बड़ी बहन ने मुठ मारते पकड़ा 6

Badi bahan ke sath chudai ki chahat:- मुझे बहुत अच्छा लगा कि आप लोग मेरी कहानी लाइक कर रहे हैं। आज के इस पार्ट में आपको शायद ज्यादा मजा न आए, लेकिन मुझे ईमेल जरूर करिए। और इतने लंबे वक्त के इंतजार के लिए आप सबसे माफी चाहता हूँ।

जो लड़कियाँ मुझसे भोपाल में चुदवाना चाहती हैं, वो मैसेज कर सकती हैं। सेक्स चैट के लिए भी आप मैसेज कर सकती हैं। और बॉयज, मैं गे नहीं हूँ, इसलिए मुझसे अपना डिक दिखाने को मत कहना। हाँ, गर्ल्स पूछ सकती हैं और मैं उन्हें फुल 9 इंच लव के साथ दिखाऊँगा।

Badi bahan ke sath chudai ki chahat sex story

फिर से लंबे इंतजार के लिए सॉरी, पिछला पार्ट यहाँ पढ़िए। बड़ी बहन ने मुठ मारते पकड़ा 5

तो चलिए शुरू करते हैं…

दोस्तों, वो रात भी क्या रात थी। सबा के बूब्स, चूत, गाँड सब मेरे पास था। मैंने जो चाहा वो किया, सिवाय उसकी चुदाई के। उस दिन बाहर निकलते हुए मम्मी ने देख लिया था। मैंने सोचा चलो दिन भर स्कूल रहूँगा और मम्मी बैंक में, तो सब भूल जाएँगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि आज न स्कूल जाना था मुझे, न ही मम्मी को बैंक। बल्कि आज हम मार्केट जाने वाले थे।

सुबह फ्रेश होकर नाश्ता करने नीचे गया तो मम्मी ने पूछ लिया—

मम्मी: तू सबा के कमरे में सोया था?

मै: हाँ।

मम्मी: क्यों?

मै: मेरा एसी काम नहीं कर रहा था, इसलिए।

मैंने ये पहले ही सोच लिया था, इसलिए नीचे आने से पहले एसी की एमसीबी ऑफ करके आ गया था। क्योंकि मैं जानता था मम्मी चेक जरूर करेंगी। उस समय वो कुछ नहीं बोलीं।

पर करीब 30 मिनट बाद बोलीं—

मम्मी: मैंने चेक किया, एसी ऑन नहीं हो रहा। आते वक्त इलेक्ट्रिशियन को बुला लेना। और बोलीं कि अब कभी ऐसा हो तो मुझसे बोलना। सबा या अनम के साथ मत सोना, तू बड़ा हो गया अब।

और वो ये बोलके वहाँ से चली गईं, गाँड हिलाती हुई। और मैं लास्ट तक मम्मी की बड़ी हिलती हुई गाँड देखता रहा। उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी, क्योंकि गाँड का पूरा शेप दिख रहा था और बीच की लाइन भी।

मैं रूम में गया। तब तक सबा और अनम जा चुके थे। मैंने सोचा यार क्यों न मम्मी के रूम जाके लेटूँ। मम्मी काम करेंगी, मैं उनकी गाँड और दूध देखूँगा। फिर मैंने अंडरवियर उतारा और बस लोअर पहनके नीचे गया। और मम्मी से पूछा—

मै: मार्केट कब चलेंगे?

मम्मी: मुझे कपड़े धोने हैं, तो एक घंटे बाद चलेंगे।

मै: तब तक मैं यहीं लेट जाऊँ?

