और छोटी बकरी जैसी थी।

ज्योति: आ गए आप।

आर्य: हाँ मेरी बकरी।

मॉम ने मेरे हाथ से सामान ले लिया। मुझे देखकर छोटा भाई भी खुश हो गया।

अनिल: भैया मेरे लिए क्या लाए?

आर्य: चॉकलेट्स लाया हूँ बेटा और फुटबॉल लाया हूँ।

(ये कहकर मॉम को आँख मार दी) और मॉम ने सर नीचे करके स्माइल कर दी और दुपट्टे से चुचियों को ढाँक दिया।

मॉम किचन में चली गईं। मैंने अनिल को बोला—

आर्य: जाओ खेलो।

और वो चला गया। मॉम किचन में थीं। ये देखकर मैं मॉम को पीछे से पकड़ लिया और चुचियों को दबाना शुरू कर दिया। दबाते हुए मैंने कहा—

आर्य: और मेरी बकरी, दूध कब पिलाओगी?

ज्योति: अभी तो आए हो। थोड़ा आराम कर लीजिए। फिर पिला दूँगी। जितना पीना है पी लो।

मैं भी कहा मानने वाला था।

आर्य: मुझे अभी पीना है।

और गुस्से से नाखून के साथ चुची को ग्रिप में लेकर जोर से दबाकर चुची जोर से दबा दी जिससे मॉम के मुँह से आआह्ह निकल गई। दूध बाहर आ गया और पेटीकोट गीली हो गई।

ज्योति: अच्छा मेरे राजाजी, पी लो। गुस्सा तो आपके नाक पर रहता है।

मैंने पेटीकोट को खोल दिया। जैसे ही खोला दोनों चुचियाँ बाहर आ गईं। उस पर बड़े-बड़े काले रंग के निप्पल्स में से दूध की बूंदें टपक रही थीं। निप्पल को मैंने मेरे अंगूठे और उंगली के बीच में लेकर हल्के से सहलाने लगा ताकि निप्पल कड़क और खड़े हो जाएँ।

मैंने सोचा अगर मैं जोर से निप्पल्स दबाऊँ तो मॉम को अकड़ आएगी और वो चिल्लाएँगी। उससे पहले ही मैं मॉम को अपने विशाल शरीर के आगोश में लेकर उन्हें दबा दूँ ताकि मॉम को दर्द हुआ तो वो हिलें नहीं और ना ही रेसिस्ट करें।

मेरा लंड भी इतना टाइट हो गया था कि मॉम की पीठ पर लग रहा था। मॉम का भरा शरीर मेरे आगोश में आ गया था। मॉम डरने लगीं और काँपने लगीं।

मैं मॉम को जकड़े हुए था। मेरा एक हाथ मॉम की लेफ्ट चुची पर था जिससे उनकी दिल की जोर-जोर से धड़कनें की आवाज मुझे महसूस हो रही थी। मॉम डर रही थीं। ये सोच रही थीं कि अब मैं क्या करूँगा।

ज्योति: (काँपते हुए) जी, आप मुझे इतनी जोर से क्यों दबा दिए हो? मेरा दम टूट जाएगा ऐसा हो रहा है। मेरी पसलियाँ टूट जाएँगी।

आर्य: चुपचाप खड़ी रह।

लेकिन मुझे थोड़ा अनकंफर्टेबल फील हो रहा था क्योंकि मेरा लंड मॉम की पीठ पर टकरा रहा था। क्योंकि मॉम की हाइट बहुत छोटी थी। मैंने मॉम को ऊपर उठाया ताकि मॉम की गाँड ऊपर आ जाए जिससे मेरा लंड उनकी गाँड के दरार में धँस जाए। उठाकर मॉम को किचन के प्लेटफॉर्म पर चिपका दिया। मॉम की साँसें तेज हो गईं और दिल जोर से धड़क रहा था।

मैंने एक हाथ से उनकी एक चुची के निप्पल के पास ले गया और जोर से निप्पल को दबा दिया। जैसे ही दबाया दूध का फव्वारा निकल गया और मॉम जोर से चिल्लाईं और रेसिस्ट करने लगीं। लेकिन वो कहाँ हिलतीं, उनको दबा जो रखा था। मैं निप्पल को दबाए रखा।

ज्योति: आआआह्ह्ह्ह मर गई। प्लीज छोड़ दीजिए। ये कौन सा तरीका है दूध निकालने का।

मॉम को तड़पने का भी मौका नहीं दे रहा था क्योंकि उनके शरीर को दबाए रखा था। मॉम की चीखने की आवाज से अनिल अंदर आ गया।

अनिल: माँ क्या हुआ? किधर हो?