मम्मी: हाँ ठीक है, लेट जा।

और मैं वहीं लेट गया। मम्मी ने एक नाइटी पहनी हुई थी सफेद रंग की। और उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी, क्योंकि जब मम्मी कपड़े उठा रही थीं तब मैंने पास से उनकी गाँड देखी थी। लेकिन मम्मी ने ब्रा पहना हुआ था, शायद क्रीम या सफेद। जिससे उनके दूध उठे हुए लग रहे थे।

मम्मी मेरे सामने झुक-झुककर कपड़े उठा रही थीं और इधर मेरा लंड उठना शुरू हो गया था। फिर मम्मी मुड़ीं और मेरी तरफ पीठ करके बैठ गईं। मुझे उनकी ब्रा की स्ट्रिप्स दिखाई दे रही थीं और गाँड के बीच में फंसी नाइटी ने मेरे लंड को गीला कर दिया था। फिर मम्मी उठीं और बोलीं—

मम्मी: ये कपड़े मशीन के पास रख दे।

मैं उठा और कपड़े उठाए। मैं भूल गया कि लंड खड़ा है। मम्मी ने सीधे मेरे लंड को देखा, पर कुछ कहा नहीं। मैंने कपड़े उठाए और मशीन के पास रख दिए। फिर मम्मी भी वहीं आ गईं और बोलीं—

मम्मी: बाल्टी में पानी भर दे।

मैंने पानी भरा और मम्मी को देखने लगा। वो झुकके बाल्टी में कपड़े मल रही थीं। मैं उनके दूध देख रहा था। मुझे देखते हुए मम्मी ने देख लिया और बोलीं—

मम्मी: क्या देख रहा है?

मै: कुछ नहीं।

फिर वहाँ से चला गया।

थोड़ी देर बाद मम्मी ने बुलाया कपड़ों की बाल्टी उठाने के लिए। मैंने बाल्टी में पानी डाला और मम्मी मशीन से कपड़े निकालके बाल्टी में रख रही थीं। उनके कपड़े पूरे गीले हो चुके थे। उनकी गाँड तो अब बिल्कुल साफ दिख रही थी, बल्कि चमक रही थी। और उनके बूब्स वाला एरिया भी थोड़ा गीला था। मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो गया।

मम्मी ने कपड़े पूरे रखे और मेरे लंड को देखके बोलीं—

मम्मी: तुझे क्या हो जाता है? क्या सोचता रहता है?

मै: क्यों, क्या हुआ?

(मैंने जानबूझकर पूछा क्योंकि मम्मी ने थोड़ा हँसते हुए पूछा था।)

मम्मी: नीचे देख। और फिर बोलीं— मैं कई दिनों से देख रही हूँ तेरा ध्यान गलत चीजों में रहता है और तेरी निगाहें भी बहुत चलती हैं। कभी मुँह पे, कभी कामवाली बाई पे, तो कभी सबा पे।

मै: नहीं मम्मी, ऐसा नहीं है।

मम्मी: सब पता है मुझे। आजकल इंटरनेट पे यही सब देखता है तू, इसलिए ऐसा हो रहा है।

मै: मम्मी आप कहाँ की बात कहाँ जोड़ रही हो। ऐसा कुछ नहीं है।

फिर मम्मी बोलीं—

मम्मी: बाल्टी उठा।

और वो आगे-आगे चलने लगीं। और मेरे सामने ही सीढ़ियाँ चढ़ने लगीं। मैं उनकी गाँड देख रहा था और उनके बिल्कुल क्लोज था। मैं चले जा रहा था। फिर अचानक मम्मी छत का दरवाजा खोलने के लिए रुकीं और मैं एकदम से उनसे टकरा गया। और मेरा खड़ा लंड मम्मी की गाँड पे टच हो गया।

मम्मी: जोर से बोला— सीधा खड़ा रह!

मैंने मन में कहा— खड़ा ही तो है।

फिर मम्मी ने गेट खोला और नीचे पत्थर हटाने के लिए झुकीं। और उनकी गाँड साफ मेरे लंड पे आकर रुकी। दिल तो किया कि बस फाड़के डाल दूँ। फिर मम्मी छत पे गईं और कपड़े निकाल-निकालके फैलाने लगीं।

पूरे टाइम मैं बस उनकी गाँड और दूध देखता रहा।

फिर मम्मी ने बोला—

मम्मी: अब नीचे चलो।

और मैं उनके पीछे चलने लगा। वो बोलीं—

मम्मी: गेट बंद करके आना।

मैंने गेट बंद किया और नीचे आने लगा। फिर मम्मी ने कहा—

मम्मी: अब एक बाल्टी लाके दे, मैं वॉशिंग एरिया साफ कर दूँ।

मैंने बाल्टी में पानी भरके मम्मी को दिया और मैं मम्मी के रूम में चला गया। फिर मम्मी आईं और वो बाथरूम चली गईं नहाने। मुझे अफसोस हुआ कि आज मौका भी था, मैं कैमरा लगा सकता था। खैर, मैंने मम्मी की ब्रा और पैंटी ढूँढ़ी और लेकर अपने रूम में चला गया।

वहाँ जाके मम्मी की ब्रा और पैंटी पकड़के सूँघके मुठ मारी और माल छोड़ दिया उसी पर। फिर मम्मी ऊपर आ गईं और गेट नॉक करके बुलाने लगीं मार्केट जाने के लिए।

मैं रेडी होकर नीचे गया और मम्मी हम मार्केट चले गए। मम्मी ने कुछ कपड़े लिए और पापा के लिए भी शर्ट्स लीं। और फिर मुझे एक जगह बोला—

मम्मी: तू रुक, मैं आती हूँ।

मैं वहीं रुका रहा। मैंने देखा कि मम्मी एक लिंगरी शॉप में गईं और काफी देर बाद भी नहीं आईं। फिर मैं उसी शॉप के सामने खड़ा हो गया तो देखा मम्मी के हाथ में दो बड़ी थैलियाँ हैं और शॉप से निकल रही हैं। और मुझे हँसते हुए बोलीं—

मम्मी: तुझे सब्र नहीं हुआ है ना?

फिर हम 4 बजे तक वापस घर आ गए। मम्मी ने मुझे मेरे कपड़े दिए और एक पॉलीबैग दिया—

मम्मी: ये ऊपर सबा के रूम में रख देना। और इसमें एक और पॉलीबैग है, वो अनम के रूम में।

मैंने सोचा रख दूँगा। फिर मम्मी ने कहा—

मम्मी: खोलना मत।

लेकिन अब तो खोलना लाजमी था।

मैं सबा के रूम में गया और पॉलीबैग खोला। उसमें 34 साइज की 3 ब्रा थीं और 3-4 पैंटी थीं। और दूसरे बैग में 32 साइज की ब्रा-पैंटी और शमीज थी। मैं समझ गया ये अनम का साइज है। मैंने वो पॉलीबैग अनम के रूम में रख दिया और अपने रूम में आ गया।

फिर मैंने प्लान बनाया कि आज तो मम्मी के साथ सोऊँगा, मम्मी के बेड पे। लेकिन ये उसी वक्त मुमकिन था कि अगर पापा आज भी अंकल के यहाँ ही सोए।

लेकिन मेरी किस्मत इतनी अच्छी नहीं है दोस्तों। पापा तो लेट आने की बजाय जल्दी आ गए। और साथ में एक इलेक्ट्रिशियन को भी ले आए। मम्मी ने शायद बोल दिया होगा। उस इलेक्ट्रिशियन ने 5 मिनट में ठीक कर दिया। साला एक एमसीबी ही तो ऑन करनी थी।

फिर मैं उस रात लेटकर सोचने लगा मम्मी की गाँड के बारे में। और मुझे याद आया कि मम्मी की ब्रा और पैंटी तो यहीं हैं। मैंने वो निकाली और पूरे कपड़े उतारके मुठ मारने लगा और मम्मी की पैंटी सूँघने लगा। कसम से दोस्तों, माँ की चूत सबसे अलग होती है। सबा की चूत मैंने लिक की थी और सूँघी भी थी, लेकिन मम्मी की चूत ने तो लंड को लाल कर दिया। मैं मुठ मार रहा था और मेरा पूरा माल मम्मी की ब्रा पे और बेडशीट पे गिर गया।

मैं बस ऐसे ही लेटा रहा और पैंटी सूँघता था। तभी गेट नॉक हुआ। बाहर मम्मी थीं। मम्मी ने बाहर से ही बोला—

मम्मी: ऊपर जाके कपड़े उतारकर ले आओ।

मैंने फौरन कपड़े पहने और मम्मी की ब्रा-पैंटी बाथरूम में छुपा दी। फिर लोअर और बनियान में ही मम्मी के पास नीचे गया। मेरा लटकता हुआ लंड और गीला लोअर देखते ही मम्मी बोलीं—

मम्मी: क्या कर रहा था?