अनिल की आवाज सुनकर मैं मॉम का मुँह दबा दिया और ऐसे ही पोजीशन में खड़ा रहा। अनिल को मॉम नहीं दिखाई दे रही थीं क्योंकि मॉम मेरे विशाल आगोश के अंदर से छुपी हुई थीं।

अनिल: भैया माँ किधर हैं?

आर्य: बेटा मम्मी बाहर बाजार गई हैं।

अनिल: मैंने माँ की चीखने की आवाज सुनी।

आर्य: जा तू बाहर जाकर खेल। मैं दूध निकाल लेता हूँ।

अनिल: मतलब किसका दूध निकाल रहे हो? मुझे कोई नहीं दिखाई दे रहा। आप उस तरफ मुँह क्यों किए हो भैया?

उसको क्या पता कि मॉम को छुपाया हूँ। अगर पलटा तो माँ दिख जाएँगी। वो आधी नंगी भी थीं, चुचियाँ बाहर थीं। मॉम के बूब्स इतने बड़े थे कि साइड से अनिल को दिखने लगे।

अनिल: (मॉम के साइड के चुचियाँ देखकर) भैया वो क्या है?

आर्य: (चुची को देखकर पकड़कर अंदर लिया) कुछ नहीं है। तू जा खेल।

अनिल: भैया क्या है? बोलो ना। क्या छुपा रहे हो?

मैं सोचने लगा फिर कहा—

आर्य: बकरी है मुन्ना। उसी का दूध निकाल रहा हूँ। दूध पीने का मन कर रहा था तो बकरी उठा लाया।

अनिल: भैया मुझे भी पीना है।

आर्य: ये बकरी खाली मुझे ही दूध देती है। पूरा दूध निकालने के बाद मैं इसको काटकर खा जाऊँगा।

ये सुनकर मॉम और डर गईं और धीरे आवाज में कहने लगीं—

ज्योति: क्या कह रहे हो आप? मेरा पूरा दूध निकालने के बाद मुझे काट दोगे?

अनिल: मुझे भी दिखाओ ना भैया। बकरी कैसी है?

ये कहकर आगे आने लगा।

आर्य: आगे मत आना नहीं तो ये दूध नहीं देगी।

ये कहकर मैंने उसको वहीं रुकवा दिया। मॉम का शरीर डर के ठंडा होने लगा।

अनिल: भैया दूध कैसे निकालते हैं? बताओ ना।

आर्य: ठीक है। उसके बाद तू बाहर चला जाएगा खेलने?

अनिल: हाँ भैया।

ज्योति: क्या कर रहे हो आप? मेरी चुची उसको दिखाओगे?

आर्य: चुप। देख मेरा दिमाग।

मैंने मॉम की एक चुची को पकड़ा और साइड से थोड़ा बाहर निकाला जिससे सिर्फ निप्पल और थोड़ा चुची का भाग मुन्ना को दिखाया। मॉम ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

ज्योति: (धीरे स्वर में) आप भी ना।

मैंने निप्पल को अंगूठों के बीच लिया और थोड़ा जोर से प्रेस किया और दूध की पिचकारी निकली। ये देखते ही अनिल—

अनिल: वाओ! पर भैया ऐसी दूधी (चुचियाँ) मैंने पहले कभी नहीं देखी। कोई बकरी की ऐसी नहीं है।

आर्य: ये बकरी की स्पेशल दूधी (चुचियाँ) हैं। सिर्फ मेरे लिए हैं।

अनिल: ठीक है भैया। मैं खेलने जाता हूँ।

और वो चला गया।

ज्योति: (लंबी साँस लेते हुए) हफ्फ्फ्फ! अब तो छोड़ दो राजाजी। मेरी पसलियाँ टूट रही हैं। कुछ और देर तक ऐसे दबाए रखोगे तो मेरी रूह निकल जाएगी। आआह्ह्ह। आप क्या कह रहे थे मुझे काट दोगे?

आर्य: हाँ।

(छुरी निकालते हुए जो बाजू में रखी थी)

ज्योति: (छुरी देखकर डरते हुए चिल्लाईं) प्लीज छोड़ दो। प्लीज ये क्या कर रहे हो?

आर्य: चिल्ला मत। काट नहीं रहा हूँ।

छुरी को निप्पल पर रखकर हल्के से घुमाने लगा जिससे मॉम के पूरे शरीर में करंट लग गया।

ज्योति: (सिसकारियाँ लेते हुए) हाये मेरे राजा।

उसके बाद मॉम को मैंने ढीला छोड़ दिया और दोनों चुचियों को हाथों से पकड़कर दबाने लगा और निप्पल को पकड़कर घुमाने लगा। ये सब करके मॉम की चुचियाँ और निप्पल्स के नसें ढीले हो गए। और एक गरम कपड़ा लिया। उसको थोड़े गरम पानी में भिगोकर दोनों निप्पल्स को गरम कपड़े से पकड़कर सेंक दिया।