मै: कुछ नहीं मम्मी।

मम्मी ने बहुत डाँटा और फिर छत की चाबी दी और कपड़े लाने को बोला। मैं कपड़े लेकर नीचे आया और मैंने देखा मम्मी टॉयलेट में हैं। मैं फौरन अपने रूम में गया, ब्रा और पैंटी लाके गंदे कपड़ों में डाल दी। और वापस रूम में आने लगा। रास्ते में सबा मिल गईं। उनके हाथ में वो पॉलीथीन थी।

सबा: ये तू लाया?

मै: हाँ, मैंने गंदी कर दी थी ना, इसलिए ले आया।

सबा: थैंक्स।

और मेरे ही रूम में आ गईं और मुझे किस करने लगीं।

सबा: मैं तेरे सामने पहनूँ?

मै: हाँ बिल्कुल।

फिर वो बोलीं—

सबा: 2:30 अम का अलार्म लगा लो। फिर मेरे रूम में आ जाना। सामने चेंज करूँगी।

मै: ओके डन।

और वो जब जाने लगीं तो मैंने उनकी गाँड पे एक हल्का सा थप्पड़ मारा। वो हँसती हुई चली गईं। और मैं रात के ढाई बजने का इंतजार करता रहा।

उस दिन सबा ने मुझसे रात में 2:30 पर मिलने को बोला था और मैंने अलार्म भी सेट कर लिया था। लेकिन दिन भर काम करने की वजह से और मम्मी की पैंटी पर मुठ मारने के बाद इतनी थकान हुई कि अलार्म बजता रहा और मेरी आँख नहीं खुली। यहाँ तक कि मैं अगले दिन 11 बजे उठा।

सुबह उठते ही याद आया कि सबा के रूम में जाना था। मैं जब गया तो देखा सबा जा चुकी थी। इस समय सब लोग चले जाते थे, घर में कोई नहीं होता था। तो मैं फ्रेश होकर लेट गया और मोबाइल में स्टोरीज़ पढ़ने लगा और अपना लंड मसलने लगा।

पढ़ते-पढ़ते मैंने कब लंड बाहर निकाल लिया, पता भी नहीं चला। मैं स्टोरी में डूबा हुआ था तभी गेट से आवाज़ आई—

मम्मी: साहिल!!!! ये क्या कर रहा है?

मेरी गाँड फट गई क्योंकि दरवाज़े पर मम्मी खड़ी थीं।

दिमाग में ये चल रहा था कि आज ये बैंक नहीं गईं? मम्मी डाँटते हुए अंदर आईं और बोलीं—

मम्मी: यही सब करता है बस तू! न पढ़ाई, न कोई काम। आने दे पापा को, सब बताऊँगी।

मम्मी से मैं “नहीं-नहीं” बोल रहा था और मेरा 9 इंच का लंड अभी भी लोअर के बाहर था। फिर मम्मी ने डाँटकर कहा—

मम्मी: इसे अंदर कर।

मैंने लंड को अंदर किया। और मम्मी ने फिर बोला—

मम्मी: सुबह उठके न नाश्ता, न कुछ। बस इसी में दिमाग रहता है। क्या मिलता है इस सबसे?

और फिर मुझे समझाने लगीं।

मै: ऐसा नहीं मम्मी, मुझे चोट लग गई थी, वहीं देख रहा था।

मम्मी: मुझे बेवकूफ मत समझ। सब पता है क्या कर रहा था।

फिर बोलीं—

मम्मी: सबा ने इसलिए तेरा लैपटॉप रखवाया होगा।

मै: नहीं मम्मी, सच में चोट लगी है। चाहे तो आप खुद देख लो।

मैंने सोचा मम्मी थोड़ी न देखेंगी। लेकिन…

मम्मी: दिखा, कहाँ लगी है?

मैं हैरानी से देखने लगा।

मम्मी: दिखा ना, कहाँ लगी है?

मै: वहाँ पर लगी है मम्मी। कैसे दिखाऊँ आपको? शर्म आ रही है आपके सामने।

मम्मी: करते वक्त शर्म नहीं आ रही थी।

मै: अच्छा, मैं आँखें बंद करता हूँ। आप देख लो, नीचे की तरफ लगी है।

मम्मी ने गुस्से में झट से लोअर हटाया। मेरा 9 इंच का लौंडा मम्मी के सामने तन-तनाता हुआ निकला।

करीब 10 सेकंड मेरे लंड को घूरने के बाद मम्मी बोलीं—

मम्मी: कहाँ लगी है? ठीक तो है।

मै: अंदर लगी है। अंदर दर्द हो रहा है, इसलिए मैं सहला रहा था। उससे आराम मिल रहा था।

मम्मी मेरे सामने झुकके देख रही थीं और उनकी कमीज़ में से उनका क्लीवेज मस्त दिख रहा था। ये देखके मेरा लंड खड़ा होने लगा। फिर मम्मी बोलीं—

मम्मी: सच में लगी है क्या?

मै: हाँ।

मम्मी: मैं ट्यूब लाके देती हूँ, वो लगा ले। और टैबलेट खा लेना, पेन किलर।

फिर मम्मी उठीं और मैं रूम में वैसे ही पड़ा रहा और लंड को सहलाता रहा। थोड़ी देर बाद मम्मी आईं और मुझे एक ट्यूब दी।

मम्मी: तू फिर वही करने लगा?

मै: मम्मी, इससे आराम मिल रहा है।

मम्मी: अब ट्यूब लगा, रूम बंद करके।

मै: मम्मी आप लगा दो, जैसे आप मेरे सर में लगाती हो अच्छे से।

मम्मी गुस्सा हो गईं और डाँटकर चली गईं।

फिर मैंने थोड़ी सी ट्यूब लगा ही ली, लेकिन गाँड फट गई मेरी। लगाते ही जलन मचने लगी। मैंने जल्दी से धोया और पूरा लंड लाल हो गया। वो जॉइंट पेन में लगाने वाली ट्यूब थी।

उस दिन पूरे समय मेरे लंड में जलन मचती रही। फिर रात को जब मम्मी मेरे रूम में दूध लेकर आईं तो पूछने लगीं—

मम्मी: आराम मिला कुछ?

मै: अब पहले से भी ज्यादा बुरा हाल है। पूरी स्किन रेड हो गई और बहुत ज्यादा जलन हो रही है सुबह से।

मम्मी: मुझे इसी से आराम मिलता है जल-चोट लगती है तो।

मै: मम्मी ये जॉइंट पेन में लगाते हैं, इसपे नहीं।

तो मम्मी थोड़ा हँसने लगीं और बोलीं—

मम्मी: ज्यादा जलन हो रही है क्या?

मै: हाँ। यकीन नहीं तो आप देख लो कितना रेड हो रहा है।

मम्मी: दिखाओ।

फिर मैंने बिना कुछ सोचे सीधे लोअर से लंड बाहर निकालके मम्मी को दिखाया। उस समय लंड ढीला था।

मम्मी: हाँ, सुबह से अलग लग रहा है।

मै: मम्मी सुबह हार्ड था।

मम्मी: मैं उसका नहीं बोल रही, स्किन का बोल रही हूँ।

मै: हाथ लगाने में ही जलन मच रही है।

मम्मी: एक काम कर, बादाम का तेल लगा ले। उससे आराम मिल जाएगा।

मै: मेरे पास तो नारियल का हेयर ऑयल है।

मम्मी: हाँ वही लगा ले।

फिर मम्मी ने ही ऑयल उठाया और मैं हाथ में लेकर लगाने लगा। जैसे ही मैंने हाथ लगाया मेरे मुँह से “ऊँह” निकल गई।

मै: मम्मी मुझसे नहीं लगेगा।

(दोस्तों, मुझे ज्यादा तो जलन नहीं हो रही थी, लेकिन मैं मौका गवाना नहीं चाहता था।)

खैर, मम्मी बोलीं—

मम्मी: मैं ऑयल डालती हूँ, तू बस रब कर ले अच्छे से। और बिना लोअर के ही सोना आज, रूम लॉक करके।

मै: ठीक है।

फिर मम्मी ऊपर से ऑयल टपका रही थीं और मैंने फिर से हाथ लगाके दर्द होने का नाटक किया। तो मम्मी ने एकदम से मेरा लौंडा पकड़ा और हल्के हाथ से रब करने लगीं। मैं मुँह से प्लेज़र में “आह… आह…” की आवाज़ निकाल रहा था। मम्मी को लगा दर्द हो रहा है।