फिर दबाने पर दूध आराम से निकलने लगा। मैंने दो गिलास लिए और किचन के प्लेटफॉर्म पर रख दिए मॉम के चुचियों के सामने। एक गिलास एक चुची के सामने और दूसरा गिलास दूसरी चुची के सामने।

फिर दोनों चुची के निप्पल्स को दबाना शुरू किया। जब दबा रहा था तो मॉम अपने होंठों को दाँतों के बीच में काट रही थीं और अपनी जीभ निकाल रही थीं और अपनी गाँड मेरे लंड पर घिस रही थीं। मैंने पूरा दूध निकाल लिया। फिर मॉम को मैंने जमीन पर रख दिया जो उसको हवा में उठाए रखा था प्लेटफॉर्म से चिपकाकर।

ज्योति: उतर गया गुस्सा या अभी भी बाकी है? आखिरकार आपने मुझे आजाद कर ही दिया। मेरे पूरे जिस्म की हड्डी तोड़ दी आपने।

मॉम ने ब्लाउज पहन लिया और जाने लगीं। मैंने मॉम का हाथ पकड़ा और अपने पास खींच लिया। और साड़ी नीचे से उठाकर अंडरवियर नीचे कर ली और एक इंडेक्स फिंगर गाँड के छेद में घुसेड़ते हुए कहा—

आर्य: अब शॉट मारना है।

मॉम डरते हुए मुझे देखकर ना में सर हिलाया।

ज्योति: प्लीज अभी नहीं। अनिल यहीं है। वो आ जाएगा।

मैं उंगली और अंदर डालता गया। उतने में मुन्ना आ गया। ये देखकर मॉम सीधी मुड़ गईं। मैं भी सीधा मुड़ गया लेकिन मेरी उंगली मॉम के गाँड के छेद के अंदर ही थी।

अनिल: माँ तुम आ गईं? किधर थीं आप?

ज्योति: बेटा मैं इधर ही थी। बाजार गई थी।

और मैं छेद को उंगली से अंदर छेदने लगा जिससे मॉम को अड़चन हो रही थी। और हिल रही थीं और धीरे से कहने लगीं—

ज्योति: प्लीज निकालिए। प्लीज।

मैंने तीन-चार स्ट्रोक मारा और उंगली निकाल ली। और दूध का गिलास हाथ में ले लिया।

अनिल: भैया दूध निकाल लिया आपने?

आर्य: हाँ।

अनिल: बकरी किधर है?

आर्य: मेरे पास ही है।

मॉम ने मुझे देखा।

अनिल: किधर? मुझे तो नहीं दिखाई दे रही है। मम्मी, भैया के पास बकरी थी और भैया उसका दूध निकाल रहे थे।

ज्योति: अच्छा।

आर्य: (दूध पीते-पीते) बकरी सिर्फ मेरे पास आती है। मैंने उसका नाम भी रखा है।

अनिल: क्या?

आर्य: ज्योति।

मॉम आश्चर्य से देखीं मुझे।

अनिल: क्याआआ? ज्योति? ये तो मम्मी का नाम है।

आर्य: हाँ मुन्ना। माँ उस बकरी के जैसे दिखती हैं इसलिए मैंने उसका नाम ज्योति रखा है।

ये कहकर मॉम को आँख मार दी।

अनिल: माँ मैंने बकरी की दूधी (चुचियाँ) देखी। भैया ने दिखाया था।

ज्योति: अच्छा।

अनिल: हाँ।

ये कहकर मुन्ना खेलने चला गया।

ज्योति: (स्माइल करके) आप बहुत इंटेलिजेंट हो।

आर्य: चल अभी बहुत कुछ बाकी है। तुझे नंगी करके चोदना है मेरी बकरी।

ज्योति: हम्म। वो तो है। आप मुझे चोदने वाले तो नहीं हो।

मैंने मॉम को गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। और बेड पर पटक दिया।

ज्योति: देखो प्लीज। आप बेरहमी से मत कीजिए। कंट्रोल में रहिए और प्यार से करिए। पिछली बार आपकी बड़ी तलवार से मेरी चूत लाल हो गई और गाँड भी फाड़ दी। प्लीज अबकी बार प्यार से कीजिए।

आर्य: अब तू मुझे चोदना सिखाएगी। पत्ते से मारूँगा।

मैंने मॉम के सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी कर दी।

ज्योति: सॉरी सॉरी। गलती हो गई।

दोस्तों, ये टॉप स्टोरीज़ माँ-बेटा, माँ को चोदा का पहला पार्ट था। आगे की कहानी में बताऊँगा कि कैसे मैंने मॉम को चोदा।

आगे क्या हुआ पढिए अगले पार्ट मे

Part 2 ==> बकरी का दूध 2

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