फिर मेरी नज़र मम्मी के कंधे पर पड़ी। उनकी मैक्सी से उनकी काली ब्रा की स्ट्रिप दिख रही थी। और जब सामने देखा तो मम्मी के दूध की दरार।

तो मम्मी जब भी तेल लगाने के लिए आगे झुकतीं, थोड़ा दूध और ब्रा के दर्शन होते। आपका तो पता नहीं दोस्तों, पर मुझे लड़कियाँ और औरतें ब्रा-पैंटी में ज्यादा खूबसूरत दिखती हैं। देखते ही देखते मेरा लौंडा मम्मी के हाथ में तन गया।

मम्मी ने भी नोट किया कि मुझे मज़ा आ रहा है। मम्मी फिर भी मेरे लंड को तेल लगा-लगाके ऊपर-नीचे मल रही थीं और मैं मम्मी के दूध कंटिन्यू देख रहा था। मम्मी ने मुझे दूध देखते हुए भी देख लिया था, पर कुछ भी नहीं बोलीं। बल्कि और ज्यादा झुकके लंड रब करने लगीं।

थोड़ी देर बाद मेरे मुँह से “आआह्ह्ह्ह…” और लंड से मेरे सीमेन एक साथ निकल पड़े। पूरा माल मम्मी की मैक्सी पर और मेरे लोअर पर गिर गया। मम्मी ने ये देखा तो उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया।

5 सेकंड तक एक-दूसरे की आँखों में देखने के बाद मम्मी वहाँ से चली गईं। और जाते-जाते बोल गईं—

मम्मी: अब सही हो गया। साफ कर लेना।

और गेट जोर से बंद करके चली गईं।

बातों से लगा कि मम्मी को मज़ा आया, पर दरवाज़ा बंद करने से लगा कि गुस्सा हैं। शायद उन्हें अजीब लगा। और लगता भी क्यों न, अपने ही बेटे को हैंडजॉब देके जो गई थीं।

मैंने उस रात बहुत एंजॉय किया। और मम्मी की पुरानी पैंटी ढूँढ़के मम्मी की चुदाई के ख्वाबों में रात भर मुठ मारी और सो गया।

उसके कई दिनों तक मम्मी ने मुझसे और मैंने मम्मी से सही से बात नहीं की। दोनों को ही अजीब लग रहा था। पर मुझे बुरा नहीं लगा क्योंकि सबा से अब भी मेरा कनेक्शन था।

कुछ दिनों बाद सबा और मैं बाइक पे मार्केट से लौट रहे थे। रास्ते में सुनसान जगह देखके सबा ने मुझे पीछे से हग कर लिया और कान और गले के पास किस करने लगी।

मेरा तो उसी वक्त लंड खड़ा होने लगा। और मेरे कान में बोलीं—

सबा: आज रात बहुत आएगा। 2 बजे रूम में आ जाना।

मैंने उसे हाँ बोला और “आई लव यू बहन” बोलके गाड़ी चलाने लगा।

घर पहुँचके हम लोगों ने खाना खाया, और फिर अपने रूम में चला गया। अब मुझे बस रात का इंतज़ार था। सबा के साथ मुझे वो मज़ा मिला जिसके बारे में सोचकर मैं बस मुठ ही मारता था।

आगे की देसी गंदी कहानी बड़ी बहन की चुदाई जानने के लिए पढ़ते रहिए।

Next Part ==> बड़ी बहन ने मुठ मारते पकड़ा 7

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12 Comments

  1. The story is interesting anfd going good. Just one suggestion is to not to turn it mom son direction. Keep it in bhai behen more.
    Looking forward to next part.

  2. जो व्यक्ति बचपन की नादानी के कारण जिनको धातु स्वपन्दोष नामर्दी, का होना, जोश, शीघ्रपतन गलत विचारों से वीर्य का निकलना, शुकाणु का कम होना, सुजाक व आतेशक होना, पेशाब में जलन होना ज्यादा आय ु वाले मर्दों का सैक्स पॉवर खत्म होना contact

